केंद्र सरकार द्वारा गठित निम्नलिखित प्राधिकरणों में से कौन-सा एक, कर्मचारी भविष्य निधि और प्रकीर्ण उपबंध अधिनियम, 1952 के अधीन अपीलीय प्राधिकरण होगा ?
- (a)कर्मचारी भविष्य निधि अपीलीय अधिकरण
- (b)राष्ट्रीय अधिकरण
- (c)श्रम अपीलीय अधिकरण
- (d)औद्योगिक अधिकरण
सही उत्तर — D, (d) औद्योगिक अधिकरण । यह प्रश्न 2017 के एक बड़े परिवर्तन पर टिका है । कर्मचारी भविष्य निधि और प्रकीर्ण उपबंध अधिनियम, 1952 की धारा 7D मूलतः एक पृथक 'कर्मचारी भविष्य निधि अपीलीय अधिकरण' का उपबंध करती थी । वित्त अधिनियम, 2017 (अध्याय VI का भाग XIV) ने, 26 मई 2017 से प्रभावी, उस अधिकरण को समाप्त कर दिया और धारा 7D को प्रतिस्थापित कर दिया : अब वह औद्योगिक अधिकरण, जो केंद्र सरकार द्वारा औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 की धारा 7A(1) के अधीन गठित किया गया है, इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए 'अधिकरण' होगा और उसे इस अधिनियम के अधीन प्रदत्त अधिकारिता, शक्तियाँ तथा प्राधिकार प्राप्त होंगे । उसी वित्त अधिनियम ने धाराएँ 7E, 7F और 7G — जो पुराने अपीलीय अधिकरण के पीठासीन अधिकारी की पदावधि, त्यागपत्र और वेतन-भत्तों से संबंधित थीं — विलोपित कर दीं । व्यवहार में इसका अर्थ यह है कि धारा 7A (देय राशि का निर्धारण), 7B (पुनर्विलोकन), 7C (छूटी हुई राशि का निर्धारण) तथा 14B (क्षतिपूर्ति-वसूली) के अधीन पारित आदेशों के विरुद्ध धारा 7-I की अपील अब केंद्रीय सरकार औद्योगिक अधिकरण के समक्ष जाती है । अतः 'केंद्र सरकार द्वारा गठित' शब्द स्टेम में यूँ ही नहीं हैं — वे ठीक उसी अधिकरण की ओर संकेत करते हैं जो औद्योगिक विवाद अधिनियम की धारा 7A के अधीन केंद्र सरकार गठित करती है ।
- (a)कर्मचारी भविष्य निधि अपीलीय अधिकरण — यह 2017 से पहले का सही उत्तर है, और इसीलिए यह प्रश्न का सबसे ख़तरनाक विकल्प है । वित्त अधिनियम, 2017 ने 26 मई 2017 से इस पृथक अधिकरण को समाप्त कर उसका कार्य केंद्रीय सरकार औद्योगिक अधिकरण को सौंप दिया, और उसके पीठासीन अधिकारी से संबंधित धाराएँ 7E, 7F तथा 7G विलोपित कर दीं । जो अभ्यर्थी पुरानी पुस्तक या पुराने नोट्स से पढ़ता है, वह यहीं चूक जाता है ; श्रम विधि में संशोधन-तिथि याद रखना उतना ही आवश्यक है जितना उपबंध ।
- (b)राष्ट्रीय अधिकरण — राष्ट्रीय अधिकरण (National Tribunal) औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 की धारा 7B के अधीन केंद्र सरकार द्वारा गठित निकाय है, और उसका काम ऐसे औद्योगिक विवादों का न्यायनिर्णयन है जिनमें राष्ट्रीय महत्त्व के प्रश्न अंतर्ग्रस्त हों अथवा जो एक से अधिक राज्यों के प्रतिष्ठानों को प्रभावित करते हों । यह भविष्य निधि की अपीलों का मंच नहीं है । ध्यान दीजिए कि धारा 7A का अधिकरण और धारा 7B का राष्ट्रीय अधिकरण दो अलग निकाय हैं — 1952 का अधिनियम केवल पहले को अपनाता है ।
- (c)श्रम अपीलीय अधिकरण — श्रम अपीलीय अधिकरण औद्योगिक विवाद (अपील अधिकरण) अधिनियम, 1950 के अधीन गठित निकाय था और बाद में समाप्त कर दिया गया ; आज भारत की श्रम-न्याय व्यवस्था में इस नाम का कोई अपीलीय मंच विद्यमान नहीं है । यह विकल्प केवल इसलिए रखा गया है कि नाम में 'श्रम' और 'अपीलीय' दोनों शब्द हैं और वह भविष्य निधि की अपील के लिए स्वाभाविक-सा लगता है । नाम की परिचितता और वैधानिक अस्तित्व दो अलग बातें हैं ।
कर्मचारी भविष्य निधि और प्रकीर्ण उपबंध अधिनियम, 1952 की न्याय-प्रक्रिया तीन चरणों की है । पहला चरण — निर्धारण : धारा 7A के अधीन केंद्रीय भविष्य निधि आयुक्त या अन्य प्राधिकृत अधिकारी यह अवधारित करता है कि नियोक्ता पर कितनी राशि देय है ; धारा 7B उसी आदेश के पुनर्विलोकन की और धारा 7C छूटी हुई अवधि के निर्धारण की शक्ति देती है ; धारा 14B विलंबित संदाय पर क्षतिपूर्ति लगाती है । दूसरा चरण — अपील : धारा 7-I इन आदेशों के विरुद्ध अधिकरण के समक्ष अपील का अधिकार देती है, और धारा 7-O के अनुसार नियोक्ता को अपील दाख़िल करने से पहले देय राशि का एक भाग जमा करना होता है । तीसरा चरण — वसूली : धारा 8B से 8G तक वसूली अधिकारी के माध्यम से बकाया की वसूली । 2017 से पहले दूसरे चरण का मंच पृथक 'कर्मचारी भविष्य निधि अपीलीय अधिकरण' था ; अब वही भूमिका केंद्रीय सरकार औद्योगिक अधिकरण निभाता है ।
यह प्रश्न इस बात की परीक्षा है कि अभ्यर्थी श्रम विधि को 'जमी हुई' पुस्तक की तरह पढ़ता है या संशोधनों के साथ । वित्त अधिनियम, 2017 ने एक साथ कई क्षेत्रीय अधिकरणों का विलय किया था, और भविष्य निधि अपीलीय अधिकरण उन्हीं में से एक था । EPFO की परीक्षा में यह विशेष रूप से महत्त्वपूर्ण है, क्योंकि प्रवर्तन अधिकारी का दैनिक कार्य ही धारा 7A की कार्यवाहियों और उनके विरुद्ध अपीलों के इर्द-गिर्द चलता है । उत्तर देने से पहले स्टेम का वह वाक्यांश देखिए जो निकाय की उत्पत्ति बताता है — यहाँ 'केंद्र सरकार द्वारा गठित' — क्योंकि वही औद्योगिक विवाद अधिनियम की धारा 7A(1) की ओर संकेत करता है । ध्यान रहे कि 1952 का यह अधिनियम अब सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 में समाहित है, जो 21 नवंबर 2025 से प्रवृत्त हुई ; प्रश्नपत्र 2023 का है ।
- वित्त अधिनियम, 2017 ने 26 मई 2017 से कर्मचारी भविष्य निधि अपीलीय अधिकरण समाप्त कर दिया और धारा 7D प्रतिस्थापित कर दी ।
- प्रतिस्थापित धारा 7D — औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 की धारा 7A(1) के अधीन केंद्र सरकार द्वारा गठित औद्योगिक अधिकरण ही इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए अधिकरण होगा ।
- उसी संशोधन से धाराएँ 7E, 7F और 7G — पुराने अधिकरण के पीठासीन अधिकारी की पदावधि, त्यागपत्र और वेतन-भत्ते — विलोपित कर दी गईं ।
- अपील योग्य आदेश — धारा 7A (निर्धारण), 7B (पुनर्विलोकन), 7C (छूटी हुई अवधि का निर्धारण) और 14B (क्षतिपूर्ति) के अधीन पारित आदेश ; अपील का उपबंध धारा 7-I में है ।
- राष्ट्रीय अधिकरण औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 की धारा 7B का निकाय है और उसका संबंध राष्ट्रीय महत्त्व अथवा एक से अधिक राज्यों को प्रभावित करने वाले औद्योगिक विवादों से है, भविष्य निधि की अपीलों से नहीं ।
- 2017 से पहले का उत्तर (कर्मचारी भविष्य निधि अपीलीय अधिकरण) आज भी सही मान लेना ।
- औद्योगिक अधिकरण (धारा 7A) और राष्ट्रीय अधिकरण (धारा 7B) को एक मान लेना — दोनों औद्योगिक विवाद अधिनियम के अलग-अलग निकाय हैं ।
- श्रम न्यायालय, औद्योगिक अधिकरण और श्रम अपीलीय अधिकरण के नाम आपस में गड्डमड्ड कर देना ।
EPFO की दोनों परीक्षाएँ ईपीएफ अधिनियम की न्याय-प्रक्रिया से नियमित प्रश्न पूछती हैं — कौन निर्धारण करता है, अपील कहाँ जाती है, अपील से पहले कितनी राशि जमा करनी होती है, वसूली कौन करता है । ये प्रश्न प्रायः संशोधनों पर केंद्रित होते हैं, क्योंकि वही अभ्यर्थियों की सबसे कमज़ोर कड़ी है । इसलिए अधिनियम की धारा-सूची के साथ प्रमुख संशोधनों की तिथियाँ भी एक जगह लिखकर याद रखिए ।
इस प्रश्न से सीधे संबंधित कोई पूर्व PYQ उपलब्ध नहीं।
- practice — not a real PYQ
कर्मचारी भविष्य निधि और प्रकीर्ण उपबंध अधिनियम, 1952 की किस धारा के अधीन देय राशि का निर्धारण किया जाता है ?
- (a)धारा 6
- (b)धारा 7A
- (c)धारा 7D
- (d)धारा 14B
उत्तर(b) धारा 7A — देय राशि के निर्धारण की शक्ति ; इसी के विरुद्ध धारा 7-I के अधीन अधिकरण में अपील होती है ।
- practice — not a real PYQ
कर्मचारी भविष्य निधि अपीलीय अधिकरण को किस विधान द्वारा समाप्त किया गया ?
- (a)वित्त अधिनियम, 2017
- (b)सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020
- (c)औद्योगिक संबंध संहिता, 2020
- (d)वित्त अधिनियम, 2015
उत्तर(a) वित्त अधिनियम, 2017 — 26 मई 2017 से प्रभावी ; इसके बाद केंद्र सरकार द्वारा गठित औद्योगिक अधिकरण ही ईपीएफ अधिनियम का अधिकरण है ।