DNA के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए : 1. DNA, डिऑक्सीराइबोन्यूक्लीक अम्ल को निर्दिष्ट करता है । 2. यह राइबोसोम में अवस्थित होता है । 3. यह राइबोन्यूक्लीक अम्ल से संघटित है । 4. यह अपनी प्रतिलिपि स्वयं बना सकता है । उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं ?
- (a)1 और 4
- (b)1 और 3
- (c)केवल 4
- (d)2 और 3
सही उत्तर — A, (a) 1 और 4 । चारों कथनों को एक-एक कर जाँचिए । कथन 1 सही है : DNA अंग्रेज़ी Deoxyribonucleic Acid का संक्षिप्त रूप है, हिन्दी में डिऑक्सीराइबोन्यूक्लीक अम्ल — नाम में ही उसकी शर्करा डिऑक्सीराइबोस का संकेत है । कथन 2 ग़लत है : DNA राइबोसोम में नहीं रहता । सुकेंद्रकी (eukaryotic) कोशिका में उसका मुख्य स्थान केंद्रक है, जहाँ वह गुणसूत्रों के रूप में रहता है, और थोड़ी मात्रा में वह माइटोकॉन्ड्रिया तथा हरितलवक में भी मिलता है ; जीवाणु जैसी असुकेंद्रकी कोशिका में वह केंद्रकाभ (nucleoid) क्षेत्र में पड़ा रहता है । राइबोसोम में rRNA और प्रोटीन होते हैं और वहाँ प्रोटीन का संश्लेषण होता है, DNA का भंडारण नहीं । कथन 3 भी ग़लत है : DNA राइबोन्यूक्लीक अम्ल से नहीं बना — RNA एक भिन्न न्यूक्लीक अम्ल है । DNA की इकाई डिऑक्सीराइबो-न्यूक्लियोटाइड है, जिसमें डिऑक्सीराइबोस शर्करा, फ़ॉस्फ़ेट समूह और चार क्षारकों — ऐडेनीन, थाइमीन, ग्वानीन, साइटोसीन — में से एक होता है ; RNA में डिऑक्सीराइबोस के स्थान पर राइबोस और थाइमीन के स्थान पर यूरैसिल आता है । कथन 4 सही है और यही DNA का सबसे विशिष्ट गुण है : वह अपनी प्रतिलिपि स्वयं बना सकता है । यह संभव इसलिए है कि उसकी दोहरी कुंडली की दोनों लड़ियाँ पूरक क्षारक-युग्मन से जुड़ी होती हैं — ऐडेनीन सदैव थाइमीन के सामने और ग्वानीन सदैव साइटोसीन के सामने । लड़ियाँ अलग होने पर प्रत्येक अपने सामने की नई लड़ी बनाने का साँचा बन जाती है, और DNA पॉलिमरेज़ की सहायता से दो समान अणु बन जाते हैं । इस प्रक्रिया को अर्ध-संरक्षी प्रतिकृतीयन कहते हैं, क्योंकि हर नए अणु में एक पुरानी लड़ी बनी रहती है । अतः सही कथन 1 और 4 हैं ।
- (b)1 और 3 — इस विकल्प में कथन 1 तो सही है, पर कथन 3 ग़लत है, इसलिए यह युग्म नहीं बनता । कथन 3 कहता है कि DNA राइबोन्यूक्लीक अम्ल से संघटित है, जबकि राइबोन्यूक्लीक अम्ल स्वयं एक अलग अणु — RNA — है । दोनों में तीन स्पष्ट अंतर हैं : शर्करा (DNA में डिऑक्सीराइबोस, RNA में राइबोस), एक क्षारक (DNA में थाइमीन, RNA में यूरैसिल) और संरचना (DNA प्रायः द्विलड़ीय, RNA प्रायः एकलड़ीय) । नाम का पहला अक्षर ही भेद बता देता है : 'डिऑक्सी' का अर्थ है एक ऑक्सीजन परमाणु कम ।
- (c)केवल 4 — यह विकल्प कथन 4 को तो स्वीकार करता है, पर कथन 1 को छोड़ देता है — और कथन 1 में कुछ भी विवादित नहीं है, वह केवल DNA का पूरा नाम बताता है । ऐसे 'केवल एक कथन' वाले विकल्प प्रायः उस अभ्यर्थी को फँसाते हैं जो कठिन कथनों की जाँच में इतना उलझ जाता है कि सबसे सरल कथन पर संदेह करने लगता है । नियम यह रखिए कि हर कथन को स्वतंत्र रूप से सही या ग़लत ठहराइए, और परिभाषा बताने वाले कथन को बिना कारण ग़लत मत मानिए ।
- (d)2 और 3 — इस विकल्प के दोनों कथन ग़लत हैं । कथन 2 DNA को राइबोसोम में बताता है, जबकि राइबोसोम प्रोटीन संश्लेषण का स्थल है और उसमें rRNA तथा प्रोटीन होते हैं ; DNA का स्थान केंद्रक (तथा माइटोकॉन्ड्रिया और हरितलवक) है । कथन 3 DNA को राइबोन्यूक्लीक अम्ल से बना बताता है, जो दोनों अणुओं को गड्डमड्ड कर देता है । दो ग़लत कथनों को जोड़कर बनाया गया विकल्प केवल तभी चुना जाता है जब अभ्यर्थी ने कथनों को अलग-अलग परखा ही न हो ।
DNA आनुवंशिक सूचना का भंडार है । उसकी संरचना का प्रतिरूप 1953 में जेम्स वाटसन और फ़्रांसिस क्रिक ने प्रस्तुत किया, जिसमें रोज़ालिंड फ़्रैंकलिन के एक्स-किरण विवर्तन चित्रों का निर्णायक योगदान था । अणु दो लड़ियों की दोहरी कुंडली है, जिनकी दिशा परस्पर विपरीत होती है । बाहरी ढाँचा शर्करा और फ़ॉस्फ़ेट का है और भीतर की ओर क्षारक जोड़े में हाइड्रोजन आबंधों से जुड़े रहते हैं — ऐडेनीन के साथ थाइमीन (दो आबंध) और ग्वानीन के साथ साइटोसीन (तीन आबंध) । चारगॉफ़ का नियम इसी युग्मन से निकलता है : किसी भी DNA में ऐडेनीन की मात्रा थाइमीन के और ग्वानीन की मात्रा साइटोसीन के बराबर होती है । इसी पूरकता से प्रतिकृतीयन संभव होता है, और उसी सूचना से अनुलेखन (transcription) द्वारा RNA बनकर प्रोटीन का संश्लेषण होता है — यही आणविक जीव विज्ञान का केंद्रीय सिद्धांत है ।
चार कथनों वाले इस प्रश्न में परीक्षक ने दो सर्वाधिक प्रचलित भ्रांतियाँ रखी हैं । पहली — DNA को राइबोसोम से जोड़ देना, जो इसलिए होता है कि दोनों प्रोटीन बनने की कहानी में साथ आते हैं ; पर भूमिकाएँ अलग हैं : सूचना केंद्रक के DNA में है, संदेशवाहक mRNA उसे राइबोसोम तक ले जाता है, और वहाँ प्रोटीन बनती है । दूसरी — DNA और RNA के नामों की समानता से उन्हें एक ही मान लेना । कथन 4 इस प्रश्न का सबसे महत्त्वपूर्ण अंश है, क्योंकि स्वयं की प्रतिलिपि बनाने की क्षमता ही किसी अणु को आनुवंशिक पदार्थ बनने योग्य बनाती है ; इसी कसौटी पर DNA को RNA से अधिक स्थिर और उपयुक्त माना जाता है । इस प्रकार के प्रश्न में सुरक्षित पद्धति यह है कि पहले चारों कथनों पर अलग-अलग सही या ग़लत का निशान लगाइए, फिर विकल्पों को मिलाइए ।
- DNA का पूरा नाम डिऑक्सीराइबोन्यूक्लीक अम्ल है ; उसकी शर्करा डिऑक्सीराइबोस होती है ।
- सुकेंद्रकी कोशिका में DNA केंद्रक में गुणसूत्रों के रूप में रहता है, तथा माइटोकॉन्ड्रिया और हरितलवक में भी थोड़ी मात्रा में मिलता है ।
- राइबोसोम में rRNA और प्रोटीन होते हैं ; वह प्रोटीन संश्लेषण का स्थल है, DNA का भंडार नहीं ।
- DNA के चार क्षारक — ऐडेनीन, थाइमीन, ग्वानीन, साइटोसीन ; RNA में थाइमीन के स्थान पर यूरैसिल आता है ।
- पूरक क्षारक-युग्मन — ऐडेनीन के सामने थाइमीन और ग्वानीन के सामने साइटोसीन ; इसी से चारगॉफ़ का नियम निकलता है ।
- DNA का प्रतिकृतीयन अर्ध-संरक्षी होता है — प्रत्येक नए अणु में एक पुरानी और एक नई लड़ी रहती है ।
- दोहरी कुंडली का प्रतिरूप 1953 में वाटसन और क्रिक ने दिया, जिसमें रोज़ालिंड फ़्रैंकलिन के एक्स-किरण विवर्तन चित्र निर्णायक रहे ।
- DNA को राइबोसोम में मान लेना ; राइबोसोम प्रोटीन संश्लेषण का स्थल है ।
- DNA और RNA के नामों की समानता से उन्हें एक ही अणु समझ लेना ।
- सबसे सरल परिभाषात्मक कथन पर संदेह करके उसे छोड़ देना, जिससे 'केवल 4' वाला विकल्प चुन लिया जाता है ।
सामान्य विज्ञान के खंड में DNA पर प्रश्न प्रायः कथन-आधारित होते हैं, जिनमें एक कथन पूरा नाम बताता है, एक स्थान बताता है, एक संघटन और एक गुण । इसी सामग्री से सीधे प्रश्न भी बनते हैं — DNA का पूरा नाम, थाइमीन के सामने कौन-सा क्षारक, RNA में कौन-सा क्षारक अनुपस्थित है, या दोहरी कुंडली का प्रतिरूप किसने दिया । इसलिए तैयारी में नाम, स्थान, चार क्षारक, युग्मन का नियम और प्रतिकृतीयन की प्रकृति — ये पाँच बिंदु पर्याप्त रहते हैं ।
इस प्रश्न से सीधे संबंधित कोई पूर्व PYQ उपलब्ध नहीं।
- practice — not a real PYQ
DNA और RNA के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा एक कथन सही है ?
- (a)DNA में राइबोस शर्करा होती है और RNA में डिऑक्सीराइबोस ।
- (b)DNA में थाइमीन होता है, जबकि RNA में उसके स्थान पर यूरैसिल आता है ।
- (c)दोनों में चारों क्षारक एक ही होते हैं ।
- (d)RNA सदैव द्विलड़ीय होता है और DNA एकलड़ीय ।
उत्तर(b) DNA में थाइमीन होता है, जबकि RNA में उसके स्थान पर यूरैसिल आता है — शर्करा का क्रम पहले विकल्प में उलटा दिया गया है और DNA प्रायः द्विलड़ीय तथा RNA प्रायः एकलड़ीय होता है ।
- practice — not a real PYQ
DNA के प्रतिकृतीयन को अर्ध-संरक्षी क्यों कहा जाता है ?
- (a)क्योंकि आधा DNA केंद्रक में और आधा राइबोसोम में रहता है
- (b)क्योंकि हर नए अणु में एक पुरानी और एक नई लड़ी होती है
- (c)क्योंकि प्रतिकृतीयन में आधे क्षारक बदल जाते हैं
- (d)क्योंकि यह केवल आधी कोशिकाओं में होता है
उत्तर(b) क्योंकि हर नए अणु में एक पुरानी और एक नई लड़ी होती है — पुरानी लड़ी नई लड़ी बनने का साँचा बनती है ।