यदि एक तार की लंबाई को, जिसमें धारा प्रवाहित है, आधा कर दिया जाए, तो दिए गए विभवान्तर के लिए, तार में प्रवाहित धारा :
- (a)दुगुनी हो जाएगी
- (b)आधी हो जाएगी
- (c)अपरिवर्तित रहेगी
- (d)शून्य हो जाएगी
सही उत्तर — A, (a) दुगुनी हो जाएगी । स्टेम में एक शर्त बहुत सावधानी से रखी गई है — 'दिए गए विभवान्तर के लिए' — अर्थात् तार के दोनों सिरों के बीच की वोल्टता वही रहेगी, बदलेगी केवल तार की लंबाई । किसी तार का प्रतिरोध R = ρL/A से मिलता है, जहाँ ρ पदार्थ की प्रतिरोधकता है, L लंबाई और A अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल । तार को छोटा करने पर न पदार्थ बदलता है और न मोटाई, इसलिए ρ और A दोनों वही रहते हैं और प्रतिरोध केवल लंबाई के अनुपात में घटता है । लंबाई आधी हुई तो प्रतिरोध भी आधा रह गया । अब ओम के नियम I = V/R में V को स्थिर रखिए और R को आधा कर दीजिए — भाजक आधा होने पर भागफल दुगुना हो जाता है, अतः धारा दुगुनी हो जाएगी । इसे और सहज ढंग से यों देखिए : प्रतिरोध इलेक्ट्रॉनों के प्रवाह में आने वाली बाधा है, और तार जितना लंबा होगा उतनी ही अधिक दूरी तक इलेक्ट्रॉनों को धातु के आयनों से टकराते हुए चलना पड़ेगा । आधी दूरी का अर्थ है आधी बाधा, और उतनी ही वोल्टता पर दुगुना प्रवाह । एक मान्यता स्पष्ट कर देना उचित है : यहाँ तार को काटकर छोटा करने की बात है, जिससे मोटाई ज्यों की त्यों रहती है । यदि तार को दबाकर या खींचकर लंबाई बदली जाए तो आयतन स्थिर रहने के कारण अनुप्रस्थ काट भी बदल जाती है और गणना दूसरी हो जाती है ; स्टेम ऐसा कुछ नहीं कहता, इसलिए मानक पाठ यही है ।
- (b)आधी हो जाएगी — धारा आधी तब होती जब प्रतिरोध दुगुना हो जाता, अर्थात् तार की लंबाई दुगुनी की जाती । यहाँ ठीक उलटा हुआ है । यह विकल्प उस अभ्यर्थी को फँसाता है जो 'आधा' शब्द स्टेम से उठाकर सीधे उत्तर में रख देता है, या जो धारा को लंबाई के अनुक्रमानुपाती मान बैठता है । वास्तव में प्रतिरोध लंबाई के अनुक्रमानुपाती है और धारा प्रतिरोध के व्युत्क्रमानुपाती, इसलिए धारा लंबाई के व्युत्क्रमानुपाती हो जाती है — लंबाई घटे तो धारा बढ़ेगी ।
- (c)अपरिवर्तित रहेगी — धारा तभी अपरिवर्तित रहती जब स्रोत धारा को स्थिर रखने वाला होता । स्टेम कहता है कि विभवांतर दिया हुआ है, धारा नहीं — और जब वोल्टता स्थिर हो तथा प्रतिरोध बदल जाए, तो ओम के नियम के अनुसार धारा बदलनी ही है । यह विकल्प उस भ्रम से आता है कि धारा परिपथ का कोई स्थायी गुण है । वास्तव में धारा परिणाम है — वोल्टता और प्रतिरोध दोनों मिलकर उसे तय करते हैं, और दोनों में से कोई एक भी बदले तो वह बदल जाती है ।
- (d)शून्य हो जाएगी — धारा शून्य तभी होती जब परिपथ खुल जाता, अर्थात् चालन का मार्ग ही टूट जाता, या तार का प्रतिरोध अनंत हो जाता । तार की लंबाई घटाने से न मार्ग टूटता है और न प्रतिरोध बढ़ता है ; उलटे प्रतिरोध घटता है और प्रवाह सुगम होता है । इसलिए यह विकल्प न केवल गलत है, बल्कि परिवर्तन की दिशा के भी विपरीत है ।
चालक के प्रतिरोध का सूत्र R = ρL/A है । इससे तीन बातें निकलती हैं । पहली — प्रतिरोध लंबाई के अनुक्रमानुपाती है, इसलिए लंबा तार अधिक बाधा डालता है । दूसरी — प्रतिरोध अनुप्रस्थ काट के व्युत्क्रमानुपाती है, इसलिए मोटा तार कम बाधा डालता है ; यही कारण है कि भारी धारा के लिए मोटी केबल लगाई जाती है । तीसरी — प्रतिरोधकता ρ पदार्थ का गुण है और आकार से नहीं बदलती, यद्यपि वह तापमान के साथ बदलती है । प्रतिरोध और ओम के नियम को मिलाकर परिणाम यह निकलता है कि स्थिर वोल्टता पर धारा लंबाई के व्युत्क्रमानुपाती और अनुप्रस्थ काट के अनुक्रमानुपाती होती है ।
यह प्रश्न सामान्य विज्ञान के भौतिकी उपखंड का है और उसी शृंखला में है जिसमें इसके ठीक पहले वाला प्रश्न बल्ब की शक्ति के बारे में है — दोनों की जड़ ओम का नियम ही है । ऐसे प्रश्नों में सबसे महत्वपूर्ण काम यह पहचानना है कि कौन-सी राशि स्थिर रखी गई है । यहाँ विभवांतर स्थिर है, इसलिए धारा बदलेगी ; यदि स्टेम में धारा स्थिर रखी गई होती तो विभवांतर बदलता । हिन्दी स्तंभ 'potential difference' के लिए 'विभवान्तर' छापता है, जो मानक पद है, और शेष सारी शब्दावली भी पाठ्यपुस्तक वाली ही है ; इसलिए इस प्रश्न में दोनों स्तंभ पूरी तरह एक ही बात कहते हैं ।
- R = ρL/A — प्रतिरोध लंबाई के अनुक्रमानुपाती और अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल के व्युत्क्रमानुपाती होता है ।
- लंबाई आधी करने पर, मोटाई वही रहते हुए, प्रतिरोध आधा रह जाता है ।
- ओम का नियम I = V/R ; स्थिर वोल्टता पर प्रतिरोध आधा होने से धारा दुगुनी हो जाती है ।
- प्रतिरोधकता ρ पदार्थ का गुण है, आकार का नहीं ; वह लंबाई या मोटाई बदलने से नहीं बदलती ।
- तार को खींचकर लंबाई बदलने पर आयतन स्थिर रहने के कारण अनुप्रस्थ काट भी बदल जाती है, और तब प्रतिरोध लंबाई के वर्ग के अनुक्रमानुपाती हो जाता है ।
- मोटे तार का प्रतिरोध कम होता है ; इसीलिए अधिक धारा ले जाने वाली केबल मोटी बनाई जाती है ।
- स्टेम का 'आधा' शब्द सीधे उत्तर में उठा लेना ; लंबाई आधी होने का अर्थ धारा आधी होना नहीं है ।
- यह भूल जाना कि यहाँ विभवांतर स्थिर रखा गया है, धारा नहीं ।
- तार काटने और तार खींचने की दो अलग-अलग दशाओं को एक मान लेना ।
इस प्रकरण पर प्रश्न प्रायः अनुपात के रूप में आते हैं — लंबाई, मोटाई या व्यास बदलकर प्रतिरोध या धारा पर पड़ने वाला प्रभाव पूछना । इसका सबसे कठिन रूप वह है जिसमें तार को खींचकर लंबा किया जाता है और आयतन स्थिर रहता है ; वहाँ लंबाई दुगुनी होने पर अनुप्रस्थ काट आधी हो जाती है और प्रतिरोध चार गुना । दूसरा प्रचलित रूप यह है कि किसी तार को दो या तीन बराबर भागों में काटकर उन्हें समांतर जोड़ दिया जाए और कुल प्रतिरोध पूछा जाए । हर दशा में विधि एक ही है : पहले R = ρL/A से नया प्रतिरोध निकालिए, फिर ओम का नियम लगाइए ।
इस प्रश्न से सीधे संबंधित कोई पूर्व PYQ उपलब्ध नहीं।
- practice — not a real PYQ
किसी तार का व्यास दुगुना कर दिया जाए और उसकी लंबाई वही रहे, तो उसका प्रतिरोध कितना रह जाएगा ?
- (a)दुगुना
- (b)आधा
- (c)एक-चौथाई
- (d)चौगुना
उत्तर(c) एक-चौथाई — व्यास दुगुना होने पर अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल चार गुना हो जाता है, और R क्षेत्रफल के व्युत्क्रमानुपाती है ।
- practice — not a real PYQ
किसी तार को खींचकर उसकी लंबाई दुगुनी कर दी जाती है और आयतन अपरिवर्तित रहता है । उसका प्रतिरोध कितना गुना हो जाएगा ?
- (a)2 गुना
- (b)4 गुना
- (c)8 गुना
- (d)16 गुना
उत्तर(b) 4 गुना — लंबाई दुगुनी होने पर अनुप्रस्थ काट आधी रह जाती है, इसलिए R = ρL/A में अंश दुगुना और हर आधा होकर प्रतिरोध चार गुना हो जाता है ।