किसी मरुभूमि में, X और Y दो बिंदु हैं जो परस्पर 100 किलोमीटर दूर हैं । बिंदु X पर, दो खम्भे, एक काला और एक सफ़ेद, खड़े किए गए हैं । X और Y को जोड़ने वाली रेखा पर, एक सफ़ेद खम्भा प्रत्येक 180 मीटर पर और एक काला खम्भा प्रत्येक 350 मीटर पर खड़े किए गए हैं । X से Y तक जाते हुए कितनी बार काले और सफ़ेद खम्भे एक साथ खड़े मिलेंगे ?
- (a)14 बार
- (b)15 बार
- (c)16 बार
- (d)17 बार
सही उत्तर — C, (c) 16 बार । यह लघुत्तम समापवर्त्य (LCM) का प्रश्न है, जिसमें अंतिम चरण पर 'सिरे गिनने' का ध्यान रखना होता है । सबसे पहले सारी दूरियाँ एक इकाई में लाइए : X और Y के बीच 100 किलोमीटर = 1,00,000 मीटर । सफ़ेद खम्भे X से 180 मीटर के प्रत्येक गुणज पर हैं और काले खम्भे 350 मीटर के प्रत्येक गुणज पर । दोनों एक साथ वहीं मिलेंगे जहाँ दूरी 180 और 350 दोनों का गुणज हो, अर्थात् उनके लघुत्तम समापवर्त्य के गुणजों पर । अभाज्य गुणनखंड निकालिए : 180 = 2² × 3² × 5 और 350 = 2 × 5² × 7 । अतः लघुत्तम समापवर्त्य = 2² × 3² × 5² × 7 = 4 × 9 × 25 × 7 = 6300 मीटर । अब गिनिए कि X से Y तक 6300 के कितने गुणज आते हैं : 1,00,000 ÷ 6300 ≈ 15.87, अतः 6300 से 94,500 तक (6300 × 15 = 94,500) कुल 15 बिंदु X के बाद पड़ते हैं । किन्तु प्रश्न स्पष्ट कहता है कि 'बिंदु X पर, दो खम्भे, एक काला और एक सफ़ेद, खड़े किए गए हैं' — अर्थात् शून्य दूरी पर भी दोनों एक साथ हैं, और यात्रा X से ही आरंभ हो रही है । इसलिए X वाला युग्म भी गिना जाएगा : 15 + 1 = 16 । यह भी जाँच लीजिए कि Y पर कोई खम्भा नहीं है — 1,00,000 न तो 180 का गुणज है और न 350 का — इसलिए दूसरे सिरे पर कुछ जोड़ने का प्रश्न ही नहीं उठता । अतः उत्तर 16 बार है ।
- (a)14 बार — इस उत्तर तक कोई सुसंगत गणना नहीं पहुँचती ; यह प्रायः ग़लत लघुत्तम समापवर्त्य से निकलता है । उदाहरणार्थ यदि कोई 180 और 350 का लघुत्तम समापवर्त्य 6300 के स्थान पर 7000 मान ले, तो 1,00,000 ÷ 7000 ≈ 14.28 से 14 निकल आएगा । इसीलिए इस प्रकार के प्रश्न में पहला काम अभाज्य गुणनखंडन को दो बार जाँचना है — 180 = 2² × 3² × 5, 350 = 2 × 5² × 7, और प्रत्येक अभाज्य की उच्चतम घात लेकर 6300 ।
- (b)15 बार — यह इस प्रश्न का असली जाल है और सबसे अधिक चुना जाने वाला ग़लत उत्तर । 15 वह संख्या है जो केवल X के बाद पड़ने वाले संयोग-बिंदुओं की है — 6300, 12600, … 94,500 । यह गणना बिंदु X पर पहले से खड़े काले और सफ़ेद खम्भों की जोड़ी छोड़ देती है, जिसका उल्लेख प्रश्न ने अलग से किया है । यही 'सिरे की समस्या' (fence-post problem) है : यात्रा X से आरंभ होती है, इसलिए X का युग्म भी 'एक साथ खड़े मिलने' में गिना जाएगा ।
- (d)17 बार — 17 तब निकलता है जब कोई दोनों सिरों को गिन ले — X का युग्म भी और Y पर एक कल्पित युग्म भी । किन्तु Y पर कोई खम्भा है ही नहीं : 1,00,000 ÷ 180 = 555.55… और 1,00,000 ÷ 350 = 285.71… , अर्थात् दोनों में से कोई भी संख्या 1,00,000 को पूरा-पूरा नहीं बाँटती । अंतिम संयोग-बिंदु 94,500 मीटर पर है, जिसके बाद Y तक 5,500 मीटर में कोई युग्म नहीं बनता ।
यह 'चक्रीय घटनाओं का संपात' (coincidence of periodic events) वाला मानक प्रश्न-प्रकार है । जब दो घटनाएँ अलग-अलग नियत अंतरालों पर दोहराई जाती हैं और वे एक साथ आरंभ होती हैं, तो वे उसके बाद अपने अंतरालों के लघुत्तम समापवर्त्य के प्रत्येक गुणज पर एक साथ घटती हैं । दिए गए परिसर में संयोगों की संख्या निकालने का सूत्र है : कुल दूरी (या समय) ÷ लघुत्तम समापवर्त्य का पूर्णांक भाग, और फिर यह निर्णय कि आरंभ-बिंदु गिना जाएगा या नहीं । यही तर्क घंटियों के एक साथ बजने, ट्रैफ़िक-लाइटों के एक साथ बदलने, बसों के एक साथ चलने और वृत्ताकार पथ पर दौड़ने वालों के मिलने वाले सभी प्रश्नों में काम करता है । केवल इकाई और सिरों की गिनती बदलती है ।
इस प्रश्न में परीक्षक ने दो अलग-अलग परीक्षाएँ एक साथ रखी हैं । पहली — क्या अभ्यर्थी 180 और 350 का लघुत्तम समापवर्त्य ठीक निकाल पाता है (6300, जो 63,000 या 7000 जैसी सहज-सी ग़लतियों से भिन्न है) । दूसरी, और अधिक निर्णायक — क्या वह आरंभ-बिंदु गिनता है । विकल्पों में 15 और 16 दोनों का होना ही बताता है कि प्रश्न का केंद्र यही है । ऐसे प्रश्न में सुरक्षित आदत यह है कि उत्तर लिखने से पहले शून्य दूरी की स्थिति पर एक पंक्ति लिखिए — 'X पर दोनों खम्भे हैं, अतः गिनती में सम्मिलित' — और फिर दूसरे सिरे की जाँच कीजिए कि वहाँ संयोग बनता है या नहीं । पुस्तिका के हिन्दी विकल्पों में संख्याओं के साथ 'बार' शब्द भी छपा है, जबकि अंग्रेज़ी पृष्ठ पर केवल संख्याएँ हैं ; अर्थ दोनों का एक ही है ।
- 100 किलोमीटर = 1,00,000 मीटर ; प्रश्न हल करने से पहले सभी दूरियाँ एक ही इकाई में लाना अनिवार्य है ।
- 180 = 2² × 3² × 5 और 350 = 2 × 5² × 7 ; अतः लघुत्तम समापवर्त्य = 2² × 3² × 5² × 7 = 6300 मीटर ।
- 1,00,000 ÷ 6300 ≈ 15.87 ; अतः X के बाद 6300 के 15 गुणज (6300 से 94,500 तक) परिसर में आते हैं ।
- बिंदु X पर दोनों खम्भे पहले से खड़े हैं, अतः वह भी एक संयोग है : कुल 15 + 1 = 16 ।
- Y पर कोई खम्भा नहीं है — 1,00,000 न 180 का गुणज है, न 350 का ; अंतिम संयोग 94,500 मीटर पर है ।
- आरंभ-बिंदु को गिनना भूल जाना, जिससे 16 के स्थान पर 15 आ जाता है ।
- इकाई न बदलना — किलोमीटर और मीटर मिलाकर गणना करने से उत्तर सैकड़ों गुना ग़लत हो जाता है ।
- लघुत्तम समापवर्त्य निकालने में जल्दबाज़ी — 180 और 350 का ल.स. 6300 है, 63,000 या 7000 नहीं ।
EPFO के संख्यात्मक अभियोग्यता खंड में ल.स./म.स. के अनुप्रयोग लगभग हर वर्ष आते हैं, प्रायः 'एक साथ आरंभ होने वाली दो चक्रीय घटनाएँ' के रूप में — खम्भे, घंटियाँ, बत्तियाँ, बसें या वृत्ताकार पथ पर धावक । विकल्पों में सदैव क्रमागत संख्याएँ (जैसे 14, 15, 16, 17) रखी जाती हैं, क्योंकि परीक्षक जानता है कि पूरी गणना सही होने पर भी अभ्यर्थी सिरे की गिनती में एक की चूक कर सकता है । इसलिए अंतिम चरण में सिरों की जाँच अलग से कीजिए ।
इस प्रश्न से सीधे संबंधित कोई पूर्व PYQ उपलब्ध नहीं।
- practice — not a real PYQ
तीन घंटियाँ क्रमशः 12, 15 और 18 मिनट के अंतराल पर बजती हैं और सुबह 8 बजे एक साथ बजती हैं । सुबह 8 बजे से दोपहर 2 बजे तक (8 बजे वाली बार को सम्मिलित करते हुए) वे कितनी बार एक साथ बजेंगी ?
- (a)2 बार
- (b)3 बार
- (c)4 बार
- (d)5 बार
उत्तर(b) 3 बार — 12, 15 और 18 का ल.स. 180 मिनट अर्थात् 3 घंटे है, इसलिए वे 8:00, 11:00 और 2:00 बजे एक साथ बजेंगी । आरंभ-बिंदु (8 बजे) को गिनना ही इस प्रकार के प्रश्नों का निर्णायक चरण है ।
- practice — not a real PYQ
180 और 350 का लघुत्तम समापवर्त्य क्या है ?
- (a)1260
- (b)3150
- (c)6300
- (d)63000
उत्तर(c) 6300 — 180 = 2² × 3² × 5 और 350 = 2 × 5² × 7 ; प्रत्येक अभाज्य की उच्चतम घात लेने पर 2² × 3² × 5² × 7 = 6300 ।