निम्नलिखित में से किस एक अधिनियम के अधीन, 'बाह्य-कर्मकार' को स्पष्ट रूप से 'कर्मकार' की परिभाषा से बाहर रखा गया है ?
- (a)कारखाना अधिनियम, 1948
- (b)बागान श्रम अधिनियम, 1951
- (c)ठेका श्रम (विनियमन और उत्सादन) अधिनियम, 1970
- (d)अंतरराज्यिक प्रवासी कर्मकार (नियोजन का विनियमन और सेवा-शर्त) अधिनियम, 1979
सही उत्तर — C, (c) ठेका श्रम (विनियमन और उत्सादन) अधिनियम, 1970 । इस अधिनियम की धारा 2(1)(i) 'कर्मकार' को परिभाषित करती है और फिर तीन कोटियों को उसमें से स्पष्ट रूप से बाहर करती है : (A) जो मुख्यतः प्रबंधकीय या प्रशासनिक हैसियत में नियोजित है ; (B) जो पर्यवेक्षीय हैसियत में नियोजित होते हुए पाँच सौ रुपये प्रति मास से अधिक मज़दूरी पाता है या मुख्यतः प्रबंधकीय प्रकृति के कृत्य करता है ; और (C) जो बाह्य-कर्मकार है । अधिनियम बाह्य-कर्मकार की परिभाषा भी उसी खंड में दे देता है — वह व्यक्ति, जिसे मुख्य नियोजक द्वारा या उसकी ओर से वस्तुएँ और सामग्री इसलिए दी जाती हैं कि उन्हें मुख्य नियोजक के व्यापार या कारोबार के प्रयोजन से बिक्री के लिए बनाया, साफ़ किया, धोया, बदला, सजाया, पूरा किया, मरम्मत किया या अन्यथा संसाधित किया जाए, और यह काम या तो उस व्यक्ति के अपने घर में होना है या ऐसे किसी अन्य परिसर में जो मुख्य नियोजक के नियंत्रण और प्रबंध के अधीन नहीं है । अपवर्जन का तर्क अधिनियम की पूरी बनावट से निकलता है : यह क़ानून ठेकेदार के लाइसेंस, स्थापन के रजिस्ट्रीकरण, और स्थापन में कैंटीन, विश्राम-कक्ष, पेयजल, शौचालय तथा प्राथमिक उपचार जैसी सुविधाओं पर टिका है । जो व्यक्ति अपने घर में काम करता है, उस पर यह पूरी मशीनरी लागू ही नहीं हो सकती, क्योंकि वहाँ न मुख्य नियोजक का परिसर है और न उसका पर्यवेक्षण । एक शब्द-सूचना : पुस्तिका ने abolition को 'उत्सादन' लिखा है, जो अधिनियम का सरकारी हिन्दी नाम है ; प्रचलित शब्द 'उन्मूलन' खोजने पर मिलेगा नहीं ।
- (a)कारखाना अधिनियम, 1948 — कारखाना अधिनियम, 1948 में जो पद परिभाषित है वह 'कर्मकार' (worker) है, और उसकी धारा 2(l) में बाह्य-कर्मकार का कोई अपवर्जन है ही नहीं । वह परिभाषा उल्टे बहुत समावेशी है — उसमें वह भी आता है जो सीधे नियोजित है और वह भी जो किसी अभिकरण या ठेकेदार के माध्यम से नियोजित है, चाहे मुख्य नियोजक को उसकी जानकारी हो या न हो, और चाहे मज़दूरी मिलती हो या न मिलती हो ; विनिर्माण प्रक्रिया के साथ जुड़ी सफ़ाई और आनुषंगिक काम भी उसमें शामिल हैं । इस परिभाषा से जिसे स्पष्ट रूप से बाहर रखा गया है, वह संघ के सशस्त्र बलों का सदस्य है । अर्थात् यहाँ अपवर्जन तो है, पर वह बाह्य-कर्मकार का नहीं ।
- (b)बागान श्रम अधिनियम, 1951 — बागान श्रम अधिनियम, 1951 भी 'कर्मकार' को परिभाषित करता है, पर उसके अपवर्जन दूसरे हैं — बागान में नियोजित चिकित्सा अधिकारी ; वह व्यक्ति जिसकी मासिक मज़दूरी विहित सीमा से अधिक है ; वह जो मुख्यतः प्रबंधकीय या प्रशासनिक हैसियत में नियोजित है ; और वह जो भवन, सड़क, पुल, नाली या नहर के निर्माण, विकास या अनुरक्षण के काम पर अस्थायी रूप से लगाया गया है । बाह्य-कर्मकार इस सूची में कहीं नहीं है, और होने का कारण भी नहीं — बागान का काम अपनी प्रकृति से ही बाग़ान की भूमि पर होता है, वहाँ 'सामग्री घर ले जाकर संसाधित करने' जैसी कोई स्थिति बनती ही नहीं ।
- (d)अंतरराज्यिक प्रवासी कर्मकार (नियोजन का विनियमन और सेवा-शर्त) अधिनियम, 1979 — यह इस प्रश्न का सबसे कठिन विकल्प है, क्योंकि अंतरराज्यिक प्रवासी कर्मकार (नियोजन का विनियमन और सेवा-शर्त) अधिनियम, 1979 की 'कर्मकार' की परिभाषा लगभग शब्दशः ठेका श्रम अधिनियम से उठाई गई है — वही 'किसी स्थापन के काम में या उसके संबंध में कुशल, अर्ध-कुशल या अकुशल शारीरिक, पर्यवेक्षीय, तकनीकी या लिपिकीय काम' वाली भाषा । अंतर यह है कि 1979 का अधिनियम केवल दो अपवर्जनों पर रुक जाता है — प्रबंधकीय या प्रशासनिक हैसियत, और पाँच सौ रुपये प्रति मास से अधिक पाने वाला पर्यवेक्षीय कर्मचारी । बाह्य-कर्मकार वाला तीसरा खंड उसमें जोड़ा ही नहीं गया । यह अधिनियम एक राज्य से भर्ती होकर दूसरे राज्य में लाए गए कर्मकारों के बारे में है, इसलिए घर पर काम करने वाला व्यक्ति उसकी कल्पना में आता भी नहीं ।
ठेका श्रम (विनियमन और उत्सादन) अधिनियम, 1970 उन कर्मकारों के लिए है जिन्हें कोई ठेकेदार किसी स्थापन के काम के लिए लगाता है । उसकी दो टाँगें हैं — विनियमन और उत्सादन । विनियमन के अंतर्गत स्थापन का रजिस्ट्रीकरण, ठेकेदार का लाइसेंस, मज़दूरी के संदाय की ज़िम्मेदारी, तथा कैंटीन, विश्राम-कक्ष, पेयजल, शौचालय और प्राथमिक उपचार जैसी कल्याण-सुविधाएँ आती हैं ; उत्सादन के अंतर्गत धारा 10 की वह शक्ति आती है जिससे समुचित सरकार किसी स्थापन में ठेका श्रम का नियोजन प्रतिषिद्ध कर सकती है । धारा 2(1)(i) की 'कर्मकार' की परिभाषा तीन कोटियों को बाहर रखती है — प्रबंधकीय या प्रशासनिक, पाँच सौ रुपये से अधिक पाने वाला पर्यवेक्षीय, और बाह्य-कर्मकार ।
बाह्य-कर्मकार वस्तुतः घर-आधारित कामगार है — वह जिसे कच्चा माल दे दिया जाता है और जो उसे अपने घर में या मुख्य नियोजक के नियंत्रण से बाहर के किसी परिसर में तैयार करता है । भारत में यह काम कपड़े की सिलाई, कढ़ाई, बीड़ी, अगरबत्ती और चूड़ी जैसे उद्योगों में बहुत बड़े पैमाने पर होता है, और यही कारण है कि ऐसे कामगारों के लिए अलग विधियाँ बनीं — जैसे बीड़ी और सिगार कर्मकार (नियोजन की शर्त) अधिनियम, 1966, और आगे चलकर असंगठित कामगार सामाजिक सुरक्षा अधिनियम, 2008 । शब्दावली पर ध्यान दीजिए : यह पुस्तिका कहीं 'कामगार' लिखती है और कहीं 'कर्मकार', और इस प्रश्न में सरकारी अनुवाद 'कर्मकार' है ; साथ ही अधिनियम के नाम में abolition का हिन्दी 'उत्सादन' है, जो सामान्य हिन्दी में विरला शब्द है ।
- ठेका श्रम (विनियमन और उत्सादन) अधिनियम, 1970 की धारा 2(1)(i) 'कर्मकार' को परिभाषित करती है ।
- उसके तीन अपवर्जन हैं — प्रबंधकीय या प्रशासनिक हैसियत ; पाँच सौ रुपये प्रति मास से अधिक पाने वाला पर्यवेक्षीय कर्मचारी ; और बाह्य-कर्मकार ।
- बाह्य-कर्मकार वह है जिसे मुख्य नियोजक की ओर से वस्तुएँ और सामग्री दी जाती हैं और जो उन्हें अपने घर में या मुख्य नियोजक के नियंत्रण से बाहर के परिसर में संसाधित करता है ।
- कारखाना अधिनियम, 1948 की धारा 2(l) की 'कर्मकार' की परिभाषा से केवल संघ के सशस्त्र बलों का सदस्य बाहर है ; वह ठेकेदार के माध्यम से नियोजित व्यक्ति को भीतर रखती है ।
- बागान श्रम अधिनियम, 1951 के अपवर्जन हैं — चिकित्सा अधिकारी, विहित सीमा से अधिक मज़दूरी पाने वाला, प्रबंधकीय या प्रशासनिक हैसियत वाला, और निर्माण-अनुरक्षण के काम पर अस्थायी रूप से लगा व्यक्ति ।
- अंतरराज्यिक प्रवासी कर्मकार अधिनियम, 1979 की परिभाषा में केवल दो अपवर्जन हैं ; बाह्य-कर्मकार वाला खंड उसमें नहीं है ।
- 'कर्मकार' और 'कामगार' को अलग-अलग अवधारणाएँ मान लेना ; ये एक ही अंग्रेज़ी पद के दो हिन्दी अनुवाद हैं ।
- यह मान लेना कि 1979 के अधिनियम की परिभाषा भी बाह्य-कर्मकार को बाहर रखती है ; भाषा मिलती-जुलती है, पर वह खंड वहाँ नहीं है ।
- कारखाना अधिनियम की परिभाषा में ठेकेदार के माध्यम से नियोजित व्यक्ति को बाहर मान लेना ; वह स्पष्ट रूप से भीतर है ।
- पर्यवेक्षीय अपवर्जन की सीमा भूल जाना — पाँच सौ रुपये प्रति मास, जो अधिनियम में आज भी वैसी ही छपी है ।
परिभाषा-खंड EPFO की दोनों परीक्षाओं का सबसे उपजाऊ क्षेत्र है, क्योंकि हर अधिनियम एक ही शब्द को थोड़ा अलग परिभाषित करता है । सबसे काम की तैयारी एक तुलनात्मक तालिका है, जिसमें एक ओर अधिनियम और दूसरी ओर उसका परिभाषित पद, उसका अपवर्जन और उसकी मज़दूरी-सीमा लिखी हो । प्रश्न प्रायः इसी रूप में आते हैं — 'किस अधिनियम के अधीन अमुक को बाहर रखा गया है', या 'अमुक परिभाषा में निम्नलिखित में से कौन शामिल नहीं है' । धारा की संख्या भी साथ लिखिए ; उत्तर लिखते समय वही सबसे भारी पड़ती है ।
इस प्रश्न से सीधे संबंधित कोई पूर्व PYQ उपलब्ध नहीं।
- practice — not a real PYQ
ठेका श्रम (विनियमन और उत्सादन) अधिनियम, 1970 के अधीन 'बाह्य-कर्मकार' कौन है ?
- (a)वह व्यक्ति जो ठेकेदार के माध्यम से स्थापन के परिसर में काम करता है
- (b)वह व्यक्ति जिसे मुख्य नियोजक की ओर से वस्तुएँ और सामग्री दी जाती हैं और जो उन्हें अपने घर में या मुख्य नियोजक के नियंत्रण से बाहर के परिसर में संसाधित करता है
- (c)वह व्यक्ति जो एक राज्य से भर्ती होकर दूसरे राज्य में काम करता है
- (d)वह व्यक्ति जो पर्यवेक्षीय हैसियत में नियोजित है और पाँच सौ रुपये प्रति मास से अधिक पाता है
उत्तर(b) वह व्यक्ति जिसे मुख्य नियोजक की ओर से वस्तुएँ और सामग्री दी जाती हैं और जो उन्हें अपने घर में या मुख्य नियोजक के नियंत्रण से बाहर के परिसर में संसाधित करता है — यही परिभाषा धारा 2(1)(i) में दी गई है ।
- practice — not a real PYQ
कारखाना अधिनियम, 1948 की 'कर्मकार' की परिभाषा से निम्नलिखित में से किसे स्पष्ट रूप से बाहर रखा गया है ?
- (a)बाह्य-कर्मकार
- (b)संघ के सशस्त्र बलों का सदस्य
- (c)ठेकेदार के माध्यम से नियोजित व्यक्ति
- (d)लिपिकीय कार्य करने वाला व्यक्ति
उत्तर(b) संघ के सशस्त्र बलों का सदस्य — ठेकेदार के माध्यम से नियोजित व्यक्ति तो इस परिभाषा में स्पष्ट रूप से शामिल है ।