औद्योगिक नियोजन (स्थायी आदेश) अधिनियम, 1946 के उपबंधों के अनुसार, नियोक्ता को और ट्रेड यूनियनों को अपील प्राधिकारी के आदेश की प्रतियाँ भेजी जाने की तिथि से कितने दिनों की समाप्ति के बाद स्थायी आदेश प्रचालन में आएँगे ?
- (a)सात दिन
- (b)दस दिन
- (c)पंद्रह दिन
- (d)तीस दिन
सही उत्तर — A, (a) सात दिन । यह उत्तर औद्योगिक नियोजन (स्थायी आदेश) अधिनियम, 1946 की धारा 7 ('स्थायी आदेशों के प्रचालन की तिथि') से सीधे निकलता है । धारा 7 दो स्थितियाँ रखती है और प्रत्येक के लिए अलग अवधि देती है । पहली — यदि धारा 6 के अधीन कोई अपील नहीं की गई, तो स्थायी आदेश उस तिथि से तीस दिन की समाप्ति पर प्रचालन में आएँगे जिस तिथि को धारा 5(3) के अधीन उनकी अधिप्रमाणित प्रतियाँ भेजी गई थीं । दूसरी — यदि अपील की गई, तो वे उस तिथि से सात दिन की समाप्ति पर प्रचालन में आएँगे जिस तिथि को धारा 6(2) के अधीन अपील प्राधिकारी के आदेश की प्रतियाँ भेजी गई थीं ; ये प्रतियाँ नियोक्ता को तथा ट्रेड यूनियन या कामगारों के अन्य विहित प्रतिनिधियों को भेजी जाती हैं । प्रश्न का स्टेम ठीक इसी दूसरी स्थिति का वर्णन करता है — 'अपील प्राधिकारी के आदेश की प्रतियाँ भेजी जाने की तिथि से' — इसलिए लागू अवधि सात दिन है, तीस दिन नहीं । यही इस प्रश्न की पूरी कठिनाई है : दोनों संख्याएँ एक ही धारा में हैं, और अभ्यर्थी को यह पढ़ना होता है कि स्टेम किस घटना से गिनती आरंभ कर रहा है — अधिप्रमाणित प्रतियों के प्रेषण से (तीस दिन), या अपीलीय आदेश के प्रेषण से (सात दिन) ।
- (b)दस दिन — दस दिन की कोई अवधि इस अधिनियम की धारा 7 में है ही नहीं । यह अंक श्रम विधियों के दूसरे कोनों से आता है — जैसे मज़दूरी संदाय अधिनियम, 1936 की धारा 5 में बड़े प्रतिष्ठानों के लिए वेतन-अवधि की समाप्ति से दस दिन के भीतर मज़दूरी का भुगतान । परीक्षक ऐसे 'परिचित पर असंबद्ध' अंक इसीलिए रखता है कि अभ्यर्थी परिचय के आधार पर चुन बैठे ।
- (c)पंद्रह दिन — पंद्रह दिन भी धारा 7 की कोई अवधि नहीं है । अधिनियम की गिनती-योग्य अवधियाँ याद रखिए : प्रारूप स्थायी आदेश प्रस्तुत करने के लिए छह मास (धारा 3), अपील के लिए तीस दिन (धारा 6), अपील न होने पर प्रचालन के लिए तीस दिन और अपील होने पर सात दिन (धारा 7) । पंद्रह दिन इनमें से किसी में नहीं आता, इसलिए यह विशुद्ध भराव-विकल्प है ।
- (d)तीस दिन — यह प्रश्न का सबसे ख़तरनाक विकल्प है, क्योंकि तीस दिन धारा 7 में सचमुच है — पर दूसरी स्थिति के लिए । तीस दिन तब लागू होते हैं जब कोई अपील नहीं की गई और गिनती धारा 5(3) के अधीन अधिप्रमाणित प्रतियों के प्रेषण से आरंभ होती है । स्टेम स्पष्ट रूप से 'अपील प्राधिकारी के आदेश की प्रतियाँ' कह रहा है, अर्थात् अपील हो चुकी है ; इसलिए यहाँ सात दिन ही लागू होंगे । जो अभ्यर्थी धारा 7 का केवल पहला भाग याद रखता है, वह यही विकल्प चुनता है ।
औद्योगिक नियोजन (स्थायी आदेश) अधिनियम, 1946 का उद्देश्य यह है कि औद्योगिक प्रतिष्ठानों में नियोजन की शर्तें मौखिक या मनमानी न रहकर लिखित, प्रमाणित और सर्वविदित हों । अधिनियम की प्रक्रिया एक सीधी शृंखला है : (i) अधिनियम लागू होने के छह मास के भीतर नियोक्ता प्रमाणन अधिकारी (Certifying Officer) के समक्ष प्रारूप स्थायी आदेश प्रस्तुत करता है (धारा 3) ; (ii) प्रमाणन अधिकारी कामगारों/ट्रेड यूनियन को सुनवाई का अवसर देकर उन्हें प्रमाणित करता है और धारा 5(3) के अधीन अधिप्रमाणित प्रतियाँ भेजता है ; (iii) व्यथित पक्षकार तीस दिन के भीतर अपील प्राधिकारी के समक्ष अपील कर सकता है (धारा 6), जिसका निर्णय अंतिम होता है ; और (iv) धारा 7 बताती है कि आदेश कब प्रचालन में आएँगे — अपील न होने पर तीस दिन बाद, अपील होने पर अपीलीय आदेश की प्रतियाँ भेजे जाने के सात दिन बाद । धारा 10A का निर्वाह भत्ता भी इसी अधिनियम का प्रसिद्ध उपबंध है ।
श्रम विधि के प्रश्नों में EPFO का सबसे प्रिय जाल यही है — एक ही धारा में दो अवधियाँ रखकर यह जाँचना कि अभ्यर्थी 'गिनती किस घटना से शुरू होती है' पढ़ पाता है या नहीं । ऐसे प्रश्न में सबसे पहले स्टेम का वह वाक्यांश रेखांकित कीजिए जो प्रारंभ-बिंदु बताता है ; यहाँ वह है 'अपील प्राधिकारी के आदेश की प्रतियाँ भेजी जाने की तिथि से' । यदि स्टेम में 'अधिप्रमाणित प्रतियाँ' या 'प्रमाणन अधिकारी' आता, तो उत्तर तीस दिन होता । अधिनियम केंद्रीय स्तर पर सामान्यतः उन औद्योगिक प्रतिष्ठानों पर लागू होता है जिनमें एक सौ या उससे अधिक कामगार नियोजित हों, यद्यपि कई राज्यों ने अपनी अधिसूचनाओं से यह संख्या घटाई है । यह अधिनियम अब औद्योगिक संबंध संहिता, 2020 में समाहित है, जो 21 नवंबर 2025 से प्रवृत्त हुई ; 2023 का यह प्रश्न मूल अधिनियम के अनुसार हल किया जाना चाहिए ।
- धारा 7 — अपील न होने पर स्थायी आदेश, धारा 5(3) के अधीन अधिप्रमाणित प्रतियाँ भेजे जाने की तिथि से तीस दिन की समाप्ति पर प्रचालन में आते हैं ।
- धारा 7 — अपील होने पर वे, धारा 6(2) के अधीन अपील प्राधिकारी के आदेश की प्रतियाँ भेजे जाने की तिथि से सात दिन की समाप्ति पर प्रचालन में आते हैं ।
- अपीलीय आदेश की प्रतियाँ नियोक्ता को तथा ट्रेड यूनियन या कामगारों के अन्य विहित प्रतिनिधियों को भेजी जाती हैं ।
- धारा 3 — अधिनियम के लागू होने से छह मास के भीतर नियोक्ता को प्रमाणन अधिकारी के समक्ष प्रारूप स्थायी आदेश प्रस्तुत करने होते हैं ; धारा 6 — अपील की अवधि तीस दिन ।
- धारा 10A — निलंबन के दौरान निर्वाह भत्ता : पहले नब्बे दिन मज़दूरी का 50 प्रतिशत, उसके बाद 75 प्रतिशत ।
- धारा 7 की दो अवधियाँ आपस में बदल देना — बिना अपील तीस दिन, अपील के बाद सात दिन ।
- अपील की अवधि (धारा 6 — तीस दिन) और प्रचालन की अवधि (धारा 7) को एक मान लेना ; दोनों तीस दिन के हैं पर अलग-अलग घटनाओं से गिने जाते हैं ।
- गिनती का प्रारंभ-बिंदु न पढ़ना — अधिप्रमाणित प्रतियों का प्रेषण और अपीलीय आदेश का प्रेषण दो अलग तिथियाँ हैं ।
यह अधिनियम EPFO में दो रूपों में लौटता है — अवधि-आधारित प्रश्न (छह मास, तीस दिन, सात दिन, नब्बे दिन) और उपबंध-आधारित प्रश्न (निर्वाह भत्ता, प्रमाणन अधिकारी, आदर्श स्थायी आदेश) । अवधि-आधारित प्रश्नों में स्टेम का प्रारंभ-बिंदु ही निर्णायक होता है, इसलिए विकल्प देखने से पहले स्टेम दो बार पढ़िए । अधिनियम की सभी अवधियों की एक छोटी सूची बनाकर याद रखना सबसे सुरक्षित तैयारी है ।
इस प्रश्न से सीधे संबंधित कोई पूर्व PYQ उपलब्ध नहीं।
- practice — not a real PYQ
औद्योगिक नियोजन (स्थायी आदेश) अधिनियम, 1946 के अधीन, यदि कोई अपील न की जाए तो स्थायी आदेश अधिप्रमाणित प्रतियाँ भेजे जाने की तिथि से कितने दिन बाद प्रचालन में आते हैं ?
- (a)सात दिन
- (b)पंद्रह दिन
- (c)तीस दिन
- (d)साठ दिन
उत्तर(c) तीस दिन — धारा 7 का पहला भाग ; अपील होने की दशा में यह अवधि घटकर सात दिन रह जाती है ।
- practice — not a real PYQ
इसी अधिनियम की धारा 3 के अधीन नियोक्ता को प्रमाणन अधिकारी के समक्ष प्रारूप स्थायी आदेश कितने समय के भीतर प्रस्तुत करने होते हैं ?
- (a)तीस दिन के भीतर
- (b)तीन मास के भीतर
- (c)छह मास के भीतर
- (d)एक वर्ष के भीतर
उत्तर(c) छह मास के भीतर — अधिनियम के प्रतिष्ठान पर लागू होने की तिथि से छह मास के भीतर प्रारूप स्थायी आदेश प्रस्तुत करने होते हैं ।