निम्नलिखित में से कौन कैबिनेट मिशन का सदस्य नहीं था ?
- (a)पेथिक-लॉरेंस
- (b)स्टैफ़र्ड क्रिप्स
- (c)ए.वी. अलेक्ज़ेंडर
- (d)लॉर्ड वेवल
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — D, (d) लॉर्ड वेवल । स्टेम में निषेध मोटे तिरछे अक्षरों में छपा है, इसलिए यहाँ वह नाम ढूँढ़ना है जो कैबिनेट मिशन का सदस्य नहीं था । कैबिनेट मिशन ब्रिटिश मंत्रिमंडल के तीन सदस्यों का दल था जो मार्च 1946 में भारत आया । उसके तीन सदस्य थे — लॉर्ड पेथिक-लॉरेंस, जो भारत सचिव थे और मिशन के अध्यक्ष भी ; सर स्टैफ़र्ड क्रिप्स ; और ए.वी. अलेक्ज़ेंडर । लॉर्ड वेवल उस समय भारत के वायसराय थे । वे बातचीत में उपस्थित रहे और उन्हीं के माध्यम से आगे की व्यवस्था बनी, पर वे मिशन के सदस्य नहीं थे — मिशन लंदन से आया एक अलग दल था और वायसराय भारत में पहले से नियुक्त अधिकारी । यही अंतर इस प्रश्न का आधार है । मिशन का प्रयोजन यह था कि सत्ता के हस्तांतरण की रूपरेखा पर कांग्रेस और मुस्लिम लीग के बीच सहमति बनाई जाए तथा संविधान बनाने की प्रक्रिया तय की जाए । मई 1946 में उसने अपनी योजना घोषित की, जिसमें पाकिस्तान की माँग को अस्वीकार करते हुए एक ऐसा संघ प्रस्तावित किया गया जिसके पास प्रतिरक्षा, विदेश और संचार जैसे विषय रहते और शेष विषय प्रांतों के पास ; प्रांतों को तीन समूहों में बाँटने की व्यवस्था दी गई ; और संविधान सभा के निर्वाचन का ढंग तय किया गया, जिसके सदस्य प्रांतीय विधान सभाओं द्वारा चुने जाने थे । इसी योजना के अंतर्गत सितंबर 1946 में जवाहरलाल नेहरू के नेतृत्व में अंतरिम सरकार बनी । समूहीकरण की व्याख्या पर मतभेद बना रहा और अंततः यह प्रयास विफल हो गया । लॉर्ड वेवल का स्थान 1947 के आरंभ में लॉर्ड माउंटबेटन ने लिया, जिनके अधीन सत्ता का हस्तांतरण हुआ ।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (a)पेथिक-लॉरेंस — लॉर्ड पेथिक-लॉरेंस मिशन के सदस्य ही नहीं, उसके अध्यक्ष थे, इसलिए वे उत्तर नहीं हो सकते । वे उस समय ब्रिटेन की श्रमिक दल की सरकार में भारत सचिव थे, अर्थात् वह मंत्री जिसके अधीन भारत का प्रशासन आता था । दूसरे विश्व युद्ध के बाद बनी उस सरकार की नीति पहले की सरकारों से भिन्न थी और उसमें भारत को सत्ता सौंपने का निर्णय सैद्धांतिक रूप से लिया जा चुका था ; प्रश्न केवल यह था कि हस्तांतरण किस रूप में और किस ढाँचे के साथ हो । इसीलिए मिशन में भारत सचिव स्वयं आए, जो असामान्य बात थी और उससे यह भी पता चलता है कि ब्रिटिश सरकार इस प्रयास को कितना महत्व दे रही थी । पद और नाम दोनों साथ याद रखिए, क्योंकि प्रश्न कभी-कभी पद पूछ लेते हैं ।
- (b)स्टैफ़र्ड क्रिप्स — सर स्टैफ़र्ड क्रिप्स मिशन के तीन सदस्यों में थे, इसलिए यह विकल्प भी उत्तर नहीं बनता । उनका नाम भारतीय इतिहास में दो बार आता है और यही उन्हें विशेष रूप से महत्वपूर्ण बनाता है । पहली बार वे 1942 में अकेले भारत आए थे, जब युद्ध के दबाव में ब्रिटिश सरकार ने भारत को युद्ध के बाद अधिराज्य का दर्जा देने का प्रस्ताव भेजा था ; वह प्रस्ताव अस्वीकार हो गया और उसी के बाद भारत छोड़ो आंदोलन आरंभ हुआ । दूसरी बार वे 1946 में कैबिनेट मिशन के सदस्य के रूप में आए । इसलिए ऐसे प्रश्नों में केवल नाम पहचानना पर्याप्त नहीं, वर्ष के साथ यह भी याद रखिए कि वे किस प्रसंग में आए और किस हैसियत से ।
- (c)ए.वी. अलेक्ज़ेंडर — ए.वी. अलेक्ज़ेंडर मिशन के तीसरे सदस्य थे, इसलिए वे भी निषेध का उत्तर नहीं हैं । ब्रिटिश मंत्रिमंडल में उनका विभाग नौसेना से संबंधित था । तीनों सदस्यों में उनकी भूमिका सबसे कम चर्चित रही, और यही कारण है कि परीक्षा में प्रायः उन्हीं का नाम अनिश्चित लगता है — विकल्प इसी अनिश्चय पर टिके होते हैं । इसलिए तीनों नाम एक साथ याद कीजिए, अलग-अलग नहीं । एक सरल उपाय यह है कि तीनों को उनके पदों के साथ जोड़ लिया जाए — भारत सचिव, व्यापार से जुड़ा मंत्री और नौसेना से जुड़ा मंत्री — क्योंकि तब यह भी स्पष्ट रहता है कि तीनों ब्रिटिश मंत्रिमंडल के सदस्य थे, और वायसराय उस मंत्रिमंडल का सदस्य नहीं होता था ।
अवधारणा
दूसरे विश्व युद्ध की समाप्ति के बाद ब्रिटेन में जो सरकार बनी उसने भारत को सत्ता सौंपने का निर्णय ले लिया था, और शेष प्रश्न केवल यह था कि हस्तांतरण किस ढाँचे में हो । इसी क्रम में मार्च 1946 में ब्रिटिश मंत्रिमंडल के तीन सदस्य भारत आए — लॉर्ड पेथिक-लॉरेंस, सर स्टैफ़र्ड क्रिप्स और ए.वी. अलेक्ज़ेंडर — जिन्हें कैबिनेट मिशन कहा गया । मई 1946 में घोषित उनकी योजना के मुख्य अंश ये थे : पाकिस्तान की माँग स्वीकार नहीं की गई ; एक संघ प्रस्तावित हुआ जिसके पास प्रतिरक्षा, विदेश और संचार रहते तथा शेष विषय प्रांतों के पास ; प्रांतों को तीन समूहों में बाँटा गया, जिनमें एक हिंदू-बहुल प्रांतों का और दो मुस्लिम-बहुल प्रांतों के थे ; संविधान सभा प्रांतीय विधान सभाओं द्वारा निर्वाचित होनी थी ; और तत्काल एक अंतरिम सरकार बननी थी । संविधान सभा का निर्वाचन 1946 में हुआ और उसकी पहली बैठक दिसंबर 1946 में हुई । अंतरिम सरकार सितंबर 1946 में जवाहरलाल नेहरू के नेतृत्व में बनी । समूहीकरण की व्याख्या पर कांग्रेस और मुस्लिम लीग में मतभेद बना रहा और यह प्रयास अंततः विफल हुआ ।
इस प्रसंग में सबसे अधिक भ्रम मिशन और वायसराय के बीच होता है, और वह स्वाभाविक भी है, क्योंकि दोनों एक ही समय, एक ही विषय पर और प्रायः एक ही मेज़ पर काम कर रहे थे । पर भूमिकाएँ अलग थीं : मिशन ब्रिटिश मंत्रिमंडल का प्रतिनिधि दल था जो एक निश्चित काम के लिए भेजा गया, और वायसराय भारत में ब्रिटिश शासन का स्थायी प्रमुख था । इसी प्रकार का भ्रम अन्य आयोगों और मिशनों में भी होता है, इसलिए हर प्रतिनिधिमंडल के लिए तीन बातें अलग लिख लीजिए — वह कब आया, उसमें कौन-कौन थे, और उस समय वायसराय कौन था । उदाहरण के लिए 1927 के साइमन कमीशन के समय वायसराय इर्विन थे, 1942 के क्रिप्स मिशन के समय लिनलिथगो, और 1946 के कैबिनेट मिशन के समय वेवल ।
मुख्य तथ्य
- कैबिनेट मिशन ब्रिटिश मंत्रिमंडल के तीन सदस्यों का दल था जो मार्च 1946 में भारत आया ।
- उसके तीन सदस्य थे — लॉर्ड पेथिक-लॉरेंस, जो भारत सचिव तथा मिशन के अध्यक्ष थे, सर स्टैफ़र्ड क्रिप्स, और ए.वी. अलेक्ज़ेंडर ।
- लॉर्ड वेवल उस समय भारत के वायसराय थे ; वे बातचीत में सम्मिलित रहे पर मिशन के सदस्य नहीं थे ।
- मई 1946 की योजना ने पाकिस्तान की माँग अस्वीकार करते हुए संघ का ढाँचा प्रस्तावित किया, जिसके पास प्रतिरक्षा, विदेश और संचार रहते ।
- योजना में प्रांतों को तीन समूहों में बाँटने की व्यवस्था थी और संविधान सभा प्रांतीय विधान सभाओं द्वारा निर्वाचित होनी थी ।
- इसी योजना के अंतर्गत सितंबर 1946 में जवाहरलाल नेहरू के नेतृत्व में अंतरिम सरकार बनी ।
- संविधान सभा का निर्वाचन 1946 में हुआ और उसकी पहली बैठक दिसंबर 1946 में हुई ।
- सर स्टैफ़र्ड क्रिप्स 1942 में अकेले भी भारत आए थे ; वह प्रस्ताव अस्वीकार हुआ और उसके बाद भारत छोड़ो आंदोलन आरंभ हुआ ।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- वायसराय को मिशन का सदस्य मान लेना । मिशन लंदन से आया दल था और वायसराय भारत में नियुक्त अधिकारी ।
- क्रिप्स के दोनों आगमन को एक मान लेना । 1942 में वे अकेले आए थे और 1946 में मिशन के सदस्य के रूप में ।
- मिशन के सदस्यों की संख्या भूल जाना ; वे तीन थे, और तीनों ब्रिटिश मंत्रिमंडल के सदस्य ।
- योजना के प्रावधानों को माउंटबेटन योजना के प्रावधानों से मिला देना ; दोनों अलग वर्षों की अलग योजनाएँ हैं ।
- अंतरिम सरकार और संविधान सभा को एक ही चीज़ समझ लेना ; एक कार्यपालिका थी और दूसरी संविधान बनाने वाली निकाय ।
स्वतंत्रता के तत्काल पूर्व का काल इस प्रश्नपत्र में नियमित रूप से आता है, और उसके प्रश्न प्रायः प्रतिनिधिमंडल, योजना और तिथि के आसपास बनते हैं । इस प्रश्न का रूप सबसे सरल है — सदस्यों की सूची में एक बाहरी नाम रख देना — पर वह बाहरी नाम जानबूझकर ऐसा चुना गया है जो उसी घटना से जुड़ा हो । यही इस श्रेणी की सामान्य चाल है, इसलिए तैयारी में हर मिशन और आयोग के लिए एक पंक्ति लिखिए जिसमें वर्ष, सदस्य, तत्कालीन वायसराय और मुख्य प्रस्ताव आ जाएँ । इससे कई प्रश्न एक साथ सधते हैं, क्योंकि परीक्षक इन्हीं चार में से किसी एक को पूछता है । दूसरी बात, इस काल की तिथियाँ पास-पास हैं और घटनाएँ तेज़ी से घटती हैं — मार्च 1946 में मिशन का आना, मई में योजना, सितंबर में अंतरिम सरकार, दिसंबर में संविधान सभा की पहली बैठक — इसलिए उन्हें क्रम से याद कीजिए, अलग-अलग नहीं । क्रम याद होने पर तिथि भूल जाने पर भी सापेक्ष स्थिति से उत्तर निकल आता है ।
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अभ्यास
- practice — not a real PYQ
कैबिनेट मिशन के समय भारत के वायसराय निम्नलिखित में से कौन थे ?
- (a)लॉर्ड लिनलिथगो
- (b)लॉर्ड वेवल
- (c)लॉर्ड माउंटबेटन
- (d)लॉर्ड इर्विन
उत्तर(b) लॉर्ड वेवल — वे मिशन के सदस्य नहीं थे, वायसराय के रूप में उपस्थित थे ।
- practice — not a real PYQ
कैबिनेट मिशन योजना के अनुसार प्रस्तावित संघ के पास निम्नलिखित में से कौन-से विषय रहने थे ?
- (a)प्रतिरक्षा, विदेश और संचार
- (b)केवल प्रतिरक्षा
- (c)शिक्षा, स्वास्थ्य और पुलिस
- (d)सभी विषय
उत्तर(a) प्रतिरक्षा, विदेश और संचार — शेष विषय प्रांतों के पास रहने थे ।