2^(2^100) के इकाई के स्थान में कौन-सा अंक है ?
- (a)2
- (b)4
- (c)6
- (d)8
सही उत्तर — C, (c) 6 । दो की घातों के इकाई अंक चार-चार पर लौटते हैं : 2¹ = 2, 2² = 4, 2³ = 8, 2⁴ = 16 का 6, और फिर 2⁵ = 32 पर वही 2 । अर्थात् इकाई अंक का चक्र 2, 4, 8, 6 है और उसका आवर्तकाल चार है । इसलिए इकाई अंक पूरी घात से नहीं, केवल इस बात से तय होता है कि घातांक को 4 से भाग देने पर शेष क्या बचता है — शेष 1 पर 2, शेष 2 पर 4, शेष 3 पर 8, और शेष 0 पर 6 । अब इस प्रश्न में घातांक स्वयं 2^100 है, इसलिए असली काम यह है कि 2^100 को 4 से भाग देने पर शेष निकाला जाए । यह बिना किसी गणना के दिख जाता है : 2^100 = 4 × 2^98, अर्थात् 2^100 स्वयं 4 का गुणज है और शेष शून्य है । शेष शून्य का अर्थ है चक्र का चौथा पद, जो 6 है । इसीलिए उत्तर 6 है । यही बात एक सामान्य नियम के रूप में भी कही जा सकती है — जब घातांक स्वयं 2 की कोई घात हो और उसका सूचकांक 2 या उससे बड़ा हो, तब वह घातांक सदा 4 का गुणज होता है और उत्तर सदा 6 आता है । छोटे मानों पर इसे स्वयं देख लीजिए : 2^(2^2) = 2⁴ = 16, और 2^(2^3) = 2⁸ = 256 — दोनों का इकाई अंक 6 । एक पाठ-संबंधी सूचना भी उपयोगी है : पुस्तिका में यह घात-मीनार के रूप में छपा है, और ऐसी मीनार ऊपर से नीचे पढ़ी जाती है, अर्थात् पहले 2^100, फिर उसे 2 का घातांक बनाइए । संयोग से यहाँ दूसरा पाठ भी वही उत्तर देता है, क्योंकि 200 भी 4 का गुणज है — पर आदत ऊपर से पढ़ने की ही डालनी चाहिए ।
- (a)2 — 2 चक्र का पहला पद है और वह तभी आता है जब घातांक को 4 से भाग देने पर शेष 1 बचे — जैसे 2¹, 2⁵, 2⁹ में । यहाँ घातांक 2^100 है, जो 4 का गुणज है, इसलिए शेष 1 आ ही नहीं सकता । इस विकल्प तक पहुँचने का सबसे आम रास्ता यह है कि शेष शून्य निकालने के बाद उसे चक्र का 'पहला' पद मान लिया जाए । याद रखने का सही ढंग यह है : शेष शून्य का अर्थ है कि आप चक्र के अंतिम पद पर खड़े हैं, पहले पर नहीं — ठीक वैसे ही जैसे 4 का गुणज होने पर सप्ताह का वही दिन लौटता है जिससे आपने गिनना बंद किया था ।
- (b)4 — 4 चक्र का दूसरा पद है और वह तब आता है जब घातांक को 4 से भाग देने पर शेष 2 बचे । यहाँ शेष शून्य है, इसलिए 4 संभव नहीं । इस विकल्प तक पहुँचने का एक बहुत ठोस रास्ता है, और उसे पहचान लेना इस प्रश्न की असली सीख है : पहले 2^100 का इकाई अंक निकाल लेना, जो 6 आता है, और फिर 2⁶ = 64 करके उत्तर 4 लिख देना । यह चरण देखने में ठीक लगता है, पर ग़लत है — घातांक को उसके इकाई अंक से बदला नहीं जा सकता । घातांक पर केवल 4 से भाग देने पर बचा शेष लगता है, उसका इकाई अंक नहीं ।
- (d)8 — 8 चक्र का तीसरा पद है और वह तब आता है जब घातांक को 4 से भाग देने पर शेष 3 बचे । पर 2^100 एक सम संख्या है और वस्तुतः 4 का गुणज भी, इसलिए उसका शेष कभी विषम हो ही नहीं सकता । इस प्रश्न को एक ही वाक्य में इस तरह देखा जा सकता है : घातांक 4 का गुणज है, इसलिए चक्र के चार पदों में से केवल अंतिम पद ही पहुँच में है ; बाक़ी तीनों अंक — 2, 4 और 8 — ऐसे शेषों के हैं जो यहाँ बन ही नहीं सकते । इसीलिए इस प्रश्न में एक ही उत्तर संभव है ।
किसी संख्या की घातों के इकाई अंक सदा चक्रीय होते हैं, और चक्र की लंबाई आधार के इकाई अंक से तय होती है । 2 का चक्र 2, 4, 8, 6 है ; 3 का 3, 9, 7, 1 ; 7 का 7, 9, 3, 1 ; 8 का 8, 4, 2, 6 — इन चारों का आवर्तकाल चार है । 4 और 9 का आवर्तकाल दो है (4, 6 तथा 9, 1) ; और 0, 1, 5, 6 का इकाई अंक कभी बदलता ही नहीं । इसलिए घात कितनी भी बड़ी हो, काम केवल इतना है कि घातांक पर आवर्तकाल से भाग देकर शेष निकाल लिया जाए, और शेष शून्य होने पर चक्र का अंतिम पद लिया जाए ।
इस प्रश्न में एक परत और जुड़ी है — घातांक स्वयं एक घात है, इसलिए दो बार शेष निकालना पड़ता है । पहले भीतरी घात 2^100 का 4 से शेष, और उसके बाद बाहरी चक्र में स्थान । 2 की घातें 2², 2³, 2⁴ … सब 4 के गुणज हैं, इसलिए भीतरी शेष सदा शून्य रहता है, और यही इस प्रश्न को दिखने से कहीं आसान बना देता है । ऐसे प्रश्नों में सबसे बड़ी सावधानी यही है कि बड़ी संख्या देखकर घबराया न जाए — 2^100 का मान निकालने की आवश्यकता कहीं नहीं है, केवल उसका 4 से शेष चाहिए, और वह एक पंक्ति में मिल जाता है ।
- 2 की घातों के इकाई अंक का चक्र 2, 4, 8, 6 है और उसका आवर्तकाल चार है ।
- घातांक को 4 से भाग देने पर शेष 1, 2, 3 और 0 पर इकाई अंक क्रमशः 2, 4, 8 और 6 होता है ।
- 2^100 = 4 × 2^98, इसलिए वह 4 का गुणज है और शेष शून्य देता है ; अतः इकाई अंक 6 है ।
- सामान्य नियम — 2 की ऐसी किसी घात के लिए जिसका घातांक स्वयं 2 की दूसरी या उससे बड़ी घात हो, इकाई अंक सदा 6 रहता है ।
- जाँच के छोटे उदाहरण — 2⁴ = 16 और 2⁸ = 256, दोनों का इकाई अंक 6 ।
- घात-मीनार ऊपर से नीचे पढ़ी जाती है, अर्थात् पहले ऊपरी घात का मान बनता है और वही नीचे के आधार का घातांक होता है ।
- शेष शून्य को चक्र का पहला पद मान लेना ; वह अंतिम पद होता है ।
- घातांक को उसके इकाई अंक से बदल देना ; घातांक पर केवल आवर्तकाल से भाग देकर बचा शेष लगता है ।
- घात-मीनार को नीचे से ऊपर पढ़ लेना ।
- बड़ी संख्या देखकर उसका मान निकालने की कोशिश करना, जबकि केवल शेष चाहिए ।
इकाई अंक के प्रश्न EPFO और अन्य आयोगों के संख्यात्मक खंड में सबसे तेज़ अंक देने वाले प्रश्नों में हैं, क्योंकि इनका हल तीस सेकंड का है । रूप तीन हैं — सीधी बड़ी घात, दो घातों का गुणनफल या योग, और घात-मीनार जैसा यह प्रश्न । तीनों में विधि एक ही रहती है : आधार के इकाई अंक से चक्र पहचानिए, घातांक पर आवर्तकाल से भाग दीजिए, और शेष के अनुसार चक्र का पद चुन लीजिए । चारों प्रमुख चक्र — 2, 3, 7 और 8 के — कंठस्थ रखिए ; बाक़ी अंक या तो स्थिर हैं या दो पदों में लौट आते हैं ।
इस प्रश्न से सीधे संबंधित कोई पूर्व PYQ उपलब्ध नहीं।
- practice — not a real PYQ
3^(3^100) के इकाई के स्थान में कौन-सा अंक होगा ?
- (a)1
- (b)3
- (c)7
- (d)9
उत्तर(b) 3 — 3 का चक्र 3, 9, 7, 1 है ; 3^100 को 4 से भाग देने पर शेष 1 बचता है, इसलिए चक्र का पहला पद लागू होता है ।
- practice — not a real PYQ
2 की घातों के इकाई अंक किस क्रम में चक्रित होते हैं ?
- (a)2, 4, 6, 8
- (b)2, 4, 8, 6
- (c)2, 8, 4, 6
- (d)2, 6, 8, 4
उत्तर(b) 2, 4, 8, 6 — क्योंकि 2¹ = 2, 2² = 4, 2³ = 8 और 2⁴ = 16, जिसके बाद यही क्रम लौट आता है ।