‘नियोक्ता और कर्मचारियों के पंजीकरण को प्रोत्साहन देने की योजना (SPREE) 2025’ से संबंधित निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं ? 1. एसपीआरईई (SPREE), कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ईएसआईसी) द्वारा अनुमोदित है । 2. एसपीआरईई (SPREE), अपंजीकृत नियोक्ताओं और कर्मचारियों को जिनमें संविदात्मक व अस्थायी कर्मचारी भी सम्मिलित हैं, पंजीकृत होने हेतु एकमात्र (वन-टाइम) अवसर प्रदान करती है । नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर उत्तर चुनिए :
- (a)केवल 1
- (b)केवल 2
- (c)1 और 2 दोनों
- (d)न तो 1 और न ही 2
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — C, (c) 1 और 2 दोनों — दोनों कथन सही हैं। यह योजना कर्मचारी राज्य बीमा निगम की है, और वह अपंजीकृत नियोक्ताओं तथा कर्मचारियों को पंजीकरण का एक बार का अवसर देती है, जिसमें संविदात्मक और अस्थायी कर्मचारी भी सम्मिलित हैं।
कथन 1 अनुमोदन करने वाली संस्था के बारे में है। यह योजना कर्मचारी राज्य बीमा निगम ने अनुमोदित की है — वही निगम जो कर्मचारी राज्य बीमा अधिनियम, 1948 की धारा 3 के अंतर्गत निगमित निकाय के रूप में स्थापित है और जिसकी अध्यक्षता केंद्रीय श्रम एवं रोज़गार मंत्री करते हैं। यहाँ सबसे आम भूल यही होती है कि श्रम-क्षेत्र की कोई भी योजना देखकर उसे भविष्य निधि संगठन से जोड़ दिया जाए; इस योजना का संबंध राज्य बीमा से है, भविष्य निधि से नहीं।
कथन 2 योजना की विषय-वस्तु के बारे में है। इसका उद्देश्य उन नियोक्ताओं और कर्मचारियों को व्यवस्था के भीतर लाना है जो अब तक पंजीकृत नहीं हुए, और इसमें संविदात्मक तथा अस्थायी कर्मचारी भी शामिल हैं — यही वह वर्ग है जो सामाजिक सुरक्षा से सबसे अधिक बाहर रह जाता है। योजना 1 जुलाई 2025 से 31 दिसंबर 2025 तक चलने के लिए बनी थी और बाद में उसे एक माह और बढ़ाकर 31 जनवरी 2026 तक कर दिया गया।
इस अवसर को आकर्षक बनाने वाली शर्त यह है कि पंजीकरण कराने वाली इकाइयों और कर्मचारियों के पुराने अभिलेखों की जाँच नहीं की जाएगी और न ही पिछली अवधि के अंशदान की माँग की जाएगी। यही वह छूट है जो 'एक बार का अवसर' शब्दों को अर्थ देती है : जो पीछे रह गए, वे बिना पुरानी देनदारी के भय के आगे आ सकें। पंजीकरण निगम के अपने पोर्टल के साथ-साथ श्रम सुविधा और कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय के पोर्टलों से भी किया जा सकता है।
दोनों कथन इस प्रकार एक ही योजना के दो पक्ष कहते हैं — कौन लाया और किसके लिए — और दोनों में कोई तथ्य बदला नहीं गया, इसलिए उत्तर दोनों को स्वीकार करने वाला है।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (a)केवल 1 — यह विकल्प केवल पहले कथन को सही मानता है, यानी वह अनुमोदन करने वाली संस्था तो ठीक मान लेता है पर योजना की विषय-वस्तु को ग़लत ठहराता है। ऐसा करने के लिए कथन 2 में कोई भूल होनी चाहिए, और वह है नहीं। कथन 2 दो बातें कहता है : यह एक बार का अवसर है, और उसमें संविदात्मक तथा अस्थायी कर्मचारी भी सम्मिलित हैं। दोनों बातें योजना के अपने विवरण में हैं। संभव है कि अभ्यर्थी 'एकमात्र' शब्द पर अटके और सोचे कि पंजीकरण तो हमेशा खुला रहता है — पर यहाँ बात सामान्य पंजीकरण की नहीं, उस विशेष छूट-सहित अवसर की है जिसमें पुराने अभिलेखों की जाँच और पिछले अंशदान की माँग नहीं होती। वह छूट सीमित अवधि के लिए ही दी गई थी।
- (b)केवल 2 — यह विकल्प केवल दूसरे कथन को सही मानता है, यानी वह योजना की विषय-वस्तु तो ठीक मान लेता है पर उसे अनुमोदित करने वाली संस्था बदल देना चाहता है। यही इस प्रश्न की सबसे संभावित भूल है, क्योंकि श्रम-क्षेत्र में दो बड़े संगठन हैं और उनके काम बाहर से मिलते-जुलते लगते हैं। भेद यह है : कर्मचारी राज्य बीमा निगम चिकित्सा, बीमारी, प्रसूति, नियोजन-क्षति और आश्रितों से जुड़ी प्रसुविधाएँ देता है, जबकि भविष्य निधि संगठन भविष्य निधि, पेंशन और निक्षेप-संबद्ध बीमा से जुड़ा है। यह योजना पंजीकरण के उस दायरे को बढ़ाने के लिए है जिसकी ज़िम्मेदारी बीमा निगम की है, इसलिए अनुमोदन भी उसी का है। यह विकल्प इसीलिए रखा गया है कि दोनों संगठनों को मिला देने वाला अभ्यर्थी यहीं फँसे।
- (d)न तो 1 और न ही 2 — यह विकल्प दोनों कथनों को ग़लत ठहराता है और इसीलिए सबसे दूर है। दोनों कथन योजना के अपने विवरण से आते हैं और उनमें कोई नाम, संख्या या शर्त बदली नहीं गई है। ऐसे विकल्प तक अभ्यर्थी प्रायः तब पहुँचता है जब योजना का नाम ही अपरिचित हो और वह पूरे प्रश्न को अनुमान पर छोड़ दे। ऐसी स्थिति में भी एक उपयोगी आदत है : योजना के नाम को खोलकर पढ़िए। यहाँ नाम स्वयं कहता है कि यह नियोक्ताओं और कर्मचारियों के पंजीकरण को प्रोत्साहन देने की योजना है, और कथन 2 ठीक यही बात कहता है। नाम और कथन का यह मेल अपने आप बता देता है कि कम से कम एक कथन तो सही है, जिससे यह विकल्प तुरंत कट जाता है।
अवधारणा
भारत की संगठित क्षेत्र की सामाजिक सुरक्षा दो बड़े स्तंभों पर खड़ी है, और इस प्रश्न को समझने के लिए उनका भेद जान लेना ज़रूरी है।
पहला स्तंभ कर्मचारी राज्य बीमा है, जो कर्मचारी राज्य बीमा अधिनियम, 1948 से चलता है। इसका संचालन कर्मचारी राज्य बीमा निगम करता है, जो अधिनियम की धारा 3 के अंतर्गत स्थापित निगमित निकाय है और जिसकी अध्यक्षता केंद्रीय श्रम एवं रोज़गार मंत्री करते हैं। इसकी प्रसुविधाएँ हैं — चिकित्सा, बीमारी, प्रसूति, नियोजन-क्षति से जुड़ी निःशक्तता, आश्रितों की सहायता और अंत्येष्टि व्यय। इसकी एक ऐतिहासिक विशेषता यह है कि भारत में पहली बार चिकित्सा प्रसुविधा को नक़दी के बदले सेवा के रूप में इसी अधिनियम ने दिया।
दूसरा स्तंभ कर्मचारी भविष्य निधि है, जो 1952 के अधिनियम से चलता है और जिसकी तीन योजनाएँ भविष्य निधि, पेंशन और निक्षेप-संबद्ध बीमा से जुड़ी हैं। दोनों संगठनों के अधिनियम अलग हैं, दायरे अलग हैं और प्रसुविधाएँ अलग।
इन दोनों की सबसे बड़ी चुनौती एक जैसी है : पंजीकरण का दायरा। बहुत-सी छोटी इकाइयाँ और बहुत-से संविदात्मक या अस्थायी कर्मचारी व्यवस्था के बाहर रह जाते हैं, कभी अनजाने में और कभी पुरानी देनदारी के भय से। इसी को हल करने के लिए समय-समय पर सीमित अवधि की ऐसी योजनाएँ लाई जाती हैं जिनमें पुराने अभिलेखों की जाँच और पिछले अंशदान की माँग नहीं होती। यही इस योजना का तर्क है।
इसका व्यापक संदर्भ यह है कि सामाजिक सुरक्षा का लाभ तभी मिलता है जब कर्मचारी अभिलेख में हो; इसलिए पंजीकरण अपने आप में एक नीति-लक्ष्य बन जाता है।
यह प्रश्न इस पेपर के उस समूह का है जो सीधे परीक्षा-लेने वाली संस्था के अपने कार्यक्षेत्र से जुड़ा है — श्रम और सामाजिक सुरक्षा की हाल की पहलें। ऐसे प्रश्नों में परीक्षक प्रायः दो में से एक बात बदलता है : या तो योजना चलाने वाली संस्था, या कोई संख्या। यहाँ दोनों कथन अपने मूल रूप में हैं और कुछ बदला नहीं गया, इसलिए उत्तर दोनों को स्वीकार करता है।
इसी पेपर में आगे दो और प्रश्न इसी परिवार के हैं — एक भविष्य निधि संगठन के हाल के क़दमों पर और एक रोज़गार से जुड़ी एक बड़ी योजना पर। तीनों को साथ पढ़ना उपयोगी है, क्योंकि तीनों में एक ही युक्ति अलग-अलग तरह से लगी है और उनकी तुलना से यह साफ़ हो जाता है कि परीक्षक कहाँ बदलाव करता है।
छपाई की दृष्टि से यहाँ एक बात ध्यान देने योग्य है : संक्षेप एक साथ दो लिपियों में छपा है — पहले देवनागरी में और उसके तुरंत बाद कोष्ठक में रोमन अक्षरों में — जबकि उसी कथन में दूसरे संगठन का संक्षेप केवल देवनागरी में है। योजना का नाम एकल उद्धरण-चिह्नों के भीतर है और वर्ष भी उन्हीं चिह्नों के भीतर आता है। यह असमानता छपी हुई है और उसे वैसा ही पढ़ना चाहिए।
मुख्य तथ्य
- नियोक्ता और कर्मचारियों के पंजीकरण को प्रोत्साहन देने की यह योजना कर्मचारी राज्य बीमा निगम ने अनुमोदित की है, कर्मचारी भविष्य निधि संगठन ने नहीं — यही इस प्रश्न का सबसे निर्णायक तथ्य है।
- यह अपंजीकृत नियोक्ताओं और कर्मचारियों को पंजीकृत होने का एक बार का अवसर देती है, और उसमें संविदात्मक तथा अस्थायी कर्मचारी भी सम्मिलित हैं।
- योजना 1 जुलाई 2025 से 31 दिसंबर 2025 तक के लिए बनी थी और बाद में उसे एक माह बढ़ाकर 31 जनवरी 2026 तक कर दिया गया।
- पंजीकरण कराने वाली इकाइयों और कर्मचारियों के पुराने अभिलेखों की जाँच नहीं होती और न पिछली अवधि के अंशदान की माँग की जाती है; पंजीकरण निगम के पोर्टल के अलावा श्रम सुविधा तथा कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय के पोर्टलों से भी किया जा सकता है।
- कर्मचारी राज्य बीमा निगम कर्मचारी राज्य बीमा अधिनियम, 1948 की धारा 3 के अंतर्गत स्थापित निगमित निकाय है और उसकी अध्यक्षता केंद्रीय श्रम एवं रोज़गार मंत्री करते हैं।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- श्रम-क्षेत्र की किसी भी योजना को भविष्य निधि संगठन से जोड़ देना; यह योजना कर्मचारी राज्य बीमा निगम की है और उसका आधार 1948 का अधिनियम है।
- 'एक बार का अवसर' को सामान्य पंजीकरण समझ लेना; विशेषता यह है कि इस अवधि में पुराने अभिलेखों की जाँच और पिछले अंशदान की माँग नहीं होती।
- संविदात्मक और अस्थायी कर्मचारियों को इस योजना से बाहर मान लेना; योजना का विवरण उन्हें स्पष्ट रूप से सम्मिलित करता है।
श्रम और सामाजिक सुरक्षा की हाल की पहलें इस परीक्षा का स्थायी विषय हैं, और उन पर प्रश्न तीन रूपों में आते हैं।
पहला रूप यही है — योजना के बारे में दो कथन देकर उनकी जाँच कराना, जिनमें एक कथन प्रायः चलाने वाली संस्था बदलकर बनाया जाता है। इसलिए हर योजना के साथ यह ज़रूर याद रखिए कि वह किस संगठन की है और किस अधिनियम से निकलती है।
दूसरा रूप अधिनियम का है : किसी प्रसुविधा या प्राधिकारी का नाम देकर पूछना कि वह किस अधिनियम के अंतर्गत आता है। इसी परिवार के एक पहले के पेपर में पूछा जा चुका है कि निःशक्तता से जुड़ा कोई प्रश्न किस प्राधिकारी द्वारा तय होगा, और उसकी आधिकारिक कुंजी चिकित्सा बोर्ड को यह अधिकार देती है। एक अन्य पेपर में यह पूछा गया कि भारत में पहली बार चिकित्सा प्रसुविधा नक़दी के बदले सेवा के रूप में किस अधिनियम ने दी, और उत्तर वही 1948 का अधिनियम है।
तीसरा रूप संख्याओं का है : अवधि, सीमा, अंशदान की दर या पात्रता। तैयारी में हर योजना के साथ चार बातें जोड़िए — संस्था, अधिनियम, अवधि और लाभार्थी।
संबंधित PYQ
EPFO_APFC_2023_Q28Any question relating to disablement shall be determined by which one of the following authorities under the Employees’ State Insurance Act, 1948?
- (a) The Insurance Medical Practitioner
- (b) The Social Security Officer
- (c) The Medical Board
- (d) The Medical Appeal Tribunal
उत्तर(c) The Medical Board
कर्मचारी राज्य बीमा अधिनियम, 1948 के अंतर्गत निःशक्तता से जुड़ा प्रश्न किस प्राधिकारी द्वारा तय होगा — आधिकारिक कुंजी चिकित्सा बोर्ड को यह अधिकार देती है।
EPFO_EOAO_2017_Q87For the first time in India, medical benefit as a non-cash benefit was provided under
- (a) the Employees’ State Insurance Act, 1948
- (b) the Factories Act, 1948
- (c) the Maternity Benefit Act, 1961
- (d) the Mines Act, 1952
उत्तर(a) the Employees’ State Insurance Act, 1948
भारत में पहली बार चिकित्सा प्रसुविधा नक़दी के बदले सेवा के रूप में किस अधिनियम ने दी — कुंजी 1948 के कर्मचारी राज्य बीमा अधिनियम को यह श्रेय देती है।
EPFO_APFC_2016_Q23Which of the following are the typical differences between the private insurance programmes and the social insurance programmes ? 1. Adequacy versus Equity 2. Voluntary versus Mandatory Participation 3. Contractual versus Statutory Rights 4. Funding Select the correct answer using the codes given below :
- (a) 1, 2 and 3 only
- (b) 1, 2 and 4 only
- (c) 3 and 4 only
- (d) 1, 2, 3 and 4
उत्तर(d) 1, 2, 3 and 4
निजी बीमा और सामाजिक बीमा के प्रारूपिक अंतर, जिनमें स्वैच्छिक तथा अनिवार्य भागीदारी का भेद भी है — पंजीकरण की अनिवार्यता को समझने की पृष्ठभूमि।
अभ्यास
- practice — not a real PYQ
कर्मचारी राज्य बीमा निगम की स्थापना किस अधिनियम के अंतर्गत निगमित निकाय के रूप में की गई है ?
- (a)कर्मचारी भविष्य निधि और प्रकीर्ण उपबंध अधिनियम, 1952
- (b)कर्मचारी राज्य बीमा अधिनियम, 1948
- (c)औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947
- (d)कारख़ाना अधिनियम, 1948
उत्तर(b) कर्मचारी राज्य बीमा अधिनियम, 1948 — निगम इसी अधिनियम की धारा 3 के अंतर्गत स्थापित निगमित निकाय है और उसकी अध्यक्षता केंद्रीय श्रम एवं रोज़गार मंत्री करते हैं।
- practice — not a real PYQ
निम्नलिखित में से कौन-सी प्रसुविधा कर्मचारी राज्य बीमा अधिनियम, 1948 के अंतर्गत नहीं दी जाती ?
- (a)बीमारी प्रसुविधा
- (b)प्रसूति प्रसुविधा
- (c)आश्रितजन प्रसुविधा
- (d)उपदान
उत्तर(d) उपदान — यह उपदान संदाय अधिनियम, 1972 से मिलता है; बीमारी, प्रसूति और आश्रितजन प्रसुविधाएँ कर्मचारी राज्य बीमा अधिनियम, 1948 की अपनी प्रसुविधाओं में हैं।