नीचे दर्शाई गई आकृति का परिमाप कितना है ? AJ = 10 cm, JI = 12 cm, AB = x, CD = x + 1, EF = x + 2, GH = x + 3, BC = DE = FG = HI = y
- (a)44 cm
- (b)48 cm
- (c)54 cm
- (d)58 cm
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — A, (a) 44 cm — इस प्रश्न में x और y निकालने की आवश्यकता ही नहीं है, और यही इसकी असली सीख है। आकृति एक सीढ़ीनुमा बंद बहुभुज है जिसके सभी कोण समकोण हैं : A ऊपर-बाएँ कोने पर है, वहाँ से AB दाईं ओर जाता है, BC नीचे उतरता है, फिर CD दाईं ओर, DE नीचे, EF दाईं ओर, FG नीचे, GH दाईं ओर और HI नीचे — इस प्रकार सीढ़ी उतरते हुए I तक पहुँचती है, जो नीचे-दाएँ कोना है; फिर IJ बाईं ओर जाकर नीचे-बाएँ कोने J पर पहुँचता है और JA ऊपर चढ़कर आकृति बंद कर देता है। अब दो सरल तथ्य देखिए। सभी दाईं ओर जाने वाले खंड — AB, CD, EF और GH — मिलकर उतनी ही क्षैतिज दूरी तय करते हैं जितनी नीचे की भुजा JI, अर्थात् 12 cm। इसी प्रकार सभी नीचे उतरने वाले खंड — BC, DE, FG और HI — मिलकर उतनी ही ऊर्ध्वाधर दूरी तय करते हैं जितनी बाईं भुजा AJ, अर्थात् 10 cm। इसलिए परिमाप = (क्षैतिज खंडों का योग) + JI + (ऊर्ध्वाधर खंडों का योग) + AJ = 12 + 12 + 10 + 10 = 44 cm। दूसरे शब्दों में, ऐसी सीढ़ीनुमा आकृति का परिमाप उसे घेरने वाले आयत के परिमाप के बराबर होता है, अर्थात् 2 × (10 + 12) = 44 cm। यदि कोई चाहे तो x और y भी निकाल सकता है : AB + CD + EF + GH = 4x + 6 = 12, इसलिए x = 1·5; और BC + DE + FG + HI = 4y = 10, इसलिए y = 2·5; इन्हें रखने पर परिमाप 4x + 4y + 28 = 6 + 10 + 28 = 44 cm ही आता है। दोनों रास्ते एक ही उत्तर देते हैं, पर पहला रास्ता कुछ सेकंड का है और दूसरा कई पंक्तियों का।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (b)48 cm — यह उत्तर 44 से चार अधिक है, और इस आकृति में ऐसा कोई खंड नहीं है जिसे दुबारा गिन लेने से ठीक चार का अंतर आए — यही इस बात का संकेत है कि यह किसी वैध गणना से नहीं निकल सकता। सीढ़ीनुमा बंद आकृति की एक कठोर सीमा होती है : उसके सारे दाईं ओर जाने वाले खंड मिलकर नीचे की भुजा से अधिक नहीं हो सकते और सारे नीचे उतरने वाले खंड मिलकर बाईं भुजा से अधिक नहीं हो सकते, क्योंकि आकृति को उसी बिंदु पर लौटकर बंद होना है। इसका अर्थ यह हुआ कि परिमाप 2 × (10 + 12) = 44 cm से अधिक हो ही नहीं सकता। इसलिए 44 से बड़ा कोई भी विकल्प — 48, 54 या 58 — केवल तभी निकलता है जब किसी खंड को दो बार गिना गया हो या x तथा y के मान अनुमान से लिए गए हों। यह जाँच परीक्षा में बहुत उपयोगी है, क्योंकि यह चारों में से तीन विकल्प एक ही तर्क से हटा देती है।
- (c)54 cm — यह उत्तर 44 से ठीक दस अधिक है, और दस इस आकृति में बाईं भुजा AJ का माप है — अर्थात् यह वही मान है जो बाईं भुजा को दो बार जोड़ देने पर आता है। ऐसा तब होता है जब अभ्यर्थी ऊर्ध्वाधर योगदान की गिनती में भ्रमित हो जाए : वह BC, DE, FG और HI के योग को 10 मानता है, फिर बाईं भुजा AJ को भी जोड़ता है, और उसके बाद कहीं तीसरी बार 10 और जोड़ बैठता है। यहाँ ठीक गिनती इस प्रकार है — ऊर्ध्वाधर दिशा का कुल योगदान 20 cm है, अर्थात् नीचे उतरने वाले खंडों का योग 10 और ऊपर चढ़ने वाली भुजा AJ के 10; और क्षैतिज दिशा का कुल योगदान 24 cm है, अर्थात् दाईं ओर जाने वाले खंडों का योग 12 और बाईं ओर लौटने वाली भुजा JI के 12। 20 और 24 का योग 44 है। इससे अधिक कुछ भी दुहरी गिनती है।
- (d)58 cm — यह समुच्चय का सबसे बड़ा मान है और सीढ़ीनुमा आकृति के लिए असंभव है, क्योंकि 44 cm उसका ऊपरी बंधन है। इस प्रकार का उत्तर प्रायः वहाँ बनता है जहाँ अभ्यर्थी दिए गए मापों को समीकरण बनाने के बजाय सीधे जोड़ने लगता है — जैसे 10 और 12 के साथ x, x + 1, x + 2, x + 3 तथा चार y को किसी अनुमानित मान पर जोड़ देना। ऐसी गणना में x और y के मान आकृति से नहीं, कल्पना से आते हैं, और उत्तर कुछ भी हो सकता है। यही कारण है कि इस प्रश्न में सबसे पहले यह पहचानना आवश्यक है कि x और y स्वतंत्र नहीं हैं : वे दिए गए दो मापों से बँधे हुए हैं, और इसी बंधन के कारण परिमाप उनके मान जाने बिना ही निकल आता है। परीक्षा में इस प्रकार के प्रश्न का उद्देश्य यही परखना होता है कि अभ्यर्थी अनावश्यक बीजगणित में उलझता है या आकृति की संरचना देखता है।
अवधारणा
समकोणीय अर्थात् सीढ़ीनुमा आकृतियों के परिमाप का एक सामान्य नियम है, और वह इन परीक्षाओं में बार-बार काम आता है : यदि किसी बंद बहुभुज की सभी भुजाएँ या तो क्षैतिज हैं या ऊर्ध्वाधर, तो उसका परिमाप उसे घेरने वाले सबसे छोटे आयत के परिमाप के बराबर होता है — बशर्ते आकृति में कोई भाग भीतर की ओर कटा हुआ न हो, अर्थात् वह केवल सीढ़ी की तरह उतरती-चढ़ती हो। इसका कारण सरल है : बंद आकृति में दाईं ओर चलने वाली कुल दूरी बाईं ओर लौटने वाली कुल दूरी के बराबर होनी ही चाहिए, और इसी प्रकार नीचे उतरने वाली कुल दूरी ऊपर चढ़ने वाली कुल दूरी के बराबर। इसलिए परिमाप = 2 × (कुल चौड़ाई + कुल ऊँचाई)। यहाँ कुल चौड़ाई 12 cm और कुल ऊँचाई 10 cm है, इसलिए परिमाप 44 cm। ध्यान रहे कि यह नियम केवल परिमाप के लिए है, क्षेत्रफल के लिए नहीं — सीढ़ीनुमा आकृति का क्षेत्रफल घेरने वाले आयत से कम होता है और उसे निकालने के लिए वास्तव में x तथा y के मान चाहिए। परीक्षा इसी भेद पर प्रश्न बनाती है : परिमाप पूछे तो नियम लगाइए, क्षेत्रफल पूछे तो चरों के मान निकालिए।
यह प्रश्नपत्र में उन दो प्रश्नों में से एक है जिनके साथ आकृति छपी है — दूसरा एक सारणी वाला प्रश्न है। यहाँ आकृति प्रश्न-वाक्य और माप-सूची के बीच छपी है और वही चित्र हिन्दी पृष्ठ पर दोबारा छापा गया है, अर्थात् हिन्दी पढ़ने वाले अभ्यर्थी को अंग्रेज़ी पृष्ठ पर लौटना नहीं पड़ता। हिन्दी स्तंभ में केवल प्रश्न-वाक्य देवनागरी में है; शीर्ष-अक्षर A से J तक, माप-सूची और चारों विकल्प वहाँ भी रोमन लिपि में ही हैं, क्योंकि वह गणितीय संकेतन है, अनुवाद की चूक नहीं। दो माप चित्र पर भी अंकित हैं — बाईं भुजा के पास 10 और नीचे की भुजा के नीचे 12 — और वही माप-सूची में AJ = 10 cm तथा JI = 12 cm के रूप में दोहराए गए हैं। आकृति में कोई कोण अंकित नहीं है और सभी कोने समकोण के रूप में खींचे गए हैं, जो इस हल-विधि की पूर्व-शर्त है। इसलिए यहाँ चित्र केवल सजावट नहीं है : वह बताता है कि खंड किस दिशा में जाते हैं, और उसी से यह नियम लागू होता है।
मुख्य तथ्य
- सभी भुजाएँ क्षैतिज या ऊर्ध्वाधर होने वाली सीढ़ीनुमा बंद आकृति का परिमाप उसे घेरने वाले आयत के परिमाप के बराबर होता है, बशर्ते कोई भाग भीतर की ओर कटा न हो।
- इस प्रश्न में कुल चौड़ाई 12 cm और कुल ऊँचाई 10 cm है, इसलिए परिमाप 2 × (10 + 12) = 44 cm है और x तथा y निकालने की आवश्यकता नहीं पड़ती।
- यदि चर निकालने ही हों तो AB + CD + EF + GH = 4x + 6 = 12 से x = 1·5 और BC + DE + FG + HI = 4y = 10 से y = 2·5 आता है; इन्हें रखने पर भी परिमाप 44 cm ही मिलता है।
- यह नियम परिमाप के लिए है, क्षेत्रफल के लिए नहीं — सीढ़ीनुमा आकृति का क्षेत्रफल घेरने वाले आयत से कम होता है और उसके लिए चरों के मान आवश्यक हैं।
- बंद आकृति में दाईं ओर चली गई कुल दूरी बाईं ओर लौटी गई कुल दूरी के बराबर होती है और नीचे उतरी गई कुल दूरी ऊपर चढ़ी गई कुल दूरी के बराबर — यही इस नियम का आधार है।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- x और y निकालने में लग जाना, जबकि परिमाप उनके मान जाने बिना ही निकल आता है — यही इस प्रश्न का मुख्य समय-अपव्यय है।
- 44 से बड़े विकल्प चुन लेना; सीढ़ीनुमा बंद आकृति में परिमाप 2 × (10 + 12) से अधिक हो ही नहीं सकता।
- परिमाप के नियम को क्षेत्रफल पर लगा देना; क्षेत्रफल घेरने वाले आयत से कम होता है और उसके लिए चरों के मान चाहिए।
- चित्र को केवल सजावट मानकर छोड़ देना, जबकि खंडों की दिशा और समकोण ही वह सूचना है जिससे यह विधि लागू होती है।
क्षेत्रमिति के प्रश्न इस परिवार की परीक्षाओं में तीन कठिनाई-स्तरों पर आते हैं। पहला स्तर सीधे सूत्र का है — किसी आयत, वृत्त या त्रिभुज का क्षेत्रफल या परिमाप, जहाँ केवल सूत्र याद होना पर्याप्त है। दूसरा स्तर मिश्रित आकृति का है, जहाँ आकृति को परिचित टुकड़ों में बाँटना पड़ता है या, जैसा इस प्रश्न में है, कोई संरचनात्मक नियम पहचानना पड़ता है जो गणना को लगभग शून्य कर देता है। तीसरा स्तर उलटा होता है — क्षेत्रफल या परिमाप देकर भुजा या त्रिज्या पूछना, जैसा इसी प्रश्नपत्र के वृत्तों वाले प्रश्न में है, जहाँ बड़े वृत्त का क्षेत्रफल और परिधियों का अंतर देकर व्यासों का योग पूछा गया है। दूसरे और तीसरे स्तर पर सफलता का एक ही सूत्र है : पहले यह देखिए कि पूछी गई राशि और दी गई राशियों के बीच कोई सीधा संबंध है या नहीं, और उसके बाद ही चर निकालने बैठिए। आकृति वाले प्रश्न में यह अनुशासन और भी अधिक अंक बचाता है, क्योंकि वहाँ चित्र स्वयं संबंध दिखा देता है।
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EPFO_APFC_2016_Q36खोलें व हल करें →There are two circles of radii r1 and r2 (r1 < r2). The area of the bigger circle is 693/2 cm2. The difference of their circumferences is 22 cm. What is the sum of the diameters of the two circles ?
- (a) 17·5 cm
- (b) 22 cm
- (c) 28·5 cm
- (d) 35 cm
उत्तर(d) 35 cm
इसी प्रश्नपत्र का दूसरा क्षेत्रमिति प्रश्न, जिसमें दो वृत्तों का क्षेत्रफल और परिधियों का अंतर देकर व्यासों का योग पूछा गया है — वही अनुशासन, कि पहले दी गई और पूछी गई राशियों का संबंध देखिए।
अभ्यास
- practice — not a real PYQ
किसी सीढ़ीनुमा समकोणीय बंद आकृति की कुल चौड़ाई 15 cm और कुल ऊँचाई 9 cm है तथा उसकी सभी भुजाएँ क्षैतिज या ऊर्ध्वाधर हैं और कोई भाग भीतर की ओर कटा हुआ नहीं है । उसका परिमाप कितना होगा ?
- (a)24 cm
- (b)33 cm
- (c)48 cm
- (d)यह दी गई सूचना से ज्ञात नहीं किया जा सकता
उत्तर(c) 48 cm — ऐसी आकृति का परिमाप उसे घेरने वाले आयत के परिमाप के बराबर होता है, अर्थात् 2 × (15 + 9) = 48 cm, और इसके लिए अलग-अलग सोपानों की लंबाई जानने की आवश्यकता नहीं होती। यही कारण है कि (d) भी ग़लत है।
- practice — not a real PYQ
एक आयत की लंबाई 12 cm और चौड़ाई 10 cm है । यदि उसी आयत के भीतर से एक कोने पर 3 cm × 2 cm का आयताकार टुकड़ा काटकर हटा दिया जाए, तो शेष आकृति का परिमाप कितना होगा ?
- (a)34 cm
- (b)40 cm
- (c)44 cm
- (d)54 cm
उत्तर(c) 44 cm — कोने से आयताकार टुकड़ा हटाने पर आकृति सीढ़ीनुमा हो जाती है, पर कुल चौड़ाई और कुल ऊँचाई नहीं बदलतीं, इसलिए परिमाप 2 × (12 + 10) = 44 cm ही रहता है। क्षेत्रफल अवश्य घट जाता है, और यही इस प्रकार के प्रश्नों में परखा जाने वाला भेद है।