मेघों से संबंधित निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/कौन-से सही है/हैं ? 1. मेघों को ऊँचाई और उनके रूप के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है ।; 2. ऊँचाई के अनुसार उन्हें उच्च, मध्य और निम्न मेघों के रूप में वर्गीकृत किया जाता है ।; 3. स्तरी, वर्षास्तरी और स्तरी-कपासी मेघ उच्च मेघ होते हैं ।; नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर उत्तर चुनिए :
- (a)केवल 1
- (b)केवल 1 और 2
- (c)केवल 2 और 3
- (d)1, 2 और 3
सही — B, केवल कथन 1 और 2 । मेघ वस्तुतः ऊँचाई और रूप — दोनों के आधार पर वर्गीकृत होते हैं (कथन 1), और ऊँचाई के अनुसार वे उच्च, मध्य तथा निम्न कुलों में आते हैं (कथन 2) । कथन 3 असत्य है — स्तरी, वर्षास्तरी और स्तरी-कपासी मेघ निम्न मेघ हैं, जो लगभग 2 km से नीचे रहते हैं, उच्च मेघ नहीं; उच्च कुल में पक्षाभ, पक्षाभ-स्तरी और पक्षाभ-कपासी मेघ आते हैं । अतः केवल 1 और 2 सही हैं ।
- (a)केवल 1 — यह कथन 2 को छोड़ देता है, किंतु ऊँचाई के अनुसार उच्च/मध्य/निम्न का त्रिविध वर्गीकरण मानक और सही है ।
- (c)केवल 2 और 3 — यह असत्य कथन 3 को रख लेता है (वे मेघ निम्न हैं, उच्च नहीं) और सही कथन 1 को गलत ढंग से छोड़ देता है ।
- (d)1, 2 और 3 — इसमें असत्य कथन 3 सम्मिलित है, जो तीन निम्न मेघों को उच्च मेघ बता देता है ।
विश्व मौसम विज्ञान संगठन मेघों को उनके आधार की ऊँचाई और उनके रूप के अनुसार वर्गीकृत करता है । ऊँचाई के अनुसार उच्च मेघ (लगभग 6-12 km) हैं — पक्षाभ, पक्षाभ-स्तरी और पक्षाभ-कपासी; मध्य मेघ (लगभग 2-6 km) — मध्य-स्तरी और मध्य-कपासी; तथा निम्न मेघ (लगभग 2 km से नीचे) — स्तरी, स्तरी-कपासी और वर्षास्तरी । रूप के अनुसार वे पक्षाभी (झीने), स्तरीय (परतदार) और कपासी (ढेरनुमा) होते हैं । कपासी और कपासी-वर्षी जैसे अत्यधिक ऊर्ध्वाधर विस्तार वाले मेघ कई स्तरों में फैले रहते हैं ।
परीक्षक जाल कथन 3 में बिछाता है — तीन वास्तविक मेघ-नाम लेकर उन्हें 'उच्च' कह देता है । नाम के उपसर्ग का नियम इसे सुलझा देता है — 'पक्षाभ-' उच्च मेघों का चिह्न है और 'स्तरी' परतदार निम्न मेघों का, इसलिए स्तरी, वर्षास्तरी और स्तरी-कपासी तुरंत निम्न के रूप में पहचान में आ जाते हैं, जिससे कथन 3 असत्य ठहरता है ।
- उच्च मेघ हैं पक्षाभ, पक्षाभ-स्तरी और पक्षाभ-कपासी — लगभग 6-12 km पर हिम-क्रिस्टल वाले मेघ ।
- मध्य मेघों पर 'मध्य-' उपसर्ग लगता है — लगभग 2-6 km पर मध्य-स्तरी और मध्य-कपासी ।
- निम्न मेघों में स्तरी, स्तरी-कपासी और वर्षास्तरी आते हैं, जो लगभग 2 km से नीचे हैं; वर्षास्तरी से लगातार वर्षा होती है ।
- कपासी-वर्षी एक ऊँचा उठा, ऊर्ध्वाधर रूप से विकसित मेघ है जो गरज के तूफ़ान उत्पन्न करता है ।
स्तरी, वर्षास्तरी और स्तरी-कपासी निम्न मेघ हैं, अतः कथन 3 असत्य है — केवल 1 और 2 सही हैं ।
- स्तरी-कुल के मेघों को उच्च मान लेना — 'पक्षाभ-' उपसर्ग उच्च मेघों का चिह्न है, 'स्तरी' परतदार निम्न मेघों का ।
- यह सोचना कि मेघ केवल आकृति के आधार पर वर्गीकृत होते हैं — ऊँचाई वर्गीकरण का दूसरा अक्ष है ।
- वर्षास्तरी (निम्न, लगातार वर्षा) को कपासी-वर्षी (ऊँचा उठा गरज-तूफ़ान मेघ) से गड्डमड्ड कर देना ।
मेघ संबंधी प्रश्न ऊँचाई-कुल (उच्च/मध्य/निम्न) और नाम-उपसर्ग के नियम को परखते हैं — पक्षाभ का अर्थ उच्च, मध्य का अर्थ मध्यम, स्तरी का अर्थ परतदार निम्न ।
निम्नलिखित जलवायवीय और भौगोलिक परिघटनाओं पर विचार कीजिए : 1. संघनन 2. उच्च तापमान और आर्द्रता 3. पर्वतीयता (ओरोग्राफ़ी) 4. ऊर्ध्वाधर पवन गरज-मेघ का विकास इनमें से किन परिघटनाओं के कारण होता है ?
- (a) 1 और 2
- (b) 2, 3 और 4
- (c) 1, 3 और 4
- (d) 1, 2, 3 और 4
Answer(d) 1, 2, 3 और 4
मेघों का वही विषय — UPSC का प्रश्न पूछता है कि कौन-सी परिघटनाएँ कपासी-वर्षी (गरज-मेघ) बनाती हैं, जो उसी वर्गीकरण के ऊर्ध्वाधर रूप से विकसित मेघ-प्रकारों में से एक है जिसे यह प्रश्न परखता है ।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
निम्नलिखित में से कौन-सा उच्च-तुंगता वाला मेघ है ?
- (a)स्तरी
- (b)पक्षाभ
- (c)वर्षास्तरी
- (d)स्तरी-कपासी
Answer(b) पक्षाभ — 'पक्षाभ-' वाले मेघ क्षोभमंडल में ऊपर, लगभग 6-12 km पर बनते हैं ।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
भारी वर्षा और तड़ित् के साथ गरज के तूफ़ानों के लिए मुख्यतः कौन-सा मेघ उत्तरदायी है ?
- (a)पक्षाभ-स्तरी
- (b)मध्य-कपासी
- (c)कपासी-वर्षी
- (d)स्तरी
Answer(c) कपासी-वर्षी — एक ऊँचा उठा, ऊर्ध्वाधर रूप से विकसित मेघ, जो गरज के तूफ़ान उत्पन्न करता है ।