1927 में, भारत के सेक्रेटरी ऑफ़ स्टेट लॉर्ड बर्केनहेड ने भारतीय रजवाड़ों और ब्रिटिश सरकार के बीच संबंध की जाँच करने और भारतीय रजवाड़ों और ब्रिटिश भारत के बीच विद्यमान आर्थिक संबंधों के अपेक्षाकृत अधिक संतोषजनक समायोजन हेतु सुझाव देने के लिए तीन सदस्यों की एक समिति नियुक्त की । निम्नलिखित में से कौन एक, उस समिति का सदस्य नहीं था ?
- (a)हरकोर्ट बटलर
- (b)ए.जे. विल्सन
- (c)डब्ल्यू.एस. होल्ड्सवर्थ
- (d)एस.सी. पील
सही उत्तर — B, (b) ए.जे. विल्सन । प्रश्न में जिस समिति का वर्णन है वह भारतीय रजवाड़ा समिति है, जिसे उसके अध्यक्ष के नाम पर बटलर समिति कहा जाता है । लॉर्ड बर्केनहेड ने उसे 1927 में नियुक्त किया और उसमें ठीक तीन सदस्य थे — सर हरकोर्ट बटलर (अध्यक्ष), सर डब्ल्यू.एस. होल्ड्सवर्थ और सर एस.सी. पील । इन तीन नामों में ए.जे. विल्सन कहीं नहीं है, इसलिए यही विकल्प प्रश्न का उत्तर है । यहाँ प्रश्न की बनावट पर ध्यान दीजिए : पुस्तिका ने प्रश्न-वाक्य का 'नहीं' मोटे तिरछे अक्षरों में छापा है, अर्थात् आयोग स्वयं चेता रहा है कि पूछा गया नाम वह है जो समिति में था ही नहीं । जल्दबाज़ी में यह प्रश्न उलटा पढ़ लेना सबसे आम भूल है । समिति का काम दो हिस्सों में था — भारतीय रजवाड़ों और ब्रिटिश सरकार के बीच के संबंध की जाँच, और दोनों के आर्थिक संबंधों के अधिक संतोषजनक समायोजन के सुझाव । 1929 में आई उसकी रिपोर्ट के तीन मुख्य निष्कर्ष यही थे : सर्वोपरिता (paramountcy) सर्वोपरि ही रहेगी और समय की आवश्यकताओं के साथ स्वयं को ढालती रहेगी ; रजवाड़ों को उनकी सहमति के बिना किसी ऐसी भारतीय सरकार को नहीं सौंपा जाएगा जो भारतीय विधानमंडल के प्रति उत्तरदायी हो ; और रजवाड़ों का संबंध ब्रिटिश ताज से है, भारत सरकार से नहीं । रजवाड़े इस रिपोर्ट से असंतुष्ट रहे, क्योंकि सर्वोपरिता की परिभाषा वह फिर भी नहीं देती थी ।
- (a)हरकोर्ट बटलर — सर हरकोर्ट बटलर इस समिति के अध्यक्ष थे — समिति का प्रचलित नाम ही उनके नाम से बना है, इसलिए यह विकल्प किसी भी हालत में उत्तर नहीं हो सकता । वे भारतीय सिविल सेवा के वरिष्ठ अधिकारी थे और संयुक्त प्रांत तथा बर्मा, दोनों में शासन-प्रमुख रह चुके थे ; रजवाड़ों के मामलों का लंबा प्रशासनिक अनुभव ही उनके चुनाव का आधार बना । जो अभ्यर्थी प्रश्न का 'नहीं' छोड़ देता है, वह प्रायः यही विकल्प चुनता है, क्योंकि समिति के साथ सबसे पहले यही नाम स्मरण आता है ।
- (c)डब्ल्यू.एस. होल्ड्सवर्थ — सर डब्ल्यू.एस. होल्ड्सवर्थ समिति के सदस्य थे, इसलिए यह विकल्प भी उत्तर नहीं है । वे ऑक्सफ़र्ड में अंग्रेज़ी विधि के वाइनेरियन प्रोफ़ेसर थे और अंग्रेज़ी विधि के इतिहास पर उनका बहु-खंडीय ग्रंथ प्रसिद्ध है । समिति को जिस प्रश्न का उत्तर देना था — ब्रिटिश ताज और रजवाड़ों के बीच सर्वोपरिता का क़ानूनी स्वरूप क्या है — वह मूलतः विधि-शास्त्र का प्रश्न था, और उसी कारण एक विधिवेत्ता को इसमें रखा गया । यह ब्योरा याद रखने योग्य है, क्योंकि परीक्षक तीनों सदस्यों की भिन्न-भिन्न पृष्ठभूमि से ही प्रश्न बनाता है ।
- (d)एस.सी. पील — सर एस.सी. पील समिति के तीसरे सदस्य थे, इसलिए वे भी उत्तर नहीं हैं । ध्यान रखिए कि समिति में सदस्यों की संख्या तीन ही थी — प्रश्न-वाक्य स्वयं 'तीन सदस्यों की एक समिति' कहता है । इससे प्रश्न हल करने का एक सीधा रास्ता खुलता है : चार विकल्पों में से तीन सदस्य हैं और एक बाहरी, और जिस एक नाम को आप समिति के साथ कहीं पढ़ते हुए याद नहीं कर पाते, वही उत्तर है । पील ब्रिटिश सार्वजनिक जीवन के व्यक्ति थे और समिति में भारतीय प्रशासन के बाहर का दृष्टिकोण लाते थे ।
भारतीय रजवाड़ा समिति (Indian States Committee), जिसे उसके अध्यक्ष के नाम पर बटलर समिति कहते हैं, 1927 में भारत के सेक्रेटरी ऑफ़ स्टेट लॉर्ड बर्केनहेड ने नियुक्त की । सदस्य तीन थे — सर हरकोर्ट बटलर, सर डब्ल्यू.एस. होल्ड्सवर्थ और सर एस.सी. पील । उसे दो काम सौंपे गए : रजवाड़ों और ब्रिटिश सरकार के बीच संबंध की जाँच, तथा ब्रिटिश भारत और रजवाड़ों के आर्थिक संबंधों के अधिक संतोषजनक समायोजन के सुझाव । 1929 की उसकी रिपोर्ट ने कहा कि सर्वोपरिता सर्वोपरि ही रहेगी, कि रजवाड़ों को उनकी सहमति के बिना उत्तरदायी भारतीय सरकार को नहीं सौंपा जाएगा, और कि उनका संबंध ब्रिटिश ताज से है, भारत सरकार से नहीं ।
यह समिति अकेली घटना नहीं थी । 1927 वही वर्ष है जिसमें बर्केनहेड ने साइमन कमीशन की भी घोषणा की, और दोनों नियुक्तियाँ एक ही चिंता से निकलीं — भारत के भावी संवैधानिक ढाँचे में रजवाड़ों को कहाँ बिठाया जाए । 1921 में बना नरेंद्र मंडल (Chamber of Princes) पहले से माँग कर रहा था कि सर्वोपरिता की सीमाएँ परिभाषित हों । बटलर समिति ने वह परिभाषा नहीं दी, और यही उसकी सबसे बड़ी आलोचना है । इस अनसुलझे प्रश्न का असर आगे तक गया : भारत सरकार अधिनियम, 1935 का संघ रजवाड़ों के स्वेच्छया मिलने पर टिका था और उनके न मिलने के कारण कभी लागू ही नहीं हो सका ; और 1947 में सर्वोपरिता की समाप्ति के साथ ही रजवाड़ों के विलय का प्रश्न खड़ा हुआ ।
- बटलर समिति का औपचारिक नाम भारतीय रजवाड़ा समिति है ; उसे 1927 में सेक्रेटरी ऑफ़ स्टेट लॉर्ड बर्केनहेड ने नियुक्त किया ।
- उसके तीन सदस्य थे — सर हरकोर्ट बटलर (अध्यक्ष), सर डब्ल्यू.एस. होल्ड्सवर्थ और सर एस.सी. पील ।
- उसका काम था रजवाड़ों और ब्रिटिश सरकार के संबंध की जाँच तथा आर्थिक संबंधों के समायोजन के सुझाव देना ।
- 1929 की रिपोर्ट का सार — सर्वोपरिता सर्वोपरि रहेगी ; रजवाड़ों को उनकी सहमति के बिना उत्तरदायी भारतीय सरकार को नहीं सौंपा जाएगा ; उनका संबंध ब्रिटिश ताज से है ।
- रजवाड़ों की मुख्य शिकायत यह रही कि रिपोर्ट सर्वोपरिता की परिभाषा नहीं देती ।
- 1927 में ही साइमन कमीशन की घोषणा हुई ; नरेंद्र मंडल 1921 से रजवाड़ों का साझा मंच था ।
- प्रश्न का 'नहीं' छोड़कर अध्यक्ष का नाम चुन लेना ; पुस्तिका उसे मोटे तिरछे अक्षरों में छापकर चेता चुकी है ।
- बटलर समिति और साइमन कमीशन को एक ही निकाय मान लेना ; दोनों 1927 के हैं, पर उनका विषय अलग है ।
- यह मान लेना कि समिति ने सर्वोपरिता की परिभाषा दे दी ; उसने ठीक यही काम नहीं किया ।
- समिति के सदस्यों की संख्या भूल जाना ; प्रश्न-वाक्य में ही 'तीन सदस्यों की समिति' लिखा है ।
औपनिवेशिक भारत के आयोगों और समितियों पर प्रश्न तीन तरह से आते हैं — किसने नियुक्त किया, कौन सदस्य थे, और निष्कर्ष क्या रहा । इस प्रश्नपत्र ने दूसरा रास्ता लिया है, और उसे नकारात्मक रूप में पूछा है । तैयारी का व्यावहारिक तरीक़ा यह है कि हर समिति के सामने चार खाने भरे जाएँ — वर्ष, नियुक्तिकर्ता, सदस्य और एक-पंक्ति का निष्कर्ष । बटलर समिति के साथ हंटर समिति (1919), साइमन कमीशन (1927), हिल्टन-यंग आयोग और लोथियन समिति भी इसी तालिका में रखिए, क्योंकि परीक्षक इन्हीं को आपस में बदलकर विकल्प बनाता है ।
इस प्रश्न से सीधे संबंधित कोई पूर्व PYQ उपलब्ध नहीं।
- practice — not a real PYQ
बटलर समिति (भारतीय रजवाड़ा समिति) की रिपोर्ट के अनुसार भारतीय रजवाड़ों का संबंध किससे था ?
- (a)भारत सरकार से
- (b)ब्रिटिश ताज से
- (c)भारतीय विधानमंडल से
- (d)नरेंद्र मंडल से
उत्तर(b) ब्रिटिश ताज से — रिपोर्ट का यही निष्कर्ष आगे चलकर 1947 में सर्वोपरिता की समाप्ति और विलय के प्रश्न का आधार बना ।
- practice — not a real PYQ
1927 में लॉर्ड बर्केनहेड ने भारतीय रजवाड़ा समिति के अतिरिक्त और कौन-सी नियुक्ति की, जिसका भारत में व्यापक बहिष्कार हुआ ?
- (a)साइमन कमीशन
- (b)हंटर समिति
- (c)हिल्टन-यंग आयोग
- (d)लोथियन समिति
उत्तर(a) साइमन कमीशन — उसमें एक भी भारतीय सदस्य न होने के कारण देशभर में उसका बहिष्कार हुआ ।