एक खोखला, बंद घन बनाया जाता है, जिसकी प्रत्येक भुजा 10 cm और वज़न 200 gm है । इस घन के क्षैतिज फलक वाले अंश को पानी में रखा जाता है । यदि पानी का घनत्व 1 gm प्रति cm^3 है, तो इसकी ऊँचाई का कितना cm अंश पानी में डूब जाएगा ?
- (a)1 cm
- (b)1·5 cm
- (c)2 cm
- (d)2·5 cm
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — C, (c) 2 cm । यह प्रश्न प्लवन के नियम पर टिका है : तैरती हुई वस्तु उतने द्रव को हटाती है जितना उसका अपना भार होता है । यहाँ घन का भार 200 gm है और पानी का घनत्व 1 gm प्रति cm घन दिया गया है, इसलिए हटाए गए पानी का द्रव्यमान 200 gm हुआ और उसका आयतन ठीक 200 cm घन । अब वह चरण आता है जो पूरा उत्तर तय करता है, और वह आयतन का नहीं, क्षेत्रफल का है । घन को इस प्रकार रखा गया है कि उसका एक फलक क्षैतिज रहे, इसलिए जो हिस्सा पानी के भीतर जाएगा वह एक घनाभ होगा जिसका आधार वही क्षैतिज फलक है और ऊँचाई डूबी हुई गहराई । क्षैतिज फलक 10 cm गुणा 10 cm का है, अर्थात् उसका क्षेत्रफल 100 cm वर्ग । इसलिए 100 गुणा h बराबर 200, और h बराबर 2 cm । ध्यान दीजिए कि घन का अपना आयतन 1000 cm घन है और वह इस गणना में कहीं आया ही नहीं ; जो आया वह आधार का क्षेत्रफल है । यही इस प्रश्न की असली परीक्षा है — यह पहचानना कि डूबी हुई गहराई निकालने के लिए हटाए गए आयतन को उस फलक के क्षेत्रफल से भाग देना है जिस पर वस्तु तैर रही है । उत्तर को दूसरे रास्ते से भी जाँचा जा सकता है । घन का औसत घनत्व 200 बटा 1000, अर्थात् 0·2 gm प्रति cm घन है, जो पानी के घनत्व का पाँचवाँ भाग है ; और तैरती वस्तु का जितना भाग डूबता है उसका अनुपात वस्तु के औसत घनत्व और द्रव के घनत्व के अनुपात के बराबर होता है । इसलिए घन की ऊँचाई का पाँचवाँ भाग डूबेगा, अर्थात् 10 का पाँचवाँ भाग, जो 2 cm है । दोनों रास्ते एक ही उत्तर देते हैं । यह भी देखिए कि 2 cm घन की ऊँचाई 10 cm से कम है, इसलिए घन सचमुच तैरता है ; यदि गणना 10 cm से अधिक गहराई देती तो घन पूरा डूब जाता और प्रश्न का ढाँचा ही बदल जाता । घन का खोखला और बंद होना इसी बात का संकेत है ।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (a)1 cm — एक सेंटीमीटर तब निकलता जब हटाए गए पानी का आयतन 100 cm घन होता, अर्थात् घन का भार 100 gm होता । दिया गया भार 200 gm है, इसलिए यह विकल्प आधे भार का उत्तर है । यह चूक प्राय: तब होती है जब कोई भार को दो से भाग दे बैठे या क्षेत्रफल को दुगुना गिन ले । यहाँ ध्यान रखने योग्य बात यह है कि इस प्रश्न में हर विकल्प किसी न किसी भार से मेल खाता है, क्योंकि पानी का घनत्व एक होने से गहराई सीधे भार के समानुपाती है : गहराई बराबर भार बटा आधार का क्षेत्रफल । इसलिए एक सेंटीमीटर सौ ग्राम का, डेढ़ सेंटीमीटर डेढ़ सौ ग्राम का, दो सेंटीमीटर दो सौ ग्राम का और ढाई सेंटीमीटर ढाई सौ ग्राम का उत्तर है । दिए गए भार पर लौटिए और विकल्प अपने आप तय हो जाता है ।
- (b)1·5 cm — डेढ़ सेंटीमीटर तब निकलता जब घन का भार 150 gm होता, क्योंकि तब हटाया गया आयतन 150 cm घन होता और उसे सौ वर्ग सेंटीमीटर के आधार से भाग देने पर डेढ़ आता । दिया गया भार इससे अधिक है, इसलिए यह विकल्प सही उत्तर से कम है । छपाई की भी एक बात ध्यान देने योग्य है : इस पुस्तिका में दशमलव सामान्य पूर्ण विराम से नहीं, उभरे हुए मध्य-बिंदु से छापा गया है, इसलिए यह विकल्प और अंतिम विकल्प पहली नज़र में एक जैसे दिख सकते हैं और उनका भेद केवल पहले अंक में है । अंक पूरा पढ़िए । यह भी ध्यान रखिए कि प्रश्न ने उत्तर सेंटीमीटर में माँगा है, इसलिए गहराई निकालने के बाद इकाई बदलने की कोई आवश्यकता नहीं ।
- (d)2·5 cm — ढाई सेंटीमीटर तब निकलता जब भार 250 gm होता । यह विकल्प सही उत्तर से थोड़ा ही ऊपर है और इसीलिए ख़तरनाक है, विशेषकर उस अभ्यर्थी के लिए जो गणना पूरी किए बिना अनुमान लगा रहा हो । यहाँ एक और ग़लत रास्ता भी संभव है जिससे बचना चाहिए : घन के पूरे आयतन 1000 cm घन को किसी तरह गणना में ले आना । वह संख्या इस प्रश्न में काम की नहीं है, क्योंकि घन पूरा डूबा हुआ नहीं है ; डूबे हुए भाग का आयतन 200 cm घन है और वही हटाए गए पानी के बराबर है । पूरा आयतन तब काम आता जब पूछा जाता कि घन डूबेगा या तैरेगा — उसके लिए औसत घनत्व 200 बटा 1000 बराबर 0·2 निकालकर पानी के घनत्व से तुलना की जाती, और वह कम होने से घन तैरता है ।
अवधारणा
आर्किमिडीज़ का सिद्धांत कहता है कि किसी द्रव में पूर्णत: या अंशत: डूबी हुई वस्तु पर ऊपर की ओर एक उत्प्लावन बल लगता है, जो उस वस्तु द्वारा हटाए गए द्रव के भार के बराबर होता है । इसी से प्लवन का नियम निकलता है : जब कोई वस्तु तैरती है, तब उत्प्लावन बल उसके अपने भार के बराबर होता है, अर्थात् तैरती वस्तु अपने भार के बराबर द्रव हटाती है । इस प्रश्न में यही नियम लगाना है । घन का भार 200 gm है, इसलिए हटाए गए पानी का द्रव्यमान भी 200 gm होगा ; और चूँकि पानी का घनत्व 1 gm प्रति cm घन है, हटाए गए पानी का आयतन संख्या में वही 200 cm घन बन जाता है । यह एक सुविधा है जो पानी के घनत्व के एक होने से मिलती है — ग्राम में दिया गया द्रव्यमान सीधे घन सेंटीमीटर में आयतन बन जाता है । अगला चरण ज्यामिति का है । घन एक फलक क्षैतिज रखकर तैर रहा है, इसलिए डूबा हुआ भाग एक घनाभ है जिसका आधार 10 cm गुणा 10 cm का फलक है और ऊँचाई डूबी हुई गहराई । आयतन बराबर आधार का क्षेत्रफल गुणा ऊँचाई, इसलिए ऊँचाई बराबर आयतन बटा क्षेत्रफल, अर्थात् 200 बटा 100 बराबर 2 cm । इसी सिद्धांत का एक और उपयोगी रूप यह है कि तैरती वस्तु का डूबा हुआ अंश उसके औसत घनत्व और द्रव के घनत्व के अनुपात के बराबर होता है ; यहाँ वह अनुपात 0·2 है, इसलिए ऊँचाई का पाँचवाँ भाग डूबता है ।
संख्यात्मक अभियोग्यता के इस खंड में क्षेत्रमिति और भौतिकी के सिद्धांतों का मेल बार-बार दिखता है, और यही इस प्रश्नपत्र के अंतिम दो प्रश्नों को जोड़ता है । उनमें से एक ठोस गोलों के वज़न के अनुपात पर है, जहाँ उत्तर त्रिज्या के घन पर टिकता है, और यह अंतिम प्रश्न तैरते घन पर है, जहाँ उत्तर आधार के क्षेत्रफल पर टिकता है । दोनों को साथ पढ़ने से वह भेद स्पष्ट हो जाता है जो इस उपखंड में सबसे अधिक काम आता है : किस राशि के साथ लंबाई की कौन-सी घात चलती है — क्षेत्रफल के साथ दूसरी और आयतन के साथ तीसरी । इस प्रश्न में एक व्यावहारिक सावधानी भी है । घन का अपना आयतन एक हज़ार घन सेंटीमीटर है और वह संख्या प्रश्न पढ़ते ही मन में बन जाती है, पर उसका उत्तर से कोई सीधा संबंध नहीं । ऐसे प्रश्नों में सबसे पहले यह तय कीजिए कि कौन-सी राशि हटाए गए द्रव से जुड़ी है और कौन-सी वस्तु से । छपाई की दृष्टि से भी ध्यान दीजिए कि इकाइयाँ देवनागरी वाक्य के भीतर रोमन लिपि में छपी हैं और घन सेंटीमीटर में तीन को ऊपर उठाकर छापा गया है ।
मुख्य तथ्य
- आर्किमिडीज़ का सिद्धांत : द्रव में डूबी वस्तु पर लगने वाला उत्प्लावन बल उसके द्वारा हटाए गए द्रव के भार के बराबर होता है ।
- प्लवन का नियम : तैरती हुई वस्तु अपने भार के बराबर द्रव हटाती है, इसलिए 200 gm के घन द्वारा हटाए गए पानी का द्रव्यमान भी 200 gm है ।
- पानी का घनत्व 1 gm प्रति cm घन होने से ग्राम में दिया गया द्रव्यमान संख्या में सीधे घन सेंटीमीटर में आयतन बन जाता है — यहाँ 200 cm घन ।
- घन एक फलक क्षैतिज रखकर तैरता है, इसलिए डूबा हुआ भाग एक घनाभ है जिसका आधार 10 cm गुणा 10 cm बराबर 100 cm वर्ग है ।
- डूबी हुई गहराई बराबर हटाए गए आयतन बटा आधार का क्षेत्रफल, अर्थात् 200 बटा 100 बराबर 2 cm — यही प्रश्न का उत्तर है ।
- घन का अपना आयतन 1000 cm घन है, किंतु वह इस गणना में नहीं आता, क्योंकि घन पूरा डूबा हुआ नहीं है ।
- दूसरा रास्ता : घन का औसत घनत्व 200 बटा 1000 बराबर 0·2 gm प्रति cm घन है, और डूबा हुआ अंश घनत्वों के अनुपात के बराबर होता है ।
- इसलिए ऊँचाई का पाँचवाँ भाग डूबेगा — 10 cm का पाँचवाँ भाग, जो वही 2 cm है ; दोनों रास्ते एक ही उत्तर देते हैं ।
- पानी के घनत्व के एक होने से गहराई सीधे भार के समानुपाती है, इसलिए हर विकल्प किसी न किसी भार का उत्तर है — 100, 150, 200 और 250 ग्राम का ।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- घन के पूरे आयतन एक हज़ार घन सेंटीमीटर को गणना में ले आना । डूबे हुए भाग का आयतन दो सौ घन सेंटीमीटर है, पूरा घन नहीं डूबा है ।
- हटाए गए आयतन को आधार के क्षेत्रफल के बजाय किसी और राशि से भाग देना । यहाँ आधार 10 गुणा 10 बराबर 100 वर्ग सेंटीमीटर है ।
- यह भूल जाना कि पानी का घनत्व एक होने से द्रव्यमान और आयतन संख्या में बराबर हो जाते हैं ।
- उभरे मध्य-बिंदु वाले दशमलव में केवल पूँछ पढ़कर विकल्प चुन लेना । दो विकल्पों का भेद केवल पहले अंक में है ।
- घन के खोखले और बंद होने की सूचना को अनावश्यक मान लेना । वही बताती है कि औसत घनत्व पानी से कम है और घन तैरेगा ।
इस प्रश्नपत्र के अंतिम पाँच प्रश्न संख्यात्मक अभियोग्यता के हैं और उनमें आयोग की शैली यह है कि गणना छोटी रखी जाए और कठिनाई इस बात में डाली जाए कि कौन-सा सूत्र कहाँ लगेगा । यहाँ सारा गणित एक भाग का है — दो सौ बटा सौ — पर उस भाग तक पहुँचने के लिए दो पहचानें करनी पड़ती हैं । पहली, कि तैरती वस्तु अपने भार के बराबर द्रव हटाती है, इसलिए हटाया गया आयतन दो सौ घन सेंटीमीटर है । दूसरी, कि डूबी हुई गहराई निकालने के लिए उस आयतन को उस फलक के क्षेत्रफल से भाग देना है जिस पर वस्तु तैर रही है, न कि घन के अपने आयतन से जोड़ना है । ऐसे प्रश्नों में सबसे उपयोगी आदत यह है कि हल शुरू करने से पहले हर दी गई संख्या के सामने लिख लिया जाए कि वह किस राशि की है — भार, घनत्व, भुजा, या क्षेत्रफल । तब यह भी दिख जाता है कि कौन-सी संख्या प्रश्न में दी तो गई है पर उत्तर में काम नहीं आती । दूसरी आदत उत्तर की सार्थकता जाँचने की है : यहाँ दो सेंटीमीटर घन की दस सेंटीमीटर ऊँचाई से कम है, इसलिए उत्तर संगत है ; यदि वह दस से अधिक आता तो कहीं चूक हुई होती ।
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अभ्यास
- practice — not a real PYQ
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- (a)2 cm
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- practice — not a real PYQ
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- (a)40%
- (b)50%
- (c)60%
- (d)100%
उत्तर(c) 60% — तैरती वस्तु का डूबा हुआ अंश उसके औसत घनत्व और द्रव के घनत्व के अनुपात के बराबर होता है ।