कारखाना अधिनियम, 1948 के प्रावधानों के अधीन, स्थल मूल्यांकन समिति (साइट अप्रेज़ल कमिटी) के अध्यक्ष की नियुक्ति के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा एक कथन सही है ?
- (a)राज्य का श्रम आयुक्त इसका अध्यक्ष होता है ।
- (b)एक स्वतंत्र व्यक्ति को इसका अध्यक्ष नियुक्त किया जाता है ।
- (c)राज्य का श्रम मंत्री इसका पदेन अध्यक्ष होता है ।
- (d)राज्य का मुख्य निरीक्षक इसका अध्यक्ष होता है ।
सही उत्तर — D, (d) राज्य का मुख्य निरीक्षक इसका अध्यक्ष होता है । कारखाना अधिनियम, 1948 की धारा 41क स्थल मूल्यांकन समिति के गठन की व्यवस्था करती है और उसमें पहला ही नाम राज्य के मुख्य निरीक्षक का है, जो उस समिति का अध्यक्ष होगा । यह समिति राज्य सरकार को सलाह देने के लिए बनती है — जब किसी ऐसे कारखाने की, जिसमें संकटमय प्रक्रिया चलती हो, प्रारंभिक स्थापना अथवा विस्तार के लिए अनुज्ञा माँगी जाती है, तब आवेदन पर विचार करने में । उसमें जल तथा वायु प्रदूषण संबंधी केंद्रीय और राज्य बोर्डों के प्रतिनिधि, राज्य के पर्यावरण विभाग का प्रतिनिधि, भारत सरकार के मौसम विज्ञान विभाग का प्रतिनिधि, व्यावसायिक स्वास्थ्य का एक विशेषज्ञ और राज्य के नगर नियोजन विभाग का प्रतिनिधि होते हैं ; इनके अतिरिक्त राज्य सरकार पाँच तक सदस्य सहयोजित कर सकती है, जिनमें उस संकटमय प्रक्रिया का विशेष ज्ञान रखने वाला वैज्ञानिक और संबंधित स्थानीय प्राधिकारी का प्रतिनिधि सम्मिलित हैं । अध्यक्ष का पद मुख्य निरीक्षक को देने के पीछे तर्क स्पष्ट है : समिति का काम तकनीकी है, और मुख्य निरीक्षक राज्य के कारखाना निरीक्षणालय का प्रमुख होता है, अर्थात् वही अधिकारी जिसके अधीन कारखानों की सुरक्षा का पूरा प्रवर्तन-तंत्र चलता है । यह पूरा अध्याय, जो संकटमय प्रक्रियाओं से संबंधित है, अधिनियम में 1987 के संशोधन से जोड़ा गया था । समिति को आवेदन मिलने से नब्बे दिन के भीतर अपनी सिफ़ारिश राज्य सरकार को देनी होती है ।
- (a)राज्य का श्रम आयुक्त इसका अध्यक्ष होता है । — राज्य का श्रम आयुक्त इस समिति का अध्यक्ष नहीं होता । श्रम आयुक्त राज्य के श्रम विभाग का प्रमुख अधिकारी होता है और अनेक श्रम विधियों में सुलह, प्रवर्तन तथा प्रशासन का काम उसके पास रहता है, इसलिए उसका नाम विश्वसनीय लगता है । पर कारखाना अधिनियम की अपनी पदानुक्रम व्यवस्था अलग है : उसका शीर्ष अधिकारी मुख्य निरीक्षक है, और धारा 41क अध्यक्ष का पद उसी को देती है । किसी अधिनियम का प्रश्न हल करते समय उसी अधिनियम के अपने पदाधिकारी देखने चाहिए, श्रम विभाग के सामान्य पदाधिकारी नहीं ।
- (b)एक स्वतंत्र व्यक्ति को इसका अध्यक्ष नियुक्त किया जाता है । — किसी स्वतंत्र व्यक्ति को अध्यक्ष नियुक्त करने की व्यवस्था इस समिति के लिए नहीं है । ऐसी व्यवस्था कुछ दूसरे निकायों में अवश्य मिलती है, जहाँ निष्पक्षता के लिए बाहरी व्यक्ति को बैठाया जाता है । यहाँ अधिनियम ने वह मार्ग नहीं चुना ; उसने अध्यक्ष को पद के नाम से निर्दिष्ट किया है, व्यक्ति के गुण से नहीं । इसका व्यावहारिक लाभ यह है कि पद बदलने पर भी समिति का गठन अपने आप बना रहता है और उसमें किसी नियुक्ति की आवश्यकता नहीं पड़ती ।
- (c)राज्य का श्रम मंत्री इसका पदेन अध्यक्ष होता है । — राज्य का श्रम मंत्री इस समिति का पदेन अध्यक्ष नहीं होता । यह विकल्प इसलिए लुभावना है कि 'पदेन अध्यक्ष' वाला ढाँचा अनेक सरकारी परिषदों और बोर्डों में मिलता है । पर स्थल मूल्यांकन समिति नीति बनाने वाला निकाय नहीं है ; वह एक विशिष्ट आवेदन पर तकनीकी सलाह देने वाला निकाय है, जिसकी सिफ़ारिश पर राज्य सरकार निर्णय लेती है । ऐसे निकाय की अध्यक्षता मंत्री को देने का अर्थ यह होता कि सलाह देने वाला और निर्णय लेने वाला एक ही हो जाता ।
कारखाना अधिनियम, 1948 में संकटमय प्रक्रियाओं से संबंधित उपबंध 1987 के संशोधन से जोड़े गए और उनका पूरा ढाँचा रोकथाम पर टिका है । धारा 41क स्थल मूल्यांकन समिति बनाती है, जो यह देखती है कि ऐसा कारखाना किस स्थान पर लगाया जा रहा है । उसके आगे की धाराएँ अधिभोगी पर कर्तव्य डालती हैं — सूचना का अनिवार्य प्रकटन, संकटमय प्रक्रिया के संबंध में विशिष्ट उत्तरदायित्व, आपात मानक, रासायनिक तथा विषाक्त पदार्थों के अनुज्ञेय अनावरण की सीमाएँ, सुरक्षा प्रबंधन में कर्मकारों की भागीदारी के लिए सुरक्षा समिति, और आसन्न संकट की चेतावनी देने का कर्मकारों का अधिकार । इनके साथ केंद्र सरकार को जाँच समिति नियुक्त करने की शक्ति भी दी गई है ।
यह प्रश्न प्रश्नपत्र के श्रम विधि खंड का है और कारखाना अधिनियम उसमें सबसे अधिक लौटने वाले अधिनियमों में है ; इसी प्रश्नपत्र में सुरक्षा समिति के गठन पर भी प्रश्न है और आगे सुमेलन में प्रमाणक शल्य-चिकित्सक भी इसी अधिनियम से आता है । संकटमय प्रक्रियाओं वाला अध्याय अस्सी के दशक की औद्योगिक दुर्घटनाओं के बाद जोड़ा गया था, इसलिए उसकी हर धारा किसी न किसी व्यावहारिक चूक को रोकने के लिए बनी है । हिन्दी स्तंभ यहाँ सुविधाजनक है : पुस्तिका 'स्थल मूल्यांकन समिति' के साथ कोष्ठक में 'साइट अप्रेज़ल कमिटी' भी छाप देती है, इसलिए पद पहचानने में कठिनाई नहीं होती । शेष विकल्पों में 'पदेन' का अर्थ ex-officio है, अर्थात् पद के कारण स्वतः ।
- धारा 41क — स्थल मूल्यांकन समिति ; राज्य का मुख्य निरीक्षक उसका अध्यक्ष होता है ।
- समिति राज्य सरकार को संकटमय प्रक्रिया वाले कारखाने की प्रारंभिक स्थापना अथवा विस्तार की अनुज्ञा पर सलाह देती है ।
- सदस्यों में जल तथा वायु प्रदूषण संबंधी केंद्रीय और राज्य बोर्डों, राज्य के पर्यावरण विभाग, भारत सरकार के मौसम विज्ञान विभाग तथा राज्य के नगर नियोजन विभाग के प्रतिनिधि और व्यावसायिक स्वास्थ्य का एक विशेषज्ञ होते हैं ।
- राज्य सरकार पाँच तक सदस्य सहयोजित कर सकती है, जिनमें उस प्रक्रिया का विशेष ज्ञान रखने वाला वैज्ञानिक और स्थानीय प्राधिकारी का प्रतिनिधि सम्मिलित हैं ।
- समिति को आवेदन मिलने से नब्बे दिन के भीतर अपनी सिफ़ारिश देनी होती है ।
- संकटमय प्रक्रियाओं से संबंधित यह पूरा अध्याय अधिनियम में 1987 के संशोधन से जोड़ा गया ।
- श्रम आयुक्त को कारखाना अधिनियम का शीर्ष अधिकारी मान लेना ; वहाँ शीर्ष पद मुख्य निरीक्षक का है ।
- तकनीकी सलाहकार समिति की अध्यक्षता किसी मंत्री को दे देना ।
- स्थल मूल्यांकन समिति और सुरक्षा समिति को एक मान लेना ; पहली स्थान की अनुज्ञा पर सलाह देती है, दूसरी कारखाने के भीतर सुरक्षा प्रबंधन के लिए बनती है ।
इस अधिनियम पर प्रश्न प्रायः तीन ढंग से आते हैं — कौन-सा प्राधिकारी या पद किस काम के लिए है, कौन-सी संख्या किस उपबंध की है, और कौन-सी समिति किस दशा में बनती है । स्थल मूल्यांकन समिति के संदर्भ में तीनों कोण संभव हैं : अध्यक्ष कौन, सिफ़ारिश की अवधि कितनी, और समिति किस दशा में बनती है । तैयारी का सबसे कारगर ढंग यह है कि इस अधिनियम की समितियों और पदाधिकारियों की एक छोटी सारणी बना ली जाए, जिसमें हर प्रविष्टि के सामने धारा, अध्यक्ष और मुख्य कार्य लिखा हो ।
इस प्रश्न से सीधे संबंधित कोई पूर्व PYQ उपलब्ध नहीं।
- practice — not a real PYQ
कारखाना अधिनियम, 1948 के अधीन स्थल मूल्यांकन समिति को आवेदन प्राप्त होने से कितनी अवधि के भीतर अपनी सिफ़ारिश देनी होती है ?
- (a)30 दिन
- (b)60 दिन
- (c)90 दिन
- (d)180 दिन
उत्तर(c) 90 दिन — विहित प्ररूप में आवेदन मिलने की तारीख़ से नब्बे दिन के भीतर समिति को राज्य सरकार को सिफ़ारिश देनी होती है ।
- practice — not a real PYQ
कारखाना अधिनियम, 1948 के अधीन गठित सुरक्षा समिति में किनका प्रतिनिधित्व होता है ?
- (a)केवल प्रबंधन के प्रतिनिधि
- (b)कर्मकारों तथा प्रबंधन के बराबर संख्या में प्रतिनिधि
- (c)केवल कर्मकारों के प्रतिनिधि
- (d)राज्य सरकार द्वारा नामित बाहरी विशेषज्ञ
उत्तर(b) कर्मकारों तथा प्रबंधन के बराबर संख्या में प्रतिनिधि — सुरक्षा प्रबंधन में कर्मकारों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए समिति समान प्रतिनिधित्व पर बनती है ।