एक पांसा दो बार फेंका जाता है । ऐसे कितने प्रकार हैं, जिससे पहली बार फेंके जाने पर आने वाली संख्या, दूसरी बार फेंके जाने पर आने वाली संख्या से कम नहीं है ?
- (a)15
- (b)20
- (c)21
- (d)36
सही उत्तर — C, (c) 21 । स्टेम में 'नहीं' मोटे तिरछे अक्षरों में छपा है, और प्रश्न का पूरा अर्थ उसी पर टिका है : 'कम नहीं है' का अर्थ है 'बराबर या अधिक है' । अर्थात् यदि पहली बार आई संख्या को p और दूसरी बार आई संख्या को q कहें, तो गिनने हैं वे सभी युग्म (p, q) जिनमें p ≥ q । पहली विधि — सीधी गिनती । p = 1 हो तो q केवल 1 हो सकता है → 1 प्रकार ; p = 2 हो तो q = 1 या 2 → 2 प्रकार ; इसी तरह p = 3 पर 3, p = 4 पर 4, p = 5 पर 5 और p = 6 पर 6 प्रकार । कुल = 1 + 2 + 3 + 4 + 5 + 6 = 21 । दूसरी विधि — सममिति । दो फेंकों के कुल परिणाम 6 × 6 = 36 हैं । इनमें से 6 परिणाम ऐसे हैं जिनमें दोनों संख्याएँ बराबर हैं — (1,1) से (6,6) तक । शेष 36 − 6 = 30 परिणामों में या तो पहली संख्या बड़ी है या दूसरी, और सममिति से ये दोनों दशाएँ बराबर-बराबर बँटती हैं, अर्थात् 15-15 । अतः p ≥ q वाले परिणाम = 15 (कड़ाई से बड़े) + 6 (बराबर) = 21 । सामान्य सूत्र भी याद रखने योग्य है : n फलकों वाले पाँसे को दो बार फेंकने पर p ≥ q वाले परिणामों की संख्या n(n + 1)/2 होती है ; यहाँ 6 × 7 ÷ 2 = 21 । ध्यान दीजिए कि प्रश्न 'कितने प्रकार' पूछ रहा है, प्रायिकता नहीं ; यदि प्रायिकता पूछी जाती तो उत्तर 21/36 = 7/12 होता ।
- (a)15 — 15 वह संख्या है जब 'कम नहीं है' को 'अधिक है' पढ़ लिया जाए, अर्थात् केवल p > q वाले युग्म गिने जाएँ — (2,1), (3,1), (3,2) … (6,5) । ये ठीक 15 हैं । यह जान-बूझकर बनाया गया जाल है और इसीलिए पुस्तिका ने 'नहीं' को मोटे तिरछे अक्षरों में छापा है : 'कम नहीं' में बराबरी की छह दशाएँ भी सम्मिलित हैं, जिन्हें जोड़ने पर 21 बनता है ।
- (b)20 — 20 प्रायः गिनती में एक पद छूट जाने से आता है । शृंखला 1 + 2 + 3 + 4 + 5 + 6 में यदि पहला पद छोड़ दिया जाए — अर्थात् यह मान लिया जाए कि p = 1 की दशा में कोई युग्म बनता ही नहीं — तो योग 20 रह जाता है । किन्तु p = 1 और q = 1 पर भी 'पहली संख्या दूसरी से कम नहीं है' सत्य है, क्योंकि वे बराबर हैं । बराबरी वाली दशाओं को गिनना ही इस प्रश्न का केंद्र है ।
- (d)36 — 36 दो फेंकों के कुल संभव परिणामों की संख्या है (6 × 6), न कि उन परिणामों की जो शर्त पूरी करते हों । यह विकल्प उस अभ्यर्थी के लिए है जो प्रतिबंध पढ़े बिना केवल प्रतिदर्श समष्टि (sample space) का आकार लिख देता है । सरल जाँच : यदि उत्तर 36 होता तो हर परिणाम शर्त पूरी करता, जबकि (2,5) जैसे स्पष्ट प्रति-उदाहरण मौजूद हैं जहाँ पहली संख्या दूसरी से कम है ।
दो पाँसों (या एक पाँसे को दो बार फेंकने) की प्रतिदर्श समष्टि 6 × 6 = 36 क्रमित युग्मों की होती है, और 'क्रमित' शब्द महत्त्वपूर्ण है — (2, 5) और (5, 2) अलग-अलग परिणाम हैं । इसी 36-कोष्ठक वाली तालिका पर लगभग सारे प्रश्न बनते हैं : योग एक निश्चित संख्या होना, दोनों संख्याएँ बराबर होना, अंतर कोई निश्चित मान होना, या — जैसे यहाँ — एक संख्या दूसरी से बड़ी या बराबर होना । तालिका में विकर्ण (diagonal) पर छह कोष्ठक बराबरी वाले हैं, उसके एक ओर के 15 कोष्ठक p > q वाले और दूसरी ओर के 15 कोष्ठक p < q वाले । यह सममिति याद रहे तो अधिकांश प्रश्न बिना गिने हल हो जाते हैं । सामान्य सूत्र : n फलकों के लिए p ≥ q वाले परिणाम n(n + 1)/2 और p > q वाले परिणाम n(n − 1)/2 होते हैं ।
इस प्रश्न में असली परीक्षा गणित की नहीं, भाषा की है । 'से कम नहीं है' एक ऐसा वाक्यांश है जिसे जल्दबाज़ी में 'से अधिक है' पढ़ लेना बहुत आसान है, और परीक्षक ने विकल्पों में दोनों उत्तर — 15 और 21 — साथ-साथ रख दिए हैं । इसीलिए पुस्तिका 'नहीं' को मोटे तिरछे अक्षरों में छापती है ; यह प्रश्नपत्र अपने सत्रह नकारात्मक प्रश्नों में यह सुविधा देता है, जो अभ्यर्थी के पक्ष में है । पढ़ते समय ऐसे वाक्यांश को तुरंत गणितीय चिह्न में बदल लीजिए — 'कम नहीं' = ≥, 'अधिक नहीं' = ≤, 'से कम' = <, 'से अधिक' = > — और तभी गिनती आरंभ कीजिए । यह भी ध्यान रखिए कि हिन्दी पृष्ठ पर 'पाँसा' शब्द चंद्रबिंदु के बिना 'पांसा' छपा है ; अर्थ वही है ।
- एक पाँसे को दो बार फेंकने पर कुल परिणाम 6 × 6 = 36 होते हैं, और वे क्रमित युग्म हैं — (2,5) और (5,2) अलग परिणाम हैं ।
- 'पहली संख्या दूसरी से कम नहीं है' का अर्थ p ≥ q है, अर्थात् बराबरी की दशाएँ भी सम्मिलित हैं ।
- गिनती : p = 1 पर 1, p = 2 पर 2, … p = 6 पर 6 प्रकार ; कुल 1 + 2 + 3 + 4 + 5 + 6 = 21 ।
- सममिति से : 36 में 6 बराबरी वाले, शेष 30 आधे-आधे बँटकर 15 (p > q) और 15 (p < q) ; अतः p ≥ q = 15 + 6 = 21 ।
- सामान्य सूत्र — n फलकों वाले पाँसे के लिए p ≥ q वाले परिणाम n(n + 1)/2 ; संगत प्रायिकता 21/36 = 7/12 होती ।
- 'से कम नहीं है' को 'से अधिक है' पढ़ लेना, जिससे उत्तर 21 के स्थान पर 15 आ जाता है ।
- बराबरी वाली छह दशाओं में से किसी एक को छोड़ देना, जिससे 20 आ जाता है ।
- क्रमित युग्मों को अक्रमित मान लेना — (2,5) और (5,2) दो अलग परिणाम हैं ।
EPFO के संख्यात्मक खंड में पाँसों पर आधारित गणना-प्रश्न नियमित रूप से आते हैं, कभी 'कितने प्रकार' के रूप में और कभी 'प्रायिकता क्या है' के रूप में — दोनों की गणना एक ही है, बस दूसरे में 36 से भाग देना पड़ता है । कठिनाई सदैव शर्त की भाषा में रखी जाती है : 'कम नहीं', 'अधिक नहीं', 'कम से कम', 'दोनों भिन्न' । इसलिए पहला काम शर्त को असमिका के चिह्न में लिखना है ; उसके बाद गिनती यांत्रिक हो जाती है ।
इस प्रश्न से सीधे संबंधित कोई पूर्व PYQ उपलब्ध नहीं।
- practice — not a real PYQ
एक पाँसा दो बार फेंका जाता है । ऐसे कितने परिणाम हैं जिनमें पहली बार आई संख्या दूसरी बार आई संख्या से कड़ाई से अधिक है ?
- (a)12
- (b)15
- (c)18
- (d)21
उत्तर(b) 15 — कुल 36 में से 6 बराबरी वाले हटाने पर 30 बचते हैं, जो सममिति से 15-15 बँट जाते हैं ; बराबरी की दशाएँ जोड़ने पर यही संख्या 21 हो जाती है ।
- practice — not a real PYQ
एक पाँसा दो बार फेंकने पर इस बात की प्रायिकता क्या है कि पहली बार आई संख्या दूसरी बार आई संख्या से कम नहीं होगी ?
- (a)5/12
- (b)1/2
- (c)7/12
- (d)2/3
उत्तर(c) 7/12 — अनुकूल परिणाम 21 और कुल परिणाम 36 ; 21/36 = 7/12 ।