निम्नलिखित में से कौन-सा देश WTO का सदस्य नहीं है?
- (a)जापान
- (b)चीन
- (c)ईरान
- (d)रूस
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — C, (c) ईरान। यह निषेधात्मक प्रश्न है और हिन्दी स्तंभ में 'नहीं' मोटे टाइप में छपा है, इसलिए खोजना उस देश को है जो विश्व व्यापार संगठन का सदस्य नहीं है। चारों में से तीन देशों की सदस्यता की तिथियाँ स्पष्ट हैं। जापान 1995 में विश्व व्यापार संगठन की स्थापना के समय से ही सदस्य है, क्योंकि वह इससे पहले प्रशुल्क तथा व्यापार पर सामान्य समझौते का पक्षकार था और वे सभी पक्षकार नए संगठन के संस्थापक सदस्य बने। चीन लंबी वार्ता के बाद 11 दिसम्बर 2001 को सदस्य बना, और उसका प्रवेश विश्व व्यापार के इतिहास की बड़ी घटनाओं में गिना जाता है। रूस की वार्ता और भी लंबी चली और वह 22 अगस्त 2012 को सदस्य बना। ईरान इनसे भिन्न है: उसने सदस्यता के लिए आवेदन 1990 के दशक में किया, पर उसकी प्रवेश-वार्ता आरंभ ही नहीं हो सकी; 2005 में सामान्य परिषद् ने उसके लिए कार्य-दल गठित करने पर सहमति दी, जिससे उसे प्रेक्षक (observer) का दर्जा मिला, और वह आज तक प्रेक्षक ही है, सदस्य नहीं। इसलिए 2017 के इस प्रश्न का उत्तर तब भी ईरान था और अब भी वही है। यहाँ प्रेक्षक और सदस्य का भेद समझ लेना उपयोगी है: प्रेक्षक बैठकों में उपस्थित रह सकता है और कार्यवाही देख सकता है, पर उसे मताधिकार तथा समझौतों के अधिकार प्राप्त नहीं होते, और प्रेक्षक-दर्जा प्राप्त देश से यह अपेक्षा की जाती है कि वह कुछ वर्षों के भीतर सदस्यता की औपचारिक वार्ता आरंभ करे। इस प्रश्न को हल करने की सबसे तेज़ पद्धति यह है कि तीन बड़े प्रवेशों की तिथियाँ स्मृति में रखी जाएँ — चीन 2001, रूस 2012, और जापान संस्थापक — और जिस देश के आगे कोई तिथि न आए, वही उत्तर मान लिया जाए। अतः विकल्प (c) ही उत्तर है।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (a)जापान — जापान विश्व व्यापार संगठन का संस्थापक सदस्य है, इसलिए यह उत्तर नहीं हो सकता। संगठन की स्थापना 1 जनवरी 1995 को हुई और वह प्रशुल्क तथा व्यापार पर सामान्य समझौते (GATT) का उत्तराधिकारी था; जो देश उस समझौते के पक्षकार थे और जिन्होंने मराकेश समझौते को स्वीकार किया, वे नए संगठन के संस्थापक सदस्य बने। जापान 1950 के दशक से ही उस समझौते का पक्षकार रहा है और वह विश्व की सबसे बड़ी व्यापारिक अर्थव्यवस्थाओं में गिना जाता रहा है, इसलिए उसका सदस्य होना स्वाभाविक है। इस विकल्प का काम केवल इतना है कि विकल्प-समूह में एक ऐसा देश रहे जिसकी सदस्यता पर किसी को संदेह न हो। निषेधात्मक प्रश्न में ऐसे विकल्प को तुरंत छोड़ देना चाहिए और शेष पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
- (b)चीन — चीन विश्व व्यापार संगठन का सदस्य है और उसकी सदस्यता की तिथि 11 दिसम्बर 2001 है। यह प्रवेश लगभग पंद्रह वर्ष की वार्ता के बाद हुआ, जिसमें चीन को प्रशुल्क घटाने, बाज़ार खोलने और अनेक घरेलू नियमों को बदलने की प्रतिबद्धताएँ देनी पड़ीं। उसके बाद के डेढ़ दशक में चीन के निर्यात में जो विस्तार हुआ, उसने विश्व व्यापार की संरचना ही बदल दी, और यही कारण है कि उसका प्रवेश अर्थशास्त्र की पाठ्यपुस्तकों में एक अलग प्रसंग के रूप में पढ़ाया जाता है। परीक्षा की दृष्टि से 2001 की यह तिथि अपने आप में एक संभावित प्रश्न है। चूँकि चीन सदस्य है, वह इस निषेधात्मक प्रश्न का उत्तर नहीं हो सकता।
- (d)रूस — रूस भी विश्व व्यापार संगठन का सदस्य है और उसकी सदस्यता 22 अगस्त 2012 से प्रभावी हुई। रूस की प्रवेश-वार्ता असाधारण रूप से लंबी रही — वह 1990 के दशक के आरंभ से चल रही थी और लगभग दो दशक बाद पूरी हुई। यही विलंब इस विकल्प को आकर्षक बनाता है, क्योंकि बहुत से अभ्यर्थियों की स्मृति में रूस की सदस्यता अनिश्चित-सी रहती है। सुरक्षित तरीक़ा यह है कि तीनों बड़े प्रवेशों की तिथियाँ अलग से याद रखी जाएँ — चीन 2001, रूस 2012, और सऊदी अरब 2005 — क्योंकि परीक्षा प्रायः इन्हीं देशों को विकल्पों में रखती है। ईरान इस सूची में नहीं आता, क्योंकि उसकी वार्ता आरंभ ही नहीं हुई और वह प्रेक्षक-दर्जे तक ही पहुँचा।
अवधारणा
विश्व व्यापार संगठन की स्थापना 1 जनवरी 1995 को हुई और उसका मुख्यालय जिनेवा में है। वह प्रशुल्क तथा व्यापार पर सामान्य समझौते का उत्तराधिकारी है, जो 1948 से चला आ रहा था और जिसका स्वरूप एक संधि का था, संगठन का नहीं। उरुग्वे दौर की वार्ता के बाद अप्रैल 1994 में मराकेश में हस्ताक्षरित समझौते से नए संगठन का जन्म हुआ, और उसके साथ तीन बड़े परिवर्तन आए: वस्तुओं के अतिरिक्त सेवाओं तथा बौद्धिक संपदा को भी बहुपक्षीय नियमों के दायरे में लाया गया, विवाद-निपटान की एक बाध्यकारी व्यवस्था बनी, और सदस्यता एक ही पैकेज के रूप में स्वीकार करनी पड़ी। संगठन का सर्वोच्च निर्णय-मंच मंत्रिस्तरीय सम्मेलन है, जो प्रायः हर दो वर्ष में होता है; उसके नीचे सामान्य परिषद् दैनिक कार्य देखती है। निर्णय मुख्यतः सर्वसम्मति से होते हैं, जो इस संगठन की विशेषता भी है और उसकी धीमी गति का कारण भी। नए सदस्य का प्रवेश एक लंबी प्रक्रिया है — आवेदन, कार्य-दल का गठन, बहुपक्षीय तथा द्विपक्षीय वार्ता, और अंततः प्रवेश-प्रोटोकॉल का अनुमोदन।
सदस्यता की स्थिति समय के साथ बदलती रहती है, इसलिए इस प्रकार के प्रश्नों में यह ध्यान रखना चाहिए कि प्रश्न किस समय की बात कर रहा है। 2016 में दो नए सदस्य जुड़े — लाइबेरिया और अफ़ग़ानिस्तान — जिसके बाद सदस्य-संख्या 164 हो गई और वह कई वर्षों तक इतनी ही रही; आगे चलकर 2024 में कोमोरोस तथा तिमोर-लेस्ते के प्रवेश से यह संख्या 166 हुई। इन सब परिवर्तनों के बीच ईरान की स्थिति नहीं बदली — वह प्रेक्षक ही रहा है। भारत इस संगठन का संस्थापक सदस्य है और उससे पहले सामान्य समझौते का भी आरंभिक पक्षकार था। भारत के लिए इस संगठन से जुड़े स्थायी प्रश्न कृषि-सब्सिडी, सार्वजनिक भंडारण, और विवाद-निपटान अपीलीय निकाय की निष्क्रियता से जुड़े रहे हैं। परीक्षा में यह विषय तीन दिशाओं से आता है — स्थापना तथा उत्तराधिकार, सदस्यता से जुड़े तथ्य, और समझौतों के नाम जैसे कृषि समझौता तथा बौद्धिक संपदा का समझौता।
मुख्य तथ्य
- ईरान विश्व व्यापार संगठन का सदस्य नहीं है; 2005 में उसके लिए कार्य-दल गठित होने पर उसे प्रेक्षक का दर्जा मिला और वह आज भी प्रेक्षक ही है।
- जापान संगठन का संस्थापक सदस्य है, क्योंकि वह प्रशुल्क तथा व्यापार पर सामान्य समझौते का पक्षकार था और वे सभी पक्षकार 1995 में संस्थापक सदस्य बने।
- चीन 11 दिसम्बर 2001 को सदस्य बना, लगभग पंद्रह वर्ष चली वार्ता के बाद।
- रूस 22 अगस्त 2012 को सदस्य बना; उसकी प्रवेश-वार्ता लगभग दो दशक चली।
- विश्व व्यापार संगठन की स्थापना 1 जनवरी 1995 को हुई; उसका मुख्यालय जिनेवा में है और वह 1948 से चले आ रहे सामान्य समझौते का उत्तराधिकारी है।
- प्रेक्षक और सदस्य में अंतर है — प्रेक्षक बैठकों में उपस्थित रह सकता है, पर उसे मताधिकार तथा समझौतों के अधिकार प्राप्त नहीं होते।
- 2016 में लाइबेरिया तथा अफ़ग़ानिस्तान के प्रवेश से सदस्य-संख्या 164 हुई; 2024 में कोमोरोस तथा तिमोर-लेस्ते के प्रवेश से वह 166 हो गई।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- निषेधात्मक 'नहीं' पढ़े बिना पहला परिचित नाम चुन लेना; यहाँ चार में से तीन देश सदस्य हैं और केवल एक ही सदस्य नहीं है।
- रूस की सदस्यता पर संदेह करना; उसकी वार्ता लंबी अवश्य चली, पर वह 2012 से सदस्य है।
- प्रेक्षक-दर्जे को सदस्यता मान लेना; ईरान प्रेक्षक है, और प्रेक्षक को मताधिकार तथा समझौतों के अधिकार नहीं मिलते।
- सदस्य-संख्या को स्थिर मान लेना; वह समय के साथ बदलती रही है, इसलिए ऐसे प्रश्नों में तिथि का संदर्भ देखना चाहिए।
अंतर्राष्ट्रीय संगठनों की सदस्यता पर प्रश्न इस परीक्षा में नियमित हैं और उनकी दो शैलियाँ हैं — 'कौन सदस्य नहीं है' और 'कौन संस्थापक सदस्य है'। दोनों में विकल्प बड़े तथा परिचित देशों के रखे जाते हैं, इसलिए अनुमान से काम नहीं चलता; काम आती है हर बड़े संगठन के लिए एक छोटी सूची जिसमें उल्लेखनीय अपवाद दर्ज हों — अर्थात् वे देश जो किसी संगठन के सदस्य नहीं हैं, यद्यपि लगते हैं। विश्व व्यापार संगठन के प्रसंग में ईरान ऐसा ही उल्लेखनीय अपवाद है। दूसरी उपयोगी आदत यह है कि बड़े प्रवेशों की तिथियाँ याद रखी जाएँ, क्योंकि उन पर स्वतंत्र प्रश्न भी बनते हैं। तीसरी बात, ऐसे प्रश्नों में 'प्रेक्षक', 'संस्थापक सदस्य', 'निलंबित सदस्य' जैसे दर्जों का भेद स्पष्ट रखिए, क्योंकि परीक्षा प्रायः इसी भेद पर विकल्प गढ़ती है।
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अभ्यास
- practice — not a real PYQ
लगभग पंद्रह वर्ष चली प्रवेश-वार्ता के बाद चीन विश्व व्यापार संगठन का सदस्य किस वर्ष बना था, जिसे विश्व व्यापार की बड़ी घटनाओं में गिना जाता है?
- (a)1995
- (b)1999
- (c)2001
- (d)2012
उत्तर(c) 2001
- practice — not a real PYQ
विश्व व्यापार संगठन की स्थापना किस वर्ष हुई और वह किस पूर्ववर्ती व्यवस्था का उत्तराधिकारी है?
- (a)1948, और वह अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष का उत्तराधिकारी है
- (b)1995, और वह प्रशुल्क तथा व्यापार पर सामान्य समझौते का उत्तराधिकारी है
- (c)1995, और वह संयुक्त राष्ट्र व्यापार तथा विकास सम्मेलन का उत्तराधिकारी है
- (d)2001, और वह विश्व बैंक की व्यापार शाखा का उत्तराधिकारी है
उत्तर(b) 1995, और वह प्रशुल्क तथा व्यापार पर सामान्य समझौते का उत्तराधिकारी है