आज़ाद हिन्द फौज (INA) कहाँ गठित हुई थी ?
- (a)सिंगापुर में
- (b)टोक्यो में
- (c)बर्लिन में
- (d)रंगून में
सही उत्तर — A, (a) सिंगापुर में । आज़ाद हिन्द फ़ौज दक्षिण-पूर्व एशिया की उपज है, और उसका जन्मस्थान सिंगापुर है । कड़ी इस तरह जुड़ती है : फ़रवरी 1942 में सिंगापुर जापान के हाथ आया और ब्रिटिश भारतीय सेना के हज़ारों भारतीय सैनिक युद्धबंदी बने ; फ़रर पार्क की सभा में जापानी अधिकारी मेजर फ़ुजिवारा ने उन युद्धबंदियों को कैप्टन मोहन सिंह को सौंप दिया, और 1 सितंबर 1942 को सिंगापुर में ही मोहन सिंह के नेतृत्व में पहली भारतीय राष्ट्रीय सेना विधिवत् खड़ी हुई । उसी वर्ष जून में रासबिहारी बोस ने बैंकाक सम्मेलन बुलाकर इंडियन इंडिपेंडेंस लीग को इस प्रयास का राजनीतिक ढाँचा बनाया । दिसंबर 1942 में जापानी सेनापतियों से मतभेद होने पर यह पहली फ़ौज बिखर गई । दूसरा और निर्णायक चरण भी सिंगापुर में ही खुला — जुलाई 1943 में सुभाष चंद्र बोस वहाँ पहुँचे, रासबिहारी बोस ने लीग का नेतृत्व उन्हें सौंपा, अगस्त 1943 में वे फ़ौज के सर्वोच्च सेनापति बने, और 21 अक्तूबर 1943 को सिंगापुर में ही उन्होंने आज़ाद हिन्द की अस्थायी सरकार की घोषणा की । रानी झाँसी रेजिमेंट, जो इस फ़ौज की महिला टुकड़ी थी, भी सिंगापुर में ही खड़ी हुई । जनवरी 1944 में मुख्यालय रंगून गया — पर मुख्यालय का जाना गठन नहीं कहलाता, और प्रश्न गठन ही पूछता है ।
- (b)टोक्यो में — टोक्यो इस कहानी में राजनयिक राजधानी है, गठन-स्थल नहीं । सुभाष चंद्र बोस 1943 में टोक्यो पहुँचे, जापानी प्रधानमंत्री तोजो से मिले और जापान की सार्वजनिक सहायता प्राप्त की ; उसी वर्ष नवंबर में टोक्यो के महा-पूर्वी-एशिया सम्मेलन में वे आज़ाद हिन्द सरकार के प्रतिनिधि के रूप में सम्मिलित हुए । रासबिहारी बोस भी 1915 से जापान में ही रह रहे थे और वहीं से भारतीय स्वाधीनता के प्रयास चला रहे थे । इतना सब होने पर भी टोक्यो में कोई सैन्य टुकड़ी नहीं बनी — वहाँ समर्थन जुटा, सेना सिंगापुर में बनी ।
- (c)बर्लिन में — यह इस प्रश्न का सबसे कठिन विकल्प है, क्योंकि बर्लिन में भी बोस ने एक सैन्य टुकड़ी खड़ी की थी — पर वह आज़ाद हिन्द फ़ौज नहीं थी । बोस 1941 में जर्मनी पहुँचे, वहीं फ़्री इंडिया सेंटर (आज़ाद हिन्द केंद्र) बना, आज़ाद हिन्द रेडियो के प्रसारण शुरू हुए, और 'जय हिन्द' का अभिवादन तथा 'नेताजी' की उपाधि भी इसी बर्लिन-काल से जुड़ी है । उत्तरी अफ़्रीका में पकड़े गए भारतीय युद्धबंदियों से जो टुकड़ी वहाँ बनी, उसका नाम इंडियन लीजन (भारतीय सैन्य दल) है ; वह जर्मन कमान के अधीन रही और कभी भारत की सीमा तक नहीं पहुँची । प्रश्न जिस INA का नाम लेता है, वह सिंगापुर वाली फ़ौज है ।
- (d)रंगून में — रंगून इस फ़ौज का कर्मक्षेत्र है, जन्मस्थान नहीं । जनवरी 1944 में आज़ाद हिन्द सरकार और फ़ौज का मुख्यालय सिंगापुर से रंगून लाया गया, और वहीं से 1944 का इंफाल–कोहिमा अभियान चला, जिसमें फ़ौज ने जापानी सेना के साथ भारत की पूर्वी सीमा पर लड़ाई लड़ी ; 'तुम मुझे ख़ून दो, मैं तुम्हें आज़ादी दूँगा' का प्रसिद्ध आह्वान भी 1944 में बर्मा में ही दिया गया । अर्थात् रंगून का संबंध फ़ौज के अभियान-काल से है, उसके गठन से नहीं — और प्रश्न में क्रिया 'गठित हुई' है ।
आज़ाद हिन्द फ़ौज दो चरणों में बनी । पहला चरण 1942 का है : सिंगापुर के पतन के बाद जापानियों ने भारतीय युद्धबंदी कैप्टन मोहन सिंह को सौंपे और 1 सितंबर 1942 को सिंगापुर में पहली भारतीय राष्ट्रीय सेना बनी ; जून 1942 के बैंकाक सम्मेलन में रासबिहारी बोस ने इंडियन इंडिपेंडेंस लीग को उसका राजनीतिक ढाँचा दिया ; दिसंबर 1942 में जापान से मतभेद होने पर यह चरण समाप्त हो गया । दूसरा चरण 1943 का है : सुभाष चंद्र बोस सिंगापुर पहुँचे, नेतृत्व सँभाला, 21 अक्तूबर 1943 को आज़ाद हिन्द की अस्थायी सरकार घोषित की, और फ़ौज को नई गति दी । उसकी टुकड़ियों के नाम गांधी, नेहरू और आज़ाद पर थे, तथा रानी झाँसी रेजिमेंट उसकी महिला टुकड़ी थी ।
इस प्रश्न में परीक्षक ने चार शहर रखे हैं और चारों बोस की कहानी में सचमुच आते हैं — बर्लिन उनका यूरोप-काल, टोक्यो उनका राजनयिक ठिकाना, सिंगापुर फ़ौज और सरकार का जन्मस्थान, और रंगून अभियान का मुख्यालय । इसलिए विकल्पों को 'सही या ग़लत' की तरह नहीं, 'किस काम का ठिकाना' की तरह पढ़ना चाहिए । फ़ौज का अंत भी इतिहास का बड़ा मोड़ है : 1945 में जापान की पराजय के बाद उसके अफ़सरों पर दिल्ली के लाल क़िले में मुक़दमे चले, जिनमें शाहनवाज़ ख़ान, प्रेम कुमार सहगल और गुरुबख्श सिंह ढिल्लों अभियुक्त थे ; इन मुक़दमों ने देशभर में जो लहर पैदा की, वह 1946 के नौसैनिक विद्रोह और सत्ता-हस्तांतरण की पृष्ठभूमि का हिस्सा बनी ।
- फ़रवरी 1942 में सिंगापुर के पतन के बाद फ़रर पार्क में भारतीय युद्धबंदी कैप्टन मोहन सिंह को सौंपे गए ।
- पहली भारतीय राष्ट्रीय सेना 1 सितंबर 1942 को सिंगापुर में मोहन सिंह के नेतृत्व में बनी ; दिसंबर 1942 में जापान से मतभेद पर बिखर गई ।
- जून 1942 के बैंकाक सम्मेलन में रासबिहारी बोस ने इंडियन इंडिपेंडेंस लीग को इस प्रयास का राजनीतिक ढाँचा बनाया ।
- जुलाई 1943 में सुभाष चंद्र बोस ने सिंगापुर में नेतृत्व सँभाला और 21 अक्तूबर 1943 को वहीं आज़ाद हिन्द की अस्थायी सरकार घोषित की ।
- जर्मनी में बनी टुकड़ी अलग थी — इंडियन लीजन, जो जर्मन कमान के अधीन रही ; बर्लिन में फ़्री इंडिया सेंटर और आज़ाद हिन्द रेडियो भी थे ।
- जनवरी 1944 में फ़ौज और सरकार का मुख्यालय रंगून गया ; 1945 के बाद लाल क़िले में शाहनवाज़ ख़ान, प्रेम कुमार सहगल और गुरुबख्श सिंह ढिल्लों पर मुक़दमे चले ।
- बर्लिन की इंडियन लीजन को आज़ाद हिन्द फ़ौज मान लेना ; दोनों अलग टुकड़ियाँ हैं, अलग कमान के अधीन ।
- मुख्यालय के स्थानांतरण (रंगून, 1944) को गठन समझ लेना ।
- 1942 की मोहन सिंह वाली फ़ौज और 1943 की बोस वाली फ़ौज को एक ही मान लेना ; बीच में दिसंबर 1942 का विघटन है ।
- अस्थायी सरकार की घोषणा-तिथि और फ़ौज के गठन की तिथि को आपस में मिला देना ।
आज़ाद हिन्द फ़ौज पर प्रश्न प्रायः स्थान, तिथि और व्यक्ति के तीन कोनों से आते हैं — 'कहाँ गठित हुई', 'अस्थायी सरकार की घोषणा कहाँ हुई', 'बैंकाक सम्मेलन किसने बुलाया', 'लाल क़िले के मुक़दमे में कौन अभियुक्त थे' । कुछ प्रश्न कालक्रम के रूप में भी आते हैं, जिनमें बर्लिन-काल, बैंकाक सम्मेलन, नेतृत्व-हस्तांतरण, अस्थायी सरकार और इंफाल अभियान को क्रम में रखना होता है । इसलिए इन घटनाओं को एक समय-रेखा पर लिखकर याद कीजिए, अलग-अलग तथ्यों की तरह नहीं ।
इस प्रश्न से सीधे संबंधित कोई पूर्व PYQ उपलब्ध नहीं।
- practice — not a real PYQ
आज़ाद हिन्द की अस्थायी सरकार की घोषणा 21 अक्तूबर 1943 को कहाँ की गई थी ?
- (a)रंगून
- (b)सिंगापुर
- (c)टोक्यो
- (d)बैंकाक
उत्तर(b) सिंगापुर — नेतृत्व सँभालने के कुछ ही महीनों बाद सुभाष चंद्र बोस ने वहीं अस्थायी सरकार की घोषणा की ; मुख्यालय रंगून जनवरी 1944 में गया ।
- practice — not a real PYQ
द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान जर्मनी में भारतीय युद्धबंदियों से बनाई गई सैन्य टुकड़ी किस नाम से जानी जाती है ?
- (a)भारतीय राष्ट्रीय सेना
- (b)इंडियन लीजन (भारतीय सैन्य दल)
- (c)रानी झाँसी रेजिमेंट
- (d)गदर दल
उत्तर(b) इंडियन लीजन (भारतीय सैन्य दल) — यह जर्मन कमान के अधीन रही और सिंगापुर वाली भारतीय राष्ट्रीय सेना से अलग टुकड़ी थी ।