निम्नलिखित में से कौन-सा/से जलवायु परिवर्तन पर भारत के ‘पंचामृत’ दृष्टिकोण का/के तत्त्व है/हैं ? 1. भारत 2030 तक अपने ग़ैर-जीवाश्म ऊर्जा की 500 GW की क्षमता तक पहुँच जाएगा । 2. भारत 2030 तक अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं का 50% नवीकरणीय ऊर्जा से पूरा करेगा । नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए :
- (a)केवल 1
- (b)केवल 2
- (c)1 और 2 दोनों
- (d)न तो 1, न ही 2
सही उत्तर — C, (c) 1 और 2 दोनों । 'पंचामृत' वह पाँच-सूत्री संकल्प है जो भारत ने ग्लासगो में हुए जलवायु सम्मेलन COP26 में, नवंबर 2021 में, प्रस्तुत किया था । नाम पूजा-विधि के उस मिश्रण से लिया गया है जो पाँच वस्तुओं से बनता है, और यहाँ उसका अर्थ पाँच जलवायु लक्ष्यों का समुच्चय है । वे पाँच ये हैं — 2030 तक ग़ैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता 500 GW तक पहुँचाना ; 2030 तक ऊर्जा आवश्यकताओं का 50 प्रतिशत नवीकरणीय स्रोतों से पूरा करना ; अब से 2030 तक कुल प्रक्षेपित कार्बन उत्सर्जन में एक अरब टन की कमी लाना ; 2030 तक अर्थव्यवस्था की कार्बन गहनता 45 प्रतिशत घटाना ; और 2070 तक निवल शून्य उत्सर्जन का लक्ष्य प्राप्त करना । कथन 1 इस सूची का पहला संकल्प है और कथन 2 दूसरा, इसलिए दोनों 'पंचामृत' के तत्त्व हैं और उत्तर 'दोनों' ही बनता है । इस प्रश्न में कोई चालाकी नहीं है — न कोई संख्या बदली गई है, न कोई वर्ष । जो अभ्यर्थी पाँचों संकल्प देख चुका है वह इसे कुछ ही क्षणों में हल कर लेता है । एक बात जोड़ लेना उपयोगी है : इनमें से दो लक्ष्य आगे चलकर अगस्त 2022 में संयुक्त राष्ट्र को सौंपे गए संशोधित राष्ट्रीय निर्धारित योगदान में औपचारिक रूप से दर्ज किए गए, जहाँ 50 प्रतिशत वाला लक्ष्य 'संस्थापित विद्युत् क्षमता का लगभग 50 प्रतिशत ग़ैर-जीवाश्म स्रोतों से' के रूप में लिखा गया । प्रश्न ग्लासगो की घोषणा के शब्दों का अनुसरण करता है, इसलिए कथन 2 वैसा ही है जैसा वहाँ कहा गया था ।
- (a)केवल 1 — 'केवल 1' तभी सही होता जब 50 प्रतिशत नवीकरणीय ऊर्जा वाला संकल्प 'पंचामृत' का अंग न होता । वह अंग है, और पाँचों में दूसरे स्थान पर है । यह विकल्प उस अभ्यर्थी को फँसाता है जिसे केवल 500 GW वाली संख्या स्मरण रह गई हो, क्योंकि वही सबसे अधिक उद्धृत की जाती है । ध्यान रहे कि 500 GW और 50 प्रतिशत दो अलग-अलग लक्ष्य हैं — एक क्षमता का पूर्ण अंक है और दूसरा अनुपात, और दोनों की तिथि 2030 है ।
- (b)केवल 2 — 'केवल 2' भी अधूरा है, क्योंकि 500 GW ग़ैर-जीवाश्म क्षमता वाला संकल्प 'पंचामृत' का पहला ही तत्त्व है । यह विकल्प उस भ्रम से चुना जाता है कि 500 GW वाला लक्ष्य कहीं और घोषित हुआ था । वस्तुतः इससे पहले भारत के घोषित लक्ष्य 2022 तक 175 GW और 2030 तक 450 GW नवीकरणीय क्षमता के थे ; ग्लासगो में उसी को बढ़ाकर 500 GW किया गया और उसका दायरा नवीकरणीय से ग़ैर-जीवाश्म तक फैलाया गया, जिसमें नाभिकीय और बड़ी जल-विद्युत् भी आ जाती हैं ।
- (d)न तो 1, न ही 2 — 'न तो 1, न ही 2' तब सही होता जब दोनों कथन किसी और नीति के होते । ऐसा नहीं है — दोनों 'पंचामृत' की मूल घोषणा से हैं । यह विकल्प उस अभ्यर्थी को लुभा सकता है जो 'पंचामृत' को केवल निवल शून्य उत्सर्जन वाले 2070 के लक्ष्य से जोड़कर देखता है और शेष चार को अलग-अलग घोषणाएँ मान लेता है । वास्तव में 2070 वाला लक्ष्य पाँचों में अंतिम है, पहला नहीं, और शेष चार उसी संकल्प के अंग हैं ।
पेरिस समझौते के अधीन हर देश अपने जलवायु लक्ष्य स्वयं तय करके संयुक्त राष्ट्र को सौंपता है ; इन्हें राष्ट्रीय निर्धारित योगदान कहते हैं और हर कुछ वर्ष में इन्हें और कड़ा किया जाता है । भारत ने COP26 में जो पाँच संकल्प रखे उन्हें 'पंचामृत' कहा गया, और वे तीन प्रकार के हैं — क्षमता का लक्ष्य (500 GW ग़ैर-जीवाश्म), अनुपात का लक्ष्य (ऊर्जा आवश्यकताओं का 50 प्रतिशत नवीकरणीय स्रोतों से), और उत्सर्जन के लक्ष्य (एक अरब टन की कमी, कार्बन गहनता में 45 प्रतिशत की कमी तथा 2070 तक निवल शून्य) । ध्यान देने योग्य भेद यह है कि 'नवीकरणीय' और 'ग़ैर-जीवाश्म' पर्याय नहीं हैं : ग़ैर-जीवाश्म में नाभिकीय ऊर्जा और बड़ी जल-विद्युत् भी आती हैं ।
जलवायु परिवर्तन इस प्रश्नपत्र के पर्यावरण उपखंड की स्थायी सामग्री है और 'पंचामृत' उसका सबसे अधिक पूछा जाने वाला अंश है, क्योंकि उसमें पाँच स्पष्ट संख्याएँ और तीन तिथियाँ हैं । प्रश्न कथन-आधारित है, इसलिए हर कथन को अलग-अलग परखना पड़ता है और फिर कूट में से उपयुक्त संयोजन चुनना पड़ता है । यहाँ हिन्दी और अंग्रेज़ी दोनों स्तंभ एक ही बात कहते हैं ; केवल हिन्दी स्तंभ के पहले कथन में 'अपने ग़ैर-जीवाश्म ऊर्जा की' छपा है, जहाँ व्याकरण की दृष्टि से 'अपनी' चाहिए था । यह छपाई की चूक है और अर्थ पर कोई प्रभाव नहीं डालती ।
- 'पंचामृत' की घोषणा भारत ने ग्लासगो के COP26 में, नवंबर 2021 में की ।
- पहला संकल्प — 2030 तक ग़ैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता 500 GW ।
- दूसरा संकल्प — 2030 तक ऊर्जा आवश्यकताओं का 50 प्रतिशत नवीकरणीय स्रोतों से ।
- तीसरा संकल्प — 2030 तक कुल प्रक्षेपित कार्बन उत्सर्जन में एक अरब टन की कमी ।
- चौथा संकल्प — 2030 तक अर्थव्यवस्था की कार्बन गहनता में 45 प्रतिशत की कमी ; पाँचवाँ — 2070 तक निवल शून्य उत्सर्जन ।
- इससे पहले भारत के घोषित नवीकरणीय क्षमता लक्ष्य 2022 तक 175 GW और 2030 तक 450 GW के थे ।
- 500 GW को नवीकरणीय क्षमता का लक्ष्य मान लेना ; वह ग़ैर-जीवाश्म क्षमता का है ।
- पुराने 450 GW वाले लक्ष्य को ही 'पंचामृत' का अंग मान लेना ।
- निवल शून्य उत्सर्जन का वर्ष 2050 लिख देना ; भारत का लक्ष्य 2070 है ।
इस प्रकरण पर प्रश्न प्रायः संख्याओं पर टिके होते हैं — 500 GW, 50 प्रतिशत, एक अरब टन, 45 प्रतिशत और 2070 । इन्हें आपस में बदलकर पूछना सबसे प्रचलित शैली है । दूसरी शैली वही है जो यहाँ है : दो कथन देकर यह पूछना कि वे 'पंचामृत' के तत्त्व हैं या नहीं । तीसरी शैली अवधारणा की है, जैसे नवीकरणीय और ग़ैर-जीवाश्म का अंतर, या कार्बन गहनता का अर्थ । तैयारी के लिए पाँचों संकल्पों को क्रम से, अपनी संख्या और तिथि सहित, एक बार लिख लेना पर्याप्त है ।
इस प्रश्न से सीधे संबंधित कोई पूर्व PYQ उपलब्ध नहीं।
- practice — not a real PYQ
'पंचामृत' के अनुसार भारत किस वर्ष तक निवल शून्य उत्सर्जन का लक्ष्य प्राप्त करेगा ?
- (a)2030
- (b)2050
- (c)2060
- (d)2070
उत्तर(d) 2070 — यह 'पंचामृत' का पाँचवाँ और सबसे दूरस्थ लक्ष्य है ; 2030 वाले लक्ष्य क्षमता, अनुपात और उत्सर्जन से संबंधित हैं ।
- practice — not a real PYQ
'पंचामृत' के अनुसार भारत 2030 तक अपनी ग़ैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता कितनी करेगा ?
- (a)175 GW
- (b)450 GW
- (c)500 GW
- (d)1000 GW
उत्तर(c) 500 GW — 175 GW और 450 GW इससे पहले घोषित नवीकरणीय क्षमता के लक्ष्य थे, जिन्हें ग्लासगो में बढ़ाकर 500 GW ग़ैर-जीवाश्म क्षमता कर दिया गया ।