वेलामेन, जो एक स्पंजी ऊतक है, किसमें बनता है ?
- (a)मूसला जड़
- (b)अधिपादपीय जड़
- (c)झकड़ा जड़
- (d)श्वसन जड़
सही उत्तर — B, (b) अधिपादपीय जड़ । वेलामेन उन हवाई जड़ों पर बनने वाला स्पंजी ऊतक है जो अधिपादपों (epiphytes) में पाई जाती हैं — विशेषतः ऑर्किड कुल के उन पौधों में जो किसी दूसरे वृक्ष की शाखा या तने पर केवल आश्रय के लिए उगते हैं । अधिपादप परजीवी नहीं होता : वह अपने आश्रयदाता से भोजन नहीं खींचता, केवल ऊँचाई और प्रकाश पाने के लिए उस पर टिकता है । ऐसी स्थिति में उसकी जड़ें मिट्टी तक पहुँचती ही नहीं, हवा में लटकी रहती हैं, और तब पानी का एकमात्र स्रोत वर्षा तथा वायुमंडल की नमी रह जाती है । इसी समस्या का समाधान वेलामेन है । यह मृत कोशिकाओं की कई परतों वाला स्पंजी आवरण है, जो हवाई जड़ की बाह्यत्वचा के स्थान पर बन जाता है और स्पंज की तरह नमी सोखकर अपने भीतर रोक लेता है, जहाँ से वह भीतरी जीवित ऊतक तक पहुँचती है । यही आवरण जड़ को तेज़ धूप में सूखने से और यांत्रिक चोट से भी बचाता है, और शुष्क अवस्था में सफ़ेद या रुपहला दिखता है, जबकि भीगने पर हरा-सा हो जाता है । अतः वेलामेन का सीधा संबंध हवाई अर्थात् अधिपादपीय जड़ से है । यह ध्यान रखने योग्य है कि यह ऊतक जड़ के भीतर पानी 'खींचता' नहीं, बल्कि अवशोषित करके रोकता है, और उसकी कोशिकाएँ परिपक्व अवस्था में मृत होती हैं — जीवित कोशिकाओं वाले मूलरोम (root hairs) से यह उसका बड़ा अंतर है ।
- (a)मूसला जड़ — मूसला जड़ बीज के मूलांकुर से सीधे बनकर मिट्टी में गहराई तक जाने वाली प्राथमिक जड़ है, जिससे पार्श्व जड़ें निकलती हैं ; यह द्विबीजपत्री पौधों की विशेषता है — सरसों, चना, नीम, तथा गाजर और मूली जैसी भोजन-संचय के लिए फूली हुई जड़ें भी इसी की रूपांतरित दशाएँ हैं । यह मिट्टी के भीतर रहती है, इसलिए उसे वायुमंडल से नमी सोखने की आवश्यकता ही नहीं पड़ती ; उसका जल-अवशोषण मूलरोमों से होता है । वेलामेन जैसा स्पंजी आवरण उस पर नहीं बनता ।
- (c)झकड़ा जड़ — झकड़ा जड़ एकबीजपत्री पौधों — गेहूँ, धान, मक्का, घास — में पाई जाती है, जहाँ प्राथमिक जड़ अल्पजीवी होकर नष्ट हो जाती है और तने के आधार से पतली-पतली जड़ों का गुच्छा निकल आता है । ये सब मिट्टी के ऊपरी स्तर में फैलकर पौधे को थामती हैं और मूलरोमों के द्वारा मिट्टी से जल तथा खनिज लेती हैं । यह भी भूमिगत तंत्र है, इसलिए वायुमंडलीय नमी सोखने वाले विशेष ऊतक की यहाँ कोई भूमिका नहीं ।
- (d)श्वसन जड़ — श्वसन जड़ें, जिन्हें न्यूमैटोफोर कहा जाता है, दलदली और लवणीय भूमि के मैंग्रोव पौधों में — जैसे ऐविसीनिया में — मिलती हैं । वहाँ मिट्टी जल से भरी और वायु-रहित होती है, इसलिए कुछ जड़ें गुरुत्व के विपरीत ऊपर उठकर भूमि से बाहर निकल आती हैं और उन पर बने असंख्य सूक्ष्म छिद्रों से गैसों का विनिमय होता है । ध्यान दीजिए कि यहाँ समस्या पानी की नहीं, ऑक्सीजन की है — पानी तो चारों ओर भरा है । वेलामेन ठीक इसकी उलटी समस्या का उत्तर है, अर्थात् हवा में लटकी जड़ के लिए पानी जुटाने का, इसलिए दोनों को आपस में बदलना नहीं चाहिए ।
जड़ें अपने वातावरण के अनुसार रूप बदलती हैं, और यही रूपांतरण परीक्षा का प्रिय विषय है । भोजन-संचय के लिए मूसला जड़ें फूल जाती हैं (गाजर, मूली, शलजम) ; सहारे के लिए अवस्तंभ जड़ें (मक्का, गन्ना) और स्तंभ जड़ें (बरगद) बनती हैं ; दलदली भूमि में श्वसन जड़ें ऊपर निकलती हैं ; परजीवी पौधों में चूषकांग बनते हैं ; और अधिपादपों में हवाई जड़ें वेलामेन से ढक जाती हैं । वेलामेन मुख्यतः ऑर्किड कुल में और कुछ ऐरेसी सदस्यों में मिलता है । यह जड़ की बाह्यत्वचा के स्थान पर बनी मृत, स्पंजी, बहुस्तरीय संरचना है, जिसका काम वायुमंडल की नमी और वर्षा-जल को सोखकर रोकना तथा जड़ की रक्षा करना है ।
इस प्रश्न का सार यह पहचानना है कि प्रत्येक रूपांतरण किसी एक विशेष कठिनाई का उत्तर होता है । हवा में लटकी जड़ के सामने कठिनाई जल की है — इसलिए स्पंजी अवशोषक आवरण । दलदल में खड़े पौधे के सामने कठिनाई ऑक्सीजन की है — इसलिए ऊपर उठती श्वसन जड़ें । रेगिस्तानी पौधे के सामने कठिनाई गहराई तक जल खोजने की है — इसलिए अत्यंत लंबी मूसला जड़ । यदि प्रश्न पढ़ते ही यह पूछ लिया जाए कि 'यह रचना किस कमी को पूरा करती है', तो चारों विकल्पों में से तीन अपने आप छँट जाते हैं । अधिपादप और परजीवी का भेद भी इसी के साथ याद रखिए : अधिपादप केवल आश्रय लेता है, जबकि अमरबेल जैसा परजीवी आश्रयदाता से भोजन खींचता है ।
- वेलामेन मृत कोशिकाओं की बहुस्तरीय स्पंजी परत है, जो अधिपादपी ऑर्किड की हवाई जड़ों पर बाह्यत्वचा के स्थान पर बनती है ।
- उसका कार्य वायुमंडल की नमी और वर्षा-जल का अवशोषण तथा जड़ की सूखने और चोट से रक्षा है ।
- अधिपादप दूसरे पौधे पर केवल आश्रय के लिए उगता है ; वह परजीवी नहीं होता ।
- मूसला जड़ द्विबीजपत्री पौधों की और झकड़ा जड़ एकबीजपत्री पौधों की विशेषता है ; दोनों भूमिगत हैं ।
- श्वसन जड़ें (न्यूमैटोफोर) दलदली मैंग्रोव पौधों, जैसे ऐविसीनिया, में गैसों के विनिमय के लिए ऊपर की ओर बढ़ती हैं ।
- जड़ों के अन्य प्रमुख रूपांतरण — अवस्तंभ जड़ (मक्का, गन्ना), स्तंभ जड़ (बरगद), संचयी जड़ (गाजर, मूली) और परजीवी चूषकांग ।
- वेलामेन और न्यूमैटोफोर को एक मान लेना ; एक जल सोखता है, दूसरा गैसों का विनिमय करता है ।
- अधिपादप को परजीवी समझ लेना ।
- यह मान लेना कि हवाई जड़ें भी मूलरोमों से जल लेती हैं ; वेलामेन की कोशिकाएँ परिपक्व दशा में मृत होती हैं ।
सामान्य विज्ञान के वनस्पति भाग में जड़ों के रूपांतरण लगभग हर वर्ष किसी न किसी रूप में आते हैं — किसी रचना का नाम देकर उसका स्थान पूछना, जैसे यहाँ, या किसी पौधे का नाम देकर उसकी जड़ का प्रकार पूछना । बार-बार लौटने वाले उदाहरण हैं ऑर्किड की हवाई जड़ और वेलामेन, मैंग्रोव के न्यूमैटोफोर, बरगद की स्तंभ जड़ें, मक्का और गन्ने की अवस्तंभ जड़ें तथा गाजर-मूली-शलजम की संचयी जड़ें ।
इस प्रश्न से सीधे संबंधित कोई पूर्व PYQ उपलब्ध नहीं।
- practice — not a real PYQ
दलदली भूमि में उगने वाले पौधों में गैसों के विनिमय के लिए भूमि से ऊपर निकलने वाली जड़ें क्या कहलाती हैं ?
- (a)अवस्तंभ जड़ें
- (b)न्यूमैटोफोर
- (c)स्तंभ जड़ें
- (d)चूषकांग
उत्तर(b) न्यूमैटोफोर — जल से भरी वायु-रहित मिट्टी में ऑक्सीजन पाने के लिए ये जड़ें गुरुत्व के विपरीत ऊपर बढ़ती हैं ।
- practice — not a real PYQ
अधिपादप (epiphyte) के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा एक कथन सही है ?
- (a)वह आश्रयदाता पौधे से भोजन खींचता है ।
- (b)वह आश्रयदाता पौधे पर केवल सहारे के लिए उगता है ।
- (c)वह सदैव मिट्टी में ही उगता है ।
- (d)वह मृत कार्बनिक पदार्थ पर पलता है ।
उत्तर(b) वह आश्रयदाता पौधे पर केवल सहारे के लिए उगता है — भोजन खींचने वाला पौधा परजीवी कहलाता है, जैसे अमरबेल ।