निम्नलिखित में से कौन-से कथन सही हैं ? 1. कॉर्नवालिस प्रणाली के अधीन, जिले 20 – 30 वर्गमील के थानों या पुलिस अधिकारिताओं में विभाजित थे । 2. उनमें से हर एक थाना दारोगा के नाम से अभिहित एक सरकारी अधिकारी के अधीन होता था । 3. दारोगा प्रणाली मद्रास में 1812 में शुरू की गई थी । 4. दारोगा, जिला मजिस्ट्रेट द्वारा नामनिर्दिष्ट किया जाता था । नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए :
- (a)केवल 1 और 2
- (b)2, 3 और 4
- (c)1, 3 और 4
- (d)1, 2 और 4
सही उत्तर — D, (d) 1, 2 और 4 । कथन 1, 2 और 4 कॉर्नवालिस की पुलिस-व्यवस्था का सही वर्णन करते हैं, और कथन 3 की तिथि ग़लत है । 1792–93 में कॉर्नवालिस ने वह काम किया जो उससे पहले किसी ने नहीं किया था — ज़मींदारों से पुलिस का दायित्व छीन लिया । सदियों से गाँव और परगने की रखवाली ज़मींदार की थानेदारी का हिस्सा थी ; कॉर्नवालिस ने उसे राज्य का काम बनाया । इसके लिए ज़िले को थानों में बाँटा गया, जिन्हें प्रश्न 'पुलिस अधिकारिताएँ' कहता है और जिनका विस्तार 20 से 30 वर्गमील रखा गया — कथन 1 । हर थाने पर एक सरकारी अधिकारी बिठाया गया, जिसे दारोगा कहा जाता था और जिसके साथ बरकंदाज़ नाम के सशस्त्र सिपाही रहते थे — कथन 2 । और दारोगा कोई स्वतंत्र पदाधिकारी नहीं था : उसे ज़िला मजिस्ट्रेट नामनिर्दिष्ट करता था और वही उस पर नियंत्रण रखता था, अर्थात् पुलिस मजिस्ट्रेटी की एक शाखा बन गई — कथन 4 । कथन 3 इसलिए ग़लत है कि मद्रास ने दारोगा प्रणाली 1812 में नहीं, 1802 में अपनाई थी, और 1816 में उसे छोड़कर पुलिस का काम फिर कलेक्टर के अधीन गाँव के मुखियों को सौंप दिया था । जो तीन कथन सही हैं, वे 1, 2 और 4 हैं ; और चारों विकल्पों में केवल एक ही ऐसा है जो ठीक इन्हीं तीनों को रखता है ।
- (a)केवल 1 और 2 — यह विकल्प कथन 1 और 2 तो सही उठाता है, पर कथन 4 छोड़ देता है — और कथन 4 इस व्यवस्था की सबसे महत्त्वपूर्ण विशेषता है । कॉर्नवालिस की व्यवस्था में दारोगा स्वतंत्र पुलिस-अधिकारी नहीं था ; उसे ज़िला मजिस्ट्रेट नामनिर्दिष्ट करता था, उसी को वह रिपोर्ट करता था और उसी के आदेश पर हटाया जा सकता था । यही वह कड़ी है जिससे पुलिस ज़मींदार के हाथ से निकलकर कंपनी की मजिस्ट्रेटी के अधीन आई । इस कथन को छोड़ देने का अर्थ है व्यवस्था का ढाँचा तो मान लेना, पर उसकी जवाबदेही की रेखा भूल जाना ।
- (b)2, 3 और 4 — इस विकल्प में दो भूलें एक साथ हैं । पहली, यह कथन 3 को सही मान लेता है, जबकि मद्रास में दारोगा प्रणाली 1802 में लाई गई थी, 1812 में नहीं । दूसरी, यह कथन 1 को बाहर कर देता है, जबकि ज़िलों का थानों में विभाजन ही कॉर्नवालिस की पूरी योजना की बुनियाद है — दारोगा का पद इसी विभाजन के बाद बना, इसलिए कथन 2 को सही मानते हुए कथन 1 को छोड़ देना आपस में मेल नहीं खाता । यदि किसी कथन के बारे में संदेह हो तो कूट-प्रश्नों में यह जाँच बहुत काम आती है : कहीं दो कथन एक-दूसरे पर टिके तो नहीं हैं ।
- (c)1, 3 और 4 — यह विकल्प कथन 1 और 4 सही उठाता है, पर उसके साथ कथन 3 भी ले आता है, और वहीं मात खा जाता है । मद्रास प्रेसिडेंसी ने दारोगा प्रणाली बंगाल के नमूने पर 1802 में अपनाई और अनुभव अच्छा न रहने पर 1816 में उसे छोड़ दिया, जिसके बाद पुलिस का काम कलेक्टर के अधीन गाँव के मुखियों के पास लौट गया । कथन 3 में प्रांत सही है, बात सही है, केवल वर्ष ग़लत है — और परीक्षक की यही सामान्य चाल है । कूट-प्रश्नों में सबसे अधिक अंक इसी आदत से बचते हैं कि कथन को पूरा पढ़ा जाए, केवल उसका विषय देखकर सही न मान लिया जाए ।
कॉर्नवालिस की पुलिस-व्यवस्था (1792–93) आधुनिक भारतीय पुलिस की पहली रूपरेखा है । उसकी तीन बातें याद रखने योग्य हैं । पहली, ज़मींदारों से पुलिस का दायित्व लेकर उसे राज्य का काम बनाया गया । दूसरी, ज़िले को 20 से 30 वर्गमील के थानों में बाँटा गया, और हर थाने पर एक दारोगा बिठाया गया, जिसके साथ बरकंदाज़ रहते थे । तीसरी, दारोगा को ज़िला मजिस्ट्रेट नामनिर्दिष्ट करता था, इसलिए पुलिस मजिस्ट्रेटी के अधीन एक शाखा बन गई । यह ढाँचा कॉर्नवालिस कोड, 1793 के साथ चलता है, जिसने न्याय, राजस्व और पुलिस के काम अलग-अलग करने की नीति अपनाई ।
व्यवस्था चली नहीं । दारोगा का वेतन कम था, नियंत्रण ढीला, और उस पर वसूली तथा अत्याचार की शिकायतें आम हो गईं ; उन्नीसवीं सदी के आरंभिक दशकों में इसी असंतोष के कारण बार-बार फेरबदल हुए और मद्रास ने तो 1816 में इस प्रणाली को छोड़ ही दिया । आधुनिक भारतीय पुलिस की वास्तविक नींव बहुत बाद में पड़ी — 1860 के पुलिस आयोग की सिफ़ारिशों पर बने पुलिस अधिनियम, 1861 से, जो आज भी बुनियादी ढाँचे का आधार है । एक शब्दावली-सूचना भी ध्यान देने योग्य है : अंग्रेज़ी स्तंभ में कथन 1 का माप 'miles square' छपा है और हिन्दी स्तंभ में 'वर्गमील' ; दोनों पाठों में क्षेत्रफल का अभिप्राय एक-सा नहीं होता, पर कथन 1 किसी भी पाठ में सही है, क्योंकि वह थानों के विभाजन की बात कह रहा है ।
- कॉर्नवालिस ने 1792–93 में ज़मींदारों से पुलिस का दायित्व लेकर उसे राज्य का काम बनाया ।
- ज़िले 20 से 30 वर्गमील के थानों या पुलिस अधिकारिताओं में बाँटे गए ; हर थाने पर एक दारोगा और उसके साथ बरकंदाज़ रहते थे ।
- दारोगा को ज़िला मजिस्ट्रेट नामनिर्दिष्ट करता था, इसलिए पुलिस मजिस्ट्रेटी के अधीन रही ।
- मद्रास प्रेसिडेंसी ने दारोगा प्रणाली 1802 में अपनाई और 1816 में छोड़ दी, जिसके बाद पुलिस का काम कलेक्टर के अधीन गाँव के मुखियों को लौटा ।
- कॉर्नवालिस कोड, 1793 ने न्याय, राजस्व और पुलिस के कार्य अलग-अलग करने की नीति अपनाई ।
- आधुनिक भारतीय पुलिस-व्यवस्था 1860 के पुलिस आयोग और पुलिस अधिनियम, 1861 से मानी जाती है ।
- कथन में विषय सही देखकर उसे सही मान लेना ; यहाँ कथन 3 में केवल वर्ष बदला गया है ।
- दारोगा को स्वतंत्र पुलिस-अधिकारी मान लेना ; वह ज़िला मजिस्ट्रेट का नामनिर्दिष्ट अधीनस्थ था ।
- कॉर्नवालिस की पुलिस-व्यवस्था और 1861 के पुलिस अधिनियम को एक ही मान लेना ; बीच में लगभग सत्तर वर्ष हैं ।
- कूट-प्रश्न में दो कथनों की आपसी निर्भरता न देखना — थानों का विभाजन और दारोगा का पद एक ही योजना के दो हिस्से हैं ।
कूट-आधारित कथन-प्रश्न इस प्रश्नपत्र का नियमित प्रारूप है, और उनमें ग़लत कथन प्रायः तिथि, संख्या या प्रांत बदलकर बनाया जाता है, विषय बदलकर नहीं । इसलिए हर कथन को तीन टुकड़ों में तोड़कर पढ़िए — क्या, कहाँ, कब — और तीनों की अलग-अलग जाँच कीजिए । दूसरी उपयोगी आदत यह है कि जिस एक कथन पर आप निश्चित हैं, उसी के आधार पर विकल्प काटिए : यहाँ यदि केवल इतना पक्का हो कि कथन 3 ग़लत है, तो उसे रखने वाले दोनों विकल्प एक साथ हट जाते हैं और उत्तर दो में से चुनना रह जाता है ।
इस प्रश्न से सीधे संबंधित कोई पूर्व PYQ उपलब्ध नहीं।
- practice — not a real PYQ
कॉर्नवालिस की पुलिस-व्यवस्था में थाने के प्रभारी सरकारी अधिकारी को किस नाम से अभिहित किया जाता था ?
- (a)कोतवाल
- (b)दारोगा
- (c)फ़ौजदार
- (d)मुंसिफ़
उत्तर(b) दारोगा — कोतवाल मुग़लकालीन नगर-पुलिस का अधिकारी था, फ़ौजदार सरकार-स्तर का सैन्य-पुलिस अधिकारी, और मुंसिफ़ दीवानी अदालत का न्यायाधिकारी ।
- practice — not a real PYQ
आधुनिक भारतीय पुलिस-व्यवस्था की नींव सामान्यतः किस अधिनियम से मानी जाती है ?
- (a)कॉर्नवालिस कोड, 1793
- (b)पुलिस अधिनियम, 1861
- (c)चार्टर अधिनियम, 1833
- (d)भारत सरकार अधिनियम, 1919
उत्तर(b) पुलिस अधिनियम, 1861 — यह 1860 के पुलिस आयोग की सिफ़ारिशों पर बना और आज तक की पुलिस-संरचना का आधार है ।