लेखाकरण मानक-2 (मालसूची मूल्य-निर्धारण) के अनुसार निम्नलिखित में से कौन-सा ‘मालसूची की लागत’ में शामिल है ?
- (a)प्रशासनिक उपरिव्यय, जिसका योगदान मालसूची को वर्तमान अवस्थिति और दशा में लाने में नहीं होता है
- (b)भण्डार लागत जो उत्पादन प्रक्रिया में उत्पादन के अगले चरण से पहले आवश्यक है
- (c)विक्रय और वितरण लागत
- (d)क्रय पर चुकाए गए शुल्क और कर, जो बाद में प्रतिष्ठान द्वारा कर प्राधिकारियों से वसूली-योग्य हैं
सही उत्तर — B, (b) भण्डार लागत जो उत्पादन प्रक्रिया में उत्पादन के अगले चरण से पहले आवश्यक है । लेखाकरण मानक-2 पहले यह बताता है कि मालसूची की लागत में क्या-क्या जुड़ता है — क्रय की लागत, रूपांतरण की लागत, तथा वे अन्य लागतें जो मालसूची को उसकी वर्तमान अवस्थिति और दशा तक लाने में लगी हों । इसके बाद वह उन लागतों की एक अलग सूची देता है जो लागत में नहीं जोड़ी जातीं और उसी अवधि के व्यय के रूप में लिखी जाती हैं : सामग्री, श्रम या अन्य उत्पादन-लागत की असामान्य क्षति ; भण्डार लागत ; वे प्रशासनिक उपरिव्यय जो मालसूची को वर्तमान अवस्थिति और दशा में लाने में योगदान नहीं करते ; और विक्रय तथा वितरण लागत । ध्यान इस बात पर दीजिए कि भण्डार लागत वाली मद के साथ मानक एक शर्त जोड़ता है — भण्डार लागत तब तक अपवर्जित है जब तक वह उत्पादन प्रक्रिया में अगले चरण से पहले आवश्यक न हो । अर्थात् यदि माल को उत्पादन के अगले चरण में जाने से पहले कुछ समय रखना प्रक्रिया की ही अनिवार्य कड़ी है, तो वह भण्डारण उत्पादन का हिस्सा है और उसकी लागत मालसूची की लागत में जुड़ेगी । शराब या पनीर का परिपक्व होना और इमारती लकड़ी का सूखना इसी प्रकार के उदाहरण हैं । इसके विपरीत तैयार माल को गोदाम में रखने का ख़र्च, जो केवल बिक्री की प्रतीक्षा में लगता है, अपवर्जित रहता है । इस विकल्प का पाठ ठीक वही शर्त दोहराता है, इसलिए यही मालसूची की लागत में शामिल है और शेष तीनों उसी सूची से लिए गए अपवर्जन हैं ।
- (a)प्रशासनिक उपरिव्यय, जिसका योगदान मालसूची को वर्तमान अवस्थिति और दशा में लाने में नहीं होता है — यह मद मानक की अपवर्जन-सूची से जस-की-तस ली गई है, और उसके भीतर छिपी शर्त पर ध्यान देना आवश्यक है । विकल्प केवल 'प्रशासनिक उपरिव्यय' नहीं कहता, बल्कि वे प्रशासनिक उपरिव्यय कहता है जिनका योगदान मालसूची को वर्तमान अवस्थिति और दशा में लाने में नहीं होता — और यही अपवर्जन की कसौटी है । कार्यालय का किराया, सामान्य प्रबंधन का वेतन और लेखा-विभाग का ख़र्च इसी कोटि में आते हैं और उन्हें उसी अवधि का व्यय माना जाता है । यदि कोई प्रशासनिक ख़र्च वास्तव में उत्पादन को उसकी वर्तमान दशा तक लाने में लगता हो, तो वह इस अपवर्जन में आता ही नहीं ।
- (c)विक्रय और वितरण लागत — विक्रय और वितरण लागत मानक की अपवर्जन-सूची की सबसे स्पष्ट मद है । उसका कारण समझ लेना उपयोगी है : ये लागतें माल के तैयार हो जाने के बाद लगती हैं, अर्थात् वे मालसूची को उसकी वर्तमान अवस्थिति और दशा तक लाने में कोई योगदान नहीं करतीं । यदि इन्हें स्टॉक के मूल्य में जोड़ दिया जाए तो बिना बिक्री हुए ही चिट्ठे में परिसंपत्ति का मूल्य बढ़ जाएगा, और यह रूढ़िवादिता की परंपरा के भी विरुद्ध होगा । बिक्री पर लगने वाला कमीशन, विज्ञापन, माल भेजने का भाड़ा और पैकिंग की बिक्री-संबंधी लागत सब इसी कोटि में आते हैं ।
- (d)क्रय पर चुकाए गए शुल्क और कर, जो बाद में प्रतिष्ठान द्वारा कर प्राधिकारियों से वसूली-योग्य हैं — यह मद क्रय की लागत के नियम से आती है । मानक कहता है कि क्रय पर चुकाए गए शुल्क और कर लागत में जुड़ते हैं, पर वे नहीं जिन्हें प्रतिष्ठान बाद में कर प्राधिकारियों से वसूल कर लेता है । कारण यह है कि वसूली-योग्य कर प्रतिष्ठान के लिए लागत है ही नहीं — वह सरकार से प्राप्य राशि है, इसलिए वह परिसंपत्ति के रूप में अलग दिखती है, स्टॉक के मूल्य में नहीं । यही कारण है कि आगत कर-प्रत्यय (input tax credit) के योग्य कर स्टॉक की लागत में नहीं जोड़े जाते, जबकि जो शुल्क वसूली-योग्य नहीं होते वे जुड़ जाते हैं । विकल्प का पाठ ठीक वसूली-योग्य वाली स्थिति कहता है, इसलिए वह अपवर्जित है ।
लेखाकरण मानक-2 का मूल नियम यह है कि मालसूची का मूल्यांकन लागत तथा निवल वसूली-योग्य मूल्य में से जो कम हो उस पर किया जाए । लागत के तीन घटक हैं — क्रय की लागत, रूपांतरण की लागत, और वे अन्य लागतें जो माल को उसकी वर्तमान अवस्थिति और दशा तक लाने में लगी हों । क्रय की लागत में क्रय मूल्य, वे शुल्क और कर जो बाद में वसूली-योग्य नहीं हैं, आवक भाड़ा और अन्य प्रत्यक्ष व्यय जुड़ते हैं, जबकि व्यापारिक बट्टा और छूट घटाई जाती है । रूपांतरण की लागत में प्रत्यक्ष श्रम तथा स्थिर और परिवर्तनशील उत्पादन-उपरिव्यय का व्यवस्थित आवंटन आता है । अपवर्जित मदें चार हैं — असामान्य क्षति, भण्डार लागत (उस अपवाद को छोड़कर जो अगले उत्पादन-चरण से पहले आवश्यक हो), योगदान न करने वाले प्रशासनिक उपरिव्यय, तथा विक्रय और वितरण लागत ।
हिन्दी पाठक के लिए इस प्रश्न में दो शब्द ठिठकाने वाले हैं, इसलिए उन्हें पहले ही खोल लेना ठीक है । 'मालसूची' यहाँ माल की कोई सूची या तालिका नहीं है — वह inventory का अनुवाद है, अर्थात् स्टॉक स्वयं । और 'मूल्य-निर्धारण' यहाँ क़ीमत तय करने के अर्थ में नहीं आया ; वह valuation का अनुवाद है, जिसे लेखाशास्त्र की पाठ्यपुस्तकें 'मूल्यांकन' लिखती हैं । अर्थ बदलने से उत्तर नहीं बदलता, पर शब्द पहचान लेने से पढ़ने की गति बदल जाती है । यह भी ध्यान दीजिए कि मानक लागत-सूत्र के रूप में विशिष्ट पहचान, पहला आवक पहला जावक और भारित औसत को मान्यता देता है ; अंतिम आवक पहला जावक इसके अधीन अनुज्ञेय नहीं है ।
- लेखाकरण मानक-2 के अनुसार मालसूची का मूल्यांकन लागत तथा निवल वसूली-योग्य मूल्य में से जो कम हो उस पर होता है ।
- लागत = क्रय की लागत + रूपांतरण की लागत + वे अन्य लागतें जो माल को वर्तमान अवस्थिति और दशा तक लाने में लगी हों ।
- क्रय पर चुकाए वे शुल्क और कर लागत में जुड़ते हैं जो बाद में कर प्राधिकारियों से वसूली-योग्य नहीं हैं ।
- अपवर्जित मदें — असामान्य क्षति, भण्डार लागत, योगदान न करने वाले प्रशासनिक उपरिव्यय, तथा विक्रय और वितरण लागत ।
- भण्डार लागत का अपवाद — यदि वह उत्पादन प्रक्रिया में अगले चरण से पहले आवश्यक है तो वह लागत में शामिल होगी ।
- अनुज्ञेय लागत-सूत्र — विशिष्ट पहचान, पहला आवक पहला जावक और भारित औसत ; अंतिम आवक पहला जावक अनुज्ञेय नहीं ।
- भण्डार लागत को हर स्थिति में अपवर्जित मान लेना ; अगले उत्पादन-चरण से पहले आवश्यक भण्डारण अपवाद है ।
- सभी प्रशासनिक उपरिव्ययों को अपवर्जित मान लेना ; कसौटी यह है कि वे माल को वर्तमान दशा तक लाने में योगदान करते हैं या नहीं ।
- वसूली-योग्य और वसूली-अयोग्य करों में भेद न करना ; केवल वसूली-योग्य कर अपवर्जित हैं ।
- मालसूची को केवल लागत पर मूल्यांकित कर देना, जबकि नियम लागत और निवल वसूली-योग्य मूल्य में से कम वाले का है ।
लेखाकरण मानक-2 पर प्रश्न दो रूपों में लौटते हैं — सैद्धांतिक, जैसा यह प्रश्न है, जिसमें कोई मद लागत में शामिल है या नहीं यह पूछा जाता है ; और संख्यात्मक, जिसमें दिए गए आँकड़ों से लागत या मालसूची का मूल्य निकलवाया जाता है । दोनों के लिए एक ही तैयारी काम आती है — शामिल होने वाली मदों की सूची और अपवर्जित मदों की सूची, दोनों साथ-साथ लिखकर याद कीजिए, और अपवर्जन-सूची में छिपी शर्तों पर विशेष निशान लगाइए, क्योंकि प्रश्न प्रायः उन्हीं शर्तों पर बनता है ।
इस प्रश्न से सीधे संबंधित कोई पूर्व PYQ उपलब्ध नहीं।
- practice — not a real PYQ
लेखाकरण मानक-2 के अनुसार मालसूची का मूल्यांकन किस पर किया जाता है ?
- (a)केवल लागत पर
- (b)केवल निवल वसूली-योग्य मूल्य पर
- (c)लागत तथा निवल वसूली-योग्य मूल्य में से जो कम हो उस पर
- (d)प्रतिस्थापन लागत पर
उत्तर(c) लागत तथा निवल वसूली-योग्य मूल्य में से जो कम हो उस पर — यही मानक का मूल नियम है और यह रूढ़िवादिता की परंपरा का व्यावहारिक रूप भी है ।
- practice — not a real PYQ
लेखाकरण मानक-2 के अधीन निम्नलिखित में से कौन-सी लागत-सूत्र पद्धति अनुज्ञेय नहीं है ?
- (a)पहला आवक पहला जावक
- (b)भारित औसत
- (c)अंतिम आवक पहला जावक
- (d)विशिष्ट पहचान
उत्तर(c) अंतिम आवक पहला जावक — शेष तीनों पद्धतियाँ मानक के अधीन मान्य हैं ।