निम्नलिखित में से कौन-सा एक, क्रमविनिमेय नियम नहीं है ?
- (a)A * b = b * A
- (b)A + b = b + A
- (c)A – b = b – A
- (d)A * B = B * A
सही उत्तर — C, (c) A – b = b – A । स्टेम में 'नहीं' मोटे तिरछे अक्षरों में छपा है, अतः यहाँ वह विकल्प खोजना है जो क्रमविनिमेय नियम (commutative law) नहीं है । क्रमविनिमेय नियम का अर्थ है कि किसी संक्रिया में दोनों पदों का क्रम बदल देने पर भी परिणाम वही रहे । योग और गुणा इस नियम का पालन करते हैं, व्यवकलन (घटाना) और भाग नहीं । एक उदाहरण ही इसे तय कर देता है : 7 – 3 = 4, जबकि 3 – 7 = –4 ; दोनों परिणाम भिन्न हैं, यहाँ तक कि उनके चिह्न भी उलटे हैं । अतः A – b और b – A सामान्य दशा में बराबर नहीं होते । वे केवल एक विशेष स्थिति में बराबर होते हैं — जब A और b स्वयं बराबर हों, क्योंकि तब दोनों ओर शून्य आ जाता है । किसी नियम की कसौटी यही है कि वह हर मान के लिए सत्य हो ; जो समीकरण केवल किसी विशेष मान पर सत्य हो, वह नियम नहीं, समीकरण होता है । इसी कारण (c) चारों में अकेला है । यही बात बूलीय बीजगणित (Boolean algebra) की भाषा में और भी स्पष्ट है, जो इस खंड का संदर्भ है : वहाँ योग का चिह्न OR संक्रिया के लिए और गुणा का चिह्न AND संक्रिया के लिए प्रयुक्त होता है, और दोनों क्रमविनिमेय हैं — A + B = B + A तथा A · B = B · A । बूलीय बीजगणित में व्यवकलन नाम की कोई संक्रिया ही परिभाषित नहीं है, इसलिए घटाव वाला विकल्प वहाँ भी बाहर ही रहता है । अंत में एक बात जो भ्रमित कर सकती है : पुस्तिका में कहीं बड़े अक्षर और कहीं छोटे अक्षर छपे हैं (A * b, A + b, A – b, A * B), पर यह केवल छपाई का रूप है — नियम चरों के नाम या उनके आकार से नहीं, संक्रिया की प्रकृति से तय होता है ।
- (a)A * b = b * A — यह क्रमविनिमेय नियम का ठीक-ठीक उदाहरण है, इसलिए उत्तर नहीं हो सकता । गुणा में पदों का क्रम बदलने से गुणनफल नहीं बदलता — 4 × 9 और 9 × 4 दोनों 36 हैं । बूलीय बीजगणित में यही चिह्न AND संक्रिया दर्शाता है और वहाँ भी A · b = b · A सत्य है, क्योंकि दोनों इनपुट के 1 होने पर ही परिणाम 1 आता है और यह शर्त क्रम पर निर्भर नहीं करती ।
- (b)A + b = b + A — यह भी क्रमविनिमेय नियम का उदाहरण है । योग में क्रम बदलने से योगफल वही रहता है — 5 + 8 और 8 + 5 दोनों 13 हैं । बूलीय बीजगणित में यह चिह्न OR संक्रिया के लिए है, और वहाँ भी A + b = b + A सत्य है, क्योंकि दोनों में से किसी एक इनपुट के 1 होने पर परिणाम 1 हो जाता है, चाहे वह पहला हो या दूसरा ।
- (d)A * B = B * A — यह विकल्प (a) का ही दूसरा रूप है — केवल दूसरा चर छोटे के बजाय बड़े अक्षर में छपा है । नियम वही है और वही सत्य है : गुणा क्रमविनिमेय होता है । दो लगभग समान विकल्प एक साथ रखने का उद्देश्य यही होता है कि अभ्यर्थी अक्षरों के आकार में उलझकर समय गँवा दे । ऐसी दशा में तर्क यह है कि जब दो विकल्प एक ही नियम कह रहे हों, तो उनमें से कोई भी अकेला उत्तर नहीं हो सकता ; अतः उत्तर शेष दो में ही होगा ।
संक्रियाओं के तीन आधारभूत नियम बार-बार लौटते हैं । क्रमविनिमेय नियम — पदों का क्रम बदलने पर परिणाम अपरिवर्तित : a + b = b + a तथा a × b = b × a । साहचर्य नियम (associative law) — तीन पदों में कोष्ठक का स्थान बदलने पर परिणाम अपरिवर्तित : (a + b) + c = a + (b + c) । वितरण नियम (distributive law) — गुणा योग पर बँट जाता है : a × (b + c) = a × b + a × c । योग और गुणा तीनों नियमों का पालन करते हैं, जबकि व्यवकलन और भाग न क्रमविनिमेय हैं और न साहचर्य । बूलीय बीजगणित में भी ये तीनों नियम AND और OR संक्रियाओं पर लागू होते हैं, और उनके साथ डी मॉर्गन के प्रमेय जुड़ते हैं ।
यह प्रश्न प्रश्नपत्र के कंप्यूटर खंड में रखा गया है, इसलिए इसका असली संदर्भ बूलीय बीजगणित और तर्क द्वार (logic gates) हैं, जिन पर परिपथों का सरलीकरण टिका होता है । फिर भी उत्तर देने के लिए बूलीय बीजगणित जानना आवश्यक नहीं — साधारण अंकगणित का एक प्रति-उदाहरण ही पर्याप्त है । यही इस प्रकार के प्रश्नों की कुंजी है : किसी कथन को नियम मानने के लिए उसका हर मान पर सत्य होना आवश्यक है, पर उसे ख़ारिज करने के लिए एक ही प्रति-उदाहरण काफ़ी है । इसलिए विकल्पों में छोटे-छोटे मान — मान लीजिए A = 7 और b = 3 — रखकर देख लेना सबसे तेज़ तरीक़ा है । यह प्रश्नपत्र अपने नकारात्मक प्रश्नों में 'नहीं' को मोटे तिरछे अक्षरों में छापता है, जिससे स्टेम की दिशा पकड़ने में चूक की गुंजाइश कम रहती है ।
- क्रमविनिमेय नियम — पदों का क्रम बदलने पर परिणाम नहीं बदलता ; योग और गुणा इसका पालन करते हैं ।
- व्यवकलन और भाग क्रमविनिमेय नहीं हैं : 7 – 3 = 4 पर 3 – 7 = –4 ; इसी तरह 8 ÷ 2 = 4 पर 2 ÷ 8 = 0·25 ।
- A – b = b – A केवल तभी सत्य है जब A = b हो ; विशेष दशा में सत्य होना नियम नहीं बनाता ।
- बूलीय बीजगणित में + चिह्न OR के लिए और · चिह्न AND के लिए है, और दोनों क्रमविनिमेय तथा साहचर्य हैं ।
- बूलीय बीजगणित में व्यवकलन नाम की कोई संक्रिया परिभाषित नहीं है ।
- चरों का बड़े या छोटे अक्षर में छपना नियम को नहीं बदलता ; नियम संक्रिया की प्रकृति से तय होता है ।
- नकारात्मक स्टेम में क्रमविनिमेय नियम वाला विकल्प चुन बैठना ; यहाँ खोजना उसका अपवाद है ।
- A = b जैसी विशेष दशा में सत्य होने को नियम मान लेना ।
- बड़े और छोटे अक्षरों के अंतर को तकनीकी अंतर समझ लेना ।
इस विषय पर प्रश्न दो शैलियों में आते हैं — या तो किसी नियम का नाम देकर उसका उदाहरण पूछा जाता है, या चार समीकरण देकर यह पूछा जाता है कि कौन-सा नियम नहीं है । कंप्यूटर खंड में यही सामग्री बूलीय बीजगणित के रूप में लौटती है, जहाँ AND और OR के लिए क्रमविनिमेय, साहचर्य तथा वितरण नियम और डी मॉर्गन के प्रमेय पूछे जाते हैं । उत्तर देने का सबसे तेज़ तरीक़ा प्रति-उदाहरण है : विकल्प में छोटे-छोटे मान रखकर दोनों पक्ष जोड़-घटाकर देख लीजिए ।
इस प्रश्न से सीधे संबंधित कोई पूर्व PYQ उपलब्ध नहीं।
- practice — not a real PYQ
निम्नलिखित में से कौन-सा एक साहचर्य नियम (associative law) का उदाहरण है ?
- (a)a + b = b + a
- (b)(a + b) + c = a + (b + c)
- (c)a × (b + c) = a × b + a × c
- (d)a – b = b – a
उत्तर(b) (a + b) + c = a + (b + c) — इसमें पदों का क्रम नहीं, कोष्ठक का स्थान बदला गया है ; पहला विकल्प क्रमविनिमेय नियम है और तीसरा वितरण नियम ।
- practice — not a real PYQ
निम्नलिखित में से कौन-सी संक्रिया क्रमविनिमेय नहीं है ?
- (a)योग
- (b)गुणा
- (c)भाग
- (d)बूलीय OR
उत्तर(c) भाग — 8 ÷ 2 = 4 है जबकि 2 ÷ 8 = 0·25 ; योग, गुणा तथा बूलीय OR तीनों क्रमविनिमेय हैं ।