निम्नलिखित में से किस एक तत्त्व का उच्चतम क्वथनांक है ?
- (a)लीथियम
- (b)सोडियम
- (c)पोटैशियम
- (d)रूबीडियम
सही उत्तर — A, (a) लीथियम । चारों विकल्प आवर्त सारणी के पहले समूह की क्षार धातुएँ हैं और उन्हें ऊपर से नीचे के क्रम में ही रखा गया है — लीथियम, सोडियम, पोटैशियम, रूबीडियम । इस समूह में ऊपर से नीचे जाने पर गलनांक और क्वथनांक दोनों घटते जाते हैं, इसलिए सबसे ऊपर वाली धातु लीथियम का क्वथनांक सबसे ऊँचा होता है । लगभग मान इस प्रकार हैं : लीथियम का क्वथनांक लगभग 1342 °C, सोडियम का लगभग 883 °C, पोटैशियम का लगभग 759 °C और रूबीडियम का लगभग 688 °C । इसका कारण धात्विक आबंध की प्रबलता में है । धातु में धन आयनों की व्यवस्थित संरचना होती है और उसके बीच विसंस्थानीकृत इलेक्ट्रॉनों का 'समुद्र' फैला रहता है ; इन दोनों के बीच का स्थिर वैद्युत आकर्षण ही धात्विक आबंध है । समूह 1 का हर सदस्य केवल एक संयोजी इलेक्ट्रॉन देता है, अतः इलेक्ट्रॉनों की संख्या तो समान रहती है, पर नीचे जाने पर परमाणु का आकार बड़ा होता जाता है । बड़े आयन में नाभिक और इलेक्ट्रॉन-समुद्र की दूरी बढ़ जाती है, आकर्षण दुर्बल पड़ जाता है, और आबंध तोड़ने के लिए कम ऊर्जा — अर्थात् कम ताप — पर्याप्त हो जाता है । लीथियम का परमाणु इस समूह में सबसे छोटा है, इसलिए उसका धात्विक आबंध सबसे प्रबल और क्वथनांक सबसे ऊँचा है । यही तर्क गलनांक पर भी लागू होता है : लीथियम लगभग 180 °C पर पिघलता है, जबकि सोडियम लगभग 98 °C पर और पोटैशियम लगभग 63 °C पर, अर्थात् पोटैशियम को हथेली की गर्मी से थोड़ा ही अधिक ताप चाहिए ।
- (b)सोडियम — सोडियम लीथियम से ठीक नीचे है, इसलिए उसका परमाणु बड़ा और धात्विक आबंध दुर्बल है ; उसका क्वथनांक लगभग 883 °C है, जो लीथियम के लगभग 1342 °C से बहुत कम बैठता है । सोडियम इस समूह की सबसे परिचित धातु है — मिट्टी के तेल में रखी जाने वाली, चाकू से कटने वाली नरम धातु — और यही परिचय भ्रम पैदा करता है, क्योंकि परिचित नाम सही उत्तर जैसा लगने लगता है । यहाँ निर्णय परिचय से नहीं, समूह में स्थिति से होता है ।
- (c)पोटैशियम — पोटैशियम सोडियम से भी नीचे है, अतः उसका क्वथनांक और भी कम — लगभग 759 °C । वस्तुतः पोटैशियम इतना नरम और इतने कम गलनांक वाला है कि वह लगभग 63 °C पर ही पिघल जाता है । जो अभ्यर्थी 'भारी तत्त्व का क्वथनांक अधिक होता है' मानकर चलता है, वह इस विकल्प की ओर खिंचता है ; पर क्षार धातुओं में यह अनुमान उलटा पड़ता है, क्योंकि यहाँ निर्णायक बात द्रव्यमान नहीं, धात्विक आबंध की प्रबलता है, जो आकार बढ़ने पर घटती है ।
- (d)रूबीडियम — रूबीडियम इन चारों में सबसे नीचे है, इसलिए उसका परमाणु सबसे बड़ा, धात्विक आबंध सबसे दुर्बल और क्वथनांक सबसे कम — लगभग 688 °C । यह विकल्प उस अनुमान पर टिका है कि भारी परमाणु द्रव अवस्था में अधिक देर तक टिकेगा । ऐसा अनुमान अणुओं वाले तत्त्वों में सही बैठता है, जैसे हैलोजनों में, जहाँ नीचे जाने पर क्वथनांक बढ़ता है ; पर धातुओं में स्थिति उलटी है, क्योंकि वहाँ बंधन का स्वरूप ही भिन्न है ।
धात्विक आबंध की प्रबलता तीन बातों पर निर्भर करती है — धन आयन का आकार, उसका आवेश, और विसंस्थानीकृत इलेक्ट्रॉनों की संख्या । समूह 1 में हर धातु एक ही संयोजी इलेक्ट्रॉन देती है और आवेश भी सबका एक समान रहता है, इसलिए अंतर केवल आकार का बचता है ; और आकार नीचे जाने पर बढ़ता है । यही कारण है कि क्षार धातुओं के गलनांक और क्वथनांक ऊपर से नीचे घटते जाते हैं और वे सब अन्य धातुओं की तुलना में नरम तथा कम गलनांक वाली हैं । इसके विपरीत हैलोजन अणुओं के रूप में रहते हैं और उन्हें जोड़ने वाला दुर्बल परिक्षेपण बल अणु के आकार के साथ बढ़ता है, इसलिए वहाँ नीचे जाने पर क्वथनांक बढ़ता है — फ़्लुओरीन और क्लोरीन गैस, ब्रोमीन द्रव और आयोडीन ठोस । एक ही दिशा में चलने वाले दो उलटे प्रवृत्ति-नियम याद रखने के लिए यही तुलना सबसे उपयोगी है ।
इस प्रश्न में विकल्प जान-बूझकर समूह के क्रम में रखे गए हैं, इसलिए उत्तर तक पहुँचने के लिए मान याद रखना आवश्यक नहीं — केवल प्रवृत्ति की दिशा जाननी है । यदि दिशा याद न हो तो एक परिचित तथ्य से भी काम चल जाता है : पोटैशियम और रूबीडियम इतने नरम और इतने कम गलनांक वाले हैं कि उन्हें साधारण ताप के आसपास पिघलते देखा जा सकता है, जबकि लीथियम इनमें सबसे कठोर है । जो धातु पिघलने में सबसे अधिक ताप माँगती है, वही उबलने में भी सबसे अधिक माँगेगी । क्षार धातुओं की अन्य प्रवृत्तियाँ भी साथ याद रखिए — नीचे जाने पर परमाणु त्रिज्या बढ़ती है, आयनन एन्थैल्पी घटती है और जल के प्रति क्रियाशीलता बढ़ती है ।
- समूह 1 की क्षार धातुओं में गलनांक और क्वथनांक ऊपर से नीचे जाने पर घटते हैं ।
- लगभग क्वथनांक — लीथियम 1342 °C, सोडियम 883 °C, पोटैशियम 759 °C, रूबीडियम 688 °C ।
- लगभग गलनांक — लीथियम 180 °C, सोडियम 98 °C, पोटैशियम 63 °C ; ये सब अन्य धातुओं की तुलना में बहुत कम हैं ।
- कारण — समूह में नीचे जाने पर परमाणु का आकार बढ़ता है और धात्विक आबंध दुर्बल पड़ता जाता है ।
- हैलोजनों में प्रवृत्ति उलटी है : नीचे जाने पर क्वथनांक बढ़ता है, क्योंकि वहाँ अणुओं के बीच परिक्षेपण बल आकार के साथ बढ़ता है ।
- क्षार धातुएँ नरम होती हैं, जल से तीव्र क्रिया करती हैं और मिट्टी के तेल में रखी जाती हैं ।
- यह मान लेना कि भारी तत्त्व का क्वथनांक सदैव अधिक होता है ; धातुओं में यह अनुमान उलटा पड़ता है ।
- क्षार धातुओं और हैलोजनों की प्रवृत्तियों को आपस में बदल देना ।
- परिचित नाम — जैसे सोडियम — को उत्तर मान लेना, जबकि निर्णय समूह में स्थिति से होता है ।
आवर्ती प्रवृत्तियों पर प्रश्न प्रायः चार तत्त्वों की सूची देकर उनमें सबसे अधिक या सबसे कम गुण वाला तत्त्व पुछवाते हैं — क्वथनांक, गलनांक, परमाणु त्रिज्या, आयनन ऊर्जा या क्रियाशीलता । सूची लगभग सदैव किसी एक समूह या एक आवर्त की होती है, इसलिए पहला काम यह पहचानना है कि तत्त्व एक ही समूह के हैं या एक ही आवर्त के, और फिर उस दिशा की प्रवृत्ति लगा देना । यही एक आदत इस पूरे अध्याय के अधिकांश प्रश्न हल कर देती है ।
इस प्रश्न से सीधे संबंधित कोई पूर्व PYQ उपलब्ध नहीं।
- practice — not a real PYQ
क्षार धातुओं में समूह में नीचे जाने पर गलनांक की प्रवृत्ति क्या होती है ?
- (a)बढ़ती है
- (b)घटती है
- (c)पहले घटती है फिर बढ़ती है
- (d)अपरिवर्तित रहती है
उत्तर(b) घटती है — परमाणु का आकार बढ़ने से धात्विक आबंध दुर्बल पड़ता जाता है ।
- practice — not a real PYQ
हैलोजनों में F₂, Cl₂, Br₂ और I₂ के क्वथनांक का सही क्रम कौन-सा है ?
- (a)F₂ > Cl₂ > Br₂ > I₂
- (b)I₂ > Br₂ > Cl₂ > F₂
- (c)Cl₂ > F₂ > I₂ > Br₂
- (d)सभी का क्वथनांक लगभग समान होता है
उत्तर(b) I₂ > Br₂ > Cl₂ > F₂ — अणु का आकार बढ़ने पर परिक्षेपण बल बढ़ता है, इसलिए यहाँ प्रवृत्ति क्षार धातुओं से उलटी है ।