भारत के उच्चतम न्यायालय की बैठकों में सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की उपस्थिति के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं ? 1. अनुच्छेद 128, उच्चतम न्यायालय की बैठकों में सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की उपस्थिति की अनुमति देता है । 2. भारत का मुख्य न्यायमूर्ति किसी भी समय किसी को भी, जो उच्चतम न्यायालय या उच्च न्यायालय में न्यायाधीश के रूप में पद धारण कर चुका है, उच्चतम न्यायालय की बैठक में उपस्थित होने और इसके न्यायाधीश के रूप में कार्य करने का अनुरोध कर सकता है । 3. भारत का मुख्य न्यायमूर्ति किसी भी समय, भारत के राष्ट्रपति की पूर्व सहमति से, किसी भी व्यक्ति को, जो किसी उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायमूर्ति के रूप में पद धारण कर चुका है, उच्चतम न्यायालय की बैठक में उपस्थित होने और इसके न्यायाधीश के रूप में कार्य करने का अनुरोध कर सकता है । 4. भारत का मुख्य न्यायमूर्ति किसी भी समय, भारत के राष्ट्रपति की पूर्व सहमति से, किसी भी व्यक्ति को, जो उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में पद धारण कर चुका है, उच्चतम न्यायालय की बैठक में उपस्थित होने और इसके न्यायाधीश के रूप में कार्य करने का अनुरोध कर सकता है । नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए :
- (a)1 और 4
- (b)1 और 3
- (c)2 और 4
- (d)केवल 4
सही उत्तर — A, (a) 1 और 4 । संविधान का अनुच्छेद 128 इसी विषय पर है, और उसकी भाषा तीन शर्तें एक साथ रखती है : अनुरोध भारत का मुख्य न्यायमूर्ति करेगा, वह अनुरोध राष्ट्रपति की पूर्व सहमति से होगा, और जिस व्यक्ति से अनुरोध किया जा रहा है वह उच्चतम न्यायालय का, संघीय न्यायालय का, अथवा किसी उच्च न्यायालय का न्यायाधीश रह चुका हो — और उच्च न्यायालय वाली दशा में वह उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में नियुक्ति के लिए सम्यक् रूप से अर्हित भी हो । इसके साथ अनुच्छेद का परंतुक यह भी जोड़ता है कि संबंधित व्यक्ति की अपनी सहमति के बिना उसे बैठने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता । अब कथनों को इस कसौटी पर रखिए । कथन 1 सही है — यह विषय वास्तव में अनुच्छेद 128 का है और वही सेवानिवृत्त न्यायाधीशों को उच्चतम न्यायालय की बैठकों में उपस्थित होने की अनुमति देता है । कथन 4 भी सही है, क्योंकि वह अनुच्छेद की तीनों शर्तें ज्यों की त्यों दुहराता है : मुख्य न्यायमूर्ति, राष्ट्रपति की पूर्व सहमति, और ऐसा व्यक्ति जो उच्चतम न्यायालय का न्यायाधीश रह चुका हो । कथन 2 और 3 इसी कसौटी पर गिर जाते हैं — एक में राष्ट्रपति की पूर्व सहमति ही छूट गई है और दूसरे में अर्हता की शर्त । अतः सही युग्म 1 और 4 है । इस अनुच्छेद के अधीन बैठने वाले न्यायाधीश को उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश की सारी अधिकारिता, शक्तियाँ और विशेषाधिकार प्राप्त होते हैं तथा राष्ट्रपति द्वारा निर्धारित भत्ते मिलते हैं, किन्तु वह अन्य किसी प्रयोजन के लिए उस न्यायालय का न्यायाधीश नहीं माना जाता ।
- (b)1 और 3 — इस विकल्प का कथन 1 तो सही है, पर कथन 3 अनुच्छेद 128 को ठीक-ठीक नहीं कहता, इसलिए यह युग्म नहीं बनता । कथन 3 अनुरोध का पात्र उसे बताता है जो 'किसी उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायमूर्ति के रूप में पद धारण कर चुका है' । अनुच्छेद इस श्रेणी की बात करता ही नहीं ; वह उच्च न्यायालय के न्यायाधीश रह चुके व्यक्ति की बात करता है और उसके साथ एक अतिरिक्त शर्त जोड़ता है — वह उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में नियुक्ति के लिए सम्यक् रूप से अर्हित हो । कथन 3 इस अर्हता की शर्त को छोड़ देता है और पात्रता को मुख्य न्यायमूर्ति तक सीमित कर देता है ; दोनों बातें अनुच्छेद की भाषा से मेल नहीं खातीं ।
- (c)2 और 4 — इसमें कथन 4 सही है, पर कथन 2 अधूरा होने के कारण ग़लत है । कथन 2 कहता है कि मुख्य न्यायमूर्ति 'किसी भी समय किसी को भी' अनुरोध कर सकता है, और उसमें राष्ट्रपति की पूर्व सहमति का उल्लेख ही नहीं है । अनुच्छेद 128 में यह सहमति कोई औपचारिकता नहीं, बल्कि प्रत्येक अनुरोध की पूर्व शर्त है । साथ ही कथन 2 उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश के लिए अपेक्षित अर्हता की शर्त भी छोड़ देता है । इस प्रकार का विकल्प उस अभ्यर्थी को फँसाता है जो कथन का सामान्य आशय पढ़कर आगे बढ़ जाता है और यह नहीं देखता कि कौन-सी शर्त हटा दी गई है ।
- (d)केवल 4 — यह विकल्प कथन 4 को तो स्वीकार करता है, पर कथन 1 को छोड़ देता है — जबकि कथन 1 में विवाद की कोई गुंजाइश नहीं, वह केवल यह बताता है कि यह विषय अनुच्छेद 128 का है । ऐसे 'केवल एक कथन' वाले विकल्प प्रायः उस अभ्यर्थी को खींचते हैं जो शेष कथनों की जाँच में अत्यधिक सतर्क होकर सबसे सीधे कथन पर भी संदेह करने लगता है । नियम यही रखिए कि हर कथन को स्वतंत्र रूप से परखा जाए और अनुच्छेद की संख्या बताने वाले सही कथन को बिना कारण न छोड़ा जाए ।
संविधान उच्चतम न्यायालय की कार्य-क्षमता बनाए रखने के लिए दो अस्थायी व्यवस्थाएँ देता है । अनुच्छेद 127 तदर्थ न्यायाधीशों की है : यदि किसी सत्र के लिए न्यायाधीशों की गणपूर्ति उपलब्ध न हो, तो भारत का मुख्य न्यायमूर्ति राष्ट्रपति की पूर्व सहमति से और संबंधित उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायमूर्ति से परामर्श करके किसी ऐसे उच्च न्यायालय न्यायाधीश को, जो उच्चतम न्यायालय में नियुक्ति के लिए अर्हित हो, बैठने के लिए लिखित अनुरोध कर सकता है । अनुच्छेद 128 सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की है, जिसकी शर्तें ऊपर बताई गई हैं । इसी का प्रतिरूप उच्च न्यायालयों के लिए अनुच्छेद 224A है, जिसमें किसी उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायमूर्ति राष्ट्रपति की पूर्व सहमति से उस या किसी अन्य उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश से बैठने का अनुरोध कर सकता है । तीनों व्यवस्थाओं का उद्देश्य एक ही है — लंबित मामलों के दबाव में अनुभवी न्यायाधीशों की अस्थायी सहायता लेना ।
कथन-आधारित इस प्रश्न में परीक्षक ने वही तकनीक अपनाई है जो राजव्यवस्था के प्रश्नों में सबसे अधिक चलती है : मूल अनुच्छेद की भाषा से एक शर्त चुपचाप हटा देना । कथन 2 में से राष्ट्रपति की पूर्व सहमति हटी है और कथन 3 में से अर्हता की शर्त । ऊपरी तौर पर दोनों कथन सही लगते हैं, क्योंकि उनमें कही गई बात झूठी नहीं, केवल अधूरी है । इसीलिए ऐसे प्रश्नों में हर कथन को अनुच्छेद की तीन कसौटियों पर अलग-अलग रखना चाहिए — अनुरोध कौन करेगा, किसकी सहमति से करेगा, और किससे कर सकता है । यह भी ध्यान रखिए कि इस अनुच्छेद के अधीन बैठने वाला न्यायाधीश पुनर्नियुक्त नहीं होता ; उसे केवल उन बैठकों के लिए उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश की शक्तियाँ मिलती हैं ।
- अनुच्छेद 128 — भारत का मुख्य न्यायमूर्ति, राष्ट्रपति की पूर्व सहमति से, किसी पूर्व न्यायाधीश से उच्चतम न्यायालय की बैठक में बैठने और कार्य करने का अनुरोध कर सकता है ।
- पात्र व्यक्ति — उच्चतम न्यायालय अथवा संघीय न्यायालय का पूर्व न्यायाधीश, या उच्च न्यायालय का ऐसा पूर्व न्यायाधीश जो उच्चतम न्यायालय में नियुक्ति के लिए सम्यक् रूप से अर्हित हो ।
- अनुच्छेद का परंतुक — संबंधित व्यक्ति की अपनी सहमति के बिना उसे बैठने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता ।
- ऐसे न्यायाधीश को उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश की सारी अधिकारिता, शक्तियाँ और विशेषाधिकार मिलते हैं, पर वह अन्यथा उस न्यायालय का न्यायाधीश नहीं माना जाता ; भत्ते राष्ट्रपति निर्धारित करते हैं ।
- अनुच्छेद 127 — गणपूर्ति न होने पर तदर्थ न्यायाधीश की व्यवस्था, जिसमें राष्ट्रपति की पूर्व सहमति और संबंधित उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायमूर्ति से परामर्श आवश्यक है ।
- अनुच्छेद 224A — उच्च न्यायालयों के लिए वही व्यवस्था, जिसमें अनुरोध उस उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायमूर्ति करता है ।
- 'राष्ट्रपति की पूर्व सहमति' की शर्त छोड़ देने वाले कथन को सही मान लेना ।
- उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश के लिए अपेक्षित अर्हता की शर्त की अनदेखी करना ।
- अनुच्छेद 127 और 128 को आपस में बदल देना ; पहला कार्यरत उच्च न्यायालय न्यायाधीश के लिए है, दूसरा सेवानिवृत्त न्यायाधीशों के लिए ।
राजव्यवस्था के खंड में न्यायपालिका पर प्रश्न प्रायः अनुच्छेद और उसकी विषय-वस्तु के मिलान के रूप में आते हैं, या इसी तरह कथन-परीक्षण के रूप में जिसमें मूल भाषा से कोई एक शर्त हटा दी जाती है । अनुच्छेद 124 (स्थापना और नियुक्ति), 127 (तदर्थ न्यायाधीश), 128 (सेवानिवृत्त न्यायाधीश), 129 (अभिलेख न्यायालय), 130 (उच्चतम न्यायालय का स्थान), 137 (पुनर्विलोकन), 143 (परामर्शी अधिकारिता) — ये संख्याएँ विषय के साथ याद रखना इस खंड की सबसे उपयोगी तैयारी है ।
इस प्रश्न से सीधे संबंधित कोई पूर्व PYQ उपलब्ध नहीं।
- practice — not a real PYQ
उच्च न्यायालय में सेवानिवृत्त न्यायाधीशों को बैठने और कार्य करने के लिए अनुरोध करने की व्यवस्था किस अनुच्छेद में है ?
- (a)अनुच्छेद 127
- (b)अनुच्छेद 128
- (c)अनुच्छेद 224A
- (d)अनुच्छेद 233
उत्तर(c) अनुच्छेद 224A — इसमें उस उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायमूर्ति, राष्ट्रपति की पूर्व सहमति से, किसी पूर्व न्यायाधीश से अनुरोध करता है ; अनुच्छेद 128 उच्चतम न्यायालय के लिए है ।
- practice — not a real PYQ
उच्चतम न्यायालय में गणपूर्ति उपलब्ध न होने पर तदर्थ न्यायाधीश की नियुक्ति के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा एक कथन सही है ?
- (a)यह व्यवस्था अनुच्छेद 127 में है और इसके लिए राष्ट्रपति की पूर्व सहमति आवश्यक है ।
- (b)यह व्यवस्था अनुच्छेद 128 में है और इसके लिए किसी सहमति की आवश्यकता नहीं ।
- (c)इसमें केवल सेवानिवृत्त न्यायाधीश ही बुलाए जा सकते हैं ।
- (d)इसमें अनुरोध राष्ट्रपति करते हैं, मुख्य न्यायमूर्ति नहीं ।
उत्तर(a) यह व्यवस्था अनुच्छेद 127 में है और इसके लिए राष्ट्रपति की पूर्व सहमति आवश्यक है — साथ ही संबंधित उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायमूर्ति से परामर्श भी करना होता है ।