NaCl जालक (लैटिस) में Na⁺ और Cl⁻ आयनों की उपसहसंयोजन संख्या क्या है ?
- (a)6, 1
- (b)1, 6
- (c)6, 6
- (d)5, 5
सही — C, 6, 6। सोडियम क्लोराइड रॉक-सॉल्ट संरचना में क्रिस्टलित होता है: Cl⁻ आयन फलक-केंद्रित घनीय (face-centred cubic) व्यवस्था बनाते हैं और Na⁺ आयन सभी अष्टफलकीय रिक्तियों में बैठते हैं। इसलिए प्रत्येक Na⁺ आयन के चारों ओर 6 निकटतम Cl⁻ आयन होते हैं, और इसी प्रकार प्रत्येक Cl⁻ आयन के चारों ओर 6 Na⁺ आयन होते हैं। दोनों आयनों की उपसहसंयोजन संख्या 6 है, अर्थात् 6 : 6।
- (a)6, 1 — यह दोनों आयनों को गलत ढंग से असमान बना देता है। NaCl जैसे 1 : 1 आयनिक ठोस में दोनों आयनों की उपसहसंयोजन संख्या समान होनी चाहिए, अतः 6 के साथ 1 का जोड़ा असंभव है।
- (b)1, 6 — वही त्रुटि उलटे क्रम में — आयनों की उपसहसंयोजन संख्याएँ 1 और 6 नहीं हो सकतीं; NaCl सममित है, जिसमें दोनों आयन षट्-उपसहसंयोजित हैं।
- (d)5, 5 — पाँच रॉक-सॉल्ट जालक की ज्यामिति नहीं है; प्रत्येक आयन के चारों ओर की अष्टफलकीय व्यवस्था छह निकटतम पड़ोसी देती है, पाँच नहीं।
किसी क्रिस्टल में किसी आयन की उपसहसंयोजन संख्या उसके तत्काल संपर्क में रहने वाले विपरीत आवेशित आयनों की संख्या है — अर्थात् उसके निकटतम पड़ोसी। यह इस बात से तय होती है कि आयन किस प्रकार संकुलित होते हैं, जो मुख्यतः आयनी त्रिज्याओं के अनुपात पर निर्भर करता है। NaCl रॉक-सॉल्ट संरचना अपनाता है, जो एक अष्टफलकीय 6 : 6 व्यवस्था है।
पहले NaCl के 1 : 1 सूत्र का उपयोग कीजिए: चूँकि प्रत्येक Cl⁻ पर एक Na⁺ है, दोनों आयनों की उपसहसंयोजन संख्या समान होनी चाहिए, जिससे असमान विकल्प हट जाते हैं। फिर रॉक-सॉल्ट ज्यामिति स्मरण कीजिए — प्रत्येक आयन छह विपरीत आयनों के अष्टफलक के केंद्र में बैठता है — जिससे 6 : 6 मिलता है।
- रॉक-सॉल्ट (NaCl) संरचना में Cl⁻ आयन फलक-केंद्रित घनीय जालक बनाते हैं और Na⁺ प्रत्येक अष्टफलकीय रिक्ति में रहता है।
- Na⁺ और Cl⁻ दोनों षट्-उपसहसंयोजित हैं, इसलिए इस संरचना को 6 : 6 कहा जाता है।
- Na⁺ और Cl⁻ का त्रिज्या अनुपात उस परास में आता है जो अष्टफलकीय, छह-गुना उपसहसंयोजन के अनुकूल है।
- इसके विपरीत CsCl 8 : 8 है और ज़िंक ब्लेंड (ZnS) 4 : 4 — त्रिज्या अनुपात के साथ उपसहसंयोजन बदल जाता है।
1 : 1 ठोस समान उपसहसंयोजन को बाध्य करता है; अष्टफलकीय रॉक-सॉल्ट संकुलन NaCl को 6 : 6 बनाता है।
- यह सोचना कि 1 : 1 लवण में दोनों आयनों की उपसहसंयोजन संख्या भिन्न हो सकती है।
- NaCl (6 : 6) को CsCl (8 : 8) से गड्डमड्ड कर देना।
- उपसहसंयोजन संख्या को एकक कोष्ठिका में आयनों की संख्या से मिला देना।
सीधे NaCl (या CsCl/ZnS) की उपसहसंयोजन संख्या पूछी जाती है, अथवा त्रिज्या-अनुपात नियम से किसी संरचना को उसके उपसहसंयोजन से सुमेलित करने को कहा जाता है।
No directly related past PYQ was found.
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
CsCl संरचना में प्रत्येक आयन की उपसहसंयोजन संख्या है
- (a)4
- (b)6
- (c)8
- (d)12
Answer(c) 8 — CsCl में काय-केंद्रित प्रकार की 8 : 8 व्यवस्था होती है, जिसमें प्रत्येक आयन दूसरे प्रकार के आठ आयनों के संपर्क में रहता है।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
किसी आयनिक क्रिस्टल में उपसहसंयोजन संख्या मुख्यतः किस गुण से तय होती है?
- (a)परमाणु द्रव्यमान
- (b)आयनों का त्रिज्या अनुपात
- (c)रंग
- (d)चुंबकीय आघूर्ण
Answer(b) आयनों का त्रिज्या अनुपात — यही तय करता है कि किसी दिए गए आयन के चारों ओर कितने विपरीत आयन संकुलित हो सकते हैं।