किसी नियोजक द्वारा नियोजित कुमार की आयु से संबंधित विवाद को, जो किसी प्रामाणिक दस्तावेज़ के अभाव के कारण उत्पन्न हुआ है, बालक और कुमार श्रम (प्रतिषेध और विनियमन) अधिनियम, 1986 के अधीन निम्नलिखित में से किस एक प्राधिकारी के पास निर्णय के लिए भेजा जा सकता है ?
- (a)विहित चिकित्सा प्राधिकारी
- (b)श्रम न्यायालय
- (c)इस अधिनियम के अधीन नियुक्त निरीक्षक
- (d)समुचित सरकार
सही उत्तर — A, (a) विहित चिकित्सा प्राधिकारी । यह प्रश्न बालक और कुमार श्रम (प्रतिषेध और विनियमन) अधिनियम, 1986 की धारा 10 से बना है, जिसका शीर्षक ही 'आयु के बारे में विवाद' है । वह धारा कहती है कि यदि किसी स्थापन में नियोजित अथवा काम करने की अनुज्ञा प्राप्त बालक या कुमार की आयु के बारे में निरीक्षक और अधिभोगी के बीच कोई प्रश्न उठे, तो विहित चिकित्सा प्राधिकारी द्वारा दिए गए आयु-प्रमाणपत्र के अभाव में वह प्रश्न निरीक्षक द्वारा उसी विहित चिकित्सा प्राधिकारी के पास विनिश्चय के लिए भेजा जाएगा । स्टेम की शर्त 'किसी प्रामाणिक दस्तावेज़ के अभाव के कारण' ठीक इसी 'प्रमाणपत्र के अभाव में' वाली शर्त का दूसरा रूप है । विधायिका ने यह मार्ग इसलिए चुना कि आयु का प्रश्न मूलतः तथ्य का प्रश्न है, विधि का नहीं । जहाँ जन्म का कोई अभिलेख न हो, वहाँ उसे चिकित्सकीय परीक्षण से — अस्थियों की परिपक्वता, दाँतों की स्थिति और शारीरिक विकास देखकर — शीघ्र तय किया जा सकता है, और यह काम किसी न्यायालय की लंबी प्रक्रिया की अपेक्षा एक अधिकृत चिकित्सा प्राधिकारी बहुत तेज़ी से कर सकता है । 'विहित' का अर्थ यही है कि उस प्राधिकारी को समुचित सरकार नियमों द्वारा नियत करती है । यहाँ हिन्दी माध्यम के अभ्यर्थी के लिए एक चेतावनी आवश्यक है : पुस्तिका adolescent के लिए 'कुमार' छापती है, जबकि इस अधिनियम के लिए प्रचलित हिन्दी नाम में 'किशोर' मिलता है, और साधारण हिन्दी में 'कुमार' का अर्थ बालक या युवक होता है । इस अधिनियम में 'कुमार' उसे कहते हैं जिसने चौदहवाँ वर्ष पूरा कर लिया हो पर अठारहवाँ नहीं, और 'बालक' उसे जिसने चौदहवाँ वर्ष पूरा न किया हो ।
- (b)श्रम न्यायालय — श्रम न्यायालय इस अधिनियम के अधीन आयु का विवाद तय करने वाला फ़ोरम नहीं है । श्रम न्यायालय औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 के अधीन गठित होता है और वहाँ औद्योगिक विवाद — जैसे पदच्युति, छँटनी, स्थायी आदेशों की व्याख्या — सुने जाते हैं । यहाँ विवाद पक्षों के अधिकारों का नहीं, एक तथ्य का है, और उसे तय करने के लिए साक्ष्य विधिक नहीं, चिकित्सकीय है । यही कारण है कि धारा 10 इस प्रश्न को न्यायालय से हटाकर सीधे एक चिकित्सा प्राधिकारी के पास भेजती है ।
- (c)इस अधिनियम के अधीन नियुक्त निरीक्षक — इस अधिनियम के अधीन नियुक्त निरीक्षक इस प्रश्न को तय नहीं कर सकता, और कारण बहुत सीधा है : धारा 10 के शब्दों में विवाद उठता ही निरीक्षक और अधिभोगी के बीच है, इसलिए निरीक्षक स्वयं उसका एक पक्ष है । जो पक्ष हो वही निर्णायक भी हो जाए, यह न्याय के मूल सिद्धांत के विरुद्ध है । धारा उसे निर्णायक नहीं, प्रेषक बनाती है — प्रश्न उसी के द्वारा चिकित्सा प्राधिकारी के पास भेजा जाता है । निरीक्षक का काम प्रवर्तन है : वह स्थापन में प्रवेश कर सकता है, अभिलेख देख सकता है और उल्लंघन पर कार्रवाई आरंभ कर सकता है ।
- (d)समुचित सरकार — समुचित सरकार की भूमिका इस प्रकरण में है, पर वह निर्णय की नहीं । वही नियम बनाकर यह विहित करती है कि कौन चिकित्सा प्राधिकारी होगा, वही निरीक्षक नियुक्त करती है और वही अधिनियम के प्रवर्तन की व्यवस्था करती है । किसी एक बालक या कुमार की आयु के बारे में उठे विवाद पर वह स्वयं नहीं बैठती । यह भेद अनेक श्रम विधियों में दिखता है — सरकार ढाँचा बनाती है और विनिश्चय उस ढाँचे में नियत प्राधिकारी करता है ; दोनों को एक मान लेना सामान्य चूक है ।
बालक और कुमार श्रम (प्रतिषेध और विनियमन) अधिनियम, 1986 का वर्तमान रूप 2016 के संशोधन से बना, जिसने उसके नाम में 'कुमार' जोड़ा और व्यवस्था को दो स्तरों में बाँट दिया । पहला स्तर बालक का है — जिसने चौदहवाँ वर्ष पूरा न किया हो, अथवा शिक्षा के अधिकार अधिनियम, 2009 में विनिर्दिष्ट आयु, जो अधिक हो ; उसका किसी भी व्यवसाय या प्रक्रिया में नियोजन प्रतिषिद्ध है, जिसमें पारिवारिक उद्यम में विद्यालय के समय के बाद सहायता जैसी सीमित छूटें हैं । दूसरा स्तर कुमार का है — जिसने चौदहवाँ वर्ष पूरा कर लिया हो पर अठारहवाँ नहीं ; उसका नियोजन संकटमय व्यवसायों और प्रक्रियाओं में प्रतिषिद्ध है । इसी कारण आयु का प्रश्न इस अधिनियम में केंद्रीय है : आयु तय हुए बिना यह तय नहीं हो सकता कि कौन-सा प्रतिषेध लागू होता है ।
यह प्रश्न प्रश्नपत्र के श्रम विधि खंड का है, जो इस पूरे प्रश्नपत्र का केंद्र है, और उसकी शैली वही है जो ऐसे प्रश्नों में सबसे अधिक चलती है — एक विशिष्ट स्थिति देकर सक्षम प्राधिकारी पूछना । चारों विकल्प वास्तविक प्राधिकारी हैं, इसलिए अनुमान से काम नहीं चलता ; धारा याद होनी चाहिए । ध्यान देने योग्य बात यह है कि स्टेम दोनों स्तंभों में 'नियोजक' अथवा 'employer' शब्द रखता है, जबकि धारा 10 का अपना शब्द 'अधिभोगी' यानी occupier है — अर्थ में अंतर नहीं पड़ता, पर मूल पाठ खोजते समय यह जान लेना उपयोगी है । शब्दावली की दूसरी बात 'विहित' है, जो श्रम विधियों में बार-बार आता है और जिसका अर्थ सदैव यही होता है : नियमों द्वारा निर्धारित ।
- धारा 10 — आयु के बारे में विवाद निरीक्षक द्वारा विहित चिकित्सा प्राधिकारी के पास विनिश्चय के लिए भेजा जाता है ।
- यह मार्ग तभी अपनाया जाता है जब विहित चिकित्सा प्राधिकारी द्वारा दिया गया आयु-प्रमाणपत्र उपलब्ध न हो ।
- धारा 10 के शब्दों में विवाद निरीक्षक और अधिभोगी के बीच उठता है, इसलिए निरीक्षक स्वयं उसका निर्णायक नहीं हो सकता ।
- 'कुमार' — जिसने चौदहवाँ वर्ष पूरा कर लिया हो पर अठारहवाँ नहीं ; 'बालक' — जिसने चौदहवाँ वर्ष पूरा न किया हो ।
- बालक का किसी भी व्यवसाय में नियोजन प्रतिषिद्ध है ; कुमार का नियोजन संकटमय व्यवसायों और प्रक्रियाओं में प्रतिषिद्ध है ।
- अधिनियम का वर्तमान नाम 2016 के संशोधन से आया, जिसने उसमें 'कुमार' का स्तर जोड़ा ; 'विहित' का अर्थ है नियमों द्वारा निर्धारित ।
- निरीक्षक को निर्णायक मान लेना ; धारा उसे प्रेषक बनाती है, क्योंकि वह स्वयं एक पक्ष है ।
- 'कुमार' को साधारण अर्थ में बालक समझ लेना ; इस अधिनियम में उसकी आयु-सीमा चौदह से अठारह वर्ष है ।
- आयु के तथ्यात्मक प्रश्न को श्रम न्यायालय का विषय मान लेना ।
श्रम विधियों में यह प्रकरण दो ढंग से पूछा जाता है — कौन-सा प्राधिकारी सक्षम है, और कौन-सी आयु-सीमा किस श्रेणी की है । कभी-कभी प्रश्न परिभाषा से आता है, जैसे 'बालक' और 'कुमार' का अंतर, और कभी दंड या अपवाद से । ऐसे प्रश्नों में सबसे उपयोगी तैयारी यह है कि हर अधिनियम के साथ उसका सक्षम प्राधिकारी और उसकी विशिष्ट आयु-सीमाएँ एक पंक्ति में लिख ली जाएँ, क्योंकि विकल्पों में सदैव दूसरे अधिनियमों के वास्तविक प्राधिकारी ही रखे जाते हैं और वे सुनने में उतने ही विश्वसनीय लगते हैं ।
इस प्रश्न से सीधे संबंधित कोई पूर्व PYQ उपलब्ध नहीं।
- practice — not a real PYQ
बालक और कुमार श्रम (प्रतिषेध और विनियमन) अधिनियम, 1986 के अनुसार 'कुमार' कौन है ?
- (a)वह व्यक्ति जिसने बारहवाँ वर्ष पूरा कर लिया हो पर सोलहवाँ नहीं
- (b)वह व्यक्ति जिसने चौदहवाँ वर्ष पूरा कर लिया हो पर अठारहवाँ नहीं
- (c)वह व्यक्ति जिसने सोलहवाँ वर्ष पूरा कर लिया हो पर इक्कीसवाँ नहीं
- (d)वह व्यक्ति जिसने चौदहवाँ वर्ष पूरा न किया हो
उत्तर(b) वह व्यक्ति जिसने चौदहवाँ वर्ष पूरा कर लिया हो पर अठारहवाँ नहीं — अंतिम विकल्प 'बालक' की परिभाषा है ।
- practice — not a real PYQ
इसी अधिनियम की धारा 10 के अनुसार आयु संबंधी प्रश्न किनके बीच उठने पर विहित चिकित्सा प्राधिकारी के पास भेजा जाता है ?
- (a)निरीक्षक और अधिभोगी के बीच
- (b)बालक और उसके माता-पिता के बीच
- (c)दो निरीक्षकों के बीच
- (d)समुचित सरकार और अधिभोगी के बीच
उत्तर(a) निरीक्षक और अधिभोगी के बीच — यही वह स्थिति है जिसमें निरीक्षक स्वयं पक्ष होने के कारण प्रश्न को चिकित्सा प्राधिकारी के पास भेजता है ।