निम्नलिखित संतुलित समीकरण पर विचार कीजिए : CO (g) + 2H2 (g) ⟶ CH3OH (l) H2 (g) के 2·0 मोल के साथ CO (g) के 2·0 मोल की अभिक्रिया से CH3OH (l) के कितने मोल प्राप्त किए जा सकते हैं ?
- (a)1
- (b)2
- (c)3
- (d)4
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — A, (a) 1 । रससमीकरणमिति के इस प्रकार के प्रश्न में पहला काम संतुलित समीकरण से मोल-अनुपात पढ़ना है । दिए गए समीकरण के अनुसार कार्बन मोनोऑक्साइड का एक मोल हाइड्रोजन के दो मोल के साथ अभिक्रिया करके मेथेनॉल का एक मोल देता है । अर्थात् अनुपात है — एक अनुपात दो अनुपात एक । ध्यान दीजिए कि यह अनुपात अणुओं का है, द्रव्यमान का नहीं, और उसे समीकरण में लगे गुणांकों से ही पढ़ा जाता है । अब दी गई मात्राएँ रखिए : कार्बन मोनोऑक्साइड के 2·0 मोल और हाइड्रोजन के भी 2·0 मोल । दूसरा काम यह देखना है कि कौन-सा अभिकारक पहले समाप्त हो जाएगा, क्योंकि उत्पाद की मात्रा उसी से सीमित होती है और उसे सीमांत अभिकारक कहते हैं । यदि कार्बन मोनोऑक्साइड के सारे 2·0 मोल ख़र्च होते तो उसके लिए हाइड्रोजन के 4·0 मोल चाहिए होते, पर उपलब्ध केवल 2·0 मोल हैं — इसलिए कार्बन मोनोऑक्साइड पूरा ख़र्च नहीं हो सकता । दूसरी ओर हाइड्रोजन के 2·0 मोल ख़र्च होने के लिए कार्बन मोनोऑक्साइड के केवल 1·0 मोल चाहिए, और वह उपलब्ध है । अतः हाइड्रोजन सीमांत अभिकारक है और कार्बन मोनोऑक्साइड आधिक्य में है । तीसरा काम उत्पाद निकालना है : हाइड्रोजन के दो मोल से मेथेनॉल का एक मोल बनता है, इसलिए 2·0 मोल हाइड्रोजन से 1·0 मोल मेथेनॉल मिलेगा, और कार्बन मोनोऑक्साइड के 1·0 मोल बचे रह जाएँगे । इसीलिए उत्तर विकल्प (a) है । इसी गणना को एक सूत्र की तरह भी लिखा जा सकता है, और परीक्षा में वही सबसे तेज़ है : प्रत्येक अभिकारक की दी गई मात्रा को समीकरण में उसके गुणांक से भाग दीजिए । कार्बन मोनोऑक्साइड के लिए यह भागफल 2·0 भाग 1 अर्थात् 2·0 आता है, और हाइड्रोजन के लिए 2·0 भाग 2 अर्थात् 1·0 । जिसका भागफल छोटा है वही सीमांत अभिकारक है, और उत्पाद उसी भागफल को उत्पाद के गुणांक से गुणा करके मिलता है । यहाँ मेथेनॉल का गुणांक एक है, इसलिए उत्तर 1·0 मोल ही रहता है ।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (b)2 — 2 वह उत्तर है जो कार्बन मोनोऑक्साइड को सीमांत अभिकारक मान लेने से मिलता है । समीकरण में मेथेनॉल और कार्बन मोनोऑक्साइड का अनुपात एक अनुपात एक है, इसलिए यदि कार्बन मोनोऑक्साइड के सारे 2·0 मोल ख़र्च हो जाते तो मेथेनॉल के भी 2·0 मोल बनते । पर वे ख़र्च हो ही नहीं सकते, क्योंकि उसके लिए हाइड्रोजन के 4·0 मोल चाहिए और उपलब्ध केवल 2·0 मोल हैं । यह इस प्रश्न की सबसे आम भूल है, और उसकी जड़ यह है कि हाइड्रोजन पर लगा गुणांक दो अनदेखा रह जाता है । बचाव का तरीक़ा यह है कि दोनों अभिकारकों के लिए अलग-अलग संभावित उत्पाद निकालिए और उनमें से छोटा मान लीजिए — यही सीमांत अभिकारक की विधि है ।
- (c)3 — 3 दोनों संभावित उत्तरों को जोड़ देने से मिलता है । यदि कोई अभ्यर्थी कार्बन मोनोऑक्साइड के आधार पर 2·0 मोल और हाइड्रोजन के आधार पर 1·0 मोल निकालकर दोनों को जोड़ ले, तो उसे 3 मिल जाता है । यह जोड़ना निरर्थक है, क्योंकि दोनों गणनाएँ एक ही अभिक्रिया के दो वैकल्पिक अनुमान हैं, दो अलग अभिक्रियाएँ नहीं — और वास्तविक उत्पाद उन दोनों में से छोटा होगा, उनका योग नहीं । यही सीमांत अभिकारक की पूरी अवधारणा है : जो अभिकारक पहले समाप्त हो जाता है वही उत्पाद की ऊपरी सीमा तय कर देता है, और शेष अभिकारक बचकर रह जाता है ।
- (d)4 — 4 गुणांक को उल्टी दिशा में लगाने से मिलता है । समीकरण में हाइड्रोजन पर गुणांक दो है, और यदि कोई उसे उत्पाद के साथ जोड़कर 2·0 मोल को दो से गुणा कर दे तो 4 आ जाता है । गुणांक दो का अर्थ इसके ठीक विपरीत है : वह बताता है कि हाइड्रोजन अधिक मात्रा में चाहिए, इसलिए उपलब्ध हाइड्रोजन से बनने वाले उत्पाद की मात्रा निकालने के लिए भाग देना पड़ता है, गुणा नहीं । एक और रास्ता भी इसी संख्या तक पहुँचता है — दोनों अभिकारकों के मोल जोड़ देना, जो 2·0 और 2·0 मिलाकर 4 बनता है । यह भी निरर्थक है, क्योंकि उत्पाद के मोल अभिकारकों के मोल का योग नहीं होते ; उनका संबंध केवल संतुलित समीकरण के अनुपात से तय होता है ।
अवधारणा
संतुलित रासायनिक समीकरण सबसे पहले द्रव्यमान संरक्षण का कथन है — दोनों ओर हर तत्त्व के परमाणुओं की संख्या समान रहती है । पर उसका सबसे उपयोगी पाठ गुणांकों में है, क्योंकि वे बताते हैं कि पदार्थ किस अनुपात में अभिक्रिया करते हैं । यह अनुपात अणुओं का होता है और मोल की अवधारणा उसे तौलने योग्य मात्रा में बदल देती है : एक मोल में किसी भी पदार्थ के उतने ही कण होते हैं, इसलिए अणुओं का अनुपात सीधे मोल का अनुपात बन जाता है । जब दोनों अभिकारकों की मात्राएँ दी जाती हैं तब यह प्रश्न उठता है कि कौन पहले समाप्त होगा । जो पहले समाप्त होता है वह सीमांत अभिकारक कहलाता है और वही उत्पाद की मात्रा तय करता है ; दूसरा आधिक्य में रहकर बच जाता है । उसे पहचानने की मानक विधि यह है कि प्रत्येक अभिकारक की दी गई मात्रा को समीकरण में उसके गुणांक से भाग दिया जाए और जिसका भागफल सबसे छोटा निकले वही सीमांत है । इसी विधि से उत्पाद की सैद्धांतिक मात्रा भी निकलती है । व्यवहार में प्राप्त मात्रा प्रायः इससे कम रहती है, और दोनों का अनुपात प्रतिशत लब्धि कहलाता है ।
यह प्रश्न रसायन विज्ञान के उन थोड़े-से प्रश्नों में है जिनमें गणना करनी पड़ती है, पर गणना बहुत छोटी है — पूरा हल दो भागफल निकालने और उनमें से छोटा चुनने में सिमट जाता है । कठिनाई इसी में है कि दोनों अभिकारकों की मात्रा जान-बूझकर बराबर रखी गई है, अर्थात् 2·0 और 2·0, ताकि अभ्यर्थी को लगे कि दोनों बराबर मात्रा में हैं और अनुपात की चिंता करने की आवश्यकता नहीं । वस्तुतः बराबर मोल होने का अर्थ बराबर आवश्यकता होना नहीं है, क्योंकि समीकरण हाइड्रोजन की दुगुनी माँग करता है । विकल्पों की रचना भी यही जाँचती है : एक विकल्प ग़लत सीमांत चुनने से मिलता है, एक दोनों अनुमानों को जोड़ने से, और एक गुणांक को उलटी दिशा में लगाने से । पुस्तिका के बारे में यह ध्यान दीजिए कि समीकरण अपनी अलग पंक्ति में बीचोबीच छपा है और दोनों पक्षों के बीच लंबा तीर है ; दशमलव उठे हुए मध्य बिंदु के साथ छपे हैं, जो इस पुस्तिका की अपनी शैली है, और अवस्था-संकेत कोष्ठक में हैं ।
मुख्य तथ्य
- संतुलित समीकरण के गुणांक अभिकारकों और उत्पादों का मोल-अनुपात बताते हैं ; यहाँ वह अनुपात एक अनुपात दो अनुपात एक है ।
- सीमांत अभिकारक वह है जो पहले समाप्त हो जाता है और उत्पाद की मात्रा को सीमित कर देता है ; शेष अभिकारक आधिक्य में रहकर बच जाता है ।
- सीमांत अभिकारक पहचानने की विधि यह है कि प्रत्येक अभिकारक की मात्रा को उसके गुणांक से भाग दिया जाए और सबसे छोटा भागफल देखा जाए ।
- यहाँ हाइड्रोजन सीमांत अभिकारक है, क्योंकि 2·0 मोल हाइड्रोजन के लिए केवल 1·0 मोल कार्बन मोनोऑक्साइड चाहिए, जबकि 2·0 मोल कार्बन मोनोऑक्साइड के लिए 4·0 मोल हाइड्रोजन चाहिए होते ।
- उत्पाद 1·0 मोल मेथेनॉल बनता है और कार्बन मोनोऑक्साइड के 1·0 मोल बिना अभिक्रिया किए बच जाते हैं ।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- बराबर मोल को बराबर आवश्यकता मान लेना । यहाँ दोनों अभिकारक 2·0 मोल हैं, पर समीकरण हाइड्रोजन की दुगुनी मात्रा माँगता है ।
- दोनों अनुमानों को जोड़ देना । कार्बन मोनोऑक्साइड से 2·0 और हाइड्रोजन से 1·0 दो वैकल्पिक अनुमान हैं ; उत्तर उनमें से छोटा है, उनका योग नहीं ।
- गुणांक से गुणा कर देना । गुणांक दो का अर्थ है कि हाइड्रोजन अधिक चाहिए, इसलिए उपलब्ध हाइड्रोजन को दो से भाग देना है, गुणा नहीं ।
रससमीकरणमिति पर प्रश्न चार साँचों में आते हैं । पहला साँचा यही है — दोनों अभिकारकों की मात्रा देकर उत्पाद पूछना, जहाँ सीमांत अभिकारक पहचानना ही पूरा हल है । दूसरा साँचा एक ही अभिकारक की मात्रा देकर उत्पाद पूछता है, और वहाँ केवल अनुपात लगाना पड़ता है । तीसरा साँचा द्रव्यमान का है : ग्राम में मात्रा देकर मोल में बदलना, फिर अनुपात लगाना और फिर वापस ग्राम में लाना । चौथा साँचा लब्धि का है, जिसमें सैद्धांतिक और वास्तविक मात्रा देकर प्रतिशत लब्धि पूछी जाती है । चारों की तैयारी के लिए एक ही क्रम याद रखिए — समीकरण संतुलित कीजिए, दी गई मात्राओं को मोल में बदलिए, हर अभिकारक की मात्रा को उसके गुणांक से भाग दीजिए, सबसे छोटे भागफल वाले को सीमांत मानिए, और उसी से उत्पाद निकालिए । यह क्रम एक बार अभ्यास में आ जाए तो इस परिवार का कोई भी प्रश्न एक मिनट से अधिक नहीं लेता ।
संबंधित PYQ
इस प्रश्न से सीधे संबंधित कोई पूर्व PYQ उपलब्ध नहीं।
अभ्यास
- practice — not a real PYQ
किसी संतुलित समीकरण के अनुसार नाइट्रोजन का एक मोल हाइड्रोजन के तीन मोल से मिलकर अमोनिया के दो मोल देता है । एक मोल नाइट्रोजन तथा तीन मोल हाइड्रोजन से कितने मोल अमोनिया बनेगी ?
- (a)एक
- (b)दो
- (c)तीन
- (d)चार
उत्तर(b) दो — यहाँ दोनों अभिकारक ठीक अनुपात में दिए गए हैं, इसलिए कोई भी आधिक्य में नहीं है और उत्पाद सीधे गुणांक से मिल जाता है ।
- practice — not a real PYQ
रससमीकरणमिति में सीमांत अभिकारक के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है ?
- (a)वह अभिकारक जिसका द्रव्यमान सबसे अधिक हो
- (b)वह अभिकारक जो पहले पूरी तरह ख़र्च होकर उत्पाद की मात्रा सीमित कर देता है
- (c)वह अभिकारक जो अभिक्रिया के बाद सबसे अधिक मात्रा में बच जाता है
- (d)वह अभिकारक जिसका अणुभार सबसे कम हो
उत्तर(b) वह अभिकारक जो पहले पूरी तरह ख़र्च होकर उत्पाद की मात्रा सीमित कर देता है — उसे पहचानने के लिए हर अभिकारक की मात्रा को उसके गुणांक से भाग देकर सबसे छोटा भागफल देखा जाता है ।