'बकाया किराया' को किस रूप में वर्गीकृत किया जा सकता है ?
- (a)मूल व्यक्तिगत लेखा
- (b)प्रतिनिधि व्यक्तिगत लेखा
- (c)वस्तुगत लेखा
- (d)आय-व्यय लेखा
सही उत्तर — B, (b) प्रतिनिधि व्यक्तिगत लेखा । पारंपरिक वर्गीकरण में खाते तीन प्रकार के होते हैं — व्यक्तिगत, वस्तुगत (real) और अवास्तविक अर्थात् आय-व्यय वाले (nominal) । व्यक्तिगत खाते फिर तीन उपभेदों में बँटते हैं : प्राकृतिक (किसी मनुष्य का खाता, जैसे राम का खाता), कृत्रिम (विधि द्वारा बनाई गई संस्था का खाता, जैसे भारतीय स्टेट बैंक का खाता या किसी कंपनी का खाता), और प्रतिनिधि । प्रतिनिधि व्यक्तिगत खाता वह है जो अपने नाम से किसी व्यक्ति को नहीं दिखाता, पर वस्तुतः व्यक्तियों के समूह का प्रतिनिधित्व करता है । 'बकाया किराया' ठीक यही है : यह किसी वस्तु का नाम नहीं है और न ही किसी वर्ष का व्यय, बल्कि उस मकान-मालिक (या मालिकों) का प्रतिनिधित्व करता है जिसे वर्ष का किराया देय हो चुका है पर चुकाया नहीं गया । देना उसी व्यक्ति को है, इसलिए खाता व्यक्तिगत माना जाता है और उस पर व्यक्तिगत खातों का नियम लागू होता है — पाने वाले को डेबिट, देने वाले को क्रेडिट । यही कारण है कि बकाया किराया खाते का शेष क्रेडिट रहता है और चिट्ठे में उसे देयता पक्ष में चालू दायित्व के रूप में दिखाया जाता है । यहाँ 'किराया खाते' और 'बकाया किराया खाते' का भेद पकड़ लेना निर्णायक है : किराया स्वयं एक व्यय है, इसलिए किराया खाता अवास्तविक (nominal) होता है और लाभ-हानि खाते में जाता है ; किन्तु वर्ष के अंत में जो भाग अदत्त रह गया, वह अलग खाता बनकर उस व्यक्ति का प्रतिनिधि बन जाता है । इसी परिवार के अन्य खाते हैं — अदत्त वेतन, अग्रिम दिया गया बीमा, उपार्जित ब्याज, पूर्वदत्त व्यय और कर्मचारियों की मज़दूरी का बकाया ।
- (a)मूल व्यक्तिगत लेखा — पुस्तिका ने natural personal account को 'मूल व्यक्तिगत लेखा' लिखा है ; प्रचलित पाठ्यपुस्तकीय शब्द प्राकृतिक या नैसर्गिक व्यक्तिगत खाता है । यह उपभेद केवल जीवित मनुष्यों के खातों के लिए है — राम का खाता, श्याम का खाता, मालिक का पूँजी खाता तथा आहरण खाता । बकाया किराया किसी नामधारी व्यक्ति का खाता नहीं है ; उसका शीर्षक एक रक़म की प्रकृति बताता है और उसके पीछे खड़े व्यक्ति का नाम खाते में आता ही नहीं । यही अंतर उसे प्राकृतिक नहीं, प्रतिनिधि व्यक्तिगत खाता बनाता है ।
- (c)वस्तुगत लेखा — वस्तुगत खाते परिसंपत्तियों और संपत्तियों के होते हैं — रोकड़, भवन, मशीनरी, फ़र्नीचर, स्टॉक तथा ख्याति और पेटेंट जैसी अमूर्त परिसंपत्तियाँ ; उन पर नियम लगता है 'जो आए उसे डेबिट, जो जाए उसे क्रेडिट' । बकाया किराया परिसंपत्ति है ही नहीं, वह दायित्व है — व्यवसाय को कुछ मिला नहीं, बल्कि देना बाक़ी है । इस विकल्प का उलटा उदाहरण उपयोगी है : यदि व्यवसाय ने किसी को मकान किराए पर दिया हो और किराया मिलना बाक़ी हो, तो 'उपार्जित किराया' परिसंपत्ति होगी — पर तब भी वह वस्तुगत नहीं, प्रतिनिधि व्यक्तिगत खाता ही रहेगा, क्योंकि वह उस किरायेदार का प्रतिनिधित्व करता है जिससे रक़म लेनी है ।
- (d)आय-व्यय लेखा — पुस्तिका ने nominal account को 'आय-व्यय लेखा' लिखा है, और यही इस प्रश्न का सबसे बड़ा जाल है । अवास्तविक खाते आय, व्यय, लाभ और हानि के होते हैं — किराया, वेतन, कमीशन, ब्याज, मज़दूरी — और वर्ष के अंत में वे सब लाभ-हानि खाते में बंद हो जाते हैं, चिट्ठे तक पहुँचते ही नहीं । 'किराया खाता' सचमुच इसी श्रेणी का है, पर प्रश्न किराए के बारे में नहीं, 'बकाया किराया' के बारे में है । बकाया वाला भाग व्यय नहीं, दायित्व है और वह चिट्ठे में जाता है, इसलिए वह अवास्तविक नहीं हो सकता । ध्यान रहे कि अलाभकारी संस्थाओं का जो 'आय-व्यय खाता' बनता है, वह इस विकल्प से भिन्न वस्तु है — यहाँ यह पद केवल nominal account के अनुवाद के रूप में आया है ।
खातों का पारंपरिक (अंग्रेज़ी) वर्गीकरण तीन शीर्षों में है । व्यक्तिगत खाते — व्यक्तियों, संस्थाओं और उनके प्रतिनिधि खातों के ; नियम : पाने वाले को डेबिट, देने वाले को क्रेडिट । वस्तुगत खाते — परिसंपत्तियों और संपत्तियों के ; नियम : जो आए उसे डेबिट, जो जाए उसे क्रेडिट । अवास्तविक खाते — आय, व्यय, लाभ और हानि के ; नियम : सभी व्यय और हानियाँ डेबिट, सभी आय और लाभ क्रेडिट । व्यक्तिगत खातों के तीन उपभेद हैं — प्राकृतिक, कृत्रिम और प्रतिनिधि । प्रतिनिधि व्यक्तिगत खाते वे हैं जो बकाया या पूर्वदत्त रक़म के रूप में किसी व्यक्ति या व्यक्ति-समूह का प्रतिनिधित्व करते हैं — अदत्त वेतन, अदत्त किराया, पूर्वदत्त बीमा, उपार्जित ब्याज, तथा कर्मचारियों की भविष्य निधि का देय अंशदान ।
यह प्रश्न वस्तुतः यह जाँचता है कि अभ्यर्थी 'किराया' और 'बकाया किराया' में भेद कर पाता है या नहीं । दोनों में एक ही शब्द है, पर एक व्यय है और दूसरा दायित्व । वर्ष के अंत में समायोजन प्रविष्टि इसी भेद को खोलती है — किराया खाता डेबिट और बकाया किराया खाता क्रेडिट ; इससे व्यय उसी वर्ष के लाभ-हानि खाते में पूरा आ जाता है (उपार्जन आधार) और अदत्त भाग चिट्ठे में दायित्व बनकर खड़ा हो जाता है । आधुनिक अमेरिकी वर्गीकरण में यही मद सीधे 'दायित्व' कहलाती, पर भारतीय पाठ्यक्रम और EPFO जैसी परीक्षाएँ अब भी तीन-शीर्ष वाला पारंपरिक वर्गीकरण पूछती हैं, इसलिए दोनों भाषाएँ जानना आवश्यक है । पुस्तिका के हिन्दी विकल्पों में natural को 'मूल' और nominal को 'आय-व्यय' लिखा गया है ; अर्थ पहचानने के लिए अंग्रेज़ी पद साथ रखकर पढ़ना उपयोगी रहता है ।
- व्यक्तिगत खातों के तीन उपभेद — प्राकृतिक (व्यक्ति), कृत्रिम (संस्था, कंपनी, बैंक) और प्रतिनिधि (बकाया या पूर्वदत्त मदें) ।
- बकाया किराया उस मकान-मालिक का प्रतिनिधित्व करता है जिसे रक़म देनी है, इसलिए वह प्रतिनिधि व्यक्तिगत खाता है ।
- किराया खाता अवास्तविक (nominal) होता है और लाभ-हानि खाते में बंद हो जाता है ; बकाया किराया खाता चिट्ठे के देयता पक्ष में रहता है ।
- समायोजन प्रविष्टि — किराया खाता डेबिट, बकाया किराया खाता क्रेडिट ; यह उपार्जन आधार का पालन कराती है ।
- इसी परिवार की अन्य मदें — अदत्त वेतन और मज़दूरी, पूर्वदत्त बीमा, उपार्जित ब्याज, अग्रिम प्राप्त आय ।
- व्यक्तिगत खातों का नियम — पाने वाले को डेबिट, देने वाले को क्रेडिट ।
- 'किराया' शब्द देखकर उसे अवास्तविक खाता मान लेना, जबकि प्रश्न 'बकाया किराया' का है ।
- दायित्व होने के कारण उसे वस्तुगत खाता समझ लेना ; वस्तुगत खाते परिसंपत्तियों के होते हैं ।
- प्रतिनिधि व्यक्तिगत खाते को केवल तभी पहचानना जब कोई नाम लिखा हो ; नाम लिखा ही नहीं होता, यही उसकी पहचान है ।
इस अध्याय से प्रश्न प्रायः किसी एक मद का नाम देकर उसका वर्ग पूछते हैं, या चार मदें देकर यह पूछते हैं कि कौन-सी शेष तीन से भिन्न है । बार-बार लौटने वाली मदें हैं — बकाया वेतन, पूर्वदत्त बीमा, आहरण, पूँजी, ख्याति, बट्टा और भविष्य निधि का देय अंशदान । सुरक्षित तरीक़ा यह है कि पहले पूछिए — क्या यह कोई वस्तु या परिसंपत्ति है ? क्या यह किसी वर्ष की आय या व्यय है ? यदि दोनों उत्तर 'नहीं' हैं और रक़म किसी को देनी या किसी से लेनी है, तो वह प्रतिनिधि व्यक्तिगत खाता है ।
इस प्रश्न से सीधे संबंधित कोई पूर्व PYQ उपलब्ध नहीं।
- practice — not a real PYQ
'पूर्वदत्त बीमा' किस प्रकार का खाता है ?
- (a)वस्तुगत लेखा
- (b)प्रतिनिधि व्यक्तिगत लेखा
- (c)कृत्रिम व्यक्तिगत लेखा
- (d)अवास्तविक लेखा
उत्तर(b) प्रतिनिधि व्यक्तिगत लेखा — अगले वर्ष की जो सेवा अग्रिम चुकाई जा चुकी है, वह बीमा कंपनी से लेनी शेष है, इसलिए यह खाता उसी पक्ष का प्रतिनिधित्व करता है ।
- practice — not a real PYQ
व्यक्तिगत खातों पर लागू होने वाला नियम कौन-सा है ?
- (a)जो आए उसे डेबिट, जो जाए उसे क्रेडिट
- (b)सभी व्यय और हानियाँ डेबिट, सभी आय और लाभ क्रेडिट
- (c)पाने वाले को डेबिट, देने वाले को क्रेडिट
- (d)परिसंपत्ति बढ़े तो क्रेडिट, घटे तो डेबिट
उत्तर(c) पाने वाले को डेबिट, देने वाले को क्रेडिट — पहला नियम वस्तुगत खातों का है और दूसरा अवास्तविक खातों का ।