नीचे एक प्रतिष्ठान का 31.03.2022 को यथास्थिति का शेष परीक्षण दिखाया गया है : व्यापार प्राप्य | ₹ 2,50,000 | देनदारों को बट्टे के लिए प्रावधान | | ₹ 14,000 देनदारों को बट्टा | ₹ 4,000 | वर्ष के दौरान देनदारों को दिया जाने वाला अतिरिक्त बट्टा ₹ 20,000 है । प्रतिष्ठान की नीति देनदारों को बट्टे के लिए व्यापार प्राप्य शेष का 10% का प्रावधान रखने की है । दिए जाने वाले बट्टे और बट्टे के लिए किए गए प्रावधान के लिए लाभ और हानि लेखा से प्रभारित होने वाली कुल राशि (31.03.2022 को समाप्त होने वाले वर्ष के लिए) कितनी होगी ?
- (a)₹ 25,000
- (b)₹ 13,000
- (c)₹ 9,000
- (d)₹ 33,000
सही उत्तर — D, (d) ₹ 33,000 । यह प्रश्न तीन चरणों में सधता है । पहला चरण — इस वर्ष कुल कितना बट्टा दिया गया । शेष परीक्षण में 'देनदारों को बट्टा' ₹ 4,000 पहले से दर्ज है, और समायोजन बताता है कि वर्ष के दौरान ₹ 20,000 का बट्टा और दिया जाना है ; अतः कुल बट्टा ₹ 24,000 । दूसरा चरण — अंतिम प्रावधान किस राशि पर बनेगा । अतिरिक्त बट्टा देनदारों की राशि घटाता है, इसलिए प्रावधान का आधार ₹ 2,50,000 – ₹ 20,000 = ₹ 2,30,000 है, और प्रतिष्ठान की नीति के अनुसार 10 प्रतिशत प्रावधान ₹ 23,000 बनता है । तीसरा चरण — लाभ और हानि खाते पर वास्तविक प्रभार । उसमें इस वर्ष का पूरा बट्टा और इस वर्ष बनाया गया नया प्रावधान जुड़ता है, और पिछले वर्ष से चला आ रहा प्रावधान घटता है, क्योंकि वह पहले ही एक बार प्रभारित हो चुका है : ₹ 24,000 + ₹ 23,000 – ₹ 14,000 = ₹ 33,000 । इसे बट्टा खाते के रूप में देखिए तो और स्पष्ट हो जाता है — नाम पक्ष में शेष परीक्षण का बट्टा ₹ 4,000, अतिरिक्त बट्टा ₹ 20,000 और अंतिम प्रावधान ₹ 23,000, कुल ₹ 47,000 ; जमा पक्ष में प्रारंभिक प्रावधान ₹ 14,000 ; और संतुलन के लिए लाभ और हानि खाते में ₹ 33,000 । एक पठन-सूचना भी उपयोगी है : प्रश्न में जिसे 'शेष परीक्षण' कहा गया है वह trial balance है, जिसे वाणिज्य की हिन्दी पुस्तकें प्रायः 'तलपट' लिखती हैं ; और तालिका के दो अनाम धन-स्तंभों में से पहला नाम पक्ष है और दूसरा जमा पक्ष — इसी स्थिति से पता चलता है कि ₹ 14,000 का प्रावधान जमा शेष है और ₹ 4,000 का बट्टा नाम शेष ।
- (a)₹ 25,000 — ₹ 25,000 ठीक ₹ 2,50,000 का 10 प्रतिशत है, अर्थात् यह वह प्रावधान है जो बिना अतिरिक्त बट्टा घटाए, सीधे शेष परीक्षण वाली देनदारों की राशि पर निकाला जाए । इसमें दो भूलें एक साथ हैं । पहली, प्रावधान का आधार ग़लत है — ₹ 20,000 का बट्टा देनदारों की राशि घटाता है, इसलिए आधार ₹ 2,30,000 होना चाहिए । दूसरी, प्रश्न केवल प्रावधान नहीं पूछ रहा ; वह दिए जाने वाले बट्टे और बनाए गए प्रावधान, दोनों के लिए लाभ और हानि खाते पर कुल प्रभार पूछ रहा है, इसलिए अकेला प्रावधान उत्तर हो ही नहीं सकता ।
- (b)₹ 13,000 — ₹ 13,000 वह मान है जो तब निकलता है जब ₹ 20,000 के अतिरिक्त बट्टे को देनदारों की राशि घटाने में तो प्रयोग कर लिया जाए, पर उसे लाभ और हानि खाते के प्रभार में जोड़ना भूल जाया जाए : ₹ 4,000 + ₹ 23,000 – ₹ 14,000 = ₹ 13,000 । यह इस प्रश्न की सबसे सूक्ष्म चूक है, क्योंकि यहाँ तक की गणना बिलकुल ठीक चलती है । याद रखने की बात यह है कि समायोजन में दिया गया कोई भी व्यय दो जगह असर करता है — एक बार चिट्ठे में संबंधित मद घटाकर या बढ़ाकर, और एक बार लाभ और हानि खाते में प्रभार बनकर । यहाँ अतिरिक्त बट्टा दोनों जगह जाना चाहिए ।
- (c)₹ 9,000 — ₹ 9,000 केवल प्रावधान में हुई वृद्धि है — ₹ 23,000 का नया प्रावधान घटा ₹ 14,000 का पुराना । इसमें इस वर्ष वास्तव में दिया गया पूरा बट्टा, अर्थात् ₹ 4,000 और ₹ 20,000, छूट जाता है । यह चूक प्रायः तब होती है जब अभ्यर्थी संदिग्ध ऋणों के प्रावधान वाले प्रश्नों की आदत से चलता है और केवल प्रावधान के अंतर को ही उत्तर मान लेता है । प्रश्न-वाक्य यहाँ बहुत स्पष्ट है — वह 'दिए जाने वाले बट्टे और बट्टे के लिए किए गए प्रावधान' दोनों के लिए कुल राशि पूछता है, इसलिए दोनों घटक जोड़ने ही होंगे ।
देनदारों को बट्टे के लिए प्रावधान उस नक़द बट्टे का पूर्व-अनुमान है जो अगले वर्ष समय पर भुगतान करने वाले देनदारों को देना पड़ेगा । उसका तर्क मिलान की संकल्पना से आता है : बिक्री इस वर्ष हुई है, इसलिए उससे जुड़ा बट्टा भी इसी वर्ष के लाभ में से काटा जाना चाहिए, भले ही वह अगले वर्ष दिया जाए । लाभ और हानि खाते पर प्रभार निकालने का सूत्र सदा एक ही रहता है — इस वर्ष वास्तव में दिया गया बट्टा, जोड़ इस वर्ष के अंत में अपेक्षित नया प्रावधान, घटा पिछले वर्ष से चला आ रहा प्रावधान । यही ढाँचा संदिग्ध ऋणों के प्रावधान में भी काम करता है, केवल मद का नाम बदल जाता है ।
प्रावधान का आधार कौन-सी राशि हो, यह इस अध्याय का सबसे परखा जाने वाला बिंदु है । नियम यह है कि बट्टा उन्हीं देनदारों को मिलेगा जो वास्तव में भुगतान करेंगे, इसलिए प्रावधान उस राशि पर बनता है जो समायोजनों के बाद बचती है — यहाँ ₹ 2,50,000 में से ₹ 20,000 का अतिरिक्त बट्टा घटाकर ₹ 2,30,000 । जहाँ प्रश्न में अतिरिक्त डूबत ऋण या संदिग्ध ऋणों का प्रावधान भी दिया हो, वहाँ वे भी पहले घटाए जाते हैं और उसके बाद ही बट्टे का प्रावधान निकाला जाता है । शेष परीक्षण की तालिका में स्तंभों के शीर्षक छपे ही नहीं हैं, इसलिए यह पहचानना कि कौन-सी राशि नाम शेष है और कौन-सी जमा, केवल स्तंभ की स्थिति से होता है — और वही पहचान इस प्रश्न को हल करने की पहली शर्त है ।
- इस वर्ष कुल बट्टा = शेष परीक्षण का ₹ 4,000 + अतिरिक्त ₹ 20,000 = ₹ 24,000 ।
- प्रावधान का आधार = ₹ 2,50,000 – ₹ 20,000 = ₹ 2,30,000 ; उस पर 10 प्रतिशत = ₹ 23,000 ।
- लाभ और हानि खाते पर प्रभार = ₹ 24,000 + ₹ 23,000 – ₹ 14,000 = ₹ 33,000 ।
- प्रावधान बनाने का सूत्र — इस वर्ष दिया गया बट्टा, जोड़ नया प्रावधान, घटा पुराना प्रावधान ।
- समायोजन में दिया गया अतिरिक्त बट्टा दो जगह असर करता है — देनदारों की राशि घटाता है और लाभ-हानि खाते में प्रभार बनता है ।
- शेष परीक्षण में प्रावधान जमा शेष के रूप में और दिया गया बट्टा नाम शेष के रूप में दिखता है ।
- प्रावधान बिना अतिरिक्त बट्टा घटाए, सीधे शेष परीक्षण की देनदार-राशि पर निकाल लेना ।
- अतिरिक्त बट्टे को केवल देनदारों में घटाना और लाभ-हानि खाते में जोड़ना भूल जाना ।
- केवल प्रावधान का अंतर उत्तर मान लेना, जबकि प्रश्न बट्टा और प्रावधान दोनों का कुल प्रभार पूछता है ।
- पुराने प्रावधान को घटाने के बजाय जोड़ देना ।
अंतिम खातों के समायोजन पर प्रश्न प्रायः इसी रूप में आते हैं — शेष परीक्षण की तीन-चार पंक्तियाँ, एक समायोजन, और लाभ-हानि खाते पर प्रभार या चिट्ठे में दिखने वाली राशि पूछ ली जाती है । ऐसे प्रश्न में उत्तर तक पहुँचने का सबसे भरोसेमंद रास्ता संबंधित खाते का छोटा-सा प्रारूप हाशिये पर बना लेना है, क्योंकि तब कोई मद छूटती नहीं । यही ढाँचा संदिग्ध ऋणों के प्रावधान, बकाया व्यय, पूर्वदत्त व्यय और उपार्जित आय के प्रश्नों में भी लौटता है, इसलिए एक बार सूत्र पक्का कर लेना कई प्रश्नों का उत्तर बन जाता है ।
इस प्रश्न से सीधे संबंधित कोई पूर्व PYQ उपलब्ध नहीं।
- practice — not a real PYQ
किसी प्रतिष्ठान के शेष परीक्षण में व्यापार प्राप्य ₹ 2,00,000, देनदारों को बट्टे के लिए प्रावधान ₹ 5,000 (जमा) और देनदारों को बट्टा ₹ 3,000 (नाम) दिखाए गए हैं । वर्ष के दौरान देनदारों को ₹ 10,000 का बट्टा और दिया जाना है, तथा नीति देनदार-शेष का 5 प्रतिशत प्रावधान रखने की है । लाभ और हानि खाते से कुल कितनी राशि प्रभारित होगी ?
- (a)₹ 9,500
- (b)₹ 17,500
- (c)₹ 14,500
- (d)₹ 4,500
उत्तर(b) ₹ 17,500 — कुल बट्टा ₹ 13,000, नया प्रावधान ₹ 1,90,000 का 5 प्रतिशत अर्थात् ₹ 9,500, और उसमें से पुराना प्रावधान ₹ 5,000 घटाने पर ₹ 17,500 ।
- practice — not a real PYQ
देनदारों को बट्टे के लिए प्रावधान सामान्यतः किस राशि पर बनाया जाता है ?
- (a)कुल विक्रय पर
- (b)शेष परीक्षण में दिखाई गई पूरी देनदार-राशि पर
- (c)डूबत ऋणों और संदिग्ध ऋणों के प्रावधान जैसी समायोजनाओं के बाद बचे देनदारों पर
- (d)केवल उधार विक्रय पर
उत्तर(c) डूबत ऋणों और संदिग्ध ऋणों के प्रावधान जैसी समायोजनाओं के बाद बचे देनदारों पर — बट्टा उन्हीं देनदारों को मिलेगा जो वास्तव में भुगतान करेंगे ।