प्रारम्भिक खर्च किसका उदाहरण है?
- (a)पूँजीगत व्यय
- (b)पूँजीगत लाभ
- (c)आस्थगित राजस्व व्यय
- (d)राजस्व व्यय/खर्च
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — C, (c) आस्थगित राजस्व व्यय। प्रारम्भिक व्यय (preliminary expenses) वे व्यय हैं जो किसी कंपनी के गठन के सिलसिले में, उसके अस्तित्व में आने से पहले या उसी के आस-पास, किए जाते हैं — पार्षद सीमा-नियम तथा अंतर्नियम तैयार कराने का शुल्क, पंजीकरण शुल्क, मुद्रांक शुल्क, विधिक तथा व्यावसायिक परामर्श का व्यय, और दस्तावेज़ों की छपाई का ख़र्च। पारंपरिक लेखाशास्त्र इन्हें आस्थगित राजस्व व्यय की श्रेणी में रखता है, और उसका तर्क तीन कड़ियों में समझिए। पहली कड़ी — ये व्यय राजस्व प्रकृति के हैं, क्योंकि इनसे कोई मूर्त परिसंपत्ति नहीं बनती जिसे बेचा या उपयोग में लाया जा सके; अतः इन्हें पूँजीगत व्यय नहीं कहा जा सकता। दूसरी कड़ी — पर इनका लाभ केवल उसी वर्ष तक सीमित नहीं है जिसमें ये किए गए; कंपनी का अस्तित्व ही इन व्ययों से बनता है और वह आगे कई वर्षों तक चलता है, इसलिए इन्हें पूरी तरह उसी वर्ष के लाभ-हानि विवरण में डाल देना मिलान के सिद्धांत के अनुरूप नहीं होगा। तीसरी कड़ी — इसलिए इन्हें कई वर्षों में क्रमशः अपलिखित किया जाता है, और जब तक अपलिखन शेष रहता है, बची हुई राशि चिट्ठे में दिखाई जाती है। जिस व्यय की प्रकृति राजस्व की हो पर जिसका लाभ एक से अधिक अवधियों में फैला हो, उसी को आस्थगित राजस्व व्यय कहते हैं — और प्रारम्भिक व्यय इसका पाठ्यपुस्तकीय उदाहरण है। इसी श्रेणी के अन्य उदाहरण हैं किसी नए उत्पाद के लिए किया गया असाधारण रूप से बड़ा विज्ञापन-व्यय, तथा शेयर-निर्गम पर दी गई भारी छूट। एक व्यावहारिक चेतावनी भी यहीं दे दी जाए: इसी पेपर के अगले प्रश्न के विकल्प भी यही चार हैं, केवल क्रम बदला हुआ है, इसलिए उत्तर अक्षर से नहीं, विकल्प के पाठ से पहचानिए। अतः विकल्प (c) ही सही है।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (a)पूँजीगत व्यय — पूँजीगत व्यय वह है जिससे कोई परिसंपत्ति अर्जित होती है या किसी विद्यमान परिसंपत्ति की अर्जन-क्षमता अथवा उपयोगी जीवन बढ़ता है — भूमि, भवन, मशीन, फ़र्नीचर, या किसी पुरानी मशीन में किया गया ऐसा सुधार जो उसकी क्षमता बढ़ा दे। ऐसे व्यय चिट्ठे में परिसंपत्ति के रूप में दिखाए जाते हैं और उन पर मूल्यह्रास लगाया जाता है। प्रारम्भिक व्यय इस कसौटी पर नहीं उतरते, क्योंकि उनसे कोई ऐसी वस्तु या अधिकार अस्तित्व में नहीं आता जिसे परिसंपत्ति कहा जा सके; वे केवल कंपनी को विधिक रूप देने की प्रक्रिया का ख़र्च हैं। यह विकल्प इसलिए आकर्षक लगता है कि ये व्यय एक बार होते हैं और उनका लाभ लंबे समय तक रहता है — पर 'एक बार का व्यय' और 'पूँजीगत व्यय' एक बात नहीं हैं।
- (b)पूँजीगत लाभ — यह विकल्प श्रेणी की ही भूल है, इसलिए इसे सबसे पहले काट देना चाहिए। पूँजीगत लाभ का अर्थ है किसी पूँजीगत परिसंपत्ति के विक्रय पर होने वाला लाभ — अर्थात् वह एक आय है, व्यय नहीं। प्रश्न पूछ रहा है कि प्रारम्भिक व्यय किसका उदाहरण है, और उत्तर किसी व्यय की श्रेणी ही हो सकता है, आय की नहीं। परीक्षा ऐसे विकल्प इसीलिए रखती है कि जल्दी में पढ़ने वाला अभ्यर्थी केवल परिचित शब्द देखकर चुन ले। बचाव सरल है: विकल्प पढ़ते समय पहले यह देखिए कि वह उसी श्रेणी का है या नहीं जो प्रश्न माँग रहा है — यदि प्रश्न व्यय के बारे में है तो आय वाला विकल्प अपने आप बाहर हो जाता है, चाहे उसका शेष भाग कितना ही तकनीकी क्यों न लगे।
- (d)राजस्व व्यय/खर्च — राजस्व व्यय वह है जिसका लाभ उसी लेखांकन अवधि तक सीमित रहता है — वेतन, किराया, बिजली, मरम्मत, बीमा — और जिसे पूरा का पूरा उसी वर्ष के लाभ-हानि विवरण में डाल दिया जाता है। प्रारम्भिक व्यय की प्रकृति राजस्व की अवश्य है, पर उसका लाभ एक ही वर्ष तक सीमित नहीं, इसलिए उसे साधारण राजस्व व्यय कहना अधूरा वर्गीकरण होगा; उसका ठीक-ठीक नाम आस्थगित राजस्व व्यय है, जिसमें 'आस्थगित' शब्द ही उस अंतर को दर्ज करता है। यह विकल्प इस प्रश्न का सबसे बारीक जाल है, क्योंकि वह आधा सही है और अभ्यर्थी को लगता है कि अंतर केवल शब्दों का है। पर लेखाशास्त्र में यह अंतर व्यवहार का है: साधारण राजस्व व्यय पूरा उसी वर्ष जाता है, जबकि आस्थगित राजस्व व्यय कई वर्षों में अपलिखित होता है।
अवधारणा
व्यय के वर्गीकरण की तीन कोटियाँ पारंपरिक लेखाशास्त्र में इस प्रकार बनती हैं। पहली, पूँजीगत व्यय — जिससे कोई परिसंपत्ति अर्जित हो या किसी परिसंपत्ति की क्षमता तथा उपयोगी जीवन बढ़े; यह चिट्ठे में जाता है और उस पर मूल्यह्रास लगता है। दूसरी, राजस्व व्यय — जिसका लाभ उसी अवधि तक सीमित हो; यह पूरा का पूरा लाभ-हानि विवरण में जाता है। तीसरी, आस्थगित राजस्व व्यय — जिसकी प्रकृति राजस्व की हो पर लाभ कई अवधियों में फैला हो; इसे कई वर्षों में अपलिखित किया जाता है और शेष राशि चिट्ठे में दिखाई जाती है। इस वर्गीकरण के पीछे मिलान का सिद्धांत काम कर रहा है — हर अवधि पर उतना ही व्यय पड़े जितना उस अवधि के राजस्व से जुड़ा हो। परीक्षा में यह वर्गीकरण दो तरह से पूछा जाता है: किसी दिए गए व्यय को श्रेणी में रखने को कहकर, जैसे यहाँ; और यह पूछकर कि कोई विशेष व्यय पूँजीगत है या राजस्व, जैसे किसी पुरानी मशीन की ऐसी मरम्मत जो उसकी क्षमता बढ़ा दे। दोनों में निर्णय एक ही प्रश्न से होता है — इस व्यय का लाभ कितनी अवधियों तक फैला है, और क्या उससे कोई परिसंपत्ति बनी है।
इस विषय में एक बात अलग से जान लेनी चाहिए, क्योंकि वह पाठ्यपुस्तक और आधुनिक व्यवहार के बीच का अंतर है। ऊपर जो वर्गीकरण दिया गया है वह पारंपरिक तथा पाठ्यपुस्तकीय स्थिति है, और परीक्षा इसी के अनुसार पूछती तथा जाँचती है। आधुनिक लेखा मानकों की स्थिति भिन्न है: अमूर्त परिसंपत्तियों से संबंधित मानक यह अपेक्षा करता है कि संस्था के प्रारंभ से जुड़ी लागतें जिस अवधि में होती हैं उसी अवधि में व्यय के रूप में मान ली जाएँ, क्योंकि उनसे कोई ऐसी अमूर्त परिसंपत्ति नहीं बनती जिसे पहचाना तथा नियंत्रित किया जा सके। इसके अतिरिक्त आयकर विधि में इन व्ययों के लिए अलग व्यवस्था है, जिसके अंतर्गत उन्हें कुछ वर्षों में क्रमशः कटौती के रूप में लिया जा सकता है। इस प्रकार एक ही व्यय के लिए तीन दृष्टियाँ हैं — पाठ्यपुस्तक की, लेखा मानक की, और कर-विधि की — और वे एक-दूसरे से भिन्न हैं। इस प्रश्न में कुंजी पाठ्यपुस्तकीय वर्गीकरण के अनुसार है, इसलिए उत्तर आस्थगित राजस्व व्यय ही है; शेष जानकारी पृष्ठभूमि के लिए है।
मुख्य तथ्य
- प्रारम्भिक व्यय कंपनी के गठन के सिलसिले में किए गए व्यय हैं — पार्षद सीमा-नियम तथा अंतर्नियम का शुल्क, पंजीकरण तथा मुद्रांक शुल्क, विधिक परामर्श और दस्तावेज़ों की छपाई।
- पारंपरिक लेखाशास्त्र में ये आस्थगित राजस्व व्यय की श्रेणी में आते हैं, क्योंकि इनकी प्रकृति राजस्व की है पर लाभ कई वर्षों में फैला रहता है।
- आस्थगित राजस्व व्यय को कई वर्षों में क्रमशः अपलिखित किया जाता है और जब तक अपलिखन शेष रहता है, बची राशि चिट्ठे में दिखाई जाती है।
- इसी श्रेणी के अन्य उदाहरण हैं किसी नए उत्पाद के लिए किया गया असाधारण रूप से बड़ा विज्ञापन-व्यय तथा शेयर-निर्गम पर दी गई भारी छूट।
- पूँजीगत व्यय वह है जिससे कोई परिसंपत्ति अर्जित हो या किसी परिसंपत्ति की क्षमता तथा उपयोगी जीवन बढ़े; प्रारम्भिक व्यय से कोई परिसंपत्ति नहीं बनती।
- साधारण राजस्व व्यय का लाभ उसी अवधि तक सीमित रहता है और वह पूरा का पूरा उसी वर्ष के लाभ-हानि विवरण में जाता है।
- आधुनिक लेखा मानक संस्था के प्रारंभ से जुड़ी लागतों को उसी अवधि में व्यय मानने की अपेक्षा करते हैं, और कर-विधि में उनके लिए अलग कटौती-व्यवस्था है।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- साधारण राजस्व व्यय और आस्थगित राजस्व व्यय को एक मान लेना; अंतर यह है कि पहला उसी वर्ष पूरा जाता है और दूसरा कई वर्षों में अपलिखित होता है।
- 'एक बार का बड़ा व्यय' देखकर उसे पूँजीगत मान लेना; पूँजीगत होने के लिए किसी परिसंपत्ति का अर्जन या क्षमता-वृद्धि आवश्यक है।
- श्रेणी की भूल न पकड़ना; 'पूँजीगत लाभ' एक आय है, व्यय की कोई श्रेणी नहीं, इसलिए वह इस प्रश्न का उत्तर हो ही नहीं सकता।
- आधुनिक लेखा मानक की स्थिति को इस प्रश्न पर लागू कर देना; प्रश्न पारंपरिक वर्गीकरण पूछ रहा है और कुंजी उसी के अनुसार है।
व्यय के वर्गीकरण पर प्रश्न इस परीक्षा के लेखाशास्त्र खंड में लगभग निश्चित रूप से आते हैं, और इस पेपर में तो दो लगातार प्रश्न इसी विषय के हैं — यह प्रश्न और उसके बाद वाला। दोनों में विकल्प भी वही चार हैं, केवल उनका क्रम बदला हुआ है, इसलिए यदि अभ्यर्थी पहले प्रश्न का उत्तर-अक्षर याद करके दूसरे में वही अक्षर भर दे तो वह ग़लत हो जाएगा। यही इस जोड़ी की सबसे बड़ी चेतावनी है: उत्तर अक्षर से नहीं, पाठ से पहचानिए। तैयारी की दृष्टि से सबसे उपयोगी यह है कि तीनों श्रेणियों के पाँच-पाँच मानक उदाहरण याद रखे जाएँ, और साथ में वे सीमांत उदाहरण भी जिन पर प्रश्न बनते हैं — पुरानी मशीन की क्षमता बढ़ाने वाली मरम्मत, स्थापना का व्यय, नए उत्पाद का असाधारण विज्ञापन, और शेयर-निर्गम पर दी गई छूट। निर्णय का प्रश्न सदा एक ही है: लाभ कितनी अवधियों तक फैला है, और क्या कोई परिसंपत्ति बनी है।
संबंधित PYQ
EPFO_APFC_2023_Q81Which of the following is not a capital expenditure?
- (a) ₹ 5,000 spent to remove a worn-out part. This part needs to be replaced with a new engine
- (b) Expenses on foreign tour for purchasing a new machine
- (c) Freight and insurance of the machinery purchased
- (d) Amount spent on repairing a secondhand machine before put to use
उत्तर(a) ₹ 5,000 spent to remove a worn-out part. This part needs to be replaced with a new engine
EPFO APFC 2023 में पूछा गया है कि कौन-सा व्यय पूँजीगत नहीं है — यही वर्गीकरण, निषेधात्मक रूप में।
EPFO_EOAO_2023_Q41Overhauling expenses of ₹ 25,000 for the engine of a motor car to get better fuel efficiency is :
- (a) Deferred revenue expenditure
- (b) Revenue receipt
- (c) Capital expenditure
- (d) Revenue expenditure
उत्तर(c) Capital expenditure
EPFO EO/AO 2023 में मोटर कार के इंजन की ओवरहॉलिंग के व्यय को वर्गीकृत करने को कहा गया है — पूँजीगत बनाम राजस्व का सीमांत उदाहरण।
अभ्यास
- practice — not a real PYQ
निम्नलिखित में से कौन-सा आस्थगित राजस्व व्यय का उदाहरण है, जिसकी प्रकृति राजस्व की होते हुए भी उसे कई वर्षों में अपलिखित किया जाता है?
- (a)कारख़ाने के भवन का निर्माण
- (b)किसी नए उत्पाद के लिए किया गया असाधारण रूप से बड़ा विज्ञापन-व्यय
- (c)कर्मचारियों को दिया गया मासिक वेतन
- (d)मशीन के विक्रय पर हुआ लाभ
उत्तर(b) किसी नए उत्पाद के लिए किया गया असाधारण रूप से बड़ा विज्ञापन-व्यय
- practice — not a real PYQ
किसी पुरानी मशीन पर किया गया वह व्यय, जिससे उसकी उत्पादन-क्षमता स्थायी रूप से बढ़ जाती है, किस श्रेणी में आएगा?
- (a)राजस्व व्यय
- (b)आस्थगित राजस्व व्यय
- (c)पूँजीगत व्यय
- (d)पूँजीगत हानि
उत्तर(c) पूँजीगत व्यय