निम्नलिखित में से कौन-सा राजस्व व्यय है ?
- (a)खरीदी गई पुरानी मशीनरी की मरम्मत में किया गया व्यय
- (b)संपत्ति के अधिग्रहण हेतु विधिक शुल्क
- (c)मशीन के बेकार भाग के प्रतिस्थापन पर व्यय की गई धनराशि
- (d)सिनेमा घर चलाने के लिए अनुज्ञप्ति (लाइसेंस) प्राप्त करने हेतु व्यय
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — C, (c) मशीन के बेकार भाग के प्रतिस्थापन पर व्यय की गई धनराशि — यह मरम्मत की प्रकृति का व्यय है, इसलिए राजस्व व्यय है; शेष तीनों पूँजीगत व्यय हैं।
पूँजीगत और राजस्व व्यय का भेद तीन प्रश्नों से तय होता है, और तीनों एक साथ लगाने पर उत्तर लगभग हमेशा निकल आता है।
पहला प्रश्न : क्या इस व्यय से कोई परिसंपत्ति या कोई स्थायी प्रकृति का अधिकार प्राप्त हुआ? यदि हाँ, तो व्यय पूँजीगत है।
दूसरा प्रश्न : क्या इस व्यय से परिसंपत्ति की अर्जन-क्षमता बढ़ी, या केवल पहले जैसी बनी रही? बढ़ी हो तो पूँजीगत, बनी रही हो तो राजस्व।
तीसरा प्रश्न : क्या इसका लाभ इसी लेखा-अवधि में समाप्त हो जाता है, या आगे के वर्षों तक चलता है? इसी अवधि तक हो तो राजस्व।
अब विकल्प (c) पर तीनों लगाइए। मशीन का कोई भाग घिसकर बेकार हो गया और उसकी जगह नया भाग लगा दिया गया। इससे कोई नई परिसंपत्ति नहीं आई — मशीन वही है। उसकी अर्जन-क्षमता बढ़ी नहीं; वह केवल वहीं लौटी जहाँ भाग घिसने से पहले थी। और यह व्यय मशीन को चालू रखने के सामान्य क्रम का है, जो हर वर्ष किसी न किसी रूप में आता है। तीनों कसौटियों पर यह राजस्व व्यय ठहरता है, और उसे उसी वर्ष के लाभ-हानि खाते में डाल दिया जाता है।
यहाँ एक सीमा भी याद रखिए, क्योंकि प्रश्न उसी सीमा के पास बनाए जाते हैं। भाग बदलना और पूरी परिसंपत्ति बदलना एक नहीं है : किसी मशीन का घिसा हुआ पुर्ज़ा बदलना मरम्मत है, पर पूरी मशीन के स्थान पर नई मशीन लगाना पूँजीगत व्यय है। इसी प्रकार यदि पुराने भाग की जगह लगाया गया नया भाग मशीन की क्षमता या उपयोगी जीवन को बढ़ा देता है, तो उतना अंश पूँजीगत हो जाता है। प्रश्न में ऐसी कोई बात नहीं कही गई है — वहाँ केवल बेकार हो चुके भाग का प्रतिस्थापन है।
इसी परीक्षा-परिवार के एक और पेपर में ठीक यही भेद उलटी दिशा से पूछा जा चुका है, और वहाँ की आधिकारिक कुंजी भी घिसे हुए भाग पर किए गए व्यय को पूँजीगत नहीं मानती — यानी इस उत्तर की पुष्टि बाहर से भी हो जाती है।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (a)खरीदी गई पुरानी मशीनरी की मरम्मत में किया गया व्यय — यह पूँजीगत व्यय है, और उसका कारण उस छोटे-से वाक्यांश में है — 'खरीदी गई पुरानी मशीनरी'। जब कोई पुरानी मशीन ख़रीदी जाती है तो वह प्रायः तत्काल उपयोग योग्य नहीं होती; उसे चलाने लायक़ बनाने के लिए जो मरम्मत की जाती है वह उसे कारबार में लगाने की तैयारी का भाग है, इसलिए वह मशीन की लागत में जोड़ी जाती है, लाभ-हानि खाते में नहीं जाती। लेखांकन का सामान्य नियम यही है कि परिसंपत्ति को उसके इच्छित उपयोग के लिए तैयार करने तक की सारी लागतें उसी परिसंपत्ति की लागत बनती हैं — ढुलाई, बीमा, स्थापना, परीक्षण, और पहली बार की यह मरम्मत भी। यही मरम्मत यदि मशीन के उपयोग में आ जाने के बाद की जाती, तो वह राजस्व व्यय होती। समय ही यहाँ निर्णायक है, काम का नाम नहीं, और इसी परीक्षा-परिवार के एक पेपर में यही मद पूँजीगत व्यय के उदाहरण के रूप में दी जा चुकी है।
- (b)संपत्ति के अधिग्रहण हेतु विधिक शुल्क — संपत्ति के अधिग्रहण के लिए दिया गया विधिक शुल्क भी पूँजीगत व्यय है, क्योंकि वह संपत्ति प्राप्त करने की प्रक्रिया का ही एक अंग है। लेखांकन में किसी परिसंपत्ति की लागत केवल उसका क्रय-मूल्य नहीं होती; उसमें वे सारे व्यय जुड़ते हैं जो उसे प्राप्त करने और उपयोग योग्य बनाने में लगे — विलेख का शुल्क, पंजीकरण व्यय, दलाली, और अधिवक्ता को दिया गया शुल्क। ये सब भवन या भूमि के खाते में जाते हैं, अलग से व्यय के रूप में नहीं दिखाए जाते। भेद यह है कि विधिक शुल्क सदा पूँजीगत नहीं होता : यदि वह पहले से स्वामित्व में चली आ रही संपत्ति के किसी सामान्य विवाद या नवीकरण से जुड़ा हो तो वह राजस्व व्यय होगा। यहाँ शुल्क अधिग्रहण के लिए दिया गया है, इसलिए वह लागत का भाग है।
- (d)सिनेमा घर चलाने के लिए अनुज्ञप्ति (लाइसेंस) प्राप्त करने हेतु व्यय — सिनेमा घर चलाने के लिए अनुज्ञप्ति प्राप्त करने का व्यय भी पूँजीगत है, यद्यपि उसमें कोई मूर्त वस्तु नहीं ख़रीदी जाती। पूँजीगत व्यय के लिए मूर्त परिसंपत्ति आवश्यक नहीं है; स्थायी प्रकृति का कोई अधिकार या सुविधा प्राप्त हो जाना पर्याप्त है। अनुज्ञप्ति के बिना सिनेमा घर चलाया ही नहीं जा सकता, इसलिए वह व्यय कारबार करने का अधिकार ख़रीदने के समान है और उसका लाभ एक लेखा-अवधि में समाप्त नहीं होता। इसे अमूर्त परिसंपत्ति के रूप में दिखाया जाता है और उसकी अवधि में बाँटा जाता है। यहाँ भी एक भेद है : अनुज्ञप्ति पहली बार प्राप्त करने का व्यय पूँजीगत है, जबकि प्रति वर्ष उसका नवीकरण कराने का शुल्क सामान्यतः राजस्व व्यय माना जाता है, क्योंकि वह उसी वर्ष के कारबार से जुड़ा है।
अवधारणा
पूँजीगत और राजस्व का भेद लेखांकन के उन थोड़े-से भेदों में है जिनका प्रभाव एक साथ दोनों विवरणों पर पड़ता है, और इसीलिए वह इतना महत्वपूर्ण है।
यदि कोई व्यय पूँजीगत है तो वह चिट्ठे में परिसंपत्ति के रूप में दिखेगा और उसका भार आगे के वर्षों में मूल्यह्रास या परिशोधन के रूप में बँटेगा। यदि वह राजस्व है तो वह उसी वर्ष के लाभ-हानि खाते में पूरा का पूरा चला जाएगा। इसलिए एक ही राशि को ग़लत ढेरी में डाल देने से इस वर्ष का लाभ भी ग़लत हो जाता है और चिट्ठे की स्थिति भी।
भेद करने की कसौटियाँ तीन हैं : परिसंपत्ति या स्थायी अधिकार का अर्जन; अर्जन-क्षमता में वृद्धि; और लाभ का एक से अधिक अवधि तक चलना। इन्हीं से कुछ व्यावहारिक नियम निकलते हैं — परिसंपत्ति को उपयोग योग्य बनाने तक की सारी लागतें पूँजीगत हैं; परिसंपत्ति के उपयोग में आ जाने के बाद उसे चालू रखने के व्यय राजस्व हैं; क्षमता बढ़ाने वाला सुधार पूँजीगत है और पुरानी क्षमता लौटाने वाली मरम्मत राजस्व।
एक तीसरी कोटि भी है — आस्थगित राजस्व व्यय — जिसमें व्यय प्रकृति से राजस्व है पर उसका लाभ कई वर्षों तक मिलने की आशा होती है, इसलिए उसे कई वर्षों में बाँटा जाता है। परंपरागत पाठ्य-पुस्तकों में इसके उदाहरण बड़े विज्ञापन अभियान या भारी प्रारंभिक व्यय दिए जाते हैं।
इसी भेद से जुड़ी एक और बात परीक्षा में साथ ही पूछी जाती है : यदि पूँजीगत व्यय को राजस्व मान लिया जाए, या राजस्व को पूँजीगत, तो वह सैद्धांतिक त्रुटि कहलाती है, और उसकी विशेषता यह है कि उससे तलपट का संतुलन नहीं बिगड़ता।
यह भेद लेखांकन में इसलिए बना कि लाभ एक अवधि की संख्या है, जबकि कारबार की अनेक ख़रीदें कई अवधियों तक काम आती हैं। यदि मशीन का पूरा मूल्य उसी वर्ष व्यय मान लिया जाए जिसमें वह ख़रीदी गई, तो उस वर्ष का लाभ अनावश्यक रूप से घट जाएगा और आगे के उन वर्षों का बढ़ा हुआ दिखेगा जिनमें वह मशीन बिना किसी लागत के काम करती रहेगी। इसी विकृति को रोकने के लिए पूँजीगत व्यय चिट्ठे में रखा जाता है और मूल्यह्रास के रूप में धीरे-धीरे लाभ-हानि खाते में उतारा जाता है।
यही कारण है कि यह भेद चालू संस्था की मान्यता पर टिका हुआ है। यदि यह मान्यता न हो कि उद्यम आगे भी चलता रहेगा, तो किसी व्यय को आगे के वर्षों में बाँटने का कोई अर्थ ही नहीं रह जाता।
व्यवहार में यह भेद कर-निर्धारण और नियमन में भी काम आता है, इसलिए उस पर मुक़दमे भी बहुत हुए हैं। न्यायालयों ने बार-बार यही कसौटी दोहराई है कि यदि व्यय से स्थायी प्रकृति का लाभ मिलता है तो वह पूँजीगत है, और यदि वह केवल कारबार चलाते रहने के क्रम में हुआ है तो राजस्व। मरम्मत, प्रतिस्थापन और सुधार की सीमा-रेखा इसी कसौटी से खींची जाती है।
परीक्षा के लिए इसका व्यावहारिक निष्कर्ष यह है कि विकल्प में दिए गए काम का नाम नहीं, उसकी परिस्थिति देखिए। 'मरम्मत' शब्द अपने आप कुछ तय नहीं करता — उपयोग में आने से पहले की मरम्मत पूँजीगत है और बाद की राजस्व।
मुख्य तथ्य
- घिसे या बेकार हो चुके भाग का प्रतिस्थापन राजस्व व्यय है, क्योंकि उससे परिसंपत्ति की अर्जन-क्षमता बढ़ती नहीं, केवल पहले जैसी बनी रहती है।
- परिसंपत्ति को उसके इच्छित उपयोग के लिए तैयार करने तक की सारी लागतें पूँजीगत होती हैं — ढुलाई, बीमा, स्थापना, परीक्षण, और ख़रीदी गई पुरानी मशीन की पहली मरम्मत भी।
- संपत्ति के अधिग्रहण के लिए दिया गया विधिक शुल्क, पंजीकरण व्यय और दलाली उसी संपत्ति की लागत में जुड़ते हैं, अलग से व्यय के रूप में नहीं दिखाए जाते।
- पूँजीगत व्यय के लिए मूर्त वस्तु का ख़रीदा जाना आवश्यक नहीं; स्थायी प्रकृति का अधिकार, जैसे कारबार चलाने की अनुज्ञप्ति, प्राप्त कर लेना भी पर्याप्त है।
- अनुज्ञप्ति पहली बार प्राप्त करने का व्यय पूँजीगत है, जबकि उसका वार्षिक नवीकरण शुल्क सामान्यतः राजस्व व्यय माना जाता है।
- पूँजीगत को राजस्व मान लेना, या राजस्व को पूँजीगत, सैद्धांतिक त्रुटि कहलाती है और उससे तलपट का संतुलन नहीं बिगड़ता।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- 'मरम्मत' शब्द अपने आप कुछ तय नहीं करता। उपयोग में आने से पहले की मरम्मत पूँजीगत है और उपयोग में आ जाने के बाद की राजस्व।
- भाग बदलना और पूरी परिसंपत्ति बदलना अलग बातें हैं। पुर्ज़ा बदलना मरम्मत है, पूरी मशीन बदलना पूँजीगत व्यय।
- अमूर्त होने से व्यय राजस्व नहीं हो जाता। अनुज्ञप्ति, पेटेंट और अधिकार भी पूँजीगत व्यय के उदाहरण हैं।
- विधिक शुल्क का उत्तर उसके प्रयोजन पर टिका है। अधिग्रहण के लिए दिया गया शुल्क पूँजीगत है, चली आ रही संपत्ति के सामान्य विवाद का शुल्क राजस्व।
इस भेद पर प्रश्न तीन साँचों में आते हैं। पहला वही है जो यहाँ है — चार मदें देकर पूछना कि कौन-सी राजस्व व्यय है, या उसका उलटा, कि कौन-सी पूँजीगत नहीं है; इसी परीक्षा-परिवार में उलटा रूप पूछा जा चुका है, इसलिए दोनों दिशाओं का अभ्यास कीजिए। हल का तरीक़ा सदा एक ही है : हर मद पर तीन प्रश्न लगाइए — परिसंपत्ति या अधिकार मिला या नहीं, क्षमता बढ़ी या केवल लौटी, और लाभ इसी वर्ष तक है या आगे भी। दूसरा साँचा त्रुटि का है — 'अस्थायी छप्पर को पक्के भवन में बदलने का व्यय मरम्मत खाते में लिखा गया, यह कौन-सी त्रुटि है' — जहाँ यही भेद पीछे से आता है और उत्तर सैद्धांतिक त्रुटि होता है। तीसरा साँचा प्रभाव का है : किसी व्यय को ग़लत ढेरी में डालने से इस वर्ष का लाभ और चिट्ठा किस दिशा में ग़लत हो जाएगा। तीनों की तैयारी के लिए एक तालिका बना लीजिए जिसमें एक ओर परिचित मदें हों और दूसरी ओर उनकी कोटि, और हर पंक्ति के आगे वह शर्त लिखिए जो उत्तर बदल सकती है।
संबंधित PYQ
EPFO_APFC_2023_Q81Which of the following is not a capital expenditure?
- (a) ₹ 5,000 spent to remove a worn-out part. This part needs to be replaced with a new engine
- (b) Expenses on foreign tour for purchasing a new machine
- (c) Freight and insurance of the machinery purchased
- (d) Amount spent on repairing a secondhand machine before put to use
उत्तर(a) ₹ 5,000 spent to remove a worn-out part. This part needs to be replaced with a new engine
ठीक यही भेद उलटी दिशा से पूछता है — कौन-सी मद पूँजीगत व्यय नहीं है — और उसके विकल्पों में घिसे हुए भाग वाला व्यय तथा उपयोग में लाने से पहले पुरानी मशीन की मरम्मत, दोनों हैं; उसकी आधिकारिक कुंजी यहाँ के उत्तर की स्वतंत्र पुष्टि है।
EPFO_APFC_2023_Q43Which of the following errors is not detected by Trial Balance?
- (a) A credit purchase of ₹1,000 from Mr. Singh is credited wrongly to the account of Mr. Akash
- (b) A credit purchase of ₹20,000 from Mr. Sandhu is recorded in the day book as ₹2,000
- (c) Conversion of a temporary shed into a permanent building is recorded as repairs and maintenance expense
- (d) Error in posting from the book of subsidiary record to the ledger
उत्तर(d) Error in posting from the book of subsidiary record to the ledger
कौन-सी त्रुटि तलपट से नहीं पकड़ी जाती, यह पूछता है, और उसके विकल्पों में अस्थायी छप्पर को पक्के भवन में बदलने का व्यय मरम्मत खाते में लिखने वाला उदाहरण है — यानी इसी भेद की चूक से बनी त्रुटि।
EPFO_APFC_2023_Q77In a business firm, assets of the business are valued on the basis of their intrinsic value rather than realizable value. This accounting is based on
- (a) money measurement concept
- (b) matching concept
- (c) going concern assumption
- (d) consistency principle
उत्तर(c) going concern assumption
परिसंपत्तियों को वसूली-योग्य मूल्य के बजाय आंतरिक मूल्य पर आँकने की रीति किस पर आधारित है, यह पूछता है — वही चालू संस्था की मान्यता, जिसके बिना किसी व्यय को पूँजीगत मानकर वर्षों में बाँटने का कोई अर्थ नहीं रहता।
अभ्यास
- practice — not a real PYQ
लेखांकन में किसी परिसंपत्ति को उसके इच्छित उपयोग के लिए तैयार करने तक किए गए व्यय, जैसे ढुलाई, स्थापना और प्रारंभिक मरम्मत, किस कोटि में आते हैं ?
- (a)राजस्व व्यय
- (b)पूँजीगत व्यय
- (c)आस्थगित राजस्व व्यय
- (d)पूँजीगत प्राप्ति
उत्तर(b) पूँजीगत व्यय
- practice — not a real PYQ
किसी पूँजीगत व्यय को भूल से राजस्व व्यय के रूप में लेखे में लिख देने पर वह किस प्रकार की त्रुटि कहलाती है ?
- (a)सैद्धान्तिक त्रुटि
- (b)प्रतिकारी त्रुटि
- (c)लेखन की चूक
- (d)तलपट की त्रुटि
उत्तर(a) सैद्धान्तिक त्रुटि