सूची I को सूची II से सुमेलित कीजिए और सूचियों के नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए : सूची I (प्रावधान) A. विस्थापन भत्ता B. प्रमाणक शल्य-चिकित्सक C. अर्धमासिक भुगतान D. मात्रानुपाती सूची II (अधिनियम) 1. कारखाना अधिनियम, 1948 2. न्यूनतम मज़दूरी अधिनियम, 1948 3. अंतरराज्यिक प्रवासी कर्मकार (नियोजन का विनियमन और सेवा-शर्त) अधिनियम, 1979 4. कर्मचारी प्रतिकर अधिनियम, 1923 कूट : A B C D
- (a)2 1 4 3
- (b)3 1 4 2
- (c)2 4 1 3
- (d)3 4 1 2
सही उत्तर — B, (b) 3 1 4 2 । कूट की पंक्ति ऊपर छपे शीर्ष A B C D के अनुसार पढ़ी जाती है, अर्थात् इस विकल्प का अर्थ है A–3, B–1, C–4 और D–2 । अब चारों जोड़ियाँ अलग-अलग देखिए । A, विस्थापन भत्ता, अंतरराज्यिक प्रवासी कर्मकार (नियोजन का विनियमन और सेवा-शर्त) अधिनियम, 1979 की धारा 14 का पद है ; वह ठेकेदार द्वारा भर्ती के समय देय होता है, मासिक मज़दूरी के पचास प्रतिशत अथवा पचहत्तर रुपये में से जो अधिक हो उतना, और वह लौटाया नहीं जाता । इसलिए A–3 । B, प्रमाणक शल्य-चिकित्सक, कारखाना अधिनियम, 1948 की धारा 10 का पद है ; राज्य सरकार अर्हित चिकित्सा व्यवसायियों में से उसकी नियुक्ति करती है और उसका काम किशोर व्यक्तियों की परीक्षा और उनके आयु तथा स्वास्थ्य संबंधी प्रमाणपत्र देना तथा संकटमय कामों में लगे कर्मकारों की चिकित्सकीय देखरेख करना है । इसलिए B–1 । C, अर्धमासिक भुगतान, कर्मचारी प्रतिकर अधिनियम, 1923 का पद है ; उस अधिनियम में अस्थायी निःशक्तता की दशा में प्रतिकर एकमुश्त नहीं, आधे-आधे मास पर दिया जाता है, और उसके पुनर्विलोकन तथा संराशीकरण के लिए अलग धाराएँ हैं । इसलिए C–4 । D, मात्रानुपाती, न्यूनतम मज़दूरी अधिनियम, 1948 का विषय है ; उस अधिनियम की धारा 3 समुचित सरकार को समय-दर के साथ-साथ अनुपाती दर तथा अनुपाती कार्य करने वालों के लिए प्रत्याभूत समय-दर भी नियत करने की शक्ति देती है । इसलिए D–2 । इस प्रश्न का सबसे तेज़ रास्ता यह है कि पहले B तय कर लिया जाए : प्रमाणक शल्य-चिकित्सक को कारखाना अधिनियम से जोड़ते ही विकल्प (c) और (d) दोनों बाहर हो जाते हैं, क्योंकि उन दोनों में B–4 है । इसके बाद केवल A या D में से कोई एक जोड़ी तय करनी शेष रहती है और उत्तर निकल आता है ।
- (a)2 1 4 3 — इस विकल्प का अर्थ है A–2, B–1, C–4, D–3 । इसमें B और C की जोड़ियाँ ठीक हैं, पर A और D आपस में बदल गई हैं । यह कहता है कि विस्थापन भत्ता न्यूनतम मज़दूरी अधिनियम, 1948 का है और मात्रानुपाती कार्य अंतरराज्यिक प्रवासी कर्मकार अधिनियम, 1979 का । दोनों उलटे हैं । विस्थापन भत्ता उसी अधिनियम का विशिष्ट पद है जो एक राज्य से दूसरे राज्य में भेजे गए कर्मकार के लिए बना है — नाम में ही 'विस्थापन' है — और अनुपाती दर का पूरा प्रकरण न्यूनतम मज़दूरी अधिनियम की धारा 3 में है ।
- (c)2 4 1 3 — इस विकल्प का अर्थ है A–2, B–4, C–1, D–3, और इसमें चारों जोड़ियाँ गलत हैं । यह विस्थापन भत्ते को न्यूनतम मज़दूरी अधिनियम से, प्रमाणक शल्य-चिकित्सक को कर्मचारी प्रतिकर अधिनियम से, अर्धमासिक भुगतान को कारखाना अधिनियम से और मात्रानुपाती को प्रवासी कर्मकार अधिनियम से जोड़ देता है । सुमेलन प्रश्नों में ऐसा विकल्प प्रायः रखा जाता है, जिसमें सूची II का क्रम केवल घुमा दिया गया हो ; उसे पहचानने का ढंग यही है कि कोई एक निश्चित जोड़ी जाँच ली जाए, क्योंकि एक जोड़ी के गलत होते ही पूरा विकल्प गिर जाता है ।
- (d)3 4 1 2 — इस विकल्प का अर्थ है A–3, B–4, C–1, D–2 । इसमें A और D ठीक हैं, पर B और C आपस में बदल गई हैं । यह प्रमाणक शल्य-चिकित्सक को कर्मचारी प्रतिकर अधिनियम, 1923 का और अर्धमासिक भुगतान को कारखाना अधिनियम, 1948 का बता देता है । यही इस प्रश्न की सबसे संभावित चूक है, क्योंकि दोनों पद चिकित्सा और क्षतिपूर्ति के आसपास घूमते हैं और मन में जुड़ जाते हैं । भेद स्पष्ट है : शल्य-चिकित्सक कारखाने के भीतर स्वास्थ्य और आयु की जाँच के लिए है, जबकि अर्धमासिक भुगतान चोट के बाद दिए जाने वाले प्रतिकर की एक विधि है ।
सुमेलन प्रश्नों की तैयारी का सबसे कारगर ढंग यह है कि हर श्रम अधिनियम के दो-तीन ऐसे पद याद कर लिए जाएँ जो केवल उसी में मिलते हैं । कारखाना अधिनियम, 1948 के ऐसे पद हैं — अधिभोगी, मुख्य निरीक्षक, प्रमाणक शल्य-चिकित्सक, कल्याण अधिकारी, स्थल मूल्यांकन समिति । अंतरराज्यिक प्रवासी कर्मकार अधिनियम, 1979 के हैं — विस्थापन भत्ता और यात्रा भत्ता । कर्मचारी प्रतिकर अधिनियम, 1923 के हैं — स्थायी तथा अस्थायी निःशक्तता, अर्धमासिक संदाय, संराशीकरण, आयुक्त । न्यूनतम मज़दूरी अधिनियम, 1948 के हैं — न्यूनतम समय-दर, न्यूनतम अनुपाती दर, प्रत्याभूत समय-दर, अनुसूचित नियोजन । इन सूचियों के बन जाने पर सुमेलन के प्रश्न स्मृति के नहीं, पहचान के हो जाते हैं ।
यह प्रश्नपत्र श्रम विधि पर केंद्रित है और सुमेलन उसका नियमित प्रारूप है ; इसी प्रश्नपत्र में पहले भी एक ऐसा ही प्रश्न आ चुका है । यहाँ हिन्दी स्तंभ में दो शब्द ध्यान देने योग्य हैं । पहला, सूची I की चौथी प्रविष्टि 'मात्रानुपाती' है, जो अकेला विशेषण है और जिसके साथ कोई संज्ञा नहीं छपी ; अंग्रेज़ी स्तंभ वहाँ 'Piece work' छापता है, अर्थात् वह काम जिसकी मज़दूरी समय से नहीं, उत्पादित मात्रा से तय होती है । शब्द का अर्थ भी वही है — मात्रा के अनुपात में — पर अकेला पढ़ने पर वह किसी भी अनुपात का बोध करा सकता है । दूसरा, 'प्रमाणक शल्य-चिकित्सक', जहाँ 'प्रमाणक' का अर्थ प्रमाणपत्र देने वाला है । कूट की पंक्ति दोनों स्तंभों में एक जैसी है, क्योंकि वह केवल अंकों की है ।
- विस्थापन भत्ता — अंतरराज्यिक प्रवासी कर्मकार (नियोजन का विनियमन और सेवा-शर्त) अधिनियम, 1979 की धारा 14 ।
- प्रमाणक शल्य-चिकित्सक — कारखाना अधिनियम, 1948 की धारा 10 ; नियुक्ति राज्य सरकार करती है ।
- अर्धमासिक संदाय — कर्मचारी प्रतिकर अधिनियम, 1923 ; अस्थायी निःशक्तता में प्रतिकर आधे-आधे मास पर दिया जाता है ।
- अनुपाती कार्य तथा उसकी दरें — न्यूनतम मज़दूरी अधिनियम, 1948 की धारा 3, जिसमें न्यूनतम समय-दर, न्यूनतम अनुपाती दर और प्रत्याभूत समय-दर तीनों की व्यवस्था है ।
- प्रमाणक शल्य-चिकित्सक का काम किशोर व्यक्तियों की परीक्षा और प्रमाणन तथा संकटमय कामों में लगे कर्मकारों की चिकित्सकीय देखरेख है ।
- कूट की पंक्ति सदैव ऊपर छपे शीर्ष A B C D के क्रम में पढ़ी जाती है ।
- प्रमाणक शल्य-चिकित्सक को कर्मचारी प्रतिकर अधिनियम से जोड़ देना ; वह कारखाना अधिनियम का पद है ।
- अर्धमासिक भुगतान को कारखाना अधिनियम की मज़दूरी-अवधि समझ लेना ; वह प्रतिकर देने की विधि है ।
- 'मात्रानुपाती' को अकेला विशेषण मानकर उसका विषय न पहचानना ; वह अनुपाती कार्य, अर्थात् piece work है ।
सुमेलन प्रश्नों में चारों जोड़ियाँ तय करने की आवश्यकता प्रायः नहीं पड़ती । विकल्प इस तरह बनाए जाते हैं कि दो जोड़ियाँ ठीक कर लेने पर उत्तर निकल आए, इसलिए सबसे पहले वह जोड़ी पकड़नी चाहिए जिस पर पूरा भरोसा हो और फिर विकल्पों में से जो उससे मेल न खाएँ उन्हें काट देना चाहिए । यहाँ वह जोड़ी B है । दूसरी शैली में यही सामग्री सीधे प्रश्न के रूप में आती है — कौन-सा पद किस अधिनियम का है — और तीसरी में किसी पद की परिभाषा या दर पूछ ली जाती है । तीनों की तैयारी एक ही सूची से हो जाती है ।
इस प्रश्न से सीधे संबंधित कोई पूर्व PYQ उपलब्ध नहीं।
- practice — not a real PYQ
कर्मचारी प्रतिकर अधिनियम, 1923 के अधीन अस्थायी निःशक्तता की दशा में अर्धमासिक संदाय मासिक मज़दूरी के कितने प्रतिशत के बराबर होता है ?
- (a)15 प्रतिशत
- (b)25 प्रतिशत
- (c)50 प्रतिशत
- (d)60 प्रतिशत
उत्तर(b) 25 प्रतिशत — अस्थायी निःशक्तता, चाहे पूर्ण हो या आंशिक, की दशा में प्रतिकर मासिक मज़दूरी के पच्चीस प्रतिशत के बराबर अर्धमासिक संदाय के रूप में दिया जाता है ।
- practice — not a real PYQ
प्रमाणक शल्य-चिकित्सक की नियुक्ति निम्नलिखित में से किस अधिनियम के अधीन की जाती है ?
- (a)कारखाना अधिनियम, 1948
- (b)न्यूनतम मज़दूरी अधिनियम, 1948
- (c)औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947
- (d)कर्मचारी प्रतिकर अधिनियम, 1923
उत्तर(a) कारखाना अधिनियम, 1948 — उसकी धारा 10 के अधीन राज्य सरकार अर्हित चिकित्सा व्यवसायियों में से प्रमाणक शल्य-चिकित्सक नियुक्त करती है ।