31.03.2022 को समाप्त होने वाले वर्ष के लिए एक क्लब से संबंधित सूचना निम्नलिखित है : 31.03.2021 को बकाया चंदा ₹ 16,000 31.03.2022 को बकाया चंदा ₹ 18,000 31.03.2021 को प्राप्त अग्रिम चंदा ₹ 12,000 31.03.2022 को प्राप्त अग्रिम चंदा ₹ 11,000 70 सदस्यों में से प्रत्येक ₹ 1,000 वार्षिक चंदा देते हैं । 2021 – 22 के दौरान कुल प्राप्त चंदा कितना होगा ?
- (a)₹ 67,000
- (b)₹ 71,000
- (c)₹ 69,000
- (d)₹ 77,000
सही उत्तर — A, (a) ₹ 67,000 । प्रश्न चंदे की आय नहीं, वर्ष के दौरान वास्तव में प्राप्त नक़दी पूछता है, और यही भेद पूरे प्रश्न की जान है । इस वर्ष की आय तो सीधी है — 70 सदस्य × ₹ 1,000 = ₹ 70,000, और यही राशि आय और व्यय खाते में जमा होगी । अब इस आय से नक़दी तक पहुँचने के लिए चार समायोजन करने हैं । पहला, 31.03.2021 का बकाया ₹ 16,000 पिछले वर्ष की आय था जो इसी वर्ष वसूल हुआ, इसलिए वह प्राप्ति में जुड़ेगा । दूसरा, 31.03.2022 का बकाया ₹ 18,000 इस वर्ष की आय है जो अभी आई ही नहीं, इसलिए वह घटेगा । तीसरा, 31.03.2021 का अग्रिम ₹ 12,000 इस वर्ष का चंदा है जिसकी नक़दी पिछले वर्ष ही आ चुकी थी, इसलिए वह भी घटेगा । चौथा, 31.03.2022 का अग्रिम ₹ 11,000 अगले वर्ष का चंदा है जिसकी नक़दी इसी वर्ष आई, इसलिए वह जुड़ेगा । अतः प्राप्त चंदा = ₹ 70,000 + ₹ 16,000 – ₹ 18,000 – ₹ 12,000 + ₹ 11,000 = ₹ 67,000 । यही बात चंदा खाते के प्रारूप में और साफ़ दिखती है : नाम पक्ष में प्रारंभिक बकाया ₹ 16,000, आय और व्यय खाते की आय ₹ 70,000 तथा अंतिम अग्रिम ₹ 11,000 — कुल ₹ 97,000 ; जमा पक्ष में प्रारंभिक अग्रिम ₹ 12,000 और अंतिम बकाया ₹ 18,000, और संतुलन के लिए बैंक अर्थात् प्राप्त चंदा ₹ 67,000 । नियम को एक वाक्य में इस तरह याद रखिए — बकाया आरंभ में जुड़ता है और अंत में घटता है, अग्रिम आरंभ में घटता है और अंत में जुड़ता है ।
- (b)₹ 71,000 — ₹ 71,000 तब निकलता है जब केवल अग्रिम चंदे का समायोजन किया जाए और दोनों बकाया राशियाँ छूट जाएँ : ₹ 70,000 + ₹ 12,000 – ₹ 11,000 = ₹ 71,000 । यही मान दूसरे रास्ते से भी आता है — यदि बकाया राशियों के चिह्न उलट दिए जाएँ, अर्थात् प्रारंभिक बकाया घटा दिया जाए और अंतिम बकाया जोड़ दिया जाए । ध्यान दीजिए कि यह उत्तर आय ₹ 70,000 से ऊपर जाता है, जबकि यहाँ बकाया राशि बढ़ी है (₹ 16,000 से ₹ 18,000) और अग्रिम घटा है — दोनों ही परिवर्तन नक़द प्राप्ति को आय से नीचे ले जाते हैं । अर्थात् दिशा की एक मोटी जाँच ही इस विकल्प को काट देती है ।
- (c)₹ 69,000 — ₹ 69,000 उस गणना का परिणाम है जिसमें बकाया राशियों का समायोजन ठीक हो, पर अग्रिम राशियों के चिह्न उलट जाएँ : ₹ 70,000 + ₹ 16,000 – ₹ 18,000 + ₹ 12,000 – ₹ 11,000 = ₹ 69,000 । चिह्न याद रखने का सीधा तर्क यही है कि सोचा जाए, यह रुपया किस वर्ष के बैंक खाते में आया । प्रारंभिक अग्रिम की नक़दी पिछले वर्ष आ चुकी थी, इसलिए वह इस वर्ष की प्राप्ति में गिनी ही नहीं जा सकती — उसे घटाना पड़ेगा । अंतिम अग्रिम की नक़दी इसी वर्ष आई है, इसलिए वह जुड़ेगी, भले ही वह आय अगले वर्ष की मानी जाए ।
- (d)₹ 77,000 — ₹ 77,000 तब निकलता है जब केवल 31.03.2022 वाली दोनों राशियों का उपयोग किया जाए और प्रारंभिक शेष भुला दिए जाएँ — और उस पर अंतिम बकाया के चिह्न भी उलट जाएँ : ₹ 70,000 + ₹ 18,000 – ₹ 11,000 = ₹ 77,000 । ऐसे प्रश्नों में चारों आँकड़े दिए ही इसलिए जाते हैं कि सबका उपयोग हो ; यदि गणना में कोई आँकड़ा बिना लगे रह जाए तो यह लगभग निश्चित संकेत है कि कहीं चूक हुई है । उत्तर लिखने से पहले चारों राशियों पर निशान लगाकर देख लेना इस भूल से बचा देता है ।
ग़ैर-व्यापारिक संस्थाओं के खातों में चंदा (subscription) सबसे अधिक पूछी जाने वाली मद है, क्योंकि उसमें नक़द आधार और उपार्जन आधार दोनों साथ-साथ चलते हैं । प्राप्ति और भुगतान खाता नक़द आधार पर बनता है, इसलिए उसमें वर्ष के दौरान वास्तव में प्राप्त चंदा दिखता है ; आय और व्यय खाता उपार्जन आधार पर बनता है, इसलिए उसमें उसी वर्ष से संबंधित देय चंदा जमा होता है, चाहे वह मिला हो या नहीं । दोनों के बीच का पुल चार मदों से बनता है — प्रारंभिक बकाया, अंतिम बकाया, प्रारंभिक अग्रिम और अंतिम अग्रिम । बकाया चंदा चिट्ठे में परिसंपत्ति है और अग्रिम चंदा देयता ।
चिह्न याद रखने का सबसे भरोसेमंद तरीक़ा रटना नहीं, यह पूछना है कि 'यह रुपया किस वर्ष के बैंक खाते में गया' । पिछले वर्ष का बकाया इस वर्ष आया, इसलिए प्राप्ति में जुड़ा ; इस वर्ष का बकाया अभी आया नहीं, इसलिए घटा ; पिछले वर्ष लिया गया अग्रिम इस वर्ष नहीं आया, इसलिए घटा ; इस वर्ष लिया गया अग्रिम इसी वर्ष आया, इसलिए जुड़ा । यही तर्क उलटी दिशा में भी काम करता है, अर्थात् प्राप्त राशि दी हो और आय पूछी जाए तब सारे चिह्न उलट जाते हैं । पुस्तिका के हिन्दी वाक्य पर एक टिप्पणी : वहाँ '70 सदस्यों में से प्रत्येक ... देते हैं' लिखा है, जहाँ 'प्रत्येक' के साथ एकवचन क्रिया अपेक्षित होती ; अर्थ पर इसका कोई असर नहीं पड़ता — सदस्य 70 हैं और चंदा प्रति सदस्य ₹ 1,000 ।
- इस वर्ष की चंदा-आय = 70 सदस्य × ₹ 1,000 = ₹ 70,000, और यही आय और व्यय खाते में जमा होती है ।
- प्राप्त चंदा = आय + प्रारंभिक बकाया – अंतिम बकाया – प्रारंभिक अग्रिम + अंतिम अग्रिम ।
- गणना — ₹ 70,000 + ₹ 16,000 – ₹ 18,000 – ₹ 12,000 + ₹ 11,000 = ₹ 67,000 ।
- बकाया चंदा चिट्ठे में परिसंपत्ति है ; अग्रिम में प्राप्त चंदा देयता है ।
- प्राप्ति और भुगतान खाता नक़द आधार पर बनता है, आय और व्यय खाता उपार्जन आधार पर ।
- चंदा खाते के प्रारूप में नाम पक्ष का योग ₹ 97,000 बैठता है और जमा पक्ष में शेष के रूप में प्राप्त चंदा ₹ 67,000 निकलता है ।
- प्राप्त चंदे और चंदे की आय को एक मान लेना ; प्रश्न नक़द प्राप्ति पूछता है ।
- अग्रिम राशियों के चिह्न उलट देना — प्रारंभिक अग्रिम घटता है और अंतिम अग्रिम जुड़ता है ।
- प्रारंभिक शेष भुला देना और केवल अंतिम वर्ष के आँकड़े लगाना ।
- यह न जाँचना कि दिए गए चारों आँकड़े गणना में लगे या नहीं ।
इस अध्याय में प्रश्न दो दिशाओं में आता है — आय दी हो और प्राप्ति पूछी जाए, या प्राप्ति दी हो और आय पूछी जाए ; दूसरी दिशा में सारे चिह्न उलट जाते हैं । कभी-कभी सदस्यों की संख्या और प्रति सदस्य चंदा देकर आय स्वयं निकलवाई जाती है, जैसा यहाँ किया गया है । सबसे सुरक्षित तरीक़ा हर बार चंदा खाते का छोटा प्रारूप बना लेना है, क्योंकि उसमें कोई मद छूटती नहीं और चिह्न याद रखने की आवश्यकता ही नहीं पड़ती । आजीवन सदस्यता शुल्क और प्रवेश शुल्क का व्यवहार भी साथ में पढ़ लीजिए, क्योंकि प्रश्नपत्र उन्हें इसी मद के साथ मिलाकर पूछता है ।
इस प्रश्न से सीधे संबंधित कोई पूर्व PYQ उपलब्ध नहीं।
- practice — not a real PYQ
किसी क्लब के 50 सदस्य हैं और प्रत्येक ₹ 500 वार्षिक चंदा देता है । वर्ष के आरंभ में बकाया चंदा ₹ 4,000 और वर्ष के अंत में ₹ 3,000 था ; अग्रिम प्राप्त चंदा आरंभ में ₹ 2,000 और अंत में ₹ 2,500 था । वर्ष के दौरान प्राप्त कुल चंदा कितना होगा ?
- (a)₹ 24,500
- (b)₹ 25,500
- (c)₹ 26,500
- (d)₹ 27,500
उत्तर(c) ₹ 26,500 — ₹ 25,000 + ₹ 4,000 – ₹ 3,000 – ₹ 2,000 + ₹ 2,500 = ₹ 26,500 ।
- practice — not a real PYQ
किसी क्लब के आय और व्यय खाते में चंदे की कौन-सी राशि जमा की जाती है ?
- (a)वर्ष के दौरान वास्तव में प्राप्त चंदा
- (b)चालू वर्ष से संबंधित देय चंदा, चाहे वह प्राप्त हुआ हो या नहीं
- (c)केवल बकाया चंदा
- (d)केवल अग्रिम में प्राप्त चंदा
उत्तर(b) चालू वर्ष से संबंधित देय चंदा, चाहे वह प्राप्त हुआ हो या नहीं — क्योंकि आय और व्यय खाता उपार्जन आधार पर बनता है ; वास्तव में प्राप्त राशि प्राप्ति और भुगतान खाते में जाती है ।