प्रदूषण के अध्ययन में, SPM किसे निर्दिष्ट करता है ?
- (a)सल्फर फॉस्फोरस मैटर
- (b)सल्फर पार्टिकुलेट मैटर
- (c)सॉलिड पार्टिकुलेट मैटर
- (d)सस्पेन्डेड पार्टिकुलेट मैटर
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — D, (d) सस्पेन्डेड पार्टिकुलेट मैटर — प्रदूषण के अध्ययन में SPM का पूरा रूप suspended particulate matter है, यानी वायु में निलंबित कणिकीय पदार्थ।
नाम के तीनों अंश अपनी-अपनी बात कहते हैं। ‘निलंबित’ इसलिए कि ये कण इतने हल्के हैं कि गुरुत्व उन्हें तुरन्त नीचे नहीं बैठा पाता और वे लंबे समय तक हवा में तैरते रहते हैं — यही उनका परिभाषक गुण है। ‘कणिकीय’ इसलिए कि यह गैस नहीं, ठोस कणों और सूक्ष्म द्रव बूँदों का मिश्रण है। और ‘पदार्थ’ इसलिए कि इसमें किसी एक रसायन का नाम नहीं है : धूल, कालिख, धुएँ का कार्बन, धातु-कण, सल्फेट और नाइट्रेट के द्वितीयक कण, परागकण — सब इसी छतरी के नीचे आते हैं।
आकार के आधार पर इसे आगे बाँटा जाता है। दस माइक्रोमीटर तक के कण PM10 कहलाते हैं, जिन्हें श्वसनीय कणिकीय पदार्थ भी कहा जाता है, और ढाई माइक्रोमीटर तक के महीन कण PM2·5। कण जितना महीन होता है, वह श्वास-तंत्र में उतना ही भीतर तक पहुँचता है — PM2·5 फेफड़ों की वायुकोष्ठिकाओं तक जाकर रक्त-प्रवाह में भी प्रवेश कर सकता है, इसीलिए वायु गुणवत्ता के मानकों में इसे अलग से मापा जाता है।
यहाँ तीनों ग़लत विकल्प एक ही जाल के तीन रूप हैं : वे S का विस्तार बदल देते हैं। दो में उसे ‘सल्फर’ बना दिया गया है और एक में ‘सॉलिड’। संक्षेप का पहला अक्षर वह गुण बताता है जो इन कणों को परिभाषित करता है — हवा में निलंबित रहना — किसी रसायन या अवस्था का नाम नहीं।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (a)सल्फर फॉस्फोरस मैटर — सल्फर फॉस्फोरस मैटर नाम की कोई राशि वायु गुणवत्ता के मापन में है ही नहीं। यह विकल्प दो परिचित तत्त्वों के नाम जोड़कर बनाया गया है, ताकि रसायन पढ़ चुके पाठक को कुछ जाना-पहचाना लगे। वायु प्रदूषण में सल्फर की भूमिका है, पर वह सल्फर डाइऑक्साइड गैस के रूप में और आगे चलकर सल्फेट कणों के रूप में; फॉस्फोरस वायु गुणवत्ता के मानक प्रदूषकों में आता ही नहीं। संक्षेप का अर्थ कण के आकार और निलंबन से है, किसी तत्त्व-युग्म से नहीं।
- (b)सल्फर पार्टिकुलेट मैटर — यह विकल्प इसलिए ख़तरनाक है कि आधा सच है। ‘पार्टिकुलेट मैटर’ सही अंश है, पर S का विस्तार ‘सल्फर’ ग़लत है। सल्फर डाइऑक्साइड वायुमंडल में ऑक्सीकृत होकर सल्फेट के महीन कण बनाता है, जो कणिकीय पदार्थ का एक अंश ज़रूर हैं — पर वे उसका केवल एक भाग हैं, पूरा नाम नहीं। कणिकीय पदार्थ में धूल, कालिख, धातु-कण और अनेक कार्बनिक यौगिक भी शामिल हैं, इसलिए उसे किसी एक तत्त्व के नाम से बाँधना उसकी परिभाषा को संकुचित कर देता है।
- (c)सॉलिड पार्टिकुलेट मैटर — यह सबसे निकट का जाल है, क्योंकि अधिकांश कण सचमुच ठोस होते हैं। पर परिभाषा ठोस होने पर नहीं, हवा में निलंबित रहने पर टिकी है, और निलंबित कणों में सूक्ष्म द्रव बूँदें — कोहरे और धुंध के एरोसोल, अम्ल की बूँदें — भी शामिल होती हैं। ‘सॉलिड’ कह देने से वे बाहर हो जातीं। यही कारण है कि मानक शब्दावली में S का अर्थ suspended है : वह गुण बताता है जिसके कारण ये कण साँस के साथ भीतर जा पाते हैं।
अवधारणा
कणिकीय पदार्थ वायु प्रदूषण का वह वर्ग है जिसमें प्रदूषक गैस के रूप में नहीं, ठोस कणों और द्रव बूँदों के रूप में हवा में तैरता है। इसे आकार से वर्गीकृत किया जाता है, क्योंकि स्वास्थ्य पर असर आकार से तय होता है : मोटे कण नाक और गले में रुक जाते हैं, दस माइक्रोमीटर तक के कण श्वास-नली से आगे बढ़ते हैं, और ढाई माइक्रोमीटर से महीन कण फेफड़ों की गहराई तक पहुँचते हैं।
स्रोत दो प्रकार के होते हैं। प्राथमिक कण सीधे उत्सर्जित होते हैं — वाहनों और उद्योगों का धुआँ, निर्माण-कार्य और सड़कों की धूल, बायोमास तथा फ़सल-अवशेष का जलना। द्वितीयक कण वायुमंडल में गैसों की अभिक्रिया से बनते हैं — सल्फर डाइऑक्साइड से सल्फेट, नाइट्रोजन के ऑक्साइडों से नाइट्रेट, और अमोनिया से अमोनियम लवण।
भारत में राष्ट्रीय परिवेशी वायु गुणवत्ता मानकों में PM10 और PM2·5 दोनों के लिए अलग-अलग वार्षिक तथा चौबीस घंटे की सीमाएँ तय हैं, और वायु गुणवत्ता सूचकांक में भी ये दोनों प्रमुख प्रदूषकों में गिने जाते हैं। इसी कारण समाचारों में शहरों की वायु गुणवत्ता की चर्चा प्रायः PM2·5 के आँकड़े से शुरू होती है।
वायु प्रदूषण के प्रश्न पर्यावरण और सामान्य विज्ञान दोनों की सीमा पर पड़ते हैं, और संक्षेपों की पहचान उनका सबसे आम रूप है। SPM के साथ RSPM (श्वसनीय निलंबित कणिकीय पदार्थ), PM10 और PM2·5 एक ही परिवार के पद हैं और परीक्षा में प्रायः एक-दूसरे के विकल्प के रूप में रखे जाते हैं।
भारत में निगरानी का ढाँचा केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और राज्य बोर्डों के माध्यम से चलता है, जो राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता निगरानी कार्यक्रम के अंतर्गत नगरों में मापन केंद्र चलाते हैं। वायु गुणवत्ता सूचकांक इन्हीं मापों को एक संख्या और एक रंग-श्रेणी में बदलकर आम पाठक तक पहुँचाता है, और उसमें कणिकीय पदार्थ के अलावा सल्फर डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन डाइऑक्साइड, कार्बन मोनोक्साइड, ओज़ोन, अमोनिया और सीसा भी शामिल हैं।
इस प्रश्नपत्र में भूगोल और पर्यावरण के लगभग आठ प्रश्न हैं, और इसी क्रम में अम्लीय वर्षा जैसा प्रश्न भी पूछा गया है — यानी वायु प्रदूषण के गैसीय और कणिकीय, दोनों पक्ष इस पत्र में आए हैं।
मुख्य तथ्य
- SPM का पूरा रूप suspended particulate matter है — वायु में निलंबित कणिकीय पदार्थ; परिभाषक गुण निलंबन है, कोई रसायन नहीं।
- इसमें ठोस कणों के साथ सूक्ष्म द्रव बूँदें भी सम्मिलित रहती हैं, इसलिए इसे केवल ‘ठोस’ कहना परिभाषा को संकुचित कर देता है।
- दस माइक्रोमीटर तक के कण PM10 यानी श्वसनीय कणिकीय पदार्थ और ढाई माइक्रोमीटर तक के कण PM2·5 कहलाते हैं।
- कण जितना महीन होता है श्वसन-तंत्र में उतना गहरा प्रवेश करता है; PM2·5 फेफड़ों की वायुकोष्ठिकाओं तक पहुँच सकता है।
- द्वितीयक कण वायुमंडल में गैसों की अभिक्रिया से बनते हैं : सल्फर डाइऑक्साइड से सल्फेट और नाइट्रोजन के ऑक्साइडों से नाइट्रेट।
- भारत के राष्ट्रीय परिवेशी वायु गुणवत्ता मानकों तथा वायु गुणवत्ता सूचकांक, दोनों में PM10 और PM2·5 सम्मिलित हैं।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- S को ‘सल्फर’ या ‘सॉलिड’ पढ़ लेना — इस संक्षेप में पहला अक्षर कणों के निलंबित रहने का सूचक है, किसी तत्त्व या अवस्था का नहीं।
- कणिकीय पदार्थ को केवल ठोस मान लेना, जबकि उसमें सूक्ष्म द्रव बूँदें और एरोसोल भी आते हैं।
- PM10 और PM2·5 की सीमाएँ तथा उनके स्वास्थ्य-प्रभाव आपस में बदल देना; महीन कण श्वसन-तंत्र में अधिक गहराई तक पहुँचते हैं।
संक्षेपों वाले प्रश्न में सबसे तेज़ रास्ता यह है कि पहले उस अक्षर पर ध्यान दिया जाए जिसे विकल्प बदल रहे हैं। यहाँ चारों विकल्पों में ‘पार्टिकुलेट मैटर’ या उससे मिलता-जुलता अंश साझा है और असली अंतर केवल S के विस्तार में है, इसलिए प्रश्न वास्तव में यह पूछ रहा है कि इन कणों की परिभाषक विशेषता क्या है। पर्यावरण के इसी परिवार से प्रश्न कभी परिभाषा के रूप में आते हैं, कभी स्रोत के रूप में और कभी स्वास्थ्य-प्रभाव के रूप में; तीनों की तैयारी एक साथ करने पर एक ही सामग्री तीन तरह के प्रश्नों में काम आ जाती है।
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EPFO_APFC_2016_Q63खोलें व हल करें →Acid rain is due to
- (a) Sulphur dioxide pollution
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- (d) Dust particles in the atmosphere
उत्तर(a) Sulphur dioxide pollution
इसी प्रश्नपत्र का अम्लीय वर्षा वाला प्रश्न, जो वायु प्रदूषण के गैसीय पक्ष — सल्फर डाइऑक्साइड — पर केंद्रित है।
अभ्यास
- practice — not a real PYQ
वायु गुणवत्ता के मापन में PM2·5 किसे निर्दिष्ट करता है ?
- (a)ढाई माइक्रोमीटर तक व्यास वाले महीन निलंबित कण
- (b)ढाई मिलीमीटर तक व्यास वाले कण
- (c)प्रति घन मीटर ढाई मिलीग्राम सल्फर डाइऑक्साइड
- (d)ढाई प्रतिशत तक कार्बन वाले धूल-कण
उत्तर(a) ढाई माइक्रोमीटर तक व्यास वाले महीन निलंबित कण
- practice — not a real PYQ
निम्नलिखित में से कौन-सा द्वितीयक कणिकीय प्रदूषक का उदाहरण है ?
- (a)निर्माण-कार्य से उड़ी धूल
- (b)डीज़ल इंजन से निकली कालिख
- (c)सल्फर डाइऑक्साइड के ऑक्सीकरण से बने सल्फेट कण
- (d)सड़क पर वाहनों से उड़ी मिट्टी
उत्तर(c) सल्फर डाइऑक्साइड के ऑक्सीकरण से बने सल्फेट कण