नैनो-प्रौद्योगिकी के लिए निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए : 1. यह परमाणु-दर-परमाणु पदार्थों और युक्तियों के निर्माण की प्रौद्योगिकी है । 2. भौतिक गुणधर्मों में नैनोमीटर पैमाने पर बदलाव होता है । 3. रासायनिक गुणधर्मों में नैनोमीटर पैमाने पर बदलाव होता है । उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं ?
- (a)केवल 1 और 2
- (b)केवल 1 और 3
- (c)केवल 2 और 3
- (d)1, 2 और 3
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — D, (d) 1, 2 और 3 — तीनों कथन नैनो-प्रौद्योगिकी की मानक परिभाषा और उसके मूल तर्क को ही दोहराते हैं।
कथन 1 — यह परमाणु-दर-परमाणु पदार्थों और युक्तियों के निर्माण की प्रौद्योगिकी है। सही। इस क्षेत्र की पहचान ही यह है कि पदार्थ को अत्यंत सूक्ष्म पैमाने पर, परमाणुओं और अणुओं के स्तर पर व्यवस्थित करके नए गुणों वाली संरचनाएँ बनाई जाएँ। नीचे से ऊपर की ओर, यानी परमाणुओं को जोड़कर संरचना बनाने वाली विधि इसी विचार का सीधा रूप है।
कथन 2 — भौतिक गुणधर्मों में नैनोमीटर पैमाने पर बदलाव होता है। सही। इस पैमाने पर पदार्थ का व्यवहार उसके स्थूल रूप से भिन्न हो जाता है : गलनांक बदल सकता है, यांत्रिक सामर्थ्य बढ़ सकती है, चालकता और चुंबकीय व्यवहार बदल सकते हैं, और कण के आकार के अनुसार रंग तक बदल जाता है।
कथन 3 — रासायनिक गुणधर्मों में भी नैनोमीटर पैमाने पर बदलाव होता है। सही, और इसका कारण सरल है। कण जितना छोटा होता है, उसके आयतन की तुलना में उसका पृष्ठ-क्षेत्रफल उतना ही अधिक होता है, और रासायनिक अभिक्रियाएँ पृष्ठ पर ही होती हैं। इसलिए नैनो-कण उसी पदार्थ के स्थूल रूप की तुलना में कहीं अधिक क्रियाशील हो सकते हैं — यही उत्प्रेरण में उनके उपयोग का आधार है।
तीनों कथन टिकते हैं, इसलिए उत्तर (d) है।
कथन 2 और 3 को एक साथ देखना उपयोगी है : वे एक ही परिघटना के दो पक्ष हैं। पैमाना घटने पर पृष्ठ का महत्त्व बढ़ता है और क्वांटम प्रभाव सामने आने लगते हैं; इनमें से पहला मुख्यतः रसायन को बदलता है और दूसरा भौतिकी को। इसलिए इनमें से किसी एक को सही और दूसरे को ग़लत मानने का कोई आधार नहीं बनता — और तीनों ग़लत विकल्प ठीक यही करते हैं।
छपाई की एक बात : प्रश्न में एक ओर ‘नैनो-प्रौद्योगिकी’ योजक-चिह्न के साथ है और दूसरी ओर ‘नैनोमीटर’ एक ही शब्द के रूप में; यही असंगति अंग्रेज़ी स्तंभ में भी है और अर्थ पर इसका कोई असर नहीं पड़ता।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (a)केवल 1 और 2 — यह समुच्चय रासायनिक गुणधर्मों वाले कथन को छोड़ देता है, जबकि नैनो-पैमाने पर रासायनिक व्यवहार का बदलना इस क्षेत्र का सबसे व्यावहारिक परिणाम है। कारण ज्यामितीय है : आयतन घटने की तुलना में पृष्ठ-क्षेत्रफल धीमे घटता है, इसलिए कण जितना छोटा, उसका उतना ही बड़ा अंश पृष्ठ पर होता है। चूँकि अभिक्रियाएँ पृष्ठ पर होती हैं, वही पदार्थ नैनो-रूप में कहीं अधिक क्रियाशील हो जाता है। उत्प्रेरकों में नैनो-कणों का उपयोग इसी तथ्य पर टिका है।
- (b)केवल 1 और 3 — यह विकल्प भौतिक गुणधर्मों वाले कथन को नकार देता है, जो और भी कठिन है। नैनो-पैमाने पर भौतिक व्यवहार का बदलना इस क्षेत्र की सबसे पहले देखी गई विशेषता है — कण के आकार के अनुसार प्रकाश का अवशोषण और परावर्तन बदलता है, इसीलिए एक ही धातु के नैनो-कण अलग-अलग रंग दिखा सकते हैं; गलनांक, सामर्थ्य और चुंबकीय व्यवहार भी बदलते हैं। यदि भौतिक गुण न बदलते, तो नैनो-पदार्थों में विशेष रुचि का कारण ही न रहता।
- (c)केवल 2 और 3 — यह विकल्प परिभाषा वाले कथन को ही बाहर कर देता है। परमाणु और अणु के स्तर पर पदार्थ को व्यवस्थित करके संरचनाएँ बनाना नैनो-प्रौद्योगिकी की मूल पहचान है, और यही उसे परंपरागत पदार्थ-विज्ञान से अलग करता है, जहाँ पदार्थ को स्थूल रूप में काटा-ढाला जाता है। ध्यान दीजिए कि इस क्षेत्र में ऊपर से नीचे की ओर चलने वाली विधियाँ भी हैं, जिनमें बड़े पदार्थ को घटाकर सूक्ष्म संरचना बनाई जाती है — पर दोनों विधियों का लक्ष्य एक ही है : नैनो-पैमाने पर नियंत्रित संरचना।
अवधारणा
नैनोमीटर एक मीटर का अरबवाँ भाग है, और नैनो-पैमाना सामान्यतः एक से सौ नैनोमीटर तक माना जाता है। इस पैमाने पर पदार्थ का व्यवहार दो कारणों से बदल जाता है।
पहला कारण पृष्ठ का है। किसी पिंड को छोटे-छोटे कणों में बाँटने पर कुल आयतन वही रहता है, पर कुल पृष्ठ-क्षेत्रफल बहुत बढ़ जाता है। चूँकि रासायनिक अभिक्रियाएँ, अधिशोषण और उत्प्रेरण सब पृष्ठ पर होते हैं, नैनो-कणों की क्रियाशीलता स्थूल पदार्थ से कहीं अधिक होती है।
दूसरा कारण क्वांटम प्रभावों का है। जब संरचना का आकार उन दूरियों के परास में आ जाता है जिन पर इलेक्ट्रॉनों का व्यवहार निर्धारित होता है, तब ऊर्जा-स्तर और प्रकाश के साथ अंतःक्रिया बदल जाती है। इसी से कण के आकार के अनुसार रंग, चालकता और चुंबकीय गुण बदलते हैं।
निर्माण की दो शैलियाँ हैं। नीचे से ऊपर की शैली में परमाणुओं और अणुओं को जोड़कर संरचना बनाई जाती है; ऊपर से नीचे की शैली में बड़े पदार्थ को उकेरकर या घटाकर सूक्ष्म संरचना तक पहुँचा जाता है — सूक्ष्म-इलेक्ट्रॉनिकी की चिप-निर्माण प्रक्रिया इसका परिचित उदाहरण है।
उपयोग व्यापक हैं : औषधि को शरीर के नियत स्थान तक पहुँचाना, हल्के और मज़बूत पदार्थ, बेहतर उत्प्रेरक, जल-शोधन की झिल्लियाँ, और प्रसाधन तथा सूर्य-रक्षक में सूक्ष्म कण। इसके साथ नैनो-कणों की विषाक्तता और पर्यावरण में उनके व्यवहार को लेकर सतर्कता भी आवश्यक मानी जाती है।
नैनो-प्रौद्योगिकी सामान्य विज्ञान और प्रौद्योगिकी के उस भाग में आती है जिसे परीक्षाएँ ‘उभरती प्रौद्योगिकियाँ’ कहकर पूछती हैं, और उसके साथ जैव प्रौद्योगिकी, कृत्रिम बुद्धि और अंतरिक्ष-प्रौद्योगिकी जैसे विषय एक ही समूह में आते हैं।
भारत में इस क्षेत्र के लिए विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग की ओर से समर्पित पहल चलाई गई है, जिसका उद्देश्य अनुसंधान-सुविधाएँ, मानव संसाधन और उद्योग-अकादमिक सहयोग विकसित करना है।
प्रश्न की बनावट पर एक बात : यहाँ सूची के बाद सीधे प्रश्न-वाक्य आता है और कोई कूट-पंक्ति नहीं है। सूची के तीनों कथन एक ही दिशा में जाते हैं — परिभाषा, फिर भौतिक गुण, फिर रासायनिक गुण — और जब सूची के सभी कथन एक-दूसरे के पूरक हों तथा उनमें कोई अतिशयोक्ति न हो, तब ‘सब सही’ वाला विकल्प गंभीरता से देखा जाना चाहिए; पर निर्णय तभी लीजिए जब हर कथन अलग से जाँच लिया गया हो।
मुख्य तथ्य
- नैनोमीटर एक मीटर का अरबवाँ भाग है और नैनो-पैमाना सामान्यतः एक से सौ नैनोमीटर तक माना जाता है।
- नैनो-प्रौद्योगिकी में पदार्थ को परमाणु और अणु के स्तर पर व्यवस्थित करके नए गुणों वाली संरचनाएँ बनाई जाती हैं।
- पैमाना घटने पर आयतन की तुलना में पृष्ठ-क्षेत्रफल बढ़ता है, और चूँकि अभिक्रियाएँ पृष्ठ पर होती हैं, रासायनिक क्रियाशीलता बढ़ जाती है।
- क्वांटम प्रभावों के कारण भौतिक गुण — रंग, गलनांक, चालकता और चुंबकीय व्यवहार — भी इस पैमाने पर बदल जाते हैं।
- निर्माण की दो शैलियाँ हैं : नीचे से ऊपर की ओर परमाणुओं को जोड़कर, और ऊपर से नीचे की ओर बड़े पदार्थ को घटाकर।
- उपयोग : लक्षित औषधि-वितरण, हल्के और मज़बूत पदार्थ, बेहतर उत्प्रेरक, जल-शोधन की झिल्लियाँ और सूर्य-रक्षक; साथ ही नैनो-कणों की विषाक्तता सतर्कता का विषय है।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- भौतिक और रासायनिक गुणों में से किसी एक को ही नैनो-पैमाने पर बदलता मान लेना, जबकि दोनों एक ही परिघटना के दो पक्ष हैं।
- नैनो-प्रौद्योगिकी को केवल भविष्य की कल्पना समझना, जबकि उसके उत्पाद पहले से प्रचलन में हैं।
- नैनोमीटर और माइक्रोमीटर के परिमाण आपस में बदल देना, जिससे पूरा पैमाना हज़ार गुना खिसक जाता है।
‘सब सही’ वाले विकल्प से डरना नहीं चाहिए, पर उस तक पहुँचना हर कथन की अलग जाँच से ही चाहिए। इस प्रश्न में एक और उपयोगी संकेत है : कथन 2 और 3 एक ही परिघटना के दो पक्ष हैं, इसलिए यदि एक सही है तो दूसरे को ग़लत ठहराने के लिए कोई विशेष कारण चाहिए — और ऐसा कोई कारण यहाँ नहीं है। उभरती प्रौद्योगिकियों पर प्रश्न प्रायः परिभाषा, कारण और उपयोग — इन तीन कोनों से आते हैं, इसलिए तैयारी में हर तकनीक के साथ ये तीनों बिंदु एक साथ जोड़कर रखिए।
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इसी प्रश्नपत्र का DNA अंगुलि-छाप वाला प्रश्न — आधुनिक प्रौद्योगिकियों के उसी खंड से।
अभ्यास
- practice — not a real PYQ
नैनो-पैमाने पर पदार्थों की रासायनिक क्रियाशीलता बढ़ने का मुख्य कारण क्या है ?
- (a)आयतन की तुलना में पृष्ठ-क्षेत्रफल का बढ़ जाना
- (b)घनत्व का बढ़ जाना
- (c)गलनांक का घट जाना
- (d)परमाणु-भार का बदल जाना
उत्तर(a) आयतन की तुलना में पृष्ठ-क्षेत्रफल का बढ़ जाना
- practice — not a real PYQ
एक नैनोमीटर कितने के बराबर होता है ?
- (a)एक मीटर का दस लाखवाँ भाग
- (b)एक मीटर का अरबवाँ भाग
- (c)एक मिलीमीटर का हज़ारवाँ भाग
- (d)एक माइक्रोमीटर का सौवाँ भाग
उत्तर(b) एक मीटर का अरबवाँ भाग