निम्नलिखित सूचनाओं पर विचार कीजिए : तिथि | ब्योरा | इकाई | दर प्रति इकाई (₹) 1 जनवरी | हस्ते माल | 200 | 7 8 जनवरी | क्रय | 1100 | 8 25 जनवरी | क्रय | 300 | 9 6 जनवरी | विक्रय के लिए निर्गमित | 100 | – 9 जनवरी | विक्रय के लिए निर्गमित | 200 | – निम्नलिखित में से कौन-सा एक, पहला आवक पहला जावक (FIFO) पद्धति का प्रयोग करते हुए चिरस्थायी मालसूची प्रणाली के अंतर्गत 31 जनवरी को मालसूची का मूल्य है ?
- (a)₹ 6,700
- (b)₹ 8,700
- (c)₹ 10,700
- (d)₹ 12,000
सही उत्तर — C, (c) ₹ 10,700 । पहले लेन-देन को तिथि के क्रम में रख लीजिए, क्योंकि तालिका उन्हें 1, 8, 25, 6 और 9 जनवरी के क्रम में छापती है और अंतिम दो पंक्तियाँ क्रम से बाहर हैं । सही क्रम यह है : 1 जनवरी को 200 इकाइयाँ ₹ 7 पर हस्ते ; 6 जनवरी को 100 इकाइयाँ निर्गमित ; 8 जनवरी को 1,100 इकाइयाँ ₹ 8 पर क्रय ; 9 जनवरी को 200 इकाइयाँ निर्गमित ; और 25 जनवरी को 300 इकाइयाँ ₹ 9 पर क्रय । अब पहला आवक पहला जावक पद्धति लगाइए, जिसमें निर्गम सदा सबसे पुराने लॉट में से होता है । 6 जनवरी का निर्गम पूरा का पूरा ₹ 7 वाले लॉट से जाएगा, इसलिए उसमें से 100 इकाइयाँ बचती हैं । 9 जनवरी को 200 इकाइयाँ निर्गमित होनी हैं : पहले ₹ 7 वाली बची हुई 100 इकाइयाँ जाएँगी और शेष 100 इकाइयाँ ₹ 8 वाले लॉट से । इसके बाद स्टॉक में ₹ 7 वाली एक भी इकाई नहीं बचती और ₹ 8 वाले लॉट में 1,000 इकाइयाँ रह जाती हैं । 25 जनवरी का क्रय उसमें 300 इकाइयाँ ₹ 9 पर जोड़ देता है । अतः 31 जनवरी की मालसूची = 1,000 × ₹ 8 + 300 × ₹ 9 = ₹ 8,000 + ₹ 2,700 = ₹ 10,700 । इकाइयों से जाँच लीजिए — आवक 200 + 1,100 + 300 = 1,600, जावक 100 + 200 = 300, इसलिए शेष 1,300 इकाइयाँ, और 1,000 तथा 300 का जोड़ ठीक 1,300 है । एक शब्द-सूचना : 'चिरस्थायी मालसूची प्रणाली' perpetual inventory system का अनुवाद है, अर्थात् वह प्रणाली जिसमें हर आवक और हर जावक के बाद स्टॉक का अभिलेख तुरंत बदल दिया जाता है ; इसका संबंध चिरस्थायी बंदोबस्त जैसे किसी स्थायित्व से नहीं है । यह भी जान लीजिए कि इस पद्धति में तिथियों का उलट-पुलट उत्तर नहीं बदलता, क्योंकि निर्गम फिर भी सबसे पुराने लॉट से ही होंगे — पर भारित औसत प्रणाली में वही उलट-पुलट उत्तर बदल देता ।
- (a)₹ 6,700 — इस विकल्प को एक पंक्ति में काटा जा सकता है । अंत में स्टॉक 1,300 इकाइयों का है और तालिका में केवल तीन दरें हैं — ₹ 7, ₹ 8 और ₹ 9 । इसलिए किसी भी पद्धति से निकाला गया मूल्य 1,300 × ₹ 7 = ₹ 9,100 और 1,300 × ₹ 9 = ₹ 11,700 के बीच ही होना चाहिए । ₹ 6,700 इस निचली सीमा से भी ₹ 2,400 कम है, इसलिए इस मान तक कोई भी शुद्ध गणना पहुँच ही नहीं सकती — जो भी रास्ता यहाँ पहुँचाता है, उसने 1,300 से कहीं कम इकाइयों का मूल्यांकन किया है । यह सीमा-जाँच मालसूची के हर संख्यात्मक प्रश्न में सबसे तेज़ हथियार है ।
- (b)₹ 8,700 — ₹ 8,700 भी उसी निचली सीमा ₹ 9,100 से कम है, इसलिए वह भी 1,300 इकाइयों का मूल्य नहीं हो सकता । अंकगणित से देखिए तो यह मान ठीक 1,000 × ₹ 8 + 100 × ₹ 7 है — अर्थात् उस गणना का परिणाम जिसमें 25 जनवरी का 300 इकाइयों का क्रय छूट गया हो और साथ ही ₹ 7 वाली एक सौ इकाइयाँ स्टॉक में बची हुई मान ली गई हों, जबकि पहला आवक पहला जावक पद्धति में वे 9 जनवरी के निर्गम में जा चुकी हैं । दो भूलें एक साथ । इसीलिए इन प्रश्नों में स्टॉक-कार्ड की तरह पंक्ति-दर-पंक्ति शेष लिखते चलना सबसे सुरक्षित तरीक़ा है ।
- (d)₹ 12,000 — ₹ 12,000 ऊपरी सीमा ₹ 11,700 से भी अधिक है, इसलिए 1,300 इकाइयों का मूल्य इतना हो ही नहीं सकता — सबसे महँगी दर ₹ 9 पर भी नहीं । दूसरी ओर से देखिए : महीने भर में जितना माल आया उसकी कुल लागत ₹ 1,400 + ₹ 8,800 + ₹ 2,700 = ₹ 12,900 है । यदि अंतिम मालसूची ₹ 12,000 मानी जाए तो निर्गमित 300 इकाइयों की लागत केवल ₹ 900 बैठेगी, अर्थात् ₹ 3 प्रति इकाई — और यह दर तालिका में कहीं है ही नहीं । सही गणना में निर्गमित माल की लागत ₹ 2,200 आती है और ₹ 12,900 – ₹ 2,200 = ₹ 10,700 ।
पहला आवक पहला जावक पद्धति यह मानकर चलती है कि जो माल पहले आया वही पहले निकला, इसलिए निर्गम पुराने लॉट की दरों पर होते हैं और अंत में बची मालसूची नवीनतम क्रय-दरों पर मूल्यांकित होती है । चिरस्थायी मालसूची प्रणाली में यह हिसाब हर लेन-देन के साथ-साथ चलता है — हर आवक और हर जावक के बाद स्टॉक-कार्ड में शेष अद्यतन किया जाता है — जबकि आवधिक प्रणाली में गिनती अवधि के अंत में होती है । इस पद्धति की एक सुविधाजनक विशेषता यह है कि दोनों प्रणालियों में अंतिम मालसूची का मूल्य एक ही आता है ; भारित औसत में ऐसा नहीं होता, क्योंकि वहाँ औसत हर क्रय पर बदलता है ।
इस प्रश्न में परीक्षक ने दो छोटे जाल रखे हैं । पहला, तालिका की पंक्तियाँ तिथि के क्रम में नहीं छपी हैं — 25 जनवरी का क्रय 6 और 9 जनवरी के निर्गमों से पहले दिखता है ; इस पद्धति में उत्तर इससे बदलता नहीं, पर लिखते समय क्रम ठीक कर लेना अच्छी आदत है । दूसरा, निर्गम-पंक्तियों में दर की जगह डैश छपा है, जो यह याद दिलाता है कि निर्गम की दर दी नहीं जाती — वही तो पद्धति से निकालनी है । बढ़ती क़ीमतों के दौर में यह पद्धति अंतिम मालसूची का मूल्य ऊँचा और विक्रीत माल की लागत नीची दिखाती है, इसलिए लाभ अपेक्षाकृत अधिक दिखता है — यही इस अध्याय का सबसे अधिक पूछा जाने वाला सैद्धांतिक बिंदु है ।
- तिथि-क्रम — 1 जनवरी हस्ते 200 इकाइयाँ ₹ 7 पर ; 6 जनवरी निर्गम 100 ; 8 जनवरी क्रय 1,100 ₹ 8 पर ; 9 जनवरी निर्गम 200 ; 25 जनवरी क्रय 300 ₹ 9 पर ।
- 6 जनवरी का निर्गम ₹ 7 वाले लॉट से जाता है ; 9 जनवरी का निर्गम पहले शेष 100 इकाइयाँ ₹ 7 से और फिर 100 इकाइयाँ ₹ 8 से लेता है ।
- अंतिम मालसूची = 1,000 × ₹ 8 + 300 × ₹ 9 = ₹ 10,700 ।
- इकाइयों की जाँच — आवक 1,600, जावक 300, शेष 1,300 इकाइयाँ ।
- 1,300 इकाइयों का मूल्य ₹ 9,100 और ₹ 11,700 के बीच ही हो सकता है, क्योंकि दरें केवल ₹ 7, ₹ 8 और ₹ 9 हैं ।
- पहला आवक पहला जावक पद्धति में चिरस्थायी और आवधिक, दोनों प्रणालियों में अंतिम मालसूची का मूल्य एक ही आता है ।
- तालिका की छपी हुई पंक्ति-क्रम को ही तिथि-क्रम मान लेना ।
- निर्गम को नवीनतम लॉट से घटा देना, जो अंतिम आवक पहला जावक पद्धति है और मानक के अधीन अनुज्ञेय नहीं ।
- इकाइयों का मिलान न करना ; शेष इकाइयों की गिनती हर ग़लत उत्तर को तुरंत पकड़ लेती है ।
- अंतिम क्रय की पंक्ति छोड़ देना, क्योंकि वह तालिका में निर्गमों से पहले छपी है ।
मालसूची मूल्यांकन के प्रश्न लगभग सदा एक छोटी तालिका के साथ आते हैं और उनमें पूछा जाता है कि किसी तिथि पर स्टॉक का मूल्य क्या होगा, या विक्रीत माल की लागत कितनी । हल का ढर्रा तीन पंक्तियों का है : लेन-देन तिथि-क्रम में लिखिए, स्टॉक-कार्ड की तरह हर पंक्ति के बाद शेष इकाइयाँ और उनकी दर लिखते चलिए, और अंत में शेष इकाइयों की गिनती से मिलान कीजिए । उत्तर लिखने से पहले सीमा-जाँच भी कर लीजिए — शेष इकाइयों को सबसे नीची और सबसे ऊँची दर से गुणा करके देखिए कि आपका उत्तर उस परिधि में आता है या नहीं ।
इस प्रश्न से सीधे संबंधित कोई पूर्व PYQ उपलब्ध नहीं।
- practice — not a real PYQ
1 जनवरी को 100 इकाइयाँ ₹ 10 प्रति इकाई की दर से हस्ते थीं ; 10 जनवरी को 200 इकाइयाँ ₹ 12 प्रति इकाई पर क्रय की गईं ; और 15 जनवरी को 150 इकाइयाँ विक्रय के लिए निर्गमित की गईं । पहला आवक पहला जावक पद्धति से 31 जनवरी को मालसूची का मूल्य क्या होगा ?
- (a)₹ 1,500
- (b)₹ 1,650
- (c)₹ 1,800
- (d)₹ 2,100
उत्तर(c) ₹ 1,800 — निर्गम में पहले ₹ 10 वाली 100 इकाइयाँ और फिर ₹ 12 वाली 50 इकाइयाँ जाती हैं, इसलिए शेष 150 इकाइयाँ ₹ 12 पर, अर्थात् ₹ 1,800 ।
- practice — not a real PYQ
बढ़ती क़ीमतों के दौर में पहला आवक पहला जावक पद्धति अपनाने का क्या प्रभाव पड़ता है ?
- (a)अंतिम मालसूची का मूल्य कम और लाभ कम दिखता है
- (b)अंतिम मालसूची का मूल्य अधिक और लाभ अधिक दिखता है
- (c)अंतिम मालसूची और लाभ, दोनों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता
- (d)अंतिम मालसूची का मूल्य अधिक और लाभ कम दिखता है
उत्तर(b) अंतिम मालसूची का मूल्य अधिक और लाभ अधिक दिखता है — क्योंकि शेष स्टॉक नवीनतम ऊँची दरों पर मूल्यांकित होता है और निर्गम पुरानी नीची दरों पर ।