संचार की वह पद्धति, जिसमें दोनों दिशाओं में संचरण हो सकता है, किन्तु एक समय में एक ही दिशा में होता है, क्या कहलाती है ?
- (a)द्वैध (ड्यूप्लेक्स)
- (b)अर्ध द्वैध
- (c)पूर्ण द्वैध
- (d)एकमुखी (सिम्प्लेक्स)
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — B, (b) अर्ध द्वैध — प्रश्न में दो शर्तें एक साथ रखी गई हैं, और उत्तर उन्हीं दोनों के मेल से तय होता है। पहली शर्त यह है कि संचरण दोनों दिशाओं में हो सकता है; दूसरी शर्त यह है कि एक समय में केवल एक ही दिशा में होता है। जो पद्धति दोनों शर्तें एक साथ पूरी करती है वही अर्ध द्वैध (half duplex) है — चैनल द्विदिश तो है, पर दोनों छोर एक साथ नहीं बोल सकते; एक छोर भेजता है तब दूसरा केवल सुनता है, और भेजने की बारी बदलने पर दिशा पलट जाती है। वॉकी-टॉकी इसका सबसे परिचित उदाहरण है: बटन दबाकर बोलना और छोड़कर सुनना ही 'एक समय में एक दिशा' का व्यावहारिक रूप है। पुरानी शैली के अर्ध-द्वैध ईथरनेट में भी यही व्यवस्था थी, जहाँ एक ही माध्यम पर दो छोर एक साथ भेजने लगें तो टक्कर (collision) हो जाती है। भ्रम मिटाने का एक सीधा तरीक़ा यह है कि हर पद्धति से दो प्रश्न पूछिए — पहला, क्या उलटी दिशा में लौटने का मार्ग है ? दूसरा, क्या दोनों दिशाएँ एक ही क्षण में चल सकती हैं ? पहले का उत्तर 'नहीं' हो तो पद्धति एकमुखी है; पहले का 'हाँ' और दूसरे का 'नहीं' हो तो अर्ध द्वैध; और दोनों का 'हाँ' हो तो पूर्ण द्वैध। इस प्रश्न में दोनों सूचनाएँ अलग-अलग वाक्यांशों में रखी गई हैं, इसलिए दोनों प्रश्नों के उत्तर सीधे स्टेम से मिल जाते हैं और कोटि बीच वाली ही बचती है। यही कारण है कि यहाँ विकल्प (a) और (b) का भेद ही असली परीक्षा है, (b) और (d) का नहीं।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (a)द्वैध (ड्यूप्लेक्स) — 'द्वैध' अपने आप में केवल इतना कहता है कि संचार दोनों दिशाओं में संभव है — यह अर्ध द्वैध और पूर्ण द्वैध, दोनों को समेटने वाला कुल-वर्ग है और प्रश्न की दूसरी शर्त, यानी 'एक समय में एक ही दिशा', को यह पद अलग से नहीं बताता। सामान्य प्रयोग में बिना विशेषण के 'duplex' कहने पर प्रायः पूर्ण द्वैध ही समझा जाता है, इसलिए यह विकल्प प्रश्न की पहचान-शर्त को छूता तक नहीं। व्यवहार में भी यह पद अकेला बहुत कम मिलता है — तकनीकी लेखन उसे सदैव 'अर्ध' या 'पूर्ण' के साथ जोड़कर लिखता है, ठीक इसी अस्पष्टता से बचने के लिए। जहाँ प्रश्न किसी कोटि की पहचान माँगे, वहाँ कुल-वर्ग का नाम कभी उत्तर नहीं होता।
- (c)पूर्ण द्वैध — पूर्ण द्वैध (full duplex) में दोनों छोर एक ही समय में भेज और पा सकते हैं — जैसे साधारण टेलीफ़ोन वार्ता, जिसमें दोनों व्यक्ति एक साथ बोल सकते हैं। यह प्रश्न की पहली शर्त तो पूरी करता है पर दूसरी का उल्लंघन करता है, क्योंकि यहाँ दिशा-परिवर्तन की बारी लेने की आवश्यकता ही नहीं रहती। इसे पहचानने का सरल चिह्न यह है कि पूर्ण द्वैध में दिशा बदलने के लिए किसी को रुकना नहीं पड़ता, इसलिए वहाँ 'बारी' या 'टर्नअराउंड' जैसी कोई अवधारणा ही नहीं आती। यदि प्रश्न में बारी लेने या रुकने का संकेत हो तो उत्तर पूर्ण द्वैध कभी नहीं होगा।
- (d)एकमुखी (सिम्प्लेक्स) — एकमुखी (simplex) में संचरण सदैव एक ही निश्चित दिशा में होता है और उलटी दिशा में लौटने का मार्ग होता ही नहीं — रेडियो और टेलीविज़न प्रसारण, या कुंजीपटल से कम्प्यूटर तक जाने वाला संकेत। प्रश्न स्पष्ट कहता है कि संचरण दोनों दिशाओं में हो सकता है, इसलिए यह विकल्प पहली ही शर्त पर कट जाता है। ध्यान रखिए कि एकमुखी में उलटी दिशा का अभाव माध्यम की सीमा नहीं, व्यवस्था का चुनाव होता है — प्रसारण में लाखों श्रोता हैं और उनसे उत्तर लेने की आवश्यकता ही नहीं। इसीलिए एकमुखी तंत्र सस्ते और सरल होते हैं।
अवधारणा
आँकड़ा-संचरण की दिशा के आधार पर संचार पद्धतियाँ तीन हैं और उनका भेद 'कितनी दिशाएँ' पर नहीं, 'एक साथ या बारी-बारी' पर टिका है। एकमुखी (simplex) में संचरण सदैव एक ही निश्चित दिशा में होता है और लौटने का कोई मार्ग होता ही नहीं — प्रसारण इसी कोटि का है, जहाँ भेजने वाला केवल भेजता है और पाने वाला केवल पाता है। अर्ध द्वैध (half duplex) में दोनों दिशाएँ उपलब्ध हैं पर एक समय में एक; चैनल एक ही है, इसलिए दोनों छोरों को बारी लेनी पड़ती है, और बारी बदलने में जो थोड़ा समय लगता है उसे टर्नअराउंड समय कहते हैं। पूर्ण द्वैध (full duplex) में दोनों दिशाएँ एक साथ चलती हैं, क्योंकि या तो दो अलग मार्ग होते हैं या एक ही माध्यम को आवृत्ति अथवा समय के आधार पर बाँट दिया जाता है। क्षमता की दृष्टि से पूर्ण द्वैध सबसे तेज़ पड़ता है, पर उसका ढाँचा भी सबसे महँगा होता है — यही कारण है कि सरल और सस्ते तंत्रों में आज भी अर्ध द्वैध चलता है।
यह प्रश्न इस पेपर के कम्प्यूटर और नेटवर्क वाले समूह का है, जिसमें संचार-माध्यम, नेटवर्क का विस्तार, युक्तियों के संक्षेप और सॉफ़्टवेयर की कोटियाँ बार-बार पूछी गई हैं। इस समूह के प्रश्न प्रायः परिभाषा से पद पहचानने के होते हैं, और उनमें विकल्प जान-बूझकर एक ही परिवार के रखे जाते हैं — यहाँ चारों विकल्प संचरण-पद्धति के ही नाम हैं, इसलिए अनुमान से काम नहीं चलता। ऐसे प्रश्नों की तैयारी में परिभाषा रटने से अधिक उपयोगी यह है कि हर पद के साथ एक रोज़मर्रा का उदाहरण जोड़कर रखा जाए — प्रसारण, वॉकी-टॉकी और टेलीफ़ोन — क्योंकि परीक्षा उदाहरण से पद और पद से उदाहरण, दोनों दिशाओं में पूछती है। हिन्दी स्तंभ में लिप्यन्तरण के कोष्ठक केवल दो विकल्पों पर लगे हैं, इसलिए पद का हिन्दी रूप भी पहचानना पड़ता है।
मुख्य तथ्य
- एकमुखी (simplex) — संचरण केवल एक निश्चित दिशा में, उलटा मार्ग होता ही नहीं; उदाहरण रेडियो और टेलीविज़न प्रसारण तथा कुंजीपटल से कम्प्यूटर तक जाने वाला संकेत।
- अर्ध द्वैध (half duplex) — दोनों दिशाएँ उपलब्ध पर एक समय में एक; वॉकी-टॉकी में बटन दबाकर बोलना और छोड़कर सुनना इसी का व्यावहारिक रूप है।
- पूर्ण द्वैध (full duplex) — दोनों दिशाएँ एक ही समय में चलती हैं, जैसे साधारण टेलीफ़ोन वार्ता, जिसमें दोनों व्यक्ति एक साथ बोल सकते हैं।
- अर्ध-द्वैध साझा माध्यम पर दो छोर एक साथ भेजने लगें तो टक्कर (collision) होती है, इसलिए ऐसे नेटवर्कों में बारी तय करने की व्यवस्था रखनी पड़ती है।
- एक ही माध्यम पर पूर्ण द्वैध पाने के लिए उसे आवृत्ति या समय के आधार पर बाँटा जाता है, जिससे ढाँचा जटिल और महँगा हो जाता है।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- 'दोनों दिशाओं में' पढ़कर तुरंत पूर्ण द्वैध चुन लेना, जबकि निर्णायक वाक्यांश आगे है — 'एक समय में एक ही दिशा में होता है'।
- 'द्वैध' जैसे कुल-वर्ग वाले विकल्प को विशिष्ट उत्तर मान लेना, जबकि प्रश्न उसकी एक उप-कोटि की परिभाषा दे रहा है।
- संचरण की दिशा वाले वर्गीकरण को संचरण के प्रकार (क्रमिक और समान्तर) वाले वर्गीकरण से मिला देना — दोनों अलग कसौटियाँ हैं।
यह विषय दो रूपों में आता है — परिभाषा से पद पहचानिए, जैसा यहाँ है, या उदाहरण से पद पहचानिए, जैसे 'वॉकी-टॉकी किस पद्धति का उदाहरण है'। कभी-कभी उलटा रूप भी आता है, जिसमें किसी पद्धति का उदाहरण पूछा जाता है। तीनों रूपों में निर्णय एक ही वाक्यांश पर होता है, इसलिए उत्तर देने से पहले यह देख लीजिए कि प्रश्न में 'एक साथ' (simultaneously) लिखा है या 'एक समय में एक' (one at a time)। जहाँ यह वाक्यांश न हो, वहाँ यह देखिए कि उलटी दिशा का मार्ग है या नहीं — उतने से ही एकमुखी अलग हो जाता है।
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- (b) 1 only
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अभ्यास
- practice — not a real PYQ
वॉकी-टॉकी पर होने वाली बातचीत आँकड़ा-संचरण की किस पद्धति का उदाहरण है ?
- (a)एकमुखी (सिम्प्लेक्स)
- (b)अर्ध द्वैध
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उत्तर(b) अर्ध द्वैध