निम्नलिखित में से कौन-से, सरकार द्वारा अनुमोदित राष्ट्रीय दूरसंचार नीति, 2012 में सन्निविष्ट हैं ? 1. दो मेगाबिट्स प्रति सेकंड की न्यूनतम डाउनलोड रफ़्तार के साथ, सभी के लिए ब्रॉडबैंड 2. अगले पाँच वर्षों में भारत के ग्रामीण दूरभाष-घनत्व (टेली-डेन्सिटी) को 39% से उन्नत कर 70% करना 3. रोमिंग प्रभारों को समाप्त किया जाएगा नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए :
- (a)केवल 1 और 2
- (b)केवल 1 और 3
- (c)केवल 2 और 3
- (d)1, 2 और 3
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — D, (d) 1, 2 और 3 — तीनों बातें राष्ट्रीय दूरसंचार नीति, 2012 में सन्निविष्ट हैं, इसलिए कोई भी कथन छोड़ा नहीं जा सकता। कथन 1 इस नीति की सबसे प्रचारित घोषणा है : 'माँग पर ब्रॉडबैंड' की व्यवस्था करना और सभी के लिए ब्रॉडबैंड उपलब्ध कराना, जिसमें न्यूनतम डाउनलोड रफ़्तार दो मेगाबिट्स प्रति सेकंड रखी गई और माँग पर उससे अधिक देने की बात कही गई; नीति ने ब्रॉडबैंड की न्यूनतम रफ़्तार की परिभाषा ही ऊपर उठा दी थी। कथन 2 इसी नीति का ग्रामीण लक्ष्य है : ग्रामीण दूरभाष-घनत्व को उस समय के लगभग उनतालीस के स्तर से बढ़ाकर पाँच वर्षों में सत्तर तक ले जाना, और आगे चलकर सौ तक। कथन 3 भी नीति की घोषित दिशा है : नीति में 'एक राष्ट्र — मुक्त रोमिंग' की बात कही गई, अर्थात् देश के भीतर रोमिंग प्रभार समाप्त करना, और इसी के साथ 'एक राष्ट्र — एक अनुज्ञप्ति' तथा पूर्ण मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी की बातें भी रखी गईं। इस प्रकार तीनों कथन नीति के अंग हैं और उत्तर (d) है। एक बात स्पष्ट रखनी चाहिए : ये नीति के लक्ष्य और घोषित उद्देश्य हैं, और नीति में सन्निविष्ट होना तथा नियत समय पर पूरा हो जाना दो अलग बातें हैं। प्रश्न पूछ रहा है कि नीति में क्या सन्निविष्ट है, इसलिए उत्तर उसी आधार पर निकलेगा। यह भेद इस खंड के अनेक प्रश्नों में काम आता है, क्योंकि नीति-दस्तावेज़ प्रायः महत्त्वाकांक्षी लक्ष्य रखते हैं और परीक्षा उन्हीं लक्ष्यों को उद्धृत करती है।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (a)केवल 1 और 2 — यह विकल्प रोमिंग प्रभारों वाले कथन को छोड़ देता है, संभवतः इस कारण कि वह उपभोक्ता-हित की घोषणा जैसा लगता है और नीति-दस्तावेज़ का अंग नहीं जान पड़ता। वस्तुतः राष्ट्रीय दूरसंचार नीति, 2012 में इसे स्पष्ट रूप से रखा गया था — 'एक राष्ट्र — मुक्त रोमिंग' के रूप में — और यह उसी समूह की घोषणाओं में से एक थी जिसमें 'एक राष्ट्र — एक अनुज्ञप्ति' तथा पूर्ण मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी भी सम्मिलित थीं। इन तीनों का साझा उद्देश्य यह था कि देश एक ही दूरसंचार बाज़ार की तरह काम करे और अभिदाता के लिए परिमंडल की सीमाएँ महत्त्वहीन हो जाएँ। इसलिए इस कथन को केवल इस आधार पर हटाना कि वह घोषणा जैसा लगता है, ठीक नहीं है। ऐसे प्रश्नों में सुरक्षित तरीक़ा यह है कि नीति के मुख्य नारों को याद रखा जाए, क्योंकि परीक्षक प्रायः उन्हीं को कथन बनाकर छापता है।
- (b)केवल 1 और 3 — यह विकल्प ग्रामीण दूरभाष-घनत्व वाले लक्ष्य को छोड़ देता है, जो नीति का सबसे स्पष्ट संख्यात्मक लक्ष्य है। नीति ने ग्रामीण दूरभाष-घनत्व को उस समय के लगभग उनतालीस के स्तर से बढ़ाकर सत्तर तक ले जाने की बात कही थी, और उससे आगे सौ तक। इस कथन को छोड़ देने का एक कारण यह हो सकता है कि अभ्यर्थी संख्याओं को लेकर सशंकित रहता है और सोचता है कि कहीं आँकड़ा बदल तो नहीं दिया गया। यहाँ सावधानी की एक असली बात अवश्य है : दूरभाष-घनत्व प्रति सौ व्यक्तियों पर संयोजनों की संख्या होती है, इसलिए उसे प्रतिशत की तरह लिखना पूरी तरह सटीक नहीं है — पर प्रश्न और नीति दोनों उसी रूप में इन आँकड़ों का उल्लेख करते हैं, और कथन का आशय वही है जो नीति में है। इसलिए यह कथन सही है और इसे छोड़ना उत्तर बिगाड़ देता है।
- (c)केवल 2 और 3 — यह विकल्प ब्रॉडबैंड वाले कथन को छोड़ देता है, जो इस नीति की सबसे प्रसिद्ध घोषणा है — इसलिए यह विकल्प चुनना उस बात को गिरा देना है जिससे यह नीति सबसे अधिक पहचानी जाती है। नीति ने 'माँग पर ब्रॉडबैंड' का लक्ष्य रखा, ब्रॉडबैंड की न्यूनतम डाउनलोड रफ़्तार को दो मेगाबिट्स प्रति सेकंड पर ले जाने की बात कही और माँग पर उससे अधिक रफ़्तार देने की दिशा तय की; इसी के साथ ब्रॉडबैंड संयोजनों की संख्या के लक्ष्य भी रखे गए। संभव है कि अभ्यर्थी को रफ़्तार का आँकड़ा आज के मानकों से कम लगे और वह उसे संदिग्ध मान ले, पर उस समय की तुलना में यह वृद्धि ही थी। नीति-आधारित प्रश्नों में आँकड़े को आज की परिस्थिति से नहीं, नीति के अपने वर्ष से जोड़कर देखना चाहिए।
अवधारणा
भारत की दूरसंचार नीतियों की एक शृंखला है और परीक्षा प्रायः उन्हें आपस में बदलकर पूछती है। 1994 की राष्ट्रीय दूरसंचार नीति ने क्षेत्र को निजी सहभागिता के लिए खोला और सर्वसुलभ सेवा का लक्ष्य रखा; 1999 की नई दूरसंचार नीति ने अनुज्ञप्ति-शुल्क की व्यवस्था को नियत शुल्क से बदलकर राजस्व-भागीदारी पर लाया और क्षेत्र के पुनर्गठन का आधार बनी; और 2012 की राष्ट्रीय दूरसंचार नीति ने ब्रॉडबैंड तथा उपभोक्ता-केंद्रित उपायों पर बल दिया। 2012 की नीति की पहचान चार घोषणाओं से होती है : माँग पर ब्रॉडबैंड और ब्रॉडबैंड की न्यूनतम रफ़्तार का ऊपर उठना; ग्रामीण दूरभाष-घनत्व का संख्यात्मक लक्ष्य; 'एक राष्ट्र' वाली शृंखला, जिसमें एक अनुज्ञप्ति, मुक्त रोमिंग और पूर्ण मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी आती हैं; और दूरसंचार उपकरणों के घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा। इस क्षेत्र का नियामक ढाँचा भी साथ याद रखने योग्य है : भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण, जो 1997 में बना, और विवादों के निपटारे के लिए अलग अधिकरण, जो बाद में जोड़ा गया। नीति और नियामक अलग-अलग चीज़ें हैं — नीति सरकार बनाती है, नियमन प्राधिकरण करता है।
यह नीति-दस्तावेज़ पर आधारित कथन-प्रश्न है और इसका उत्तर 'सभी सही' है, जो इस बनावट में सबसे कम चुना जाने वाला विकल्प होता है। कारण यह है कि तीन कथनों में से कोई एक प्रायः घोषणा जैसा लगता है — यहाँ रोमिंग प्रभार समाप्त करने वाला कथन — और अभ्यर्थी उसे नीति का अंग मानने में हिचकता है। ऐसे प्रश्नों में सबसे कारगर तैयारी नीति के मुख्य नारों और संख्यात्मक लक्ष्यों को याद रखना है, क्योंकि परीक्षक उन्हीं को कथन बनाकर छापता है, प्रायः लगभग उन्हीं शब्दों में। दूसरी उपयोगी आदत यह है कि नीति में सन्निविष्ट होने और वास्तव में लागू हो जाने का भेद बनाए रखा जाए; प्रश्न पहला पूछ रहा है। हिन्दी स्तंभ में तकनीकी शब्द देवनागरी लिप्यन्तरण में हैं — मेगाबिट्स, डाउनलोड, ब्रॉडबैंड, रोमिंग — और 'दूरभाष-घनत्व' के बाद कोष्ठक में टेली-डेन्सिटी दिया गया है। कथन 2 में शब्दों का क्रम अंग्रेज़ी से भिन्न है : हिन्दी में पहले 'अगले पाँच वर्षों में' आता है और फिर आँकड़े, जबकि अंग्रेज़ी में आँकड़े पहले हैं — आशय दोनों में एक ही है।
मुख्य तथ्य
- राष्ट्रीय दूरसंचार नीति, 2012 ने 'माँग पर ब्रॉडबैंड' का लक्ष्य रखा और ब्रॉडबैंड की न्यूनतम डाउनलोड रफ़्तार दो मेगाबिट्स प्रति सेकंड निर्धारित की, तथा माँग पर उससे अधिक रफ़्तार देने की दिशा तय की।
- नीति ने ग्रामीण दूरभाष-घनत्व को उस समय के लगभग उनतालीस के स्तर से बढ़ाकर पाँच वर्षों में सत्तर तक और आगे चलकर सौ तक ले जाने का लक्ष्य रखा।
- नीति में 'एक राष्ट्र — मुक्त रोमिंग' की बात कही गई, अर्थात् देश के भीतर रोमिंग प्रभार समाप्त करना; इसी शृंखला में 'एक राष्ट्र — एक अनुज्ञप्ति' और पूर्ण मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी भी थीं।
- इससे पहले की नीतियाँ 1994 की राष्ट्रीय दूरसंचार नीति और 1999 की नई दूरसंचार नीति थीं; 1999 की नीति ने अनुज्ञप्ति-शुल्क को नियत शुल्क से बदलकर राजस्व-भागीदारी पर लाया।
- दूरभाष-घनत्व प्रति सौ व्यक्तियों पर दूरसंचार संयोजनों की संख्या है, इसलिए वह ठीक-ठीक प्रतिशत नहीं है, यद्यपि प्रश्न और नीति दोनों उसे उसी रूप में लिखते हैं।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- उपभोक्ता-हित की घोषणा को नीति-दस्तावेज़ का अंग न मानना; रोमिंग प्रभार समाप्त करने की बात नीति में स्पष्ट रूप से थी।
- नीति में सन्निविष्ट होने और नियत समय पर लक्ष्य पूरा हो जाने को एक मान लेना; प्रश्न पहला पूछ रहा है।
- आँकड़े को आज की परिस्थिति से तौलना — दो मेगाबिट्स प्रति सेकंड आज कम लगता है, पर उस नीति के समय वह न्यूनतम मानक को ऊपर उठाना था।
- दूरभाष-घनत्व को प्रतिशत मान लेना; वह प्रति सौ व्यक्तियों पर संयोजनों की संख्या है, यद्यपि प्रश्न में वह प्रतिशत चिह्न के साथ छपा है।
नीति-दस्तावेज़ों पर प्रश्न इस परिवार की परीक्षाओं में दो बनावटों में आते हैं। पहली, कथन-सूची, जैसा यह प्रश्न है, जिसमें नीति के दो-तीन लक्ष्य कथन बनाकर रख दिए जाते हैं और पूछा जाता है कि कौन-से उसमें सन्निविष्ट हैं; ऐसे प्रश्न में कथन प्रायः नीति की भाषा से ही उठाए जाते हैं, इसलिए मुख्य नारे और संख्यात्मक लक्ष्य याद रखना सबसे अधिक काम आता है। दूसरी बनावट सीधी है — कोई नीति किस वर्ष आई, उसने किस पिछली नीति का स्थान लिया, उसका कोई एक प्रमुख लक्ष्य क्या था। इसके अतिरिक्त इसी क्षेत्र से संस्थागत प्रश्न भी आते हैं, जैसे नियामक की स्थापना का वर्ष और उसके कार्य। तैयारी की दृष्टि से हर नीति के साथ तीन बातें लिखिए : वर्ष, दो-तीन मुख्य लक्ष्य, और वह विशेष नारा जिससे वह पहचानी जाती है। यही तीन बातें इन दोनों बनावटों के प्रश्नों के लिए पर्याप्त होती हैं।
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- (a) Local, World and Middle
- (b) Long, Wireless and Metropolitan
- (c) Local, Wide and Metropolitan
- (d) Least, Wireless and Maximum
उत्तर(c) Local, Wide and Metropolitan
इसी प्रश्नपत्र का वह प्रश्न, जो लैन, वैन और मैन नामक कंप्यूटर नेटवर्कों पर है — वही तकनीकी खंड, जिसकी नीतिगत ओर यह दूरसंचार-प्रश्न है।
अभ्यास
- practice — not a real PYQ
राष्ट्रीय दूरसंचार नीति, 2012 में ब्रॉडबैंड के लिए न्यूनतम डाउनलोड रफ़्तार कितनी निर्धारित की गई थी ?
- (a)512 किलोबिट्स प्रति सेकंड
- (b)1 मेगाबिट प्रति सेकंड
- (c)2 मेगाबिट्स प्रति सेकंड
- (d)10 मेगाबिट्स प्रति सेकंड
उत्तर(c) 2 मेगाबिट्स प्रति सेकंड — नीति ने यही न्यूनतम डाउनलोड रफ़्तार रखी और माँग पर उससे अधिक रफ़्तार देने की दिशा तय की, जिससे ब्रॉडबैंड की न्यूनतम परिभाषा ऊपर उठ गई।
- practice — not a real PYQ
दूरभाष-घनत्व (टेली-डेन्सिटी) से क्या अभिप्राय है ?
- (a)प्रति सौ व्यक्तियों पर दूरसंचार संयोजनों की संख्या
- (b)प्रति वर्ग किलोमीटर पर दूरसंचार मीनारों की संख्या
- (c)किसी परिमंडल में सेवा प्रदाताओं की संख्या
- (d)प्रति उपभोक्ता औसत मासिक व्यय
उत्तर(a) प्रति सौ व्यक्तियों पर दूरसंचार संयोजनों की संख्या — यही इस पद की मानक परिभाषा है, और इसी कारण उसे ठीक-ठीक प्रतिशत कहना उचित नहीं होता। शेष तीनों विकल्प क्रमशः अवसंरचना के घनत्व, बाज़ार की संरचना और उपभोक्ता-व्यय से जुड़े हैं।