'वाताग्र' के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए : 1. वाताग्र जिस क्षेत्र में गतिमान होता है, वहाँ यह मौसम में धीमा बदलाव लाता है ।; 2. शीत वाताग्र तड़ित झंझा से संबद्ध है ।; 3. कोष्ण वाताग्र, प्रगामी कोष्ण वायु राशि (संहति) एवं ठंडी वायु राशि (संहति) के बीच की सीमा है, जहाँ कोष्ण वायु, ठंडी वायु के ऊपर अभिभावी होती है और उसके ऊपर उठती है ।; उपर्युक्त में से कौन-सा/कौन-से कथन सही है/हैं ?
- (a)केवल 1
- (b)केवल 1 और 2
- (c)केवल 2 और 3
- (d)1, 2 और 3
सही — C, केवल कथन 2 और 3 । कथन 1 असत्य है — चूँकि वाताग्र दो विपरीत गुणों वाली वायु राशियों के बीच की तीक्ष्ण सीमा है, इसलिए उसके गुज़रने पर मौसम में (तापमान, दाब, पवन, मेघ और वर्षा में) अपेक्षाकृत तीव्र और स्पष्ट परिवर्तन आता है, धीमा परिवर्तन नहीं । कथन 2 सत्य है, क्योंकि शीत वाताग्र कोष्ण वायु के नीचे घुसकर उसे तीव्र ढाल पर ऊपर उठा देता है, जिससे कपासी-वर्षी मेघ बनते हैं और तड़ित झंझा भड़कती है । कथन 3 कोष्ण वाताग्र को ठीक-ठीक परिभाषित करता है — वह सीमा जहाँ प्रगामी कोष्ण वायु राशि ठंडी वायु राशि के ऊपर अभिभावी होकर उसके ऊपर उठती है । अतः केवल 2 और 3 सही हैं ।
- (a)केवल 1 — यह असत्य कथन 1 को रख लेता है और शीत तथा कोष्ण वाताग्र संबंधी दोनों सही कथनों को गलत ढंग से छोड़ देता है ।
- (b)केवल 1 और 2 — इसमें असत्य कथन 1 सम्मिलित है और कथन 3 की सही कोष्ण-वाताग्र परिभाषा छूट जाती है ।
- (d)1, 2 और 3 — इसमें कथन 1 सम्मिलित है, किंतु वाताग्र मौसम में तीव्र परिवर्तन लाता है — धीमा नहीं ।
वाताग्र भिन्न तापमान और आर्द्रता वाली दो वायु राशियों के बीच की ढालू सीमा-सतह है । शीत वाताग्र पर सघन ठंडी वायु कोष्ण वायु के नीचे घुसकर उसे तीव्र ढाल पर ऊपर धकेलती है, जिससे ऊँचे उठे कपासी-वर्षी मेघों, बौछारों और तड़ित झंझाओं की एक सँकरी पट्टी बनती है और उसके बाद तापमान तेज़ी से गिरता है । कोष्ण वाताग्र पर हल्की कोष्ण वायु पीछे हटती ठंडी वायु के ऊपर एक मंद ढाल के सहारे सरकती है, जिससे परतदार मेघों की चौड़ी पट्टी और लंबी, लगातार वर्षा मिलती है । वाताग्र ही शीतोष्ण (बहिरुष्णकटिबंधीय) चक्रवातों की संगठक विशेषता हैं ।
विकर्षक कथन 1 है — वाताग्र ठीक वही स्थान है जहाँ मौसम तीक्ष्ण रूप से बदलता है, इसलिए 'धीमा बदलाव' वाक्यांश ही चूक का संकेत है, और शीत वाताग्र तो मौसम को सबसे अचानक बदलते हैं । कथन 2 और 3 पाठ्यपुस्तक के अनुसार सही हैं, अतः कथन 1 हटाते ही उत्तर 2 और 3 पर तय हो जाता है ।
- शीत वाताग्र अपनी तीव्र ढाल के कारण कपासी-वर्षी मेघ, बौछारें और तड़ित झंझा तथा तापमान में अचानक गिरावट उत्पन्न करता है ।
- कोष्ण वाताग्र अपनी मंद ढाल के कारण चौड़े परतदार मेघ और लगातार, लंबी वर्षा लाता है, क्योंकि कोष्ण वायु ठंडी के ऊपर चढ़ती है ।
- जब अधिक तेज़ चलता शीत वाताग्र किसी कोष्ण वाताग्र को पकड़ लेता है, तो अधिविष्ट वाताग्र बनता है ।
- वाताग्र मध्य-अक्षांशीय (शीतोष्ण) चक्रवातों और उनके क्रमबद्ध मौसम-अनुक्रम के केंद्र में हैं ।
कथन 2 और 3 सही हैं; कथन 1 असत्य है, क्योंकि वाताग्र मौसम में तीव्र परिवर्तन लाता है, धीमा नहीं ।
- यह सोचना कि वाताग्र मौसम को धीरे-धीरे बदलते हैं — विशेषकर शीत वाताग्र अचानक परिवर्तन लाते हैं ।
- कोष्ण वाताग्र (लगातार, परतदार वर्षा) और शीत वाताग्र (बौछारी तड़ित झंझा) की पहचानें आपस में बदल देना ।
- शीतोष्ण/वाताग्रीय चक्रवात को उष्णकटिबंधीय चक्रवात से गड्डमड्ड कर देना, जिसमें वाताग्र होते ही नहीं ।
वाताग्र संबंधी प्रश्न शीत बनाम कोष्ण की पहचान (ढाल, मेघ, वर्षा) और यह तथ्य परखते हैं कि वाताग्र मौसम में तीक्ष्ण, न कि क्रमिक, परिवर्तन का चिह्न है ।
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- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
ऊँचे उठे कपासी-वर्षी मेघों के साथ तड़ित झंझा और तापमान में अचानक गिरावट सर्वाधिक किसकी विशेषता है ?
- (a)कोष्ण वाताग्र
- (b)शीत वाताग्र
- (c)स्थिर वाताग्र
- (d)अधिविष्ट वाताग्र
Answer(b) शीत वाताग्र — ठंडी वायु कोष्ण वायु के नीचे घुसकर उसे तीव्र ढाल पर ऊपर उठाती है, जिससे कपासी-वर्षी मेघ और तड़ित झंझा बनते हैं ।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
वाताग्र की सर्वोत्तम परिभाषा है — किसके बीच की सीमा ?
- (a)दो महासागरीय धाराओं के
- (b)भिन्न तापमान और आर्द्रता वाली दो वायु राशियों के
- (c)स्थल और समुद्र समीर के
- (d)क्षोभमंडल और समतापमंडल के
Answer(b) भिन्न तापमान और आर्द्रता वाली दो वायु राशियों के — उन्हें अलग करने वाली ढालू सतह ।