केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 2024 – 2027 की अवधि के लिए किस क्षेत्रीय समूह के साथ मुद्रा विनिमय (स्वैप) व्यवस्था की नई रूपरेखा का अनुमोदन किया है ?
- (a)दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संघ (सार्क)
- (b)अफ़्रीकी संघ (एयू)
- (c)दक्षिण पूर्व एशियाई राष्ट्र संघ (आसियान)
- (d)यूरोपीय संघ (ईयू)
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — A, (a) दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संघ (सार्क) — 2024 से 2027 की अवधि के लिए मुद्रा विनिमय व्यवस्था की जो नई रूपरेखा बनी, वह इसी क्षेत्रीय समूह के देशों के लिए है।
यह रूपरेखा जून 2024 में भारतीय रिज़र्व बैंक ने भारत सरकार की सहमति से लागू की। प्रश्न में अनुमोदन का श्रेय केंद्रीय मंत्रिमंडल को दिया गया है; जिस समूह और जिस अवधि पर प्रश्न टिका है, उन पर इस अंतर से कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता, पर तथ्य यही है कि यह व्यवस्था केंद्रीय बैंक के मार्ग से आई।
नई रूपरेखा में एक बड़ा बदलाव यह है कि रुपये के लिए एक अलग खिड़की बनाई गई, जिसका कोष 250 अरब रुपये है और जिसमें रुपये में सहायता लेने पर कुछ रियायतें दी जाती हैं। इसके साथ-साथ अमेरिकी डॉलर और यूरो वाली पुरानी खिड़की भी चलती रहती है, जिसका कुल कोष दो अरब अमेरिकी डॉलर है। रुपये वाली खिड़की का उद्देश्य क्षेत्र में रुपये के उपयोग को बढ़ावा देना है।
इस व्यवस्था का काम करने का ढंग यह है कि रिज़र्व बैंक इस रूपरेखा के अंतर्गत सार्क के अलग-अलग केंद्रीय बैंकों के साथ द्विपक्षीय विनिमय समझौते करता है। मुद्रा विनिमय का अर्थ है दो केंद्रीय बैंकों के बीच एक निश्चित अवधि के लिए मुद्राओं की अदला-बदली, जिसमें बाद में उसी दर पर वापसी होती है। इसका उपयोग अल्पकालिक विदेशी मुद्रा की कमी या भुगतान संतुलन के दबाव से निपटने के लिए किया जाता है — यानी यह एक सहारा है, कोई दीर्घकालिक ऋण नहीं।
इसकी पृष्ठभूमि पुरानी है : सार्क मुद्रा विनिमय सुविधा 15 नवंबर 2012 से चल रही है, और यह रूपरेखा उसी का संशोधित रूप है। सार्क के आठ सदस्य हैं — अफ़ग़ानिस्तान, बांग्लादेश, भूटान, भारत, मालदीव, नेपाल, पाकिस्तान और श्रीलंका।
विकल्पों में से उत्तर छाँटने का सबसे सीधा तर्क यह है कि भारत जिस क्षेत्रीय समूह का सदस्य है और जिसमें वह सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था होने के कारण सहारा देने की स्थिति में है, वह सार्क ही है।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (b)अफ़्रीकी संघ (एयू) — अफ़्रीकी संघ अफ़्रीका महाद्वीप के देशों का संगठन है, जिसका मुख्यालय अदीस अबाबा में है और जो 2002 में अफ़्रीकी एकता संगठन के स्थान पर बना। भारत उसका सदस्य नहीं है, और उसके साथ इस प्रकार की कोई मुद्रा विनिमय रूपरेखा नहीं है। भारत और अफ़्रीका के बीच सहयोग दूसरे रास्तों से चलता है — विकास साझेदारी, ऋण-सुविधाएँ, क्षमता-निर्माण और व्यापार — पर वह केंद्रीय बैंकों के बीच की उस व्यवस्था से भिन्न है जिसकी बात यह प्रश्न कर रहा है। इस विकल्प का आकर्षण केवल यह है कि अफ़्रीकी संघ हाल के वर्षों में अंतरराष्ट्रीय चर्चा में रहा है। पर विनिमय व्यवस्था वहीं बनती है जहाँ पड़ोस, व्यापार और भुगतान का नियमित सिलसिला हो, और अफ़्रीकी संघ के साथ वैसा क्षेत्रीय ढाँचा नहीं है।
- (c)दक्षिण पूर्व एशियाई राष्ट्र संघ (आसियान) — दक्षिण पूर्व एशियाई राष्ट्र संघ की स्थापना 1967 में बैंकाक घोषणा से हुई और उसके सदस्य दक्षिण-पूर्व एशिया के देश हैं। भारत उसका सदस्य नहीं, संवाद-भागीदार है, और दोनों के बीच शिखर बैठकें तथा एक मुक्त व्यापार समझौता है। यह विकल्प इसीलिए आकर्षक है कि भारत की एक्ट ईस्ट नीति के कारण यह नाम बार-बार समाचारों में आता है और वह भारत का पड़ोसी क्षेत्र भी है। पर यहाँ जिस रूपरेखा की बात है वह उस समूह के लिए बनी है जिसका भारत सदस्य है और जिसमें वह सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है — यही दोनों शर्तें एक साथ केवल एक समूह पर लागू होती हैं। ध्यान दीजिए कि इस विकल्प का आरंभ और अंत सही उत्तर से बहुत मिलता-जुलता है, इसलिए बीच के शब्द ध्यान से पढ़िए।
- (d)यूरोपीय संघ (ईयू) — यूरोपीय संघ यूरोप के देशों का आर्थिक और राजनीतिक संघ है, जिसका अपना केंद्रीय बैंक और अपनी साझा मुद्रा है। भारत उसका सदस्य नहीं और उसके साथ ऐसी कोई क्षेत्रीय विनिमय रूपरेखा नहीं। भारत और यूरोपीय संघ के बीच संबंध व्यापार, निवेश और प्रौद्योगिकी के मंचों से चलते हैं। यह विकल्प इस प्रश्न में सबसे दूर खड़ा है और उसका काम मुख्यतः विकल्प-सूची पूरी करना है। यहाँ एक सामान्य कसौटी काम आती है : मुद्रा विनिमय की व्यवस्थाएँ प्रायः वहाँ बनती हैं जहाँ एक देश दूसरे को अल्पकालिक सहारा दे सके, और उसके लिए आर्थिक आकार में अंतर तथा भौगोलिक निकटता दोनों चाहिए। यूरोपीय संघ के संदर्भ में भारत की वह भूमिका नहीं बनती।
अवधारणा
मुद्रा विनिमय व्यवस्था दो केंद्रीय बैंकों के बीच का वह समझौता है जिसमें एक निश्चित अवधि के लिए मुद्राओं की अदला-बदली होती है और अवधि पूरी होने पर पहले से तय दर पर वापसी। इसका उपयोग तब होता है जब किसी देश के पास अल्पकाल के लिए विदेशी मुद्रा की कमी हो जाए या भुगतान संतुलन पर दबाव आ जाए।
यह ऋण से भिन्न है। ऋण में एक पक्ष धन देता है और ब्याज सहित वापसी होती है; विनिमय में दोनों पक्ष एक-दूसरे को अपनी मुद्रा देते हैं, इसलिए यह पारस्परिक व्यवस्था है और सामान्यतः अल्पकालिक। यही कारण है कि इसे सहारा या पिछला दरवाज़ा कहा जाता है, विकास-वित्त नहीं।
सार्क के संदर्भ में यह सुविधा 15 नवंबर 2012 से चल रही है। भारत क्षेत्र की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और उसके पास सबसे बड़ा विदेशी मुद्रा भंडार, इसलिए इस व्यवस्था में सहारा देने की भूमिका उसी की बनती है। रिज़र्व बैंक इस रूपरेखा के अंतर्गत अलग-अलग सदस्य देशों के केंद्रीय बैंकों के साथ द्विपक्षीय समझौते करता है, यानी रूपरेखा एक है और समझौते कई।
2024 से 2027 की अवधि वाली नई रूपरेखा में सबसे बड़ा बदलाव रुपये के लिए एक अलग खिड़की का बनना है, जिसका कोष 250 अरब रुपये है और जिसमें रुपये में सहायता लेने पर रियायतें मिलती हैं। डॉलर और यूरो वाली खिड़की भी चलती है, जिसका कुल कोष दो अरब अमेरिकी डॉलर है। रुपये वाली खिड़की का उद्देश्य क्षेत्र में रुपये के उपयोग को बढ़ावा देना है, जो भारत की व्यापक नीति का एक अंग है।
सार्क स्वयं 1985 में ढाका में हुए पहले शिखर सम्मेलन से बना और आज उसके आठ सदस्य हैं — अफ़ग़ानिस्तान, बांग्लादेश, भूटान, भारत, मालदीव, नेपाल, पाकिस्तान और श्रीलंका।
यह इस पेपर का अंतिम प्रश्न है और उसकी बनावट समसामयिकी के उस साँचे की है जिसमें एक हाल की व्यवस्था लेकर उसका क्षेत्रीय समूह पूछा जाता है। ऐसे प्रश्न में तर्क से बहुत दूर तक पहुँचा जा सकता है : जिस समूह के लिए भारत सहारा देने की व्यवस्था बनाएगा, वह वही होगा जिसका वह सदस्य है और जिसमें वह सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। चार में से यह कसौटी केवल एक विकल्प पर बैठती है।
छपाई की एक बात यहाँ विशेष है : हर विकल्प का संक्षेप भी देवनागरी में ही छपा है, रोमन अक्षरों में नहीं। इसलिए अभ्यर्थी को संक्षेपों के देवनागरी रूप पहचानने आने चाहिए, केवल अंग्रेज़ी रूप से काम नहीं चलेगा। पारिभाषिक शब्द के आगे कोष्ठक में उसका प्रचलित रूप भी देवनागरी में ही दिया गया है।
दो विकल्प देखने में एक जैसे हैं — दोनों एक ही शब्द से आरंभ होते हैं और कोष्ठक से पहले एक ही शब्द पर समाप्त, अंतर केवल बीच में है। ऐसे जोड़े जानबूझकर रखे जाते हैं, और उन्हें पूरा पढ़े बिना चुनना जोखिम भरा है। वर्षों का जोड़ा भी पूरा छपा है, संक्षिप्त रूप में नहीं, इसलिए अवधि पढ़ने में कोई अस्पष्टता नहीं रहती।
मुख्य तथ्य
- 2024 से 2027 की अवधि वाली मुद्रा विनिमय रूपरेखा दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संघ के देशों के लिए है, और उसे जून 2024 में भारतीय रिज़र्व बैंक ने भारत सरकार की सहमति से लागू किया।
- नई रूपरेखा में रुपये के लिए एक अलग खिड़की बनाई गई, जिसका कोष 250 अरब रुपये है और जिसमें रुपये में सहायता लेने पर रियायतें मिलती हैं; डॉलर और यूरो वाली खिड़की भी चलती रहती है, जिसका कुल कोष दो अरब अमेरिकी डॉलर है।
- रिज़र्व बैंक इस रूपरेखा के अंतर्गत सदस्य देशों के केंद्रीय बैंकों के साथ अलग-अलग द्विपक्षीय विनिमय समझौते करता है — रूपरेखा एक है और उसके अधीन समझौते कई।
- मुद्रा विनिमय का उपयोग अल्पकालिक विदेशी मुद्रा की कमी या भुगतान संतुलन के दबाव से निपटने के लिए होता है; यह पारस्परिक और अल्पकालिक व्यवस्था है, कोई दीर्घकालिक ऋण नहीं।
- सार्क मुद्रा विनिमय सुविधा 15 नवंबर 2012 से चल रही है; सार्क की स्थापना 1985 में ढाका के पहले शिखर सम्मेलन से हुई और उसके आठ सदस्य हैं — अफ़ग़ानिस्तान, बांग्लादेश, भूटान, भारत, मालदीव, नेपाल, पाकिस्तान और श्रीलंका।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- आसियान और सार्क को गड़बड़ा देना; भारत सार्क का सदस्य है जबकि आसियान का केवल संवाद-भागीदार, और यही भेद इस प्रश्न को तय करता है।
- मुद्रा विनिमय को ऋण मान लेना; इसमें दोनों केंद्रीय बैंक एक-दूसरे को अपनी मुद्रा देते हैं और अवधि पूरी होने पर पहले से तय दर पर वापसी होती है।
- रुपये वाली खिड़की और डॉलर-यूरो वाली खिड़की को एक मान लेना; दोनों साथ-साथ चलती हैं और उनके कोष अलग-अलग हैं।
क्षेत्रीय समूहों और वित्तीय व्यवस्थाओं पर प्रश्न इस परीक्षा में तीन रूपों में आते हैं।
पहला रूप यही है — कोई व्यवस्था या समझौता बताकर उससे जुड़ा समूह पूछना। ऐसे प्रश्न में सदस्यता से चलिए : भारत किस समूह का सदस्य है और किसमें केवल भागीदार, यह अकसर आधे विकल्प काट देता है।
दूसरा रूप संगठन के तथ्यों का है : स्थापना का वर्ष, मुख्यालय, सदस्य संख्या। इसी परिवार के एक पहले के पेपर में जी-20 पर ऐसा ही प्रश्न आ चुका है, जिसमें एक कथन सदस्यों की गिनती बदलकर ग़लत बनाया गया था। इसलिए हर समूह के साथ ये चार बातें जोड़कर रखिए।
तीसरा रूप आर्थिक तंत्र का है : रिज़र्व बैंक की भूमिका, विदेशी मुद्रा भंडार, मुद्रास्फीति का लक्ष्य। एक पहले के पेपर में यह पूछा जा चुका है कि भारत में मुद्रास्फीति का लक्ष्य कौन तय करता है और किससे परामर्श कर के, और एक अन्य में विदेशी निवेश तथा विदेशी मुद्रा के प्रवाह पर कथन दिए गए थे। इसलिए इस विषय को केवल कूटनीति की ओर से नहीं, अर्थव्यवस्था की ओर से भी पढ़िए।
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- (c) Statement I is correct but statement II is incorrect
- (d) Statement I is incorrect but statement II is correct
उत्तर(c) Statement I is correct but statement II is incorrect
भारत में मुद्रास्फीति का लक्ष्य कौन तय करता है और किससे परामर्श कर के — रिज़र्व बैंक और सरकार के बीच की भूमिका-विभाजन पर वही परख, जो इस रूपरेखा के मार्ग को समझने में काम आती है।
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उत्तर(a) Both Statement (I) and Statement (II) are individually true and Statement (II) is the correct explanation of Statement (I)
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उत्तर(a) दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संघ — भारत उसका संस्थापक सदस्य है; दक्षिण पूर्व एशियाई राष्ट्र संघ के साथ उसका संबंध संवाद-भागीदार का है, और शेष दो संगठनों में उसकी सदस्यता नहीं।