मलेरिया फैलाने के अतिरिक्त, एनोफेलेस मच्छर वाहक हैं
- (a)एन्सेफेलाइटिस एवं फाइलेरियासिस
- (b)डेंगू एवं फाइलेरियासिस
- (c)डेंगू एवं एन्सेफेलाइटिस
- (d)उपर्युक्त में से कोई नहीं
सही — (d), उपर्युक्त में से कोई नहीं। पूरे विकल्प-समुच्चय में कुल तीन ही रोग आते हैं, और उनमें ठीक एक ही ऐसा है जिसे एनोफेलेस सचमुच ढोता है। लसीका फाइलेरियासिस सूत्रकृमियों से होता है — वुचेरेरिया बैंक्रॉफ्टी, जिससे लगभग नब्बे प्रतिशत मामले होते हैं, तथा ब्रुगिया मलाई और ब्रुगिया टिमोरी — और विश्व स्वास्थ्य संगठन का अपना विवरण संचरण करने वाले मच्छरों को मुख्यतः एडीज़, एनोफेलेस, क्यूलेक्स और मैनसोनिया वंशों का बताता है; एनोफेलेस उस सूची में है और अफ़्रीका के अधिकांश ग्रामीण भागों में फाइलेरियासिस का प्रमुख वाहक है, यद्यपि भारत में बैंक्रॉफ्टी फाइलेरियासिस का मुख्य वाहक क्यूलेक्स क्विंक्वेफ़ेसिएटस है। बाक़ी दोनों रोग एनोफेलेस से फैलते ही नहीं। डेंगू एक फ़्लेविवायरस है जिसके चार सीरोटाइप हैं और जो केवल एडीज़ इजिप्टाई तथा एडीज़ एल्बोपिक्टस से संचरित होता है। जापानी एन्सेफेलाइटिस अलग फ़्लेविवायरस है, जो क्यूलेक्स मच्छरों से, मुख्यतः क्यूलेक्स ट्राइटीनियोरिंकस से, संचरित होता है; इसमें सूअर संवर्धक परपोषी हैं और बगुला-कुल के जल-पक्षी प्राकृतिक भंडार। अब हर छपी हुई जोड़ी को जैसी छपी है वैसे ही जाँचिए। विकल्प (a) फाइलेरियासिस को, जिसे एनोफेलेस सचमुच ढोता है, एन्सेफेलाइटिस के साथ जोड़ता है, जिसे वह नहीं ढोता। विकल्प (b) फाइलेरियासिस को डेंगू के साथ जोड़ता है, जिसे वह नहीं ढोता। विकल्प (c) डेंगू और एन्सेफेलाइटिस के नाम लेता है, जिनमें से किसी को वह नहीं ढोता। इस तरह हर जोड़ी में कम-से-कम एक ऐसा रोग है जिसका संचरण एनोफेलेस नहीं करता, कोई जोड़ी पूरी की पूरी स्वीकार नहीं की जा सकती, और उत्तर 'उपर्युक्त में से कोई नहीं' है। यह सचमुच नज़दीकी मामला है और ईमानदारी से यह कह देना चाहिए: विकल्प (a) क़रीब आकर चूकता है, क्योंकि वह आधा सही है जबकि विकल्प (c) पूरी तरह ग़लत है, और यह प्रश्न उस पुराने एकल-उत्तर वाले प्रश्न की जोड़ी-रूप में पुनर्रचना जैसा पढ़ा जाता है जिसका उत्तर बस 'फाइलेरियासिस' था। उसी मूल प्रश्न से काम करने वाले किसी रचयिता का आशय (a) रहा हो सकता है। हम उत्तर विकल्पों को जैसा छपा है वैसा ही मानकर देते हैं, और जैसा छपा है उसमें कोई जोड़ी टिकती नहीं। यह भी ध्यान रखिए कि अंग्रेज़ी संस्करण में प्रश्न-वाक्य 'Anopheles mosquito's' अपॉस्ट्रॉफ़ी के साथ छपा है; वह आयोग की अपनी छपाई है और वहाँ ज्यों-की-त्यों रखी गई है। हिन्दी स्तंभ में यह चूक नहीं है।
- (a)एन्सेफेलाइटिस एवं फाइलेरियासिस — आधा सही, और इसीलिए सबसे ख़तरनाक विकल्प। फाइलेरियासिस सचमुच एनोफेलेस की सूची में आता है। एन्सेफेलाइटिस नहीं आता: जापानी एन्सेफेलाइटिस क्यूलेक्स ट्राइटीनियोरिंकस तथा विष्णुई समूह की उससे जुड़ी क्यूलेक्स प्रजातियों से फैलता है, जो सिंचित धान के खेतों में पनपती हैं और मवेशियों का रक्त चूसना अधिक पसंद करती हैं। कोई जोड़ी तभी स्वीकार होती है जब उसके दोनों आधे टिकें, और यह जोड़ी अपने पहले आधे पर ही गिर जाती है।
- (b)डेंगू एवं फाइलेरियासिस — यह भी आधा सही है और उसी जाँच पर गिरती है, बस दूसरे सिरे से। डेंगू केवल एडीज़ इजिप्टाई और एडीज़ एल्बोपिक्टस से संचरित होता है — दिन में काटने वाले, पात्रों में पनपने वाले, शहरी मच्छर, जिनकी टाँगों पर सफ़ेद निशान होते हैं और जिनकी पारिस्थितिकी ग्रामीण मैदानों के रात में काटने वाले एनोफेलेस से पूरी तरह भिन्न है। यहाँ सच्चा आधा फाइलेरियासिस है, झूठा आधा डेंगू।
- (c)डेंगू एवं एन्सेफेलाइटिस — एकमात्र विकल्प जिसके दोनों आधे ग़लत हैं। डेंगू एडीज़ का है और जापानी एन्सेफेलाइटिस क्यूलेक्स का, इसलिए यह जोड़ी दो ऐसे रोगों के नाम लेती है जिनसे एनोफेलेस का कोई लेना-देना नहीं। यह वही विकल्प है जिसे वह अभ्यर्थी चुनता है जिसने 'मच्छर-जनित रोगों' को एक अविभाजित सूची की तरह रट लिया है और हर रोग को उसके वंश से जोड़ा नहीं है।
'मच्छर-जनित' एक श्रेणी नहीं, चार हैं, और इस पूरे विषय का सार वंश-से-रोग का मानचित्र है। एनोफेलेस — मलेरिया, जो प्लाज़्मोडियम प्रजातियों से होता है और मादा एनोफेलेस से संचरित होता है; भारत में महत्त्वपूर्ण वाहकों में ग्रामीण मैदानों का एनोफेलेस क्युलिसीफ़ेसीज़ और क़स्बों का एनोफेलेस स्टीफ़ेंसाई हैं। एनोफेलेस दुनिया के कुछ भागों में लसीका फाइलेरियासिस भी संचरित करता है। एडीज़ — डेंगू, चिकनगुनिया, पीत ज्वर और ज़ीका, सब एडीज़ इजिप्टाई तथा एडीज़ एल्बोपिक्टस के माध्यम से। क्यूलेक्स — जापानी एन्सेफेलाइटिस, और भारत में बैंक्रॉफ्टी फाइलेरियासिस का बड़ा भाग, क्यूलेक्स क्विंक्वेफ़ेसिएटस के माध्यम से। मैनसोनिया — ब्रुगियन फाइलेरियासिस, जो पिस्टिया जैसी तैरती वनस्पति से भरे जलाशयों में पनपता है। ये वंश चिह्नों से जितने पहचाने जाते हैं उतने ही व्यवहार से: एनोफेलेस अपने शरीर को सतह से कोण बनाते हुए बैठता है और उसके पल्प शुंडिका जितने लंबे होते हैं, जबकि क्यूलेक्स और एडीज़ शरीर को लगभग सतह के समानांतर रखकर बैठते हैं; एनोफेलेस अपने अंडे अलग-अलग, पार्श्व तैरने वाली संरचनाओं के साथ देता है, क्यूलेक्स बेड़े के रूप में, और एडीज़ जल-रेखा के ऊपर नम सतहों पर अलग-अलग। भारत का राष्ट्रीय वाहक जनित रोग नियंत्रण केंद्र मलेरिया, डेंगू, चिकनगुनिया, जापानी एन्सेफेलाइटिस, लसीका फाइलेरियासिस और कालाजार के विरुद्ध कार्यक्रम चलाता है — इनमें अंतिम मच्छर-जनित है ही नहीं, वह बालू-मक्खी फ़्लेबोटोमस अर्जेंटाइप्स से फैलता है और बिहार में अत्यधिक केंद्रित है।
यहाँ भरोसेमंद तरीक़ा यह है कि सबसे परिचित लगने वाला विकल्प ढूँढ़ने के बजाय हर विकल्प को आधे-आधे में जाँचा जाए। तीनों रोग लिख लीजिए, हर एक के साथ एक वंश जोड़िए — फाइलेरियासिस: औरों के साथ एनोफेलेस भी; डेंगू: एडीज़; एन्सेफेलाइटिस: क्यूलेक्स — फिर विकल्प पढ़िए। जिस जोड़ी में डेंगू या एन्सेफेलाइटिस हो वह बाहर, और दोनों के बाहर होते ही कोई जोड़ी बचती ही नहीं। बचाव वाला विकल्प इसीलिए सही है: आयोग की आदतों के बारे में किसी अनुमान से नहीं, बल्कि इस प्रदर्शन से कि शेष तीनों विफल हो जाते हैं। 'एन्सेफेलाइटिस' शब्द विशेष संदेह का पात्र है, क्योंकि वह किसी एक रोग का नहीं, एक नैदानिक संलक्षण (सिंड्रोम) का नाम है। बिहार का अपना अनुभव यह बात तीखेपन से रखता है: मुज़फ़्फ़रपुर के आसपास होने वाले तीव्र मस्तिष्ककोप संलक्षण के प्रकोप, जिन्हें स्थानीय रूप से चमकी बुख़ार कहते हैं, 1 जून से 20 सितंबर 2019 के बीच 647 मामलों और 161 मौतों तक पहुँचे, और उन प्रकोपों का कारण आज भी विवादित है — आरंभिक जाँच में जापानी एन्सेफेलाइटिस वायरस के संकेत बहुत कम मिले, कुपोषित बच्चों में गंभीर हाइपोग्लाइसीमिया सामान्य नैदानिक निष्कर्ष रहा, और द लांसेट ग्लोबल हेल्थ में 2017 के एक केस-कंट्रोल अध्ययन ने कच्ची लीची के विषैले तत्त्वों को इस संलक्षण से जोड़ा। इसलिए कोई भी 'एन्सेफेलाइटिस' वायरल हो सकता है, जीवाणुजन्य हो सकता है, या संक्रामक हो ही नहीं — और यह एक और कारण है कि इस शब्द को यूँ ही किसी मच्छर-वंश के हवाले नहीं किया जा सकता।
- लसीका फाइलेरियासिस वुचेरेरिया बैंक्रॉफ्टी (लगभग 90 प्रतिशत मामले), ब्रुगिया मलाई और ब्रुगिया टिमोरी से होता है, और मुख्यतः एडीज़, एनोफेलेस, क्यूलेक्स तथा मैनसोनिया वंशों के मच्छरों से संचरित होता है।
- भारत में बैंक्रॉफ्टी फाइलेरियासिस का प्रमुख वाहक क्यूलेक्स क्विंक्वेफ़ेसिएटस है, एनोफेलेस नहीं; मैनसोनिया प्रजातियाँ ब्रुगियन फाइलेरियासिस ढोती हैं।
- डेंगू केवल एडीज़ इजिप्टाई और एडीज़ एल्बोपिक्टस से संचरित होता है; जापानी एन्सेफेलाइटिस केवल क्यूलेक्स मच्छरों से, मुख्यतः क्यूलेक्स ट्राइटीनियोरिंकस से, जिसमें सूअर संवर्धक परपोषी होते हैं।
- एनोफेलेस की पहचान क्षेत्र में इस बात से होती है कि वह सतह से कोण बनाकर बैठता है और उसके पल्प शुंडिका जितने लंबे होते हैं; क्यूलेक्स और एडीज़ सतह के लगभग समानांतर बैठते हैं।
- बिहार में बार-बार लौटने वाले तीव्र मस्तिष्ककोप संलक्षण के प्रकोप — 1 जून से 20 सितंबर 2019 के बीच 647 मामले और 161 मौतें, मुख्यतः मुज़फ़्फ़रपुर के आसपास — का कारण विवादित है, जिसमें प्रमुख नैदानिक निष्कर्ष किसी मच्छर-जनित वायरस के बजाय कुपोषित बच्चों में गंभीर हाइपोग्लाइसीमिया रहा है।

- सभी मच्छरों को आपस में बदले जाने योग्य मान लेना। रोग वंश से तय होता है, और पूरा प्रश्न उसी पर घूमता है।
- किसी जोड़ी को इसलिए स्वीकार कर लेना कि उसका एक आधा सही है। विकल्प (a) में फाइलेरियासिस के बारे में सच्ची बात है, फिर भी वह उत्तर नहीं है।
- यह मान लेना कि एनोफेलेस फाइलेरियासिस ढो ही नहीं सकता। वह ढो सकता है और अफ़्रीका के अधिकांश भाग में ढोता है — (a) और (b) के विफल होने का कारण हर जोड़ी का दूसरा रोग है, फाइलेरियासिस नहीं।
BPSC वाहक जनित रोगों को एक पंक्ति के मिलान के रूप में पूछता है और बचाव वाले विकल्प को उत्तर बना देने में भी संकोच नहीं करता, जैसा यहाँ हुआ है। UPSC ने इसी पाठ्यक्रम पर कथन और जोड़ी वाले प्रारूप पसंद किए हैं — डेंगू प्रोटोज़ोआजन्य है या विषाणुजन्य, ज़ीका का वाहक डेंगू वाला ही है या नहीं, कोई रोग अपने वाहक के अतिरिक्त किसी और मार्ग से भी फैल सकता है या नहीं — इसलिए वंश से रोगजनक और रोग तक का यह अंतर्निहित मानचित्र दोनों परीक्षाओं के काम आता है।
निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. डेंगू मच्छरों से संचरित होने वाला प्रोटोज़ोआजन्य रोग है। 2. नेत्रगोलक के पीछे दर्द डेंगू का लक्षण नहीं है। 3. त्वचा पर चकत्ते तथा नाक और मसूड़ों से रक्तस्राव डेंगू के कुछ लक्षण हैं। निम्नलिखित में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
- (a) 1 और 2
- (b) केवल 3
- (c) केवल 2
- (d) 1 और 3
उत्तर(b) केवल 3
डेंगू अपनी शर्तों पर जाँचा गया। उसका पहला कथन इसलिए ग़लत माना गया है कि डेंगू विषाणुजन्य है, और डेंगू क्या है तथा उसे कौन-सा मच्छर ढोता है — यही सटीकता इस BPSC पृष्ठ से विकल्प (b) और (c) हटा देती है।
निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में ज़ीका वायरस रोग उसी मच्छर से संचरित होता है जो डेंगू संचरित करता है। 2. ज़ीका वायरस रोग का यौन संचरण संभव है। ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
- (a) केवल 1
- (b) केवल 2
- (c) 1 और 2 दोनों
- (d) न तो 1 और न ही 2
उत्तर(c) 1 और 2 दोनों
वंश-से-रोग का मानचित्र सीधे पूछा गया: ज़ीका और डेंगू एक ही एडीज़ वाहक साझा करते हैं। यह याद रखना कि एडीज़ डेंगू, चिकनगुनिया, पीत ज्वर और ज़ीका ढोता है, वही जानकारी है जो डेंगू को किसी भी एनोफेलेस सूची से बाहर रखती है।
वेक्टर टीके प्रतिरोधक शक्ति प्रदान करने के लिए कैसे काम करते हैं?
- (a) किसी कमजोर या निष्क्रिय वायरस को शरीर में प्रवेश कराकर
- (b) शरीर में रोगजनकों पर सीधे हमला कर और उन्हें नष्ट कर
- (c) वायरस को किसी भिन्न वायरस के संशोधित संस्करण में रखकर
- (d) सीधे कोशिकाओं में प्रवेश कराकर और उन्हें स्पाइक प्रोटीन बनाने में सक्षम बनाकर
उत्तर(c) वायरस को किसी भिन्न वायरस के संशोधित संस्करण में रखकर
'वेक्टर' शब्द को लेकर एक चेतावनी, जिसे आयोग दोनों अर्थों में इस्तेमाल करता है। 69वीं CCE में उसका अर्थ था टीके में गढ़ा गया विषाणु-वाहक; यहाँ उसका अर्थ है वह कीट जो रोगजनक को एक परपोषी से दूसरे तक ले जाता है। उत्तर देने से पहले पढ़िए कि प्रश्न किस अर्थ में कह रहा है।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
जापानी एन्सेफेलाइटिस मनुष्यों में मुख्यतः किस मच्छर से संचरित होता है ?
- (a)एडीज़ इजिप्टाई
- (b)एनोफेलेस स्टीफ़ेंसाई
- (c)क्यूलेक्स ट्राइटीनियोरिंकस
- (d)मैनसोनिया यूनिफ़ॉर्मिस
उत्तर(c) क्यूलेक्स ट्राइटीनियोरिंकस — प्रमुख वाहक, जो सिंचित धान के खेतों में पनपता है, जिसमें सूअर संवर्धक परपोषी और जल-पक्षी प्राकृतिक भंडार हैं। एडीज़ इजिप्टाई डेंगू ढोता है और एनोफेलेस मलेरिया।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
कालाजार, जो बिहार के कुछ भागों में स्थानिक है, किससे संचरित होता है ?
- (a)मादा एनोफेलेस मच्छर से
- (b)बालू-मक्खी फ़्लेबोटोमस अर्जेंटाइप्स से
- (c)एडीज़ मच्छर से
- (d)दूषित पेयजल से
उत्तर(b) बालू-मक्खी फ़्लेबोटोमस अर्जेंटाइप्स से — आंत्रिक लीशमैनियासिस मच्छर-जनित है ही नहीं, इसीलिए वह भारत के वाहक जनित रोग कार्यक्रम में चार मच्छर-जनित रोगों के साथ, पर उनसे अलग, रखा गया है।