कारखाना अधिनियम, 1948 के प्रावधानों के अधीन, एक सुरक्षा समिति उस कारखाने में गठित की जाएगी, जहाँ :
- (a)1000 या अधिक कर्मकार नियोजित हैं
- (b)परिसंकटमय वस्तुएँ उपयोग में लाई जाती हैं या हाथ से सँभाली जाती हैं
- (c)भारी मशीनों का उपयोग होता है
- (d)500 या अधिक कर्मकार नियोजित हैं
सही उत्तर — B, (b) परिसंकटमय वस्तुएँ उपयोग में लाई जाती हैं या हाथ से सँभाली जाती हैं । कारखाना अधिनियम, 1948 की धारा 41G का शीर्षक है — सुरक्षा प्रबंध में कर्मकारों की भागीदारी । वह कहती है कि अधिभोगी (occupier) हर उस कारखाने में सुरक्षा समिति गठित करेगा जहाँ कोई परिसंकटमय प्रक्रिया चलती है, अथवा जहाँ परिसंकटमय वस्तुएँ उपयोग में लाई जाती हैं या हाथ से सँभाली जाती हैं । समिति में कर्मकारों और प्रबंधतंत्र के प्रतिनिधि बराबर संख्या में होंगे, और उसका काम दो तरफ़ा है — काम की जगह पर उचित सुरक्षा और स्वास्थ्य बनाए रखने में दोनों पक्षों का सहयोग बढ़ाना, तथा इस दिशा में उठाए गए उपायों की समय-समय पर समीक्षा करना । उसी धारा का परंतुक राज्य सरकार को यह शक्ति देता है कि वह लिखित आदेश द्वारा और कारण अभिलिखित करके किसी कारखाने या कारखानों के वर्ग को इस समिति के गठन से छूट दे दे ; समिति की संरचना, सदस्यों की पदावधि तथा उनके अधिकार और कर्तव्य नियमों से विहित होते हैं । ध्यान देने की मुख्य बात यह है कि इस धारा की कसौटी संख्या नहीं, ख़तरा है । शेष दो विकल्प संख्याएँ रखते हैं और वे संख्याएँ इसी अधिनियम की दूसरी धाराओं से उठाई गई हैं, इसी से नहीं । शब्दावली की एक सूचना : 'परिसंकटमय' hazardous का सरकारी हिन्दी पर्याय है, और इसी अधिनियम में 'परिसंकटमय प्रक्रिया' की परिभाषा भी दी गई है — वह प्रक्रिया, जिसमें विशेष सावधानी न बरतने पर कच्चा माल, उत्पाद, उप-उत्पाद, अपशिष्ट या बहिःस्राव कर्मकारों के स्वास्थ्य को गंभीर हानि पहुँचा सकते हैं या पर्यावरण को प्रदूषित कर सकते हैं ।
- (a)1000 या अधिक कर्मकार नियोजित हैं — एक हज़ार की संख्या इसी अधिनियम में आती है, पर सुरक्षा समिति के लिए नहीं — सुरक्षा अधिकारी के लिए । धारा 40B के अनुसार जिस कारखाने में सामान्यतः एक हज़ार या अधिक कर्मकार नियोजित हैं, अथवा जिसमें राज्य सरकार की राय में ऐसी कोई विनिर्माण प्रक्रिया चलती है जिसमें शारीरिक क्षति, विषाक्तता, रोग या स्वास्थ्य को अन्य ख़तरा हो, वहाँ अधिभोगी को अधिसूचना में विनिर्दिष्ट संख्या में सुरक्षा अधिकारी नियुक्त करने होते हैं । सुरक्षा अधिकारी एक वेतनभोगी पदाधिकारी है ; सुरक्षा समिति दोनों पक्षों के प्रतिनिधियों का निकाय है । परीक्षक ने यही दो पड़ोसी उपबंध आपस में बदले हैं ।
- (c)भारी मशीनों का उपयोग होता है — भारी मशीनों का उपयोग इस अधिनियम में कहीं भी सुरक्षा समिति के गठन की कसौटी नहीं है, और सच पूछिए तो यह अधिनियम की भाषा ही नहीं है । मशीनों से जुड़े ख़तरों के लिए अध्याय IV में अलग और बहुत विस्तृत उपबंध हैं — मशीनरी की घेराबंदी, चालू मशीन पर या उसके पास काम, ख़तरनाक मशीनों पर किशोरों का नियोजन, शक्ति काटने के साधन, उत्थापित्र और लिफ़्ट, घूमने वाली मशीनरी, दाब-संयंत्र इत्यादि । अध्याय IVA की कसौटी बिलकुल दूसरी है : वहाँ प्रश्न मशीन के भारीपन का नहीं, प्रक्रिया और पदार्थ के परिसंकटमय होने का है ।
- (d)500 या अधिक कर्मकार नियोजित हैं — पाँच सौ की संख्या भी इसी अधिनियम की है, पर कल्याण की धाराओं की । धारा 49 के अनुसार जिस कारखाने में पाँच सौ या अधिक कर्मकार नियोजित हैं वहाँ कल्याण अधिकारी नियुक्त करना होता है, और धारा 45 उसी संख्या पर एम्बुलेंस कक्ष की अपेक्षा रखती है । इस अधिनियम की संख्याओं की एक अलग सूची बनाकर याद रखना बहुत काम आता है — तीस महिला कर्मकारों पर शिशु-गृह, एक सौ पचास पर विश्रामगृह और भोजन-कक्ष, ढाई सौ पर कैंटीन, पाँच सौ पर कल्याण अधिकारी और एम्बुलेंस कक्ष, एक हज़ार पर सुरक्षा अधिकारी । सुरक्षा समिति इस सूची में कहीं नहीं आती, क्योंकि उसकी कसौटी संख्या है ही नहीं ।
कारखाना अधिनियम, 1948 का अध्याय IVA परिसंकटमय प्रक्रियाओं से संबंधित उपबंधों का अध्याय है और वह 1987 के संशोधन से जोड़ा गया । उसकी धाराएँ क्रम से हैं — 41A स्थल मूल्यांकन समिति, 41B अधिभोगी द्वारा सूचना का अनिवार्य प्रकटन तथा स्थल पर आपात योजना, 41C परिसंकटमय प्रक्रियाओं के संबंध में अधिभोगी का विशेष उत्तरदायित्व, 41D केंद्रीय सरकार द्वारा जाँच समिति की नियुक्ति, 41E आपात मानक, 41F रासायनिक और विषैले पदार्थों के उद्भासन की अनुज्ञेय सीमाएँ, 41G सुरक्षा प्रबंध में कर्मकारों की भागीदारी, और 41H आसन्न ख़तरे के विरुद्ध कर्मकारों का चेतावनी देने का अधिकार । सुरक्षा समिति इसी 41G की देन है और उसकी कसौटी परिसंकटमय प्रक्रिया या परिसंकटमय वस्तुएँ हैं ।
यह पूरा अध्याय 1984 की भोपाल गैस त्रासदी के बाद की देन है, और उसकी बनावट उसी अनुभव से समझ में आती है — सूचना छिपाई न जाए, आपात योजना पहले से बने, ख़तरनाक स्थल की जाँच बैठाने से पहले हो, उद्भासन की सीमाएँ नियत हों, कर्मकार को ख़तरे की चेतावनी देने का अधिकार हो, और सुरक्षा-प्रबंध में कर्मकार भी भागीदार हों । इसीलिए सुरक्षा समिति में प्रतिनिधित्व दोनों पक्षों का बराबर रखा गया । प्रश्न-वाक्य कर्मवाच्य में लिखा है — 'गठित की जाएगी' — जबकि धारा में दायित्व नाम लेकर अधिभोगी पर डाला गया है ; उत्तर इससे बदलता नहीं, पर उत्तर-लेखन में यह भेद मूल्यवान है ।
- धारा 41G — अधिभोगी हर उस कारखाने में सुरक्षा समिति गठित करेगा जहाँ परिसंकटमय प्रक्रिया चलती है, या परिसंकटमय वस्तुएँ उपयोग में लाई जाती हैं या हाथ से सँभाली जाती हैं ।
- समिति में कर्मकारों और प्रबंधतंत्र के प्रतिनिधि बराबर संख्या में होते हैं ; उसका काम सहयोग बढ़ाना और उपायों की समय-समय पर समीक्षा करना है ।
- राज्य सरकार लिखित आदेश द्वारा और कारण अभिलिखित करके इस समिति के गठन से छूट दे सकती है ।
- धारा 40B — एक हज़ार या अधिक कर्मकार, अथवा जोखिम वाली विनिर्माण प्रक्रिया होने पर सुरक्षा अधिकारी की नियुक्ति ।
- धारा 49 — पाँच सौ या अधिक कर्मकार पर कल्याण अधिकारी ; धारा 45 — उसी संख्या पर एम्बुलेंस कक्ष ।
- अध्याय IVA (धारा 41A से 41H) 1987 के संशोधन से जोड़ा गया, जिसकी पृष्ठभूमि 1984 की भोपाल त्रासदी है ।
- सुरक्षा समिति और सुरक्षा अधिकारी को एक मान लेना ; एक निकाय है, दूसरा पद, और उनकी कसौटियाँ अलग हैं ।
- अधिनियम की हर अपेक्षा को कर्मकारों की संख्या से जोड़ लेना ; धारा 41G की कसौटी संख्या नहीं, ख़तरा है ।
- पाँच सौ और एक हज़ार की संख्याएँ आपस में बदल देना — पाँच सौ कल्याण अधिकारी और एम्बुलेंस कक्ष की है, एक हज़ार सुरक्षा अधिकारी की ।
- भारी मशीन को परिसंकटमय प्रक्रिया मान लेना ; मशीनों के ख़तरे अध्याय IV के विषय हैं ।
इस अधिनियम पर प्रश्नों की दो बड़ी धाराएँ हैं — संख्या-आधारित कल्याण-सुविधाएँ, और अध्याय IVA के परिसंकटमय-प्रक्रिया उपबंध । इसलिए तैयारी भी दो सूचियों में कीजिए : एक में संख्या और उसके सामने सुविधा तथा धारा, दूसरी में 41A से 41H तक की धाराएँ और उनके एक-पंक्ति के विषय । प्रश्न प्रायः इन दोनों सूचियों को आपस में मिलाकर बनाया जाता है, जैसे यहाँ बनाया गया है — जहाँ ख़तरे की कसौटी वाली धारा पूछी गई और विकल्पों में दो संख्याएँ रख दी गईं ।
इस प्रश्न से सीधे संबंधित कोई पूर्व PYQ उपलब्ध नहीं।
- practice — not a real PYQ
कारखाना अधिनियम, 1948 के अधीन कल्याण अधिकारी की नियुक्ति किस कारखाने में अनिवार्य है ?
- (a)जहाँ एक सौ पचास या अधिक कर्मकार नियोजित हैं
- (b)जहाँ दो सौ पचास या अधिक कर्मकार नियोजित हैं
- (c)जहाँ पाँच सौ या अधिक कर्मकार नियोजित हैं
- (d)जहाँ एक हज़ार या अधिक कर्मकार नियोजित हैं
उत्तर(c) जहाँ पाँच सौ या अधिक कर्मकार नियोजित हैं — धारा 49 का यही उपबंध है ; एक हज़ार की संख्या सुरक्षा अधिकारी की धारा 40B से जुड़ी है ।
- practice — not a real PYQ
कारखाना अधिनियम, 1948 में परिसंकटमय प्रक्रियाओं से संबंधित अध्याय IVA किस वर्ष के संशोधन से जोड़ा गया ?
- (a)1954
- (b)1976
- (c)1987
- (d)2016
उत्तर(c) 1987 — यह संशोधन 1984 की भोपाल गैस त्रासदी के बाद आया और उसी ने स्थल मूल्यांकन समिति, आपात मानक तथा सुरक्षा समिति के उपबंध जोड़े ।