किसी लेखा-परीक्षक द्वारा पाए गए कपट को, कपट में कितनी राशि सन्निहित होने पर, केन्द्र सरकार को रिपोर्ट किया जाना होता है ?
- (a)₹ 20 लाख से अधिक
- (b)₹ 50 लाख से अधिक
- (c)₹ 75 लाख से अधिक
- (d)₹ 1 करोड़ या उससे अधिक
सही उत्तर — D, (d) ₹ 1 करोड़ या उससे अधिक । प्रश्न का आधार कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 143(12) है, जिसे प्रश्न-वाक्य नाम से नहीं बताता । वह धारा कहती है कि यदि किसी कंपनी के लेखा-परीक्षक को, अपने कर्तव्यों के निर्वहन के दौरान, यह विश्वास करने का कारण मिले कि कंपनी में उसके अधिकारियों या कर्मचारियों द्वारा विहित राशि का कपट किया जा रहा है या किया जा चुका है, तो वह इस विषय की रिपोर्ट केंद्र सरकार को करेगा । 'विहित राशि' कितनी है, यह अधिनियम में नहीं, कंपनी (लेखा-परीक्षा और लेखा-परीक्षक) नियम, 2014 के नियम 13 में लिखा है — एक करोड़ रुपये या उससे अधिक । यही कारण है कि विकल्प का पाठ 'या उससे अधिक' कहता है, जबकि शेष तीनों 'से अधिक' कहते हैं ; नियम की भाषा समावेशी है, अर्थात् ठीक एक करोड़ का कपट भी केंद्र सरकार को रिपोर्ट करने योग्य है । रिपोर्ट करने की प्रक्रिया भी नियम 13 में दी है और परीक्षा में वही पूछी जाती है : लेखा-परीक्षक जानकारी मिलने के दो दिन के भीतर निदेशक मंडल या लेखा-परीक्षा समिति को रिपोर्ट भेजेगा और उनसे पैंतालीस दिन के भीतर उत्तर माँगेगा ; उत्तर मिलने पर वह अपनी रिपोर्ट, प्राप्त उत्तर और अपनी टिप्पणियाँ पंद्रह दिन के भीतर केंद्र सरकार को भेजेगा ; और यदि पैंतालीस दिन में उत्तर न मिले तो रिपोर्ट के साथ यह टिप्पणी भेजेगा कि उत्तर न मिलने के कारण क्या रह गया । यह सब कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय के सचिव को प्ररूप ADT-4 में भेजा जाता है । धारा 143(15) के अनुसार इस उपबंध का पालन न करने पर लेखा-परीक्षक पर शास्ति लगती है, और 2020 के संशोधन के बाद वह सूचीबद्ध कंपनी में ₹ 5 लाख तथा अन्य कंपनियों में ₹ 1 लाख है ।
- (a)₹ 20 लाख से अधिक — ₹ 20 लाख विहित सीमा नहीं है, पर इस विकल्प को केवल 'ग़लत' कहकर छोड़ देना पढ़ने वाले के साथ अन्याय होगा — क्योंकि इतनी राशि के कपट पर लेखा-परीक्षक चुप नहीं बैठता । धारा 143(12) का परंतुक कहता है कि जहाँ कपट में सन्निहित राशि विहित राशि से कम हो, वहाँ लेखा-परीक्षक विषय की रिपोर्ट धारा 177 के अधीन गठित लेखा-परीक्षा समिति को, या जहाँ वह समिति न हो वहाँ निदेशक मंडल को करेगा । नियम 13 के अनुसार यह रिपोर्ट जानकारी मिलने के दो दिन के भीतर देनी होती है और उसमें कपट की प्रकृति, उसमें सन्निहित अनुमानित राशि तथा संबद्ध पक्ष बताने होते हैं । अर्थात् यहाँ पता बदलता है, कर्तव्य नहीं ।
- (b)₹ 50 लाख से अधिक — ₹ 50 लाख भी विहित सीमा नहीं है, और इस विकल्प के बहाने एक बात साफ़ कर लेनी चाहिए : नियम 13 कोई सीढ़ीदार वर्ग नहीं बनाता । वहाँ केवल एक आँकड़ा है — एक करोड़ रुपये — और उसके नीचे तथा ऊपर दो अलग रास्ते हैं, बीच में कोई तीसरा वर्ग नहीं । इसलिए बीस, पचास या पचहत्तर लाख जैसी हर राशि एक ही कोटि में आती है, अर्थात् विहित राशि से कम, और उसका रास्ता लेखा-परीक्षा समिति या निदेशक मंडल है । ऐसे कपटों का ब्योरा, जो केंद्र सरकार को रिपोर्ट करने योग्य नहीं होते, कंपनी को अपनी निदेशक मंडल की रिपोर्ट में प्रकट करना पड़ता है ।
- (c)₹ 75 लाख से अधिक — ₹ 75 लाख भी विहित सीमा नहीं है । इस विकल्प में एक पाठ-संबंधी संकेत छिपा है जिसे पकड़ लेना उपयोगी है : यह विकल्प, और इसके साथ के दो और विकल्प, 'से अधिक' कहते हैं, जबकि नियम की अपनी भाषा 'एक करोड़ रुपये या उससे अधिक' है — और चारों में केवल एक ही विकल्प उस समावेशी भाषा को दोहराता है । जहाँ किसी प्रश्न के विकल्पों में तीन एक ढंग से और एक दूसरे ढंग से लिखे हों, वहाँ अलग ढंग वाला विकल्प प्रायः क़ानून के शब्द उठाकर रखा गया होता है । साथ ही याद रखिए कि धारा 143(12) के ये उपबंध केवल लेखा-परीक्षक पर नहीं, लागत लेखा-परीक्षा करने वाले लागत लेखापाल और सचिवीय लेखा-परीक्षा करने वाले कंपनी सचिव पर भी यथावश्यक परिवर्तनों सहित लागू होते हैं ।
कंपनी अधिनियम, 2013 ने लेखा-परीक्षक को केवल राय देने वाला नहीं, कपट की सूचना देने वाला भी बना दिया । धारा 143(12) दो रास्ते बनाती है । पहला — यदि कपट में सन्निहित राशि विहित राशि, अर्थात् एक करोड़ रुपये या उससे अधिक हो, तो रिपोर्ट सीधे केंद्र सरकार को जाती है । दूसरा — यदि राशि उससे कम हो, तो रिपोर्ट धारा 177 के अधीन गठित लेखा-परीक्षा समिति को, और ऐसी समिति न होने पर निदेशक मंडल को जाती है । विहित राशि और पूरी प्रक्रिया कंपनी (लेखा-परीक्षा और लेखा-परीक्षक) नियम, 2014 के नियम 13 में है । धारा 143(13) यह भी कहती है कि सद्भावपूर्वक की गई ऐसी रिपोर्ट किसी कर्तव्य का उल्लंघन नहीं मानी जाएगी — यह उपबंध लेखा-परीक्षक की गोपनीयता की चिंता दूर करने के लिए है ।
प्रक्रिया की समय-सीमाएँ अलग से याद रखने योग्य हैं, क्योंकि प्रश्न उन्हीं पर बनते हैं — जानकारी मिलने से दो दिन के भीतर निदेशक मंडल या लेखा-परीक्षा समिति को रिपोर्ट, उनसे पैंतालीस दिन में उत्तर की अपेक्षा, और उसके बाद पंद्रह दिन के भीतर केंद्र सरकार को भेजना, वह भी प्ररूप ADT-4 में । जो कपट केंद्र सरकार को रिपोर्ट करने योग्य नहीं होते, उनका ब्योरा कंपनी की निदेशक मंडल की रिपोर्ट में प्रकट करना पड़ता है । शब्दावली पर ध्यान दीजिए : हिन्दी स्तंभ fraud को 'कपट' लिखता है, जो कंपनी विधि की सरकारी हिन्दी है और धारा 447 में भी वही शब्द आता है ; 'सन्निहित' का अर्थ यहाँ 'जिसमें शामिल' है । प्रश्न-वाक्य किसी अधिनियम का नाम नहीं लेता, इसलिए विषय पहचानना भी परीक्षा का ही भाग है ।
- कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 143(12) लेखा-परीक्षक को कपट की रिपोर्ट करने का दायित्व देती है ।
- विहित राशि कंपनी (लेखा-परीक्षा और लेखा-परीक्षक) नियम, 2014 के नियम 13 में है — एक करोड़ रुपये या उससे अधिक ; ऐसा कपट केंद्र सरकार को रिपोर्ट होता है ।
- एक करोड़ से कम राशि का कपट धारा 177 के अधीन गठित लेखा-परीक्षा समिति को, और ऐसी समिति न होने पर निदेशक मंडल को, दो दिन के भीतर रिपोर्ट किया जाता है ।
- केंद्र सरकार को रिपोर्ट कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय के सचिव को प्ररूप ADT-4 में भेजी जाती है ; मंडल से उत्तर के लिए पैंतालीस दिन और उसके बाद भेजने के लिए पंद्रह दिन ।
- जो कपट केंद्र सरकार को रिपोर्ट करने योग्य नहीं, उनका ब्योरा निदेशक मंडल की रिपोर्ट में प्रकट करना पड़ता है ।
- धारा 143(13) — सद्भावपूर्वक की गई रिपोर्ट किसी कर्तव्य का उल्लंघन नहीं ; धारा 143(14) — यही उपबंध लागत लेखापाल और कंपनी सचिव पर भी लागू ।
- विहित राशि को अधिनियम में खोजना ; वह नियम 13 में है, धारा में नहीं ।
- यह मान लेना कि एक करोड़ से कम के कपट पर कोई रिपोर्ट नहीं करनी होती ; वह लेखा-परीक्षा समिति या निदेशक मंडल को जाती है ।
- 'से अधिक' और 'या उससे अधिक' के भेद को अनदेखा करना ; नियम की भाषा समावेशी है ।
- दो दिन, पैंतालीस दिन और पंद्रह दिन की समय-सीमाएँ आपस में मिला देना ।
लेखापरीक्षा के प्रश्न EPFO में प्रायः संख्याओं, प्ररूपों और समय-सीमाओं पर आते हैं — विहित राशि कितनी, रिपोर्ट किसे, कितने दिन में, किस प्ररूप में । इसलिए धारा 143(12) के साथ नियम 13 की पूरी प्रक्रिया एक ही पन्ने पर लिखकर याद कीजिए, और उसके साथ धारा 139 से 142 तक की नियुक्ति-संबंधी धाराएँ भी रखिए, क्योंकि प्रश्नपत्र इन्हीं को आपस में बदलकर विकल्प बनाता है । संख्याओं की एक अलग सूची बनाना यहाँ भी सबसे उपयोगी अभ्यास है ।
इस प्रश्न से सीधे संबंधित कोई पूर्व PYQ उपलब्ध नहीं।
- practice — not a real PYQ
कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 143(12) के अधीन, जहाँ कपट में सन्निहित राशि विहित राशि से कम हो, वहाँ लेखा-परीक्षक रिपोर्ट किसे करता है ?
- (a)केंद्र सरकार को
- (b)लेखा-परीक्षा समिति को, और ऐसी समिति न होने पर निदेशक मंडल को
- (c)कंपनी रजिस्ट्रार को
- (d)राष्ट्रीय कंपनी विधि अधिकरण को
उत्तर(b) लेखा-परीक्षा समिति को, और ऐसी समिति न होने पर निदेशक मंडल को — यह रिपोर्ट जानकारी मिलने के दो दिन के भीतर देनी होती है ।
- practice — not a real PYQ
कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 143(12) के अधीन केंद्र सरकार को कपट की रिपोर्ट किस प्ररूप में भेजी जाती है ?
- (a)ADT-1
- (b)ADT-3
- (c)ADT-4
- (d)MGT-7
उत्तर(c) ADT-4 — ADT-1 लेखा-परीक्षक की नियुक्ति की सूचना के लिए है, ADT-3 उसके त्यागपत्र के लिए, और MGT-7 वार्षिक विवरणी का प्ररूप है ।