यदि ₹ 1, ₹ 2 और ₹ 5 अंकित मूल्य के पर्याप्त सिक्के हों, तो कोई व्यक्ति ₹ 10 का भुगतान कितने प्रकार से कर सकता है ?
- (a)8
- (b)9
- (c)10
- (d)11
सही उत्तर — C, (c) 10 । ऐसे प्रश्न में सबसे सुरक्षित तरीक़ा यह है कि गिनती किसी एक चर के अनुसार क्रम से की जाए, ताकि न कोई मामला छूटे और न कोई दो बार गिना जाए । सबसे बड़े सिक्के से शुरू कीजिए — ₹5 के सिक्कों की संख्या तीन ही हो सकती है : दो, एक, या शून्य । दो ₹5 के सिक्के लेने पर पूरे ₹10 बन जाते हैं और आगे कुछ जोड़ने की गुंजाइश नहीं — यह 1 प्रकार है । एक ₹5 का सिक्का लेने पर शेष ₹5 को ₹1 और ₹2 से बनाना है, और उसमें ₹2 के सिक्के शून्य, एक या दो हो सकते हैं — अर्थात् (5 + 1 + 1 + 1 + 1 + 1), (5 + 2 + 1 + 1 + 1) और (5 + 2 + 2 + 1) — कुल 3 प्रकार । कोई ₹5 का सिक्का न लेने पर पूरे ₹10 को ₹1 और ₹2 से बनाना है, और वहाँ ₹2 के सिक्के शून्य से लेकर पाँच तक हो सकते हैं — 6 प्रकार । तीनों जोड़िए : 1 + 3 + 6 = 10 । बीजगणित की भाषा में यह उन ऋणेतर पूर्णांक हलों की गिनती है जो समीकरण a + 2b + 5c = 10 को संतुष्ट करते हैं, जहाँ a, b, c क्रमशः ₹1, ₹2 और ₹5 के सिक्कों की संख्या हैं । दो बातें ध्यान में रहें । पहली, प्रश्न सिक्कों का संचय पूछता है, उनका क्रम नहीं — ₹5 पहले दीजिए या बाद में, भुगतान वही रहता है । दूसरी, किसी मूल्य-वर्ग का शून्य बार प्रयोग भी वैध है, क्योंकि प्रश्न यह कहीं नहीं कहता कि तीनों प्रकार के सिक्के लगने ही चाहिए ।
- (a)8 — 8 तब निकलते हैं जब वे दो भुगतान छोड़ दिए जाएँ जिनमें केवल एक ही मूल्य-वर्ग का सिक्का लगता है — दस ₹1 के सिक्के, और दो ₹5 के सिक्के । प्रश्न ऐसी कोई शर्त नहीं लगाता ; वह केवल इतना कहता है कि तीनों मूल्य-वर्गों के पर्याप्त सिक्के उपलब्ध हैं । 'उपलब्ध हैं' और 'प्रयोग होने ही चाहिए' दो अलग बातें हैं, और गणना के प्रश्नों में यही भेद सबसे अधिक अंक बनाता या बिगाड़ता है । जहाँ प्रश्न किसी सिक्के का प्रयोग अनिवार्य करना चाहेगा, वहाँ वह 'कम से कम एक' जैसे शब्द लिखेगा ।
- (b)9 — 9 तब निकलते हैं जब दो ₹5 के सिक्कों वाला भुगतान छूट जाए, क्योंकि तब गिनती 6 + 3 = 9 पर रुक जाती है । यही मामला सबसे आसानी से छूटता है, क्योंकि उसमें ₹1 और ₹2 का एक भी सिक्का नहीं लगता और वह 'बचे हुए पैसे बनाइए' वाली सोच में पकड़ में नहीं आता । बचाव का तरीक़ा वही है जो ऊपर बताया गया — सबसे बड़े सिक्के की संख्या को शून्य से लेकर अधिकतम संभव मान तक क्रम से चलाइए, और हर मान पर बचे हुए भाग की गिनती अलग से कीजिए । यहाँ ₹5 के सिक्के का अधिकतम संभव मान दो है, इसलिए गिनती के तीन ही ख़ाने बनते हैं ।
- (d)11 — 11 तक पहुँचने के लिए कोई ग्यारहवाँ संचय चाहिए, और सूची बनाकर देखने पर वैसा कोई संचय है ही नहीं । पूरी सूची यही दस है — दस ₹1 ; आठ ₹1 और एक ₹2 ; छह ₹1 और दो ₹2 ; चार ₹1 और तीन ₹2 ; दो ₹1 और चार ₹2 ; पाँच ₹2 ; एक ₹5 और पाँच ₹1 ; एक ₹5, एक ₹2 और तीन ₹1 ; एक ₹5, दो ₹2 और एक ₹1 ; और दो ₹5 । 11 तब आता है जब कोई एक संचय दो बार गिन लिया जाए, और ऐसा प्रायः तब होता है जब गिनती किसी एक चर के क्रम में न करके इधर-उधर से की जाए । यह भी याद रखिए कि यदि क्रम को महत्त्व दिया जाता — अर्थात् किस सिक्के के बाद कौन-सा — तो उत्तर 11 नहीं, इससे कहीं बड़ा होता ।
यह पूर्णांक विभाजन की गिनती का प्रश्न है । ₹1, ₹2 और ₹5 के सिक्कों से ₹10 बनाने के प्रकार गिनना उन ऋणेतर पूर्णांक हलों को गिनना है जो a + 2b + 5c = 10 को संतुष्ट करते हैं । ऐसी गिनती का मानक तरीक़ा है — सबसे बड़े गुणांक वाले चर को स्थिर कीजिए और उसके हर संभव मान पर बचे हुए सरल समीकरण के हल गिनिए । यहाँ c केवल 0, 1 या 2 हो सकता है ; c = 2 पर 1 हल, c = 1 पर 3 हल और c = 0 पर 6 हल मिलते हैं, कुल 10 । यही विधि किसी भी राशि और किसी भी मूल्य-वर्ग-समुच्चय पर लागू होती है, और उसका बड़ा रूप जनक फलन (generating function) की विधि है ।
इस प्रकार के प्रश्न में दो बातें प्रश्न-वाक्य से तय होती हैं और उन्हीं पर उत्तर टिका होता है । पहली, क्या क्रम मायने रखता है — 'कितने प्रकार से भुगतान कर सकता है' का अर्थ सिक्कों का संचय है, उनका अनुक्रम नहीं ; यदि अनुक्रम गिना जाता तो संख्या कई गुना बड़ी हो जाती । दूसरी, क्या हर मूल्य-वर्ग का प्रयोग अनिवार्य है — यहाँ नहीं, क्योंकि प्रश्न केवल सिक्कों की उपलब्धता बताता है । इन दो प्रश्नों का उत्तर तय किए बिना गिनती शुरू करना ही अधिकांश ग़लत उत्तरों की जड़ है । शेष काम केवल क्रम से गिनने का अनुशासन है ।
- प्रश्न a + 2b + 5c = 10 के ऋणेतर पूर्णांक हलों की गिनती है, जहाँ a, b, c क्रमशः ₹1, ₹2 और ₹5 के सिक्कों की संख्या हैं ।
- ₹5 के दो सिक्कों वाला मामला — 1 प्रकार ।
- ₹5 का एक सिक्का लेने पर शेष ₹5 को ₹1 और ₹2 से बनाने के 3 प्रकार ।
- ₹5 का कोई सिक्का न लेने पर ₹10 को ₹1 और ₹2 से बनाने के 6 प्रकार ।
- कुल प्रकार = 1 + 3 + 6 = 10 ।
- गिनती संचय की है, अनुक्रम की नहीं ; और किसी मूल्य-वर्ग का शून्य बार प्रयोग भी वैध है ।
- यह मान लेना कि तीनों मूल्य-वर्गों के सिक्के लगने ही चाहिए ; प्रश्न ऐसी शर्त नहीं लगाता ।
- केवल एक ही मूल्य-वर्ग वाले भुगतान छोड़ देना ।
- दो ₹5 के सिक्कों वाला मामला भूल जाना, क्योंकि उसमें और कोई सिक्का नहीं लगता ।
- संचय के बजाय अनुक्रम गिनने लगना, जिससे संख्या कई गुना बढ़ जाती है ।
गिनती के प्रश्न EPFO के संख्यात्मक खंड में हर वर्ष किसी न किसी रूप में आते हैं — सिक्कों से राशि बनाना, पासों के परिणाम गिनना, अंकों से संख्याएँ बनाना, या किसी शर्त के साथ चयन करना । सबका ढर्रा एक ही है : पहले तय कीजिए कि क्रम मायने रखता है या नहीं और कोई मद अनिवार्य है या नहीं, फिर किसी एक चर को स्थिर करके उसके हर संभव मान पर गिनती कीजिए, और अंत में जोड़ दीजिए । छोटे मानों पर पूरी सूची लिख डालना कमज़ोरी नहीं है — इस प्रश्न में तो वही सबसे तेज़ रास्ता है ।
इस प्रश्न से सीधे संबंधित कोई पूर्व PYQ उपलब्ध नहीं।
- practice — not a real PYQ
यदि ₹ 1, ₹ 2 और ₹ 5 अंकित मूल्य के पर्याप्त सिक्के हों, तो ₹ 6 का भुगतान कितने प्रकार से किया जा सकता है ?
- (a)4
- (b)5
- (c)6
- (d)7
उत्तर(b) 5 — ₹5 का एक सिक्का लेने पर 1 प्रकार, और कोई ₹5 का सिक्का न लेने पर ₹2 के सिक्कों की संख्या शून्य से तीन तक होने से 4 प्रकार ; कुल 5 ।
- practice — not a real PYQ
केवल ₹ 1 और ₹ 2 अंकित मूल्य के सिक्कों से ₹ 10 का भुगतान कितने प्रकार से किया जा सकता है ?
- (a)5
- (b)6
- (c)10
- (d)11
उत्तर(b) 6 — ₹2 के सिक्कों की संख्या शून्य से पाँच तक कुछ भी हो सकती है, और हर स्थिति में शेष राशि ₹1 के सिक्कों से पूरी हो जाती है ।