110 V पर 100 W के रूप में निर्धारित एक तापदीप्त बल्ब 220 V विद्युत् प्रदाय से जुड़ा है । इस बल्ब में क्षय होने वाली शक्ति क्या होगी ?
- (a)50 W
- (b)100 W
- (c)200 W
- (d)400 W
सही उत्तर — D, (d) 400 W । बल्ब पर लिखा '110 V, 100 W' कोई स्थायी गुण नहीं है ; वह एक शर्त के साथ दिया गया कथन है — यदि इसे 110 V पर चलाया जाए तो यह 100 W लेगा । बल्ब का जो अंक हर दशा में वही रहता है, वह उसके तंतु का प्रतिरोध है, और अंकित मानों से उसे निकाला जा सकता है । P = V²/R से R = V²/P = (110 × 110)/100 = 12100/100 = 121 ओम । अब इसी बल्ब को 220 V पर जोड़ने पर प्रतिरोध को स्थिर मानते हुए P = V²/R = (220 × 220)/121 = 48400/121 = 400 W । गणना किए बिना भी उत्तर निकल आता है : प्रतिरोध स्थिर हो तो शक्ति वोल्टता के वर्ग के अनुक्रमानुपाती होती है, यहाँ वोल्टता ठीक दुगुनी हुई है, इसलिए शक्ति चौगुनी — 100 का चार गुना 400 । यही इस प्रश्न का पूरा तर्क है, और विकल्पों में 50, 100 तथा 200 इसीलिए रखे गए हैं कि जो अभ्यर्थी वर्ग लगाना भूल जाए वह उन्हीं में से कोई चुन ले । एक बात ईमानदारी से जोड़ लेनी चाहिए, क्योंकि वही इस प्रश्न की आदर्शीकृत मान्यता है : वास्तविक तंतु का प्रतिरोध तापमान बढ़ने पर बढ़ता है, और दुगुनी वोल्टता पर साधारण बल्ब क्षण भर में जल जाएगा । पाठ्यपुस्तक का यह प्रश्न प्रतिरोध को स्थिर मानकर पूछा गया है और उसी मान्यता पर 400 W निकलता है । पुस्तिका जिसे 'क्षय होने वाली शक्ति' कहती है वह अंग्रेज़ी का dissipated power है, अर्थात् वह शक्ति जो बल्ब में ऊष्मा और प्रकाश बनकर व्यय होती है, कोई हानि या ह्रास नहीं ।
- (a)50 W — 50 W तब निकलेगा जब कोई शक्ति को वोल्टता के व्युत्क्रमानुपाती मान ले — वोल्टता दुगुनी हुई तो शक्ति आधी । यह मान्यता स्थिर शक्ति वाले उपकरणों, जैसे परिणामित्र (transformer), पर लागू होती है, जहाँ वोल्टता बढ़ने पर धारा घट जाती है । बल्ब ऐसा उपकरण नहीं है ; वह स्थिर प्रतिरोध वाला उपकरण है, इसलिए वोल्टता बढ़ने पर उसमें धारा भी बढ़ती है और शक्ति दोनों के गुणनफल के रूप में और तेज़ी से बढ़ती है ।
- (b)100 W — 100 W तब आएगा जब कोई अंकित शक्ति को बल्ब का स्थायी गुण मान ले — यानी यह समझ ले कि बल्ब जहाँ भी जोड़ा जाए, 100 W ही खींचेगा । अंकन का अर्थ यह नहीं है । '110 V पर 100 W' का अर्थ है कि 100 W का उपभोग केवल 110 V की शर्त पर होगा ; वोल्टता बदलते ही उपभोग भी बदल जाएगा । बल्ब का वास्तविक स्थिरांक उसका प्रतिरोध 121 ओम है, और अंकित मान उसी को निकालने का साधन हैं ।
- (c)200 W — 200 W तब निकलेगा जब कोई शक्ति को वोल्टता के सीधे अनुक्रमानुपाती मान ले — वोल्टता दुगुनी हुई तो शक्ति भी दुगुनी । यह सबसे लुभावनी चूक है, क्योंकि आधा तर्क सही है : वोल्टता बढ़ने पर शक्ति सचमुच बढ़ती है । पर P = V²/R में वोल्टता वर्ग में आती है, धारा स्वयं V/R के अनुसार दुगुनी हो जाती है, और शक्ति वोल्टता तथा धारा दोनों का गुणनफल है — दो गुना का दो गुना, अर्थात् चार गुना । इसीलिए उत्तर 200 W नहीं, 400 W है ।
विद्युत् शक्ति के तीन रूप एक ही सूत्र के हैं — P = VI, और ओम के नियम V = IR को रखने पर P = I²R तथा P = V²/R । कौन-सा रूप उठाना है, यह इस पर निर्भर करता है कि दशा बदलने पर कौन-सी राशि स्थिर रह रही है । किसी बल्ब को सीधे प्रदाय से जोड़ने पर वोल्टता निर्धारित रहती है और प्रतिरोध उपकरण का गुण है, इसलिए P = V²/R उपयुक्त है और शक्ति वोल्टता के वर्ग के अनुक्रमानुपाती हो जाती है । उपकरण पर छपे अंकित मान सदैव जोड़े में पढ़े जाते हैं — इतनी वोल्टता पर इतनी शक्ति — और उन्हीं दोनों से उसका प्रतिरोध निकाला जाता है ।
यह प्रश्न सामान्य विज्ञान के भौतिकी उपखंड का है और वही मानक प्रकार है जो विद्यालय स्तर की पाठ्यपुस्तक से सीधे उठता है । इसकी व्यावहारिक उपयोगिता भी है : भारत में घरेलू प्रदाय 230 V के आसपास है, जबकि अनेक देशों में 110–120 V, और यही कारण है कि विदेश से लाया गया उपकरण यहाँ सीधे जोड़ने पर जल जाता है — वह चार गुना शक्ति खींच बैठता है । हिन्दी स्तंभ में एक शब्द ध्यान देने योग्य है : 'निर्धारित' यहाँ rated के अर्थ में आया है, अर्थात् निर्माता द्वारा अंकित मान, न कि किसी के द्वारा तय किया गया कोई नियम । अंग्रेज़ी स्तंभ वही बात 'rated as 100 W at 110 V' कहकर कहता है, इसलिए दोनों स्तंभों का अर्थ एक ही है ।
- अंकित मानों से प्रतिरोध निकलता है : R = V²/P ; यहाँ R = 110²/100 = 121 ओम ।
- प्रतिरोध स्थिर हो तो P = V²/R, अर्थात् शक्ति वोल्टता के वर्ग के अनुक्रमानुपाती होती है ।
- वोल्टता दुगुनी होने पर शक्ति चौगुनी हो जाती है ; 100 W का बल्ब 220 V पर 400 W लेगा ।
- शक्ति के तीन समतुल्य रूप — P = VI, P = I²R, P = V²/R ।
- अंकित मान जोड़े में पढ़े जाते हैं ; '110 V, 100 W' का अर्थ है कि 100 W का उपभोग केवल 110 V पर होगा ।
- यह गणना तंतु का प्रतिरोध स्थिर मानकर की जाती है ; वास्तव में तंतु का प्रतिरोध तापमान के साथ बढ़ता है ।
- अंकित शक्ति को हर वोल्टता पर स्थिर मान लेना ।
- शक्ति को वोल्टता के अनुक्रमानुपाती मानकर 200 W लिख देना ; वोल्टता वर्ग में आती है ।
- प्रतिरोध निकालते समय P = V²/R के बदले P = VR जैसा कोई गलत रूप उठा लेना ।
इस प्रकरण पर प्रश्न प्रायः तीन रूपों में आते हैं । पहला, जैसा यहाँ है — अंकित मान देकर दूसरी वोल्टता पर शक्ति पूछना । दूसरा — दो बल्बों को श्रेणी अथवा समांतर में जोड़कर यह पूछना कि कौन अधिक चमकेगा ; श्रेणी में धारा समान रहती है इसलिए अधिक प्रतिरोध वाला, अर्थात् कम वाट का बल्ब अधिक चमकता है, और समांतर में उलटा । तीसरा — तंतु का प्रतिरोध या उसमें बहने वाली धारा सीधे पूछना । तीनों में पहला काम एक ही है : अंकित मानों से प्रतिरोध निकाल लीजिए, फिर जो राशि स्थिर है उसके अनुसार सूत्र चुनिए ।
इस प्रश्न से सीधे संबंधित कोई पूर्व PYQ उपलब्ध नहीं।
- practice — not a real PYQ
220 V पर 60 W के रूप में अंकित एक बल्ब 110 V प्रदाय से जोड़ा जाता है । प्रतिरोध स्थिर मानते हुए उसमें क्षय होने वाली शक्ति क्या होगी ?
- (a)15 W
- (b)30 W
- (c)60 W
- (d)120 W
उत्तर(a) 15 W — वोल्टता आधी हुई, इसलिए शक्ति एक चौथाई रह गई ; 60 ÷ 4 = 15 ।
- practice — not a real PYQ
220 V पर 100 W के रूप में अंकित बल्ब के तंतु का प्रतिरोध कितना होगा ?
- (a)220 ओम
- (b)242 ओम
- (c)484 ओम
- (d)4840 ओम
उत्तर(c) 484 ओम — R = V²/P = (220 × 220)/100 = 48400/100 = 484 ।