एक क्रमादेश संचय, जो यह नियंत्रित करता है कि कम्प्यूटर प्रणाली कैसे चलती है और सूचना का संसाधन करती है, क्या कहलाता है ?
- (a)अनुभाषक (कंपाइलर)
- (b)प्रचालन तंत्र (ऑपरेटिंग सिस्टम)
- (c)शृंखलक (लिंकर)
- (d)कोडांतरक (असेंबलर)
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — B, (b) प्रचालन तंत्र (ऑपरेटिंग सिस्टम) — प्रश्न का निर्णायक शब्द 'संचय' है, यानी एक अकेला क्रमादेश नहीं बल्कि क्रमादेशों का समूह, और उसका काम यह बताया गया है कि वह पूरी कम्प्यूटर प्रणाली के चलने और सूचना के संसाधन को नियंत्रित करता है। यही प्रचालन तंत्र की परिभाषा है: यह तंत्र-सॉफ़्टवेयर (system software) है जो संगणक के संसाधनों — संसाधित्र (processor), स्मृति, भंडारण और निवेश-निर्गम युक्तियों — का प्रबंध करता है और उपयोक्ता तथा अनुप्रयोगों के लिए हार्डवेयर तक पहुँचने का माध्यम बनता है। कोई भी अनुप्रयोग सीधे हार्डवेयर से बात नहीं करता; वह प्रचालन तंत्र से सेवा माँगता है, और प्रचालन तंत्र तय करता है कि कौन-सी प्रक्रिया कब चलेगी, उसे कितनी स्मृति मिलेगी और फ़ाइल कहाँ लिखी जाएगी। विंडोज़, लिनक्स, यूनिक्स और एंड्रॉइड इसी कोटि के हैं। विकल्पों की बनावट भी इसी दिशा में इशारा करती है: चार में से तीन नाम अनुवादकों के हैं — अनुभाषक, कोडांतरक और शृंखलक — और तीनों किसी कार्यक्रम को चलाने योग्य बनाने के चरण में काम आते हैं, न कि मशीन के चलने के दौरान। इसलिए प्रश्न का 'नियंत्रित करता है' वाला वाक्यांश ही चौथे विकल्प को अलग कर देता है। एक और कसौटी याद रखने योग्य है — प्रचालन तंत्र मशीन चालू होते ही स्मृति में आ जाता है और बंद होने तक चलता रहता है, जबकि अनुवादक तभी चलते हैं जब उन्हें बुलाया जाए। यही 'सदा उपस्थित' रहना उसे नियंत्रक बनाता है।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (a)अनुभाषक (कंपाइलर) — अनुभाषक (compiler) एक ही काम का एक क्रमादेश है — उच्चस्तरीय भाषा में लिखे पूरे स्रोत-कोड को एक बार में मशीनी कोड में अनूदित करना। वह अनुवादक है, नियंत्रक नहीं; कम्प्यूटर के चलने के दौरान संसाधनों का प्रबंध उसके अधिकार में नहीं आता, और वह स्वयं प्रचालन तंत्र के नीचे चलता है। अनुभाषक की तुलना निर्वचक से करते समय यह भेद भी याद रखिए — अनुभाषक पहले पूरा अनुवाद करके अलग फ़ाइल बनाता है और त्रुटियाँ एक साथ बताता है, जबकि निर्वचक पंक्ति-दर-पंक्ति चलता है और पहली त्रुटि पर रुक जाता है। दोनों में से कोई भी संसाधनों का प्रबंध नहीं करता।
- (c)शृंखलक (लिंकर) — शृंखलक (linker) संकलन के बाद बने अलग-अलग वस्तु-खंडों (object modules) और पुस्तकालय की दिनचर्याओं को जोड़कर एक चलाने योग्य फ़ाइल बनाता है। उसका काम कार्यक्रम बनाने के चरण तक सीमित है, प्रणाली के प्रचालन तक नहीं। शृंखलक का काम समझने का सरल चित्र यह है: बड़े कार्यक्रम कई फ़ाइलों में लिखे जाते हैं और पुस्तकालय की तैयार दिनचर्याएँ भी उनमें बुलाई जाती हैं; शृंखलक इन सबके पते आपस में मिलाकर एक चलाने योग्य फ़ाइल बनाता है। यह काम कार्यक्रम चलने से पहले ही समाप्त हो जाता है।
- (d)कोडांतरक (असेंबलर) — कोडांतरक (assembler) संयोजन भाषा (assembly language) के कथनों को मशीनी कोड में बदलता है — फिर वही एक अनुवादक, और सबसे निचले स्तर का। सूचना के संसाधन को 'नियंत्रित' करने वाला वह नहीं है। कोडांतरक और अनुभाषक का अन्तर स्तर का है — कोडांतरक जिस संयोजन भाषा को बदलता है वह पहले ही मशीन के बहुत पास होती है और उसका लगभग हर कथन एक मशीनी अनुदेश बनता है, जबकि उच्चस्तरीय भाषा की एक पंक्ति से कई अनुदेश बनते हैं।
अवधारणा
सॉफ़्टवेयर की दो बड़ी कोटियाँ हैं — तंत्र-सॉफ़्टवेयर, जो मशीन को चलाने और उसके संसाधनों को सँभालने का काम करता है, और अनुप्रयोग-सॉफ़्टवेयर, जो उपयोक्ता का अपना काम करता है। प्रचालन तंत्र तंत्र-सॉफ़्टवेयर का प्रधान है और उसके मुख्य कार्य पाँच हैं: प्रक्रिया प्रबंधन, यानी कौन-सा कार्यक्रम कब और कितनी देर संसाधित्र पाएगा; स्मृति प्रबंधन, यानी किसे कितनी स्मृति मिलेगी और कब लौटाई जाएगी; फ़ाइल प्रबंधन, यानी आँकड़े कहाँ और किस रूप में रखे जाएँगे; युक्ति प्रबंधन, यानी मुद्रक, कुंजीपटल और भंडारण जैसी युक्तियों से संवाद; और सुरक्षा तथा पहुँच-नियंत्रण। इसका केन्द्रीय भाग कर्नेल कहलाता है। अनुभाषक, कोडांतरक और शृंखलक भी तंत्र-सॉफ़्टवेयर ही हैं, पर वे एकल उपयोगिताएँ हैं — हर एक का एक निश्चित काम है और वह काम पूरा होते ही उसकी भूमिका समाप्त हो जाती है।
इस पेपर के कम्प्यूटर वाले समूह में परिभाषा-आधारित प्रश्न लगातार आए हैं — कहीं संक्षेप का विस्तार, कहीं युक्ति का नाम, कहीं सॉफ़्टवेयर की कोटि। ऐसे प्रश्नों में विकल्प एक ही परिवार के रखे जाते हैं, इसलिए भेद बहुत बारीक हो जाता है और अनुमान काम नहीं करता। तैयारी की दृष्टि से सबसे उपयोगी आदत यह है कि हर पद के साथ दो बातें जोड़कर याद रखी जाएँ — वह करता क्या है, और वह चलता कब है। अनुवादक कार्यक्रम बनाते समय चलते हैं, प्रचालन तंत्र मशीन चालू रहने तक चलता रहता है, और अनुप्रयोग तब चलते हैं जब उपयोक्ता उन्हें बुलाए। हिन्दी स्तंभ में चारों विकल्पों के साथ अंग्रेज़ी पद का देवनागरी लिप्यन्तरण कोष्ठक में दिया गया है, इसलिए दोनों रूप पहचानने चाहिए।
मुख्य तथ्य
- प्रचालन तंत्र का केन्द्रीय भाग कर्नेल (kernel) कहलाता है, जो स्मृति में बना रहता है और संसाधनों का बँटवारा करता है।
- उसके पाँच मुख्य कार्य — प्रक्रिया प्रबंधन, स्मृति प्रबंधन, फ़ाइल प्रबंधन, युक्ति प्रबंधन तथा सुरक्षा और पहुँच-नियंत्रण।
- प्रचालन तंत्र के प्रकार — बैच, बहु-क्रमादेशन, समय-विभाजन (time sharing), वास्तविक-काल (real time) और वितरित (distributed)।
- अनुभाषक पूरे स्रोत-कोड का एक बार में अनुवाद करता है, जबकि निर्वचक (interpreter) पंक्ति-दर-पंक्ति अनुवाद करता हुआ चलाता जाता है।
- कोडांतरक संयोजन भाषा को मशीनी कोड में बदलता है और शृंखलक वस्तु-खंडों तथा पुस्तकालय की दिनचर्याओं को जोड़कर चलाने योग्य फ़ाइल बनाता है।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- 'क्रमादेशों का संचय' और 'एक क्रमादेश' का अन्तर छोड़ देना — अनुभाषक, कोडांतरक और शृंखलक तीनों एकल क्रमादेश हैं, प्रचालन तंत्र क्रमादेशों का समूह।
- अनुभाषक और निर्वचक को एक मान लेना; परीक्षा प्रायः दोनों को एक ही विकल्प-सूची में रखकर यही भेद जाँचती है।
- तंत्र-सॉफ़्टवेयर और अनुप्रयोग-सॉफ़्टवेयर की सीमा भूल जाना — शब्द-संसाधक और स्प्रेडशीट अनुप्रयोग हैं, तंत्र-सॉफ़्टवेयर नहीं।
यह विषय तीन रूपों में पूछा जाता है — परिभाषा से पद पहचानना, दिए गए नामों में से तंत्र-सॉफ़्टवेयर या अनुप्रयोग-सॉफ़्टवेयर छाँटना, और किसी एक कार्य का उत्तरदायी घटक बताना, जैसे 'स्मृति का बँटवारा कौन करता है'। तीनों में निर्णय इसी पर होता है कि वह घटक मशीन के चलने को नियंत्रित करता है या केवल कोड का अनुवाद करता है। कभी-कभी प्रचालन तंत्रों के नाम भी पूछे जाते हैं, इसलिए विंडोज़, लिनक्स, यूनिक्स और एंड्रॉइड जैसे उदाहरण साथ रखिए।
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अभ्यास
- practice — not a real PYQ
निम्नलिखित में से कौन-सा तंत्र-सॉफ़्टवेयर (system software) नहीं है ?
- (a)प्रचालन तंत्र
- (b)अनुभाषक
- (c)कोडांतरक
- (d)शब्द-संसाधक (वर्ड प्रोसेसर)
उत्तर(d) शब्द-संसाधक (वर्ड प्रोसेसर)