किसी सहकारी सोसायटी के बोर्ड का अधिक्रमण किया जा सकता है या उसे निलंबनाधीन रखा जा सकता है, यदि : 1. कर्तव्य के निष्पादन में उपेक्षा हो रही है । 2. कोई ऐसा कृत्य हो रहा है, जो सहकारी सोसायटी या इसके सदस्यों के हितों पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाला है । 3. यह निकाय राज्य अधिनियम के उपबंधों के अनुसार निर्वाचन कराने में विफल रहा है । 4. सरकार द्वारा कोई सरकारी शेयर-धारण या ऋण या वित्तीय सहायता या कोई गारंटी नहीं है । नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए :
- (a)केवल 1 और 2
- (b)केवल 1 और 3
- (c)केवल 3 और 4
- (d)1, 2 और 3
सही उत्तर — D, (d) 1, 2 और 3 । यह प्रश्न संविधान के अनुच्छेद 243ZL पर आधारित है, जो 97वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2011 द्वारा जोड़े गए भाग IX-ख का अंग है । वह अनुच्छेद पहले एक सामान्य सुरक्षा देता है — किसी सहकारी सोसायटी का बोर्ड छह मास से अधिक अवधि के लिए न तो अधिक्रमित किया जाएगा और न निलंबनाधीन रखा जाएगा — और फिर उन दशाओं को गिनाता है जिनमें ऐसा किया जा सकता है : लगातार व्यतिक्रम, कर्तव्य के निष्पादन में उपेक्षा, सोसायटी या उसके सदस्यों के हितों पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाला कोई कृत्य, बोर्ड के गठन या कार्यों में गतिरोध, तथा राज्य अधिनियम के अनुसार निर्वाचन कराने में संबंधित प्राधिकारी या निकाय की विफलता । कथन 1, 2 और 3 इन्हीं दशाओं में से हैं, इसलिए तीनों सही हैं । कथन 4 इस सूची का अंग नहीं, बल्कि उसका उलटा है : अनुच्छेद का दूसरा परंतुक कहता है कि जिस सहकारी सोसायटी में सरकार का कोई शेयर-धारण, ऋण, वित्तीय सहायता या गारंटी नहीं है, उसका बोर्ड अधिक्रमित या निलंबनाधीन किया ही नहीं जाएगा । अर्थात् सरकारी हिस्सेदारी का अभाव अधिक्रमण का आधार नहीं, उसके विरुद्ध रोक है — जो सोसायटी पूरी तरह अपने सदस्यों के धन से चलती है, उसके प्रबंध में राज्य को हस्तक्षेप का अधिकार नहीं दिया गया । यही इस प्रश्न का केंद्र है और यही कथन 4 को ग़लत बनाता है । अतः सही उत्तर 1, 2 और 3 है । अधिक्रमण के बाद नियुक्त प्रशासक का काम भी संविधान ने बाँध रखा है — उसे उसी निर्धारित अवधि के भीतर निर्वाचन कराकर प्रबंध निर्वाचित बोर्ड को सौंपना होता है ।
- (a)केवल 1 और 2 — यह विकल्प कथन 3 को छोड़ देता है, जबकि राज्य अधिनियम के उपबंधों के अनुसार निर्वाचन कराने में विफलता अनुच्छेद 243ZL में स्पष्ट रूप से गिनाई गई दशाओं में से एक है । वस्तुतः यही दशा उस मूल उद्देश्य के सबसे निकट है जिसके लिए यह भाग जोड़ा गया था — सहकारी सोसायटियों में समय पर, नियमित और स्वतंत्र निर्वाचन सुनिश्चित करना । जो निकाय निर्वाचन ही न कराए, उसका बना रहना सदस्यों के लोकतांत्रिक अधिकार को निष्फल कर देता है, इसलिए वह दशा सूची से बाहर नहीं हो सकती ।
- (b)केवल 1 और 3 — यह विकल्प कथन 2 को छोड़ देता है, जबकि 'सहकारी सोसायटी या उसके सदस्यों के हितों पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाला कोई कृत्य' अनुच्छेद की सूची में सीधे नामित है । यह वस्तुतः उन सब आचरणों को समेटने वाली व्यापक दशा है जिनमें बोर्ड अपने ही सदस्यों के विरुद्ध काम करे — निधियों का दुरुपयोग, हितों का टकराव, या सदस्यों को उनके अधिकारों से वंचित करना । कर्तव्य में उपेक्षा और हित-विरोधी कृत्य दो अलग आधार हैं, और अनुच्छेद दोनों को अलग-अलग गिनाता है ; उनमें से किसी एक को छोड़कर बना युग्म अधूरा रह जाता है ।
- (c)केवल 3 और 4 — यह सबसे भ्रामक विकल्प है, क्योंकि इसमें कथन 4 सम्मिलित है — और कथन 4 अधिक्रमण का आधार नहीं, उस पर लगी रोक है । अनुच्छेद 243ZL का दूसरा परंतुक कहता है कि जहाँ सरकार का कोई शेयर-धारण, ऋण, वित्तीय सहायता या गारंटी नहीं है, वहाँ बोर्ड अधिक्रमित या निलंबनाधीन नहीं किया जाएगा । कथन को उलटकर विकल्प में रख देना राजव्यवस्था के प्रश्नों की सामान्य तकनीक है : वाक्य के शब्द वही रहते हैं, पर उनका विधिक प्रभाव उलट जाता है । इस विकल्प में कथन 1 और 2 का छूट जाना भी उसे और कमज़ोर बना देता है ।
97वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2011 ने सहकारी सोसायटियों को संवैधानिक आधार दिया । उसने तीन काम किए — अनुच्छेद 19(1)(ग) में 'सहकारी सोसायटियों' का उल्लेख जोड़कर उन्हें बनाने को मूल अधिकार का भाग बनाया ; नीति-निदेशक तत्त्वों में अनुच्छेद 43ख जोड़ा, जो राज्य से सहकारी सोसायटियों के स्वैच्छिक गठन, स्वायत्त कार्यकरण, लोकतांत्रिक नियंत्रण और व्यावसायिक प्रबंधन को बढ़ावा देने को कहता है ; और भाग IX-ख (अनुच्छेद 243ZH से 243ZT) जोड़ा, जिसमें बोर्ड की संरचना, निर्वाचन, अधिक्रमण, लेखापरीक्षा और सदस्यों की सूचना के अधिकार जैसे उपबंध हैं । इसी भाग का अनुच्छेद 243ZL अधिक्रमण और निलंबन से संबंधित है । उसका पूरा ढाँचा एक ही विचार पर टिका है — सहकारिता सदस्यों की अपनी संस्था है, इसलिए उसके निर्वाचित बोर्ड को हटाना अपवाद होना चाहिए, नियम नहीं ।
इस प्रश्न में परीक्षक ने वही चाल चली है जो कथन-आधारित प्रश्नों में सबसे अधिक चलती है : तीन असली आधारों के साथ एक ऐसा वाक्य रख देना जो अनुच्छेद में तो है, पर उलटे अर्थ में । इसलिए पढ़ते समय यह पूछना आवश्यक है कि वाक्य किसी शक्ति को देता है या उस पर रोक लगाता है । एक समसामयिक तथ्य भी इसके साथ जोड़ लीजिए : 2021 में उच्चतम न्यायालय ने भाग IX-ख को इस आधार पर असंवैधानिक ठहराया कि सहकारी सोसायटियाँ राज्य सूची का विषय होने के कारण यह संशोधन अनुच्छेद 368(2) के अधीन आधे राज्य विधानमंडलों के अनुसमर्थन के बिना नहीं किया जा सकता था ; किन्तु यह निर्णय बहु-राज्यीय सहकारी सोसायटियों पर लागू नहीं होता, जिनके लिए भाग IX-ख बना रहता है । राज्यों के भीतर की सोसायटियों के लिए अधिक्रमण के आधार अब संबंधित राज्य सहकारी सोसायटी अधिनियमों से आते हैं, जिनकी दशाएँ प्रायः इन्हीं जैसी हैं । 2021 में केंद्र में एक अलग सहकारिता मंत्रालय भी बनाया गया ।
- अनुच्छेद 243ZL — कोई बोर्ड छह मास से अधिक अवधि के लिए अधिक्रमित या निलंबनाधीन नहीं रखा जाएगा ।
- अधिक्रमण के आधार — लगातार व्यतिक्रम, कर्तव्य में उपेक्षा, सोसायटी या सदस्यों के हितों के प्रतिकूल कृत्य, बोर्ड के गठन या कार्यों में गतिरोध, तथा निर्वाचन कराने में विफलता ।
- जहाँ सरकार का कोई शेयर-धारण, ऋण, वित्तीय सहायता या गारंटी नहीं है, वहाँ बोर्ड अधिक्रमित या निलंबनाधीन नहीं किया जा सकता ।
- अधिक्रमण के बाद नियुक्त प्रशासक को निर्धारित अवधि के भीतर निर्वाचन कराकर प्रबंध निर्वाचित बोर्ड को सौंपना होता है ।
- 97वाँ संविधान संशोधन, 2011 — अनुच्छेद 19(1)(ग) में सहकारी सोसायटियाँ, अनुच्छेद 43ख, तथा भाग IX-ख (अनुच्छेद 243ZH से 243ZT) ।
- 2021 में उच्चतम न्यायालय ने भाग IX-ख को राज्यों के भीतर की सहकारी सोसायटियों के संबंध में अनुसमर्थन के अभाव में असंवैधानिक ठहराया ; बहु-राज्यीय सहकारी सोसायटियों के लिए वह भाग बना हुआ है ।
- रोक लगाने वाले वाक्य को आधार मान लेना — सरकारी हिस्सेदारी का अभाव अधिक्रमण को रोकता है, उसे न्यायोचित नहीं ठहराता ।
- निर्वाचन कराने में विफलता को आधारों की सूची से बाहर समझ लेना ।
- छह मास की अधिकतम अवधि को न्यूनतम अवधि मान लेना ।
सहकारिता से जुड़े प्रश्न प्रायः 97वें संशोधन के इर्द-गिर्द घूमते हैं — कौन-सा अनुच्छेद जोड़ा गया, बोर्ड में अधिकतम कितने निदेशक, कार्यकाल कितने वर्ष का, अधिक्रमण के आधार क्या हैं, और 2021 के उच्चतम न्यायालय के निर्णय का प्रभाव क्या रहा । EPFO जैसी परीक्षाओं में यह विषय शासन और अर्थव्यवस्था के खंड में आता है, इसलिए संवैधानिक उपबंध के साथ-साथ सहकारिता मंत्रालय जैसे प्रशासनिक घटनाक्रम भी देख लेने चाहिए ।
इस प्रश्न से सीधे संबंधित कोई पूर्व PYQ उपलब्ध नहीं।
- practice — not a real PYQ
अनुच्छेद 243ZL के अनुसार किसी सहकारी सोसायटी का बोर्ड अधिकतम कितनी अवधि के लिए अधिक्रमित या निलंबनाधीन रखा जा सकता है ?
- (a)तीन मास
- (b)छह मास
- (c)एक वर्ष
- (d)दो वर्ष
उत्तर(b) छह मास — इसी अवधि के भीतर प्रशासक को निर्वाचन कराकर प्रबंध निर्वाचित बोर्ड को सौंपना होता है ।
- practice — not a real PYQ
97वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2011 के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा एक कथन सही है ?
- (a)उसने सहकारी सोसायटियों को समवर्ती सूची में डाल दिया ।
- (b)उसने अनुच्छेद 19(1)(ग) में सहकारी सोसायटियों को जोड़ा और नया भाग IX-ख अंतःस्थापित किया ।
- (c)उसने सहकारी सोसायटियों के लिए एक स्वतंत्र निर्वाचन आयोग बनाया ।
- (d)उसने सहकारी सोसायटियों को मूल कर्तव्यों की सूची में जोड़ा ।
उत्तर(b) उसने अनुच्छेद 19(1)(ग) में सहकारी सोसायटियों को जोड़ा और नया भाग IX-ख अंतःस्थापित किया — साथ ही नीति-निदेशक तत्त्वों में अनुच्छेद 43ख भी जोड़ा गया ।