औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 के अधीन, शिकायत प्रतितोषण समिति से संबंधित कौन-सा एक कथन सही नहीं है ?
- (a)यह नियोजक और कर्मकारों से बराबर संख्या में सदस्यों से मिल कर बनेगी ।
- (b)यह ऐसे औद्योगिक स्थापन में, जिसमें बीस या अधिक कर्मकार नियोजित हैं, गठित होगी ।
- (c)इस समिति का अध्यक्ष समुचित सरकार द्वारा नामनिर्दिष्ट किया जाएगा ।
- (d)इस समिति के सदस्यों की कुल संख्या छह से अधिक नहीं होगी ।
सही उत्तर — C, (c) इस समिति का अध्यक्ष समुचित सरकार द्वारा नामनिर्दिष्ट किया जाएगा । यही एक कथन है जो औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 की धारा 9C के विरुद्ध जाता है, और पुस्तिका ने प्रश्न-वाक्य का 'नहीं' मोटे तिरछे अक्षरों में छापकर पहले ही चेता दिया है कि ग़लत कथन ढूँढ़ना है । धारा 9C 2010 के संशोधन से जोड़ी गई और उसका शीर्षक है — शिकायत प्रतितोषण तंत्र की स्थापना । उसकी उपधारा (3) अध्यक्ष के बारे में साफ़ कहती है कि अध्यक्ष नियोजक-पक्ष से और कर्मकारों में से बारी-बारी से, प्रतिवर्ष आवर्तन के आधार पर चुना जाएगा । अर्थात् अध्यक्षता किसी बाहरी प्राधिकारी की नियुक्ति से नहीं आती, वह दोनों पक्षों के बीच घूमती रहती है — और यही इस समिति की आत्मा है, क्योंकि यह विवाद-निपटान का द्विपक्षीय, कारखाने के भीतर का तंत्र है, सरकारी अधिनिर्णय का नहीं । समुचित सरकार की भूमिका इस अधिनियम में सुलह अधिकारी नियुक्त करने, जाँच समिति बनाने, श्रम न्यायालय तथा अधिकरण गठित करने और विवाद निर्देशित करने में है ; शिकायत प्रतितोषण समिति के अध्यक्ष को नामनिर्दिष्ट करने में नहीं । शेष तीनों कथन धारा 9C को ठीक-ठीक दोहराते हैं, इसलिए वे उत्तर नहीं हो सकते । एक शब्द-सूचना, क्योंकि हिन्दी पाठक यहीं अटकता है : पुस्तिका ने redressal को 'प्रतितोषण' लिखा है, जो विधि की सरकारी हिन्दी है — वही शब्द उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग में भी आता है ; पाठ्यपुस्तकों का प्रचलित शब्द 'निवारण' है, और दोनों का अर्थ एक ही है ।
- (a)यह नियोजक और कर्मकारों से बराबर संख्या में सदस्यों से मिल कर बनेगी । — यह कथन सही है, इसलिए यह उत्तर नहीं हो सकता । धारा 9C(2) कहती है कि शिकायत प्रतितोषण समिति नियोजक और कर्मकारों में से बराबर संख्या के सदस्यों से मिलकर बनेगी । समान प्रतिनिधित्व इस समिति के स्वरूप की बुनियाद है — यह द्विपक्षीय निकाय है, और इसी कारण अध्यक्षता भी दोनों पक्षों के बीच बारी-बारी घूमती है । इसी अधिनियम की धारा 3 की कार्य समिति (Works Committee) में भी यही समान-प्रतिनिधित्व का सिद्धांत मिलता है, अंतर केवल विषय का है : कार्य समिति सामान्य सद्भाव के लिए है और शिकायत प्रतितोषण समिति व्यक्तिगत शिकायत के निपटारे के लिए ।
- (b)यह ऐसे औद्योगिक स्थापन में, जिसमें बीस या अधिक कर्मकार नियोजित हैं, गठित होगी । — यह भी सही कथन है । धारा 9C(1) के अनुसार जिस औद्योगिक स्थापन में बीस या अधिक कर्मकार नियोजित हैं, वहाँ व्यक्तिगत शिकायतों से उठने वाले विवादों के निपटारे के लिए एक या अधिक शिकायत प्रतितोषण समितियाँ होंगी । संख्या-सीमा याद रखने योग्य है, क्योंकि इस अधिनियम में अलग-अलग उपबंधों की अलग संख्याएँ हैं — कार्य समिति के लिए एक सौ कर्मकार, और छंटनी तथा बंदी के विशेष अध्याय के लिए और बड़ी संख्याएँ । बीस का आँकड़ा केवल धारा 9C का है ।
- (d)इस समिति के सदस्यों की कुल संख्या छह से अधिक नहीं होगी । — यह कथन भी सही है और धारा 9C(4) से आता है — समिति के सदस्यों की कुल संख्या छह से अधिक नहीं होगी । उसी उपधारा का परंतुक एक बात और जोड़ता है, जो प्रश्न में नहीं आई पर पूछी जा सकती है : यथासाध्य एक महिला सदस्य होगी यदि समिति में दो सदस्य हैं, और सदस्य दो से अधिक होने पर महिला सदस्यों की संख्या अनुपात में बढ़ाई जा सकेगी । इसी धारा की आगे की उपधाराएँ कहती हैं कि समिति लिखित आवेदन मिलने के तीस दिन के भीतर कार्यवाही पूरी कर सकेगी, कि उसके विनिश्चय से व्यथित कर्मकार नियोजक के पास अपील कर सकेगा, और कि इस समिति के होने से कर्मकार का औद्योगिक विवाद उठाने का अधिकार प्रभावित नहीं होगा ।
धारा 9C औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 में 2010 के संशोधन से जोड़ी गई और वह व्यक्तिगत शिकायतों के लिए कारखाने के भीतर एक द्विपक्षीय तंत्र बनाती है । उसके उपबंध क्रम से ये हैं : बीस या अधिक कर्मकार वाले औद्योगिक स्थापन में एक या अधिक शिकायत प्रतितोषण समितियाँ होंगी ; समिति में नियोजक और कर्मकारों के बराबर सदस्य होंगे ; अध्यक्ष नियोजक-पक्ष और कर्मकारों में से प्रतिवर्ष बारी-बारी से चुना जाएगा ; सदस्यों की कुल संख्या छह से अधिक नहीं होगी, और यथासाध्य महिला प्रतिनिधित्व रहेगा ; समिति लिखित आवेदन मिलने के तीस दिन के भीतर कार्यवाही पूरी कर सकेगी ; व्यथित कर्मकार नियोजक के पास अपील कर सकेगा, जिसे एक मास के भीतर निपटाना होगा ; और इस समिति के होने से कर्मकार का औद्योगिक विवाद उठाने का अधिकार प्रभावित नहीं होगा ।
2010 का संशोधन केवल इसी धारा तक सीमित नहीं था — उसी ने धारा 2(s) में पर्यवेक्षकों के लिए मज़दूरी-सीमा बढ़ाई और धारा 2A में कर्मकार को यह अधिकार दिया कि सुलह में समय बीत जाने पर वह सीधे श्रम न्यायालय या अधिकरण के पास जा सके । इस पूरे ढाँचे का मक़सद यह था कि छोटी, व्यक्तिगत शिकायतें सुलह और अधिनिर्णय की लंबी प्रक्रिया में जाने से पहले ही कारखाने के भीतर निपट जाएँ । इसीलिए इस समिति में सरकार की कोई भूमिका नहीं रखी गई — न सदस्य नामनिर्दिष्ट करने की, न अध्यक्ष चुनने की । यही वह बिंदु है जिस पर यह प्रश्न बनाया गया है ।
- धारा 9C औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 में 2010 के संशोधन से जोड़ी गई ।
- बीस या अधिक कर्मकार नियोजित करने वाले औद्योगिक स्थापन में एक या अधिक शिकायत प्रतितोषण समितियाँ होंगी ।
- समिति में नियोजक और कर्मकारों से बराबर संख्या में सदस्य होंगे ; कुल सदस्य छह से अधिक नहीं होंगे ।
- अध्यक्ष नियोजक-पक्ष और कर्मकारों में से प्रतिवर्ष बारी-बारी से, आवर्तन के आधार पर चुना जाएगा — समुचित सरकार उसे नामनिर्दिष्ट नहीं करती ।
- समिति लिखित आवेदन मिलने के तीस दिन के भीतर कार्यवाही पूरी कर सकेगी ; व्यथित कर्मकार नियोजक के पास अपील कर सकेगा, जिसे एक मास में निपटाना होगा ।
- इस समिति के होने से कर्मकार का उसी विषय पर औद्योगिक विवाद उठाने का अधिकार प्रभावित नहीं होता ।
- अध्यक्ष के चयन में सरकार की भूमिका मान लेना ; अध्यक्षता दोनों पक्षों के बीच प्रतिवर्ष घूमती है ।
- बीस और एक सौ की संख्याएँ आपस में बदल देना — बीस धारा 9C की है, एक सौ कार्य समिति की ।
- यह मान लेना कि समिति के विनिश्चय के बाद औद्योगिक विवाद नहीं उठाया जा सकता ; धारा 9C इसका उल्टा कहती है ।
- तीस दिन (समिति की कार्यवाही) और एक मास (नियोजक द्वारा अपील का निपटारा) की अवधियाँ मिला देना ।
इस अधिनियम पर EPFO के प्रश्न प्राधिकरणों के गठन, संख्याओं और समय-सीमाओं पर केंद्रित रहते हैं, और प्रायः नकारात्मक रूप में आते हैं — 'कौन-सा कथन सही नहीं है' । ऐसे प्रश्न में सबसे सुरक्षित तरीक़ा यह है कि चारों कथनों को धारा की उपधाराओं पर एक-एक कर मिलाया जाए, और जो कथन किसी उपधारा से मेल न खाए वही चुना जाए । इसलिए धारा 9C को उपधारा-दर-उपधारा याद कीजिए : संख्या, संरचना, अध्यक्षता, सीमा, समय और अपील — छह बिंदु, और प्रश्न इन्हीं में से किसी एक को बदलकर बनता है ।
इस प्रश्न से सीधे संबंधित कोई पूर्व PYQ उपलब्ध नहीं।
- practice — not a real PYQ
औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 की धारा 9C के अधीन शिकायत प्रतितोषण समिति का अध्यक्ष किस प्रकार चुना जाता है ?
- (a)समुचित सरकार द्वारा नामनिर्दिष्ट किया जाता है
- (b)नियोजक द्वारा नियुक्त किया जाता है
- (c)नियोजक-पक्ष और कर्मकारों में से प्रतिवर्ष बारी-बारी से, आवर्तन के आधार पर
- (d)कर्मकारों के मतदान से चुना जाता है
उत्तर(c) नियोजक-पक्ष और कर्मकारों में से प्रतिवर्ष बारी-बारी से, आवर्तन के आधार पर — धारा 9C(3) का यही उपबंध है ।
- practice — not a real PYQ
औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 की धारा 9C के अधीन शिकायत प्रतितोषण समिति के सदस्यों की कुल संख्या कितने से अधिक नहीं होगी ?
- (a)चार
- (b)छह
- (c)आठ
- (d)दस
उत्तर(b) छह — और उसी उपधारा का परंतुक यथासाध्य महिला प्रतिनिधित्व की अपेक्षा भी रखता है ।