रेगड़ मृदा के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा/कौन-से कथन सही है/हैं ? 1. यह हल्के रंग की, मृण्मय (चिकनी) और उर्वर मृदा है ।; 2. यह उष्ण और आर्द्र परिस्थितियों के कारण दक्कनी बेसाल्टी लावा पर विकसित हुई है ।; 3. इस मृदा में व्यापक रूप से कपास की खेती की जाती है ।; नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर उत्तर चुनिए :
- (a)1 और 2
- (b)2 और 3
- (c)केवल 2
- (d)केवल 3
सही — B, कथन 2 और 3 । रेगड़ (काली कपास मृदा) गहरे रंग की मृदा है, हल्के रंग की नहीं, अतः कथन 1 असत्य है । यह अपक्षयित दक्कनी बेसाल्टी (ट्रैप) लावा से विकसित होती है, इसलिए कथन 2 का जनक-शैल संबंधी दावा सही है, और उस पर सबसे व्यापक रूप से उगाई जाने वाली फ़सल कपास ही है — इसीलिए उसका उपनाम 'काली कपास मृदा' है — जिससे कथन 3 सत्य बनता है । केवल 2 और 3 सही हैं ।
- (a)1 और 2 — यह कथन 1 को बनाए रखता है, किंतु रेगड़ गहरे/काले रंग की है, हल्के रंग की नहीं, इसलिए कथन 1 वाले किसी भी विकल्प को अस्वीकार करना ही होगा ।
- (c)केवल 2 — यह कथन 3 को छोड़ देता है, जबकि रेगड़ पर कपास की व्यापक खेती होती है — उसका उपनाम ही 'काली कपास मृदा' है ।
- (d)केवल 3 — यह कथन 2 को छोड़ देता है, किंतु रेगड़ वस्तुतः दक्कनी बेसाल्टी लावा पर बनती है, अतः वह जनक-शैल संबंधी कथन सही है ।
रेगड़, या काली कपास मृदा, भारत के प्रमुख मृदा वर्गों में से एक है । यह गहरे रंग की, महीन कणों वाली और मृण्मय है, तथा चूना, लोहा, मैग्नीशियम और कैल्सियम से समृद्ध किंतु नाइट्रोजन और फॉस्फोरस में निर्धन है । अत्यधिक नमी-धारक होने के कारण गीली होने पर यह फूल जाती है और चिपचिपी हो जाती है तथा सूखने पर उसमें गहरी दरारें पड़ जाती हैं, जिससे वायु-संचार में सहायता मिलती है । यह दक्कन ट्रैप बेसाल्ट के अपक्षय से बनी है ।
यहाँ जाल कथन 1 का 'हल्के रंग की' शब्द है — इस मृदा की परिभाषक विशेषता ही उसका गहरा रंग है, इसलिए कथन 1 वाला हर विकल्प तत्काल हटाया जा सकता है । इसके बाद उत्तर इस पर टिक जाता है कि उस पर कपास उगती है या नहीं — जो उगती है, अतः 2 और 3 ।
- रेगड़ दक्कन ट्रैप क्षेत्र के बड़े भाग में फैली है — महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, गुजरात तथा कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु के कुछ भाग ।
- यह दक्कन ट्रैप के बेसाल्टी (ज्वालामुखीय) लावा के अपक्षय से बनती है ।
- उसकी उच्च मृत्तिका मात्रा उसे गीली होने पर फूलने और चिपचिपा होने तथा सूखने पर गहरी दरारें डालने योग्य बनाती है ।
- काली मृदा का क्षेत्र वस्तुतः उष्ण और अर्ध-शुष्क है, जहाँ वर्षा मध्यम से कम रहती है, यद्यपि कथन 2 परिस्थितियों को ढीले ढंग से 'उष्ण और आर्द्र' कहता है; उसकी नमी-धारक प्रकृति ही वर्षा-आश्रित कपास के अनुकूल है ।

- यह मान लेना कि काली मृदा हल्के रंग की होती है — वह गहरे रंग की है, और यही कथन 1 का जाल है ।
- यह सोचना कि काली मृदा नाइट्रोजन से समृद्ध है — वह वस्तुतः नाइट्रोजन और फॉस्फोरस में निर्धन है ।
- रेगड़ के जनक शैल (बेसाल्टी दक्कन लावा) को जलोढ़ या ग्रेनाइटी उद्भव से गड्डमड्ड कर देना ।
NDA और UPSC किसी मृदा को उसके रंग, जनक शैल, क्षेत्र और सर्वाधिक उपयुक्त फ़सल से मिलाकर मृदा प्रकार परखते हैं — रेगड़ को दक्कन बेसाल्ट और कपास पर टिकाइए ।
भारत की लैटेराइट मृदाओं के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-से कथन सही हैं ? 1. वे सामान्यतः लाल रंग की होती हैं । 2. वे नाइट्रोजन और पोटाश से समृद्ध होती हैं । 3. वे राजस्थान और उत्तर प्रदेश में भली-भाँति विकसित हैं । 4. इन मृदाओं पर टैपिओका और काजू अच्छी तरह उगते हैं । नीचे दिए गए कूटों का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए ।
- (a) 1, 2 और 3
- (b) 2, 3 और 4
- (c) 1 और 4
- (d) केवल 2 और 3
Answer(c) 1 और 4
वही अवधारणा — किसी भारतीय मृदा प्रकार को उसकी विशेषताओं से पहचानना; UPSC का प्रश्न लैटेराइट मृदा परखता है, जबकि यह NDA प्रश्न रेगड़/काली मृदा — दोनों भारत की मृदा-वर्गीकरण पाठ्यचर्या का भाग हैं ।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
दक्कन की काली कपास मृदा (रेगड़) किस प्रकार की शैल के अपक्षय से बनती है ?
- (a)ग्रेनाइट
- (b)बेसाल्टी लावा
- (c)बलुआ पत्थर
- (d)चूना-पत्थर
Answer(b) बेसाल्टी लावा — रेगड़ दक्कन ट्रैप के अपक्षयित बेसाल्ट से विकसित होती है ।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
निम्नलिखित में से कौन-सी मृदा उच्च नमी-धारण और सूखने पर गहरी दरारें पड़ने के लिए सर्वाधिक जानी जाती है ?
- (a)लैटेराइट मृदा
- (b)जलोढ़ मृदा
- (c)काली (रेगड़) मृदा
- (d)लाल मृदा
Answer(c) काली (रेगड़) मृदा — उसकी मृण्मय बनावट उसे गीली होने पर फूलने और सूखने पर गहरी दरारें डालने योग्य बनाती है ।