निम्न में से किस बीज का उपयोग अभियांत्रिकीकृत हीरों के उत्पादन में होता है ?
- (a)ग्रैफाइट
- (b)घनाकार ज़िरकोनिया
- (c)सफेद नीलम
- (d)मोइज़ानाइट
सही — (a) ग्रैफाइट। प्रयोगशाला में उगाया गया हीरा ठीक उसी पदार्थ का बना होता है जिसका खदान से निकला हीरा — शुद्ध कार्बन, घनीय रूप में क्रिस्टलीकृत — इसलिए प्रक्रिया का आरम्भ किसी कार्बन पदार्थ से ही होना चाहिए, और चारों विकल्पों में कार्बन है ही केवल ग्रैफाइट। उच्च दाब–उच्च ताप (HPHT) मार्ग, जो आज भी सबसे सस्ता और सबसे अधिक प्रयोग में आने वाला मार्ग है, उसमें एक प्रेस लगभग 5 से 5.5 गिगापास्कल दाब 1,400 डिग्री सेल्सियस से ऊपर के ताप पर उत्पन्न करता है। भीतर एक विलायक-उत्प्रेरक धातु — निकल, कोबाल्ट या लोहा — पिघलती है, उच्च शुद्धता वाले कार्बन स्रोत को, अर्थात् ग्रैफाइट को, अपने में घोल लेती है और घुले हुए कार्बन को हीरे के छोटे बीजों तक पहुँचाती है, जहाँ वह हीरे के रूप में जम जाता है। उत्पादन का दूसरा मार्ग, रासायनिक वाष्प निक्षेपण (CVD), कम दाब पर गैस से काम करता है: मेथेन और हाइड्रोजन का लगभग एक-अनुपात-निन्यानबे का मिश्रण आयनित होकर क्रियाशील मूलकों में बदलता है, कार्बन एक आधार-पटल पर जमता जाता है और हाइड्रोजन बीच-बीच में बनने वाले अ-हीरा कार्बन को खुरचकर हटाता रहता है। शब्दावली की एक बात ईमानदारी से कह देनी चाहिए, क्योंकि ध्यान से पढ़ने वाला अभ्यर्थी उसे पकड़ेगा। कड़ाई से कहें तो दोनों प्रक्रियाओं में बीज हीरे का ही एक छोटा क्रिस्टल होता है, और ग्रैफाइट बीज नहीं बल्कि कच्चा माल है; आयोग ने 'बीज' शब्द को ढीले अर्थ में आरम्भिक पदार्थ के लिए प्रयोग किया है। पर विकल्प-सूची अभीष्ट अर्थ को स्वयं बाध्य कर देती है: शेष तीनों हीरा-अनुकारी (simulant) पदार्थ हैं, जो दिखते हीरे जैसे हैं पर कार्बन नहीं हैं, और उनमें से कोई भी हीरा उगाने में कहीं भाग नहीं लेता।
- (b)घनाकार ज़िरकोनिया — यह एक हीरा-अनुकारी पदार्थ है — जिरकोनियम डाइऑक्साइड का घनीय रूप, जिसे अन्य ऑक्साइडों से स्थायी बनाकर आभूषणों में हीरे के सस्ते विकल्प के रूप में उगाया जाता है। इसमें कार्बन है ही नहीं, इसलिए न तो यह स्वयं हीरा बन सकता है और न किसी हीरे को पदार्थ दे सकता है। पृष्ठ पर यह इसलिए है कि नक़ली पत्थरों में सबसे अधिक सुना-जाना नाम यही है।
- (c)सफेद नीलम — रंगहीन कोरण्डम, अर्थात् ऐलुमिनियम ऑक्साइड, जो एक और सस्ते हमशक्ल पत्थर के रूप में काम आता है। घनाकार ज़िरकोनिया की तरह यह भी अनुकारी है, हीरे की जगह बेचा जाता है, और हीरे के संश्लेषण में इसकी कोई भूमिका नहीं। अनुकारी (simulant) और संश्लिष्ट (synthetic) — यह प्रश्न असल में इन्हीं दो शब्दों को अलग कर रहा है: अनुकारी हीरे की नक़ल करता है, जबकि संश्लिष्ट हीरा हीरा ही होता है।
- (d)मोइज़ानाइट — सिलिकॉन कार्बाइड, और तीनों अनुकारियों में सबसे भरोसा दिला देने वाला, क्योंकि इसकी चमक हीरे के बहुत निकट है — पर यह सिलिकॉन का यौगिक है, कार्बन का क्रिस्टल नहीं, और यह बने-बनाए पत्थर का विकल्प है, उसे बनाने की कोई निविष्टि नहीं।
कार्बन के कई अपरूप हैं — हीरा, ग्रैफाइट, फुलरीन, ग्रैफीन, नैनोट्यूब — जिनमें अन्तर केवल इस बात का है कि परमाणु किस प्रकार बँधे हैं। हीरे में हर कार्बन चतुष्फलकीय रूप से चार अन्य कार्बनों से बँधा रहता है और एक दृढ़ त्रिविम जालक बनाता है, जिससे वह प्राकृतिक पदार्थों में सबसे कठोर होता है तथा ऊष्मा का अच्छा चालक होते हुए भी विद्युत् का नहीं। ग्रैफाइट में परमाणु चपटी षट्कोणीय चादरें बनाते हैं और परतों के बीच बल दुर्बल होते हैं, इसीलिए वह मुलायम, फिसलनदार और विद्युत्-चालक होता है। एक को दूसरे में बदलना बस कार्बन को हीरे की व्यवस्था में बाध्य कर देने की बात है, और दोनों औद्योगिक मार्ग यह काम उलटी दिशाओं से करते हैं: HPHT गहरे मैंटल की परिस्थितियाँ दोहराता है, जबकि CVD कम दाब पर गैस से परमाणु-दर-परमाणु हीरा खड़ा करता है। इन दोनों से जिसे गड्डमड्ड नहीं करना चाहिए वह है हीरा-अनुकारियों का वर्ग — घनाकार ज़िरकोनिया, मोइज़ानाइट, सफ़ेद नीलम, काँच — जो अलग पदार्थ हैं और केवल ऊपरी समानता के कारण चुने जाते हैं। प्रयोगशाला में उगाए गए हीरों की श्रेणी-निर्धारण प्राकृतिक पत्थरों की तरह ही होती है, और उन्हें प्राकृतिक से अलग केवल उन वृद्धि-चिह्नों से पहचाना जाता है जिन्हें उपकरण पकड़ लेते हैं, संघटन से नहीं।
यहाँ उत्तर तक पहुँचने के लिए संश्लेषण जानने की आवश्यकता ही नहीं है — यह जानना पर्याप्त है कि हीरा बना किससे है। हीरा कार्बन है, इसलिए निविष्टि भी कार्बन ही होनी चाहिए; विकल्पों में कार्बन पदार्थ खोजिए और केवल ग्रैफाइट उस कसौटी पर उतरता है। यह एक ही क़दम प्रश्न को निपटा देता है, भले ही HPHT और CVD शब्दों का आपके लिए कोई अर्थ न हो। अनुकारियों की सूची अलग से याद कर लेना उपयोगी है, क्योंकि परीक्षक उसे पसन्द करते हैं: घनाकार ज़िरकोनिया जिरकोनियम डाइऑक्साइड है, मोइज़ानाइट सिलिकॉन कार्बाइड, सफ़ेद नीलम ऐलुमिनियम ऑक्साइड, और इनमें से कोई कार्बन नहीं। व्यापारिक सन्दर्भ अब भारतीय भी है — सूरत, जो पहले से ही विश्व का सबसे बड़ा हीरा-तराशी केन्द्र है, प्रयोगशाला में उगाए पत्थरों का भी बड़ा प्रसंस्करण केन्द्र बन चुका है, और संश्लिष्ट हीरे तथा अनुकारी के बीच का भेद ठीक वही भेद है जिसकी चिन्ता यह व्यापार और उसके नियामक करते हैं, क्योंकि एक हीरा है और दूसरा नहीं।
- संश्लिष्ट हीरे वही पदार्थ हैं जो प्राकृतिक हीरे हैं — शुद्ध कार्बन, घनीय रूप में क्रिस्टलीकृत — जबकि हीरा-अनुकारी अलग पदार्थ हैं जो केवल देखने में मिलते-जुलते हैं
- HPHT प्रक्रिया में प्रेस लगभग 5 से 5.5 गिगापास्कल दाब 1,400 डिग्री सेल्सियस से ऊपर उत्पन्न करता है; पिघला हुआ निकल, कोबाल्ट या लोहा विलायक-उत्प्रेरक का काम करता है, ग्रैफाइट की निविष्टि को घोलता है और कार्बन को हीरे के छोटे बीजों पर जमा देता है
- रासायनिक वाष्प निक्षेपण में कार्बन का स्रोत, प्रायः मेथेन, हाइड्रोजन के साथ लगभग 1:99 के अनुपात में मिलाकर आयनित कर मूलकों में बदला जाता है; हाइड्रोजन चुन-चुनकर अ-हीरा कार्बन को खुरच देता है
- हीरे का पहला पुनरुत्पाद्य संश्लेषण 1953 में सिद्ध हुआ, और HPHT तथा CVD आज भी दोनों प्रमुख औद्योगिक मार्ग हैं
- घनाकार ज़िरकोनिया जिरकोनियम डाइऑक्साइड है, मोइज़ानाइट सिलिकॉन कार्बाइड है और सफ़ेद नीलम ऐलुमिनियम ऑक्साइड — इनमें से किसी में कार्बन नहीं
- हीरा और ग्रैफाइट कार्बन के अपरूप हैं: हीरा त्रिविम में चतुष्फलकीय रूप से बँधा है, ग्रैफाइट षट्कोणीय चादरों में परतदार है, और यही कारण है कि एक पदार्थों में सबसे कठोर है और दूसरा मुलायम स्नेहक

- अनुकारी को संश्लिष्ट मान बैठना — घनाकार ज़िरकोनिया तथा मोइज़ानाइट हीरे की नक़ल करते हैं, पर हीरे हैं नहीं और हीरा बना भी नहीं सकते
- यह मान लेना कि 'बीज' शब्द तकनीकी रूप से ठीक-ठीक ही प्रयुक्त हुआ होगा; यहाँ वह ढीले अर्थ में आरम्भिक पदार्थ के लिए है, और विकल्प-सूची अभीष्ट अर्थ स्पष्ट कर देती है
- यह भूल जाना कि हीरा और ग्रैफाइट एक ही तत्व हैं — यही अकेला तथ्य इस प्रश्न का उत्तर दे देता है
BPSC यहाँ एक ही क़दम की पदार्थ-पहचान पूछता है और भटकाने के लिए ब्राण्ड जैसे जाने-पहचाने नामों पर टिकता है — घनाकार ज़िरकोनिया, मोइज़ानाइट — इसलिए बचाव यह है कि हर पदार्थ से पूछा जाए कि रासायनिक रूप से वह है क्या। UPSC इसी अध्याय को गुणों तथा सुमेलन के रास्ते जाँचना पसन्द करता है: कोई नामित रत्न किस तत्व का बना है, हीरा काँच की नक़ल से अधिक क्यों चमकता है — इसलिए रसायन को भौतिकी के साथ-साथ थामे रखना पड़ता है।
सूची I (प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले पदार्थ) का सूची II (तत्व) से मिलान कीजिए तथा सूचियों के नीचे दिए कूट से सही उत्तर चुनिए : सूची I I. हीरा II. संगमरमर III. बालू IV. माणिक सूची II A) कैल्सियम B) सिलिकॉन C) ऐलुमिनियम D) कार्बन कूट :
- (a) I-C, II-A, III-B, IV-D
- (b) I-D, II-B, III-A, IV-C
- (c) I-B, II-A, III-C, IV-D
- (d) I-D, II-A, III-B, IV-C
उत्तर(d) I-D, II-A, III-B, IV-C
वही एक तथ्य जो इस प्रश्न को निपटा देता है : हीरा कार्बन है। UPSC माणिक को ऐलुमिनियम के साथ भी जोड़ता है, और वह वही कोरण्डम है जो यहाँ सफ़ेद नीलम के भेस में खड़ा है — यह जान लेना कि इनमें से कोई कार्बन नहीं, उसे तत्काल काट देता है।
109. कथन (A) : हीरा उसी आकार में तराशी गई काँच की नक़ल से अधिक चमकता है। कारण (R) : हीरे का अपवर्तनांक काँच के अपवर्तनांक से कम होता है। उपर्युक्त दोनों कथनों के सन्दर्भ में, निम्नलिखित में से कौन-सा एक सही है ?
- (a) A तथा R दोनों सही हैं, और R, A की सही व्याख्या है
- (b) A तथा R दोनों सही हैं, किन्तु R, A की सही व्याख्या नहीं है
- (c) A सही है, किन्तु R ग़लत है
- (d) A ग़लत है, किन्तु R सही है
उत्तर(c) A सही है, किन्तु R ग़लत है
नक़ल बनाम असली का वही भेद, पर रसायन के बजाय प्रकाशिकी से जाँचा हुआ। काँच या घनाकार ज़िरकोनिया का पत्थर उसी आकार में तराशा जा सकता है और फिर भी हीरा नहीं होता — और ठीक इसीलिए इस पृष्ठ के तीनों अनुकारी हीरा बनाने की निविष्टि नहीं हो सकते।
निम्नलिखित में से प्रथम कृत्रिमीय तैयार किया गया तत्व है
- (a) Tc
- (b) Te
- (c) Tl
- (d) Th
उत्तर(a) Tc
दिसम्बर 2024 में हुई 70वीं CCE का पत्र — यह इस पुनर्परीक्षा से अलग पत्र है — कृत्रिम संश्लेषण को दूसरे सिरे से पूछता है : पहला तत्व जो खोजा नहीं, बनाया गया। दोनों प्रश्न उसी अभ्यर्थी को पुरस्कृत करते हैं जो यह स्पष्ट रखता है कि पदार्थ बना किससे है, इससे पहले कि वह यह सोचे कि बनाया कैसे जाता है।
- अभ्यास प्रश्न — वास्तविक PYQ नहीं
निम्नलिखित में से कौन संश्लिष्ट हीरा नहीं, बल्कि हीरा-अनुकारी है ?
- (a)CVD से उगाया गया पत्थर
- (b)HPHT से उगाया गया पत्थर
- (c)मोइज़ानाइट
- (d)प्रयोगशाला में उगाई गई हीरे की बीज-पट्टिका
उत्तर(c) मोइज़ानाइट — सिलिकॉन कार्बाइड, एक भिन्न पदार्थ जो अपनी समानता के कारण चुना जाता है; CVD तथा HPHT से उगाए पत्थर संघटन तथा संरचना दोनों से हीरे ही हैं।
- अभ्यास प्रश्न — वास्तविक PYQ नहीं
ग्रैफाइट मुलायम है तथा विद्युत् का चालन करता है, जबकि हीरा अत्यन्त कठोर है तथा चालन नहीं करता, क्योंकि
- (a)वे भिन्न तत्वों से बने हैं
- (b)ग्रैफाइट में षट्कोणीय रूप से बँधे परमाणुओं की परतें तथा मुक्त इलेक्ट्रॉन होते हैं, जबकि हीरे में दृढ़ चतुष्फलकीय जाल होता है
- (c)हीरे में सिलिकॉन होता है और ग्रैफाइट में कार्बन
- (d)ग्रैफाइट एक यौगिक है और हीरा एक तत्व
उत्तर(b) ग्रैफाइट में षट्कोणीय रूप से बँधे परमाणुओं की परतें तथा मुक्त इलेक्ट्रॉन होते हैं, जबकि हीरे में दृढ़ चतुष्फलकीय जाल होता है — दोनों शुद्ध कार्बन हैं, अन्तर केवल बन्धन का है।